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अब बदलने जा रहा है यूपी के इस शहर का नाम

सत्य खबर, गाजियाबाद :             

अब उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद का नाम बदला जाएगा. नगर निगम की बोर्ड बैठक में इसको मंजूरी मिल गई है. इसके लिए तीन नामों की चर्चा है- गजनगर, हरनंदीनगर और दूधेश्वर नगर. हालांकि, इसका फैसला उत्तर प्रदेश सरकार लेगी. लेकिन इसके साथ ही गाजियाबाद के इतिहास की चर्चा शुरू हो गई है. इसी बहाने अब इतिहास के पन्ने पलटते हैं और गाजियाबाद को और करीब जान लेते हैं.

कहा जाता है कि कभी मुगलों का शाही परिवार गाजियाबाद, हिंडन के तट और आसपास के क्षेत्र समय बिताने पहुंचता था. यह उनके लिए किसी पिकनिक स्पॉट जैसा था. धीरे-धीरे से इसे व्यवस्थित रूप दिया जाने लगा और शहर में तब्दील करने की तैयारी शुरू हुई.

मुगलों के दौर में स्थापना हुई

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साल 1739 में ईरान का बादशाह नादिर शाह भारत आया. उसने देश में तहस-नहस मचाया और दिल्ली को लूटा. उसकी तहस-नहस का असर सिर्फ दिल्ली तक ही सीमित नहीं रहा. आसपास के राज्यों और क्षेत्रों में भी दिखा. फिर उन्हें व्यवस्थित रखने की कोशिश शुरू हुई.

इस तरह गाजी-उद-दीन ने 1740 में गाजियाबाद की नींव रखी ने. वो गाजी जो मुगल बादशाह मुहम्मद शाह का वजीर था. हालांकि, तब इसे गाजियाबाद नहीं कहा जाता था. शुरुआती दौर में इसे गाजी-उद-दीन नगर कहते थे. धीरे-धीरे यह नाम प्रचलित हो गया. लेकिन बाद में इसके नाम में बदलाव हुआ.

1864 में रेलवे लाइन बिछाने का काम शुरू हुआ. तब तक इसका नाम गाजी-उद-दीन नगर था, लेकिन यह नाम अंग्रेजों को बड़ा लगा और इसे छोटा किया गया. इस तरह गाजी-उद-दीन नगर का नाम बदलकर गाजियाबाद रखा गया. इसके बाद से इसे यही नाम से जाना गया.

14 नवंबर 1976 से पहले तक गाजियाबाद मेरठ जिले की तहसील हुआ करता था . इसके बाद इसे एक जिला घोषित किया गया. उत्तर प्रदेश के जिलों के नाम बदलने के दौर में कई बार यह मांग उठी की मुगलों के दौर का नाम बदला जाए और इसे सनातन धर्म से जोड़ा जाए. गाजियाबाद के साथ भी ऐसा ही है.

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कहां से आए नए नाम?

गाजियाबाद के लिए तीन नामों की चर्चा है गजनगर, हरनंदीनगर और दूधेश्वर नगर. पहले गजनगर का कनेक्शन समझते हैं. दिल्ली का प्राचीन नाम इंद्रप्रस्थ था, जिसे हस्तिनापुर की राजधानी कहा जाता था. ऐतिहासिक दस्तावेज कहते हैं कि हस्तिनापुर के उत्तरी हिस्से में कभी घने जंगल हुआ करते थे. जिसके कई नाम रखे गए थे. उन नामों में हाथियों का जिक्र मिलता है. यहीं से इसका नाम गजनगर रखने की चर्चा शुरू हुई.

हरनंदी नगर नाम हिंडौन नदी से आया है जो सदियों से इसका हिस्सा रही है. अब दूधेश्वर नगर नाम की वजह भी जान लेते हैं. इसकी वजह है गाजियाबाद का सबसे प्रख्यात दूधेश्वर नाथ मंदिर. यह पहली बार नहीं है जब इस नाम का जिक्र हुआ है.लम्बे समय से गाजियाबाद में लोगों का समूह दूधेश्वर नगर रखने की अपील कर चुका है. यहां तक की शहर में कई बार इसी नाम को बदलने के पोस्टर भी लगाए जा चुके हैं.

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