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  • 53 साल बाद अहीरवाल से कांग्रेस अध्यक्ष, क्या बदलेगा हरियाणा की राजनीति का समीकरण और कांग्रेस की किस्मत

    53 साल बाद अहीरवाल से कांग्रेस अध्यक्ष, क्या बदलेगा हरियाणा की राजनीति का समीकरण और कांग्रेस की किस्मत

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के नाम का ऐलान अभी तक नहीं हो पाया है। कांग्रेस हाईकमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के नाम को लेकर उहापोह की स्थिति में है। इस बीच माना जाता है कि कांग्रेस 53 साल बाद अहीरवाल बेल्ट से किसी नेता को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बना सकती है।

    पार्टी के गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा कैप्टन अजय सिंह यादव के नाम की है। छह बार विधायक, तीन बार मंत्री और 2005 में विपक्ष के नेता रहे यादव गांधी परिवार के करीबी माने जाते हैं। वे कांग्रेस के राष्ट्रीय ओबीसी विभाग के प्रमुख भी रह चुके हैं। उनके समर्थक कहते हैं कि उनका लंबा प्रशासनिक अनुभव, संगठनात्मक पकड़ और अहीरवाल में जनाधार उन्हें सबसे मजबूत दावेदार बनाते हैं। यादव परिवार का कांग्रेस से पुराना रिश्ता रहा है। उनके राव अभय सिंह तीन बार विधायक रहे, जबकि उनके पुत्र चिरंजीव राव वर्तमान में रेवाड़ी से विधायक हैं।

    53 साल बाद अहीरवाल से कांग्रेस अध्यक्ष, क्या बदलेगा हरियाणा की राजनीति का समीकरण और कांग्रेस की किस्मत

    अजय सिंह यादव के अलावा पूर्व मंत्री राव नरेंद्र सिंह, राव दान सिंह और पूर्व विधायक चिरंजीव राव के नाम भी सुर्खियों में हैं। राव नरेंद्र सिंह को परिवार की राजनीतिक विरासत और पारंपरिक समर्थन हासिल है। राव दान सिंह की गुड़गांव में मजबूत पकड़ है, जबकि युवा नेता चिरंजीव राव को अगले जनरेशन का चेहरा माना जा रहा है।

    दरअसल, 1972 के बाद से दक्षिण हरियाणा (अहीरवाल बेल्ट) से कोई भी नेता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बना। इस क्षेत्र से आखिरी कांग्रेसी अध्यक्ष राव निहाल सिंह थे। तब से लेकर अब तक प्रदेश अध्यक्ष का पद खासकर उत्तर और मध्य हरियाणा के नेताओं के पास ही रहा। 2019 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को अहीर-बहुल 11 सीटों में से सिर्फ एक सीट मिली, जबकि भाजपा ने यहां अपनी मजबूत पकड़ बना ली। यही कारण है कि अब पार्टी के भीतर से इस क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देने की मांग जोर पकड़ रही है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हुड्डा और शैलजा के बीच चल रही गुटबाजी ने संगठन को कमजोर किया है। अगर प्रदेश अध्यक्ष का पद दक्षिण हरियाणा को मिलता है, तो यह हुड्डा खेमे के लिए झटका हो सकता है।

    1972 के बाद से अब तक प्रदेश अध्यक्ष का पद खासकर उत्तर और मध्य हरियाणा के नेताओं के पास ही रहा। भूपेंद्र सिंह हुड्डा अब तक प्रदेश संगठन पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं और उत्तर-मध्य हरियाणा से नेतृत्व उनकी ताकत का केंद्र रहा है। नया अध्यक्ष दक्षिण हरियाणा से आने पर उनकी संगठन पर मजबूत पकड़ कमजोर पड़ सकती है।

    राजनीतिक पंडितों का मानना है कि दक्षिण हरियाणा से नया अध्यक्ष बनाना कांग्रेस के लिए रणनीतिक मजबूरी भी है और आंतरिक खींचतान का दांव भी। यह तय करेगा कि हुड्डा का कद बरकरार रहता है या पार्टी नए समीकरणों से प्रदेश की राजनीति को नई दिशा देने की कोशिश करती है।

    हरियाणा कांग्रेस के अंदर क्षेत्रीय आकांक्षाओं को साधना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। उत्तर और मध्य हरियाणा के नेता, जिन्होंने पार्टी को प्रासंगिक बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है, आसानी से अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं होंगे। साथ ही, आलोचकों का कहना है कि वंशवाद पर अधिक निर्भरता पार्टी के लिए उलटा असर भी डाल सकती है।

  • Haryana News: भूपेंद्र हुड्डा के बुरे दिन शुरू!  ईडी का शिकंजा और 400 गुना पीनल रेंट का खतरा

    Haryana News: भूपेंद्र हुड्डा के बुरे दिन शुरू! ईडी का शिकंजा और 400 गुना पीनल रेंट का खतरा

    Haryana News: यमुनानगर 16 सितम्बर लगता है कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की किस्मत उनका साथ नही दे रही है। चुनाव हारे तो सी एम की कुर्सी भी हाथ से फिसल गई।अब नेता प्रतिपक्ष का ठाट बाट भी उनसे कोसो दूर होता दिखाई दे रहा है।विधायको का शक्ति प्रदर्शन दिखाने के बाद भी कांग्रेस उनके सामने झुकने को तैयार नही ।

    वंही अब दो और मुसीबते उनका इंतजार कर रही है। एक तरफ ई डी ने शिकंजा टाइट कर दिया है तो वहीं दूसरी और हरियाणा सरकार ने भी उन पर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। तो चलिए आगे आपको बताते हैं कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा आगे आने वाले दिनों में किन मुश्किलों से गिरने वाले हैं। हरियाणा में कांग्रेस की सरकार न बनने को लेकर पहले से ही भूपेंद्र हुड्डा अपनी पार्टी के निशाने पर है न केवल राहुल गांधी बल्कि राज्य के अनेक कांग्रेसी नेता सरकार न बनने पर हुड्डा परिवार को दोषी ठहरा रहे है।

    Haryana News: भूपेंद्र हुड्डा के बुरे दिन शुरू! ईडी का शिकंजा और 400 गुना पीनल रेंट का खतरा

    हरियाणा में गुटबाजी और धड़ेबाजी के चलते राज्य की सत्ता कांग्रेस के हाथ आते-आते चली गई। इसके बाद से ही हुड्डा परिवार के बुरे दिन शुरू होने लगे हैं। सी एम की कुर्सी ना मिलने के बाद भूपेंद्र हुड्डा को उम्मीद थी कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष का रुतबा तो मिला जाएगा इसके बाद वह कैबिनेट मंत्री का लुत्फ उठा पाएंगे ना केवल सरकारी सुविधाये बल्कि चंडीगढ़ में कोठी भी उनके पास रहेगी, लेकिन कांग्रेस हाई कमान ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया वहीं अब दूसरी ओर हरियाणा सरकार ने हुड्डा साहब को सरकारी कोठी खाली करने का फरमान भी सुना दिया।

    ये कोठी कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल को पसंद थी परंतु हुड्डा ने सरकार के आदेशों पर अमल नही किया ओर कोठी कब्जाए रखी रही, हालांकि नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट मंत्री की तर्ज पर सुविधाएं मिलती है मगर कांग्रेस ने उनके नाम पर मोहर नहीं लगाई जिसके बाद पूर्व सी एम होते हुए भी एक साधारण विधायक होकर रह गए। इसलिए सरकार ने उनसे कोठी खाली करवाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके चलते ही हुड्डा पर सरकार ने पिनल रेंट लगाने की भी घोषणा कर दी है। हुड्डा के पास चंडीगढ़ में कोठी नंबर 70 का कब्जा है।

    यह कोठी उन्हें सरकार गठन के 15 दिन के अंदर खाली करनी थी परंतु करीब 12 महीने बाद भी यह कोठी खाली नही की गई। इसलिए अब हुड्डा से पीनल रेंट वसूला जाएगा। आपको बता दे नियम अनुसार पीनल रेंट किस तरह से वसूला जाता है। एक महीना होने पर पीनल रेंट 50 गुना दूसरे महीने में यह रकम 100 गुना तीसरे महीने में यह राशि 200 गुना हो जाती है और तब भी कोठी खाली नहीं होती तो वसूली का यह आंकड़ा 400 गुना हो जाता है।

    अब हुड्डा साहब के पास यह कोठी लगभग तीन महीने से भी ऊपर होने के बाद 400 गुना के दायरे में आ गए है। इस तरह से न केवल अब उन्हें यह कोठी खाली करनी होगी बल्कि 400 गुना का भुगतान भी करना होगा जो की लाखों रुपए बनेगा। ये तो हुई सरकार की बात। रही ई डी की बात है तो वह भी हुड्डा साहब के पीछे हाथ धोकर पड़ गई है जबकि उनकी अपनी ही पार्टी कांग्रेस भी अब उनसे अपना पिंड छुड़ाने को तैयार है ऐसे में देखना भी है कि भविष्य में हुड्डा परिवार की राजनीतिक दिशा किस ओर जाएगी।

  • हरियाणा विधानसभा में भी नजर आई कांग्रेस की गुटबाजी, आदित्य के प्रश्न से पहले हुड्डा की काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा की मांग

    हरियाणा विधानसभा में भी नजर आई कांग्रेस की गुटबाजी, आदित्य के प्रश्न से पहले हुड्डा की काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा की मांग

    हरियाणा में कांग्रेस की गुटबाजी कोई नई बात नहीं है। रणदीप सुरजेवाला और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गुट आमने-सामने होते रहे हैं मंगलवार को हरियाणा विधानसभा में उस समय भूपेंद्र सिंह हुड्डा और रणदीप सुरजेवाला के बेटे आमने-सामने हो गए जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस द्वारा दिए गए काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा की मांग कर रहे थे और रणदीप सुरजेवाला के बेटे आदित्य सुरजेवाला ने किसानों का मामला विधानसभा में उठा दिया।

    हरियाणा विधानसभा में कैथल से कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने किसानों की समस्याओं पर भाजपा सरकार से सवाल किए। उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं और फसल नुकसान से प्रभावित किसानों के लिए त्वरित कार्रवाई और मुआवजे की मांग की। सुरजेवाला ने कहा कि क्विक रिस्पॉन्स टीम अभी तक नहीं बनाई गई और मुआवजे की घोषणा नहीं हुई।

    उन्होंने पूछा कि क्या अगले 15 दिनों में यह टीम गठित होगी और प्रभावित किसानों को तुरंत राहत मिलेगी। उन्होंने मुआवजे के वितरण की समय-सीमा और दोबारा बुआई की लागत के बारे में स्पष्ट जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि धान की कई किस्मों का संक्रमण 80-90 प्रतिशत तक है।

    हरियाणा विधानसभा में भी नजर आई कांग्रेस की गुटबाजी, आदित्य के प्रश्न से पहले हुड्डा की काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा की मांग

    उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि क्या इन किस्मों के प्रतिरोधी संस्करण विकसित करने के लिए अनुसंधान को समर्थन दिया जा रहा है और किसानों को बीज सब्सिडी, मूल्य गारंटी और तकनीकी सहायता कब तक मिलेगी। सुरजेवाला ने मुआवजे के मुद्दे पर कहा कि यदि फसल नुकसान का डेटा मौजूद है, तो प्रभावित किसानों को मुआवजा क्यों नहीं दिया जा रहा? उन्होंने जोर देकर कहा कि कुछ गांवों में भारी नुकसान हुआ है और वहां के किसानों को न्याय और मुआवजा मिलना चाहिए।

    जब आदित्य सुरजेवाला ने प्रश्न पूछा तो भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा की मांग की। हालांकि आदित्य और भूपेंद्र हुड्डा के बीच कोई विवाद तो नहीं हुआ लेकिन दोनों ने एक दूसरे से खुद को ऊपर साबित करने का प्रयास जरूर किया। इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष ने यह कहकर भूपेंद्र सिंह हुड्डा को चुप करवाया कि काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा विधायी कार्यों के बाद होगी।

    राजनीतिक गलियारों में इस घटना की चर्चा है क्योंकि वर्तमान में कांग्रेस के सभी विधायक बराबर की हैसियत रखते हैं और कोई भी कांग्रेस का नेता अभी नहीं चुना गया है। ‌अपने ही दल के विधायक के प्रश्न पर इस प्रकार से भूपेंद्र सिंह हुड्डा का उठकर खड़ा होना और पहले अपने प्रस्तावों पर चर्चा की मांग करना कांग्रेस की गुटबाजी का सीधा-सीधा संकेत माना जाता है।

  • Haryana: अहीरवाल की राजनीति में राव इंद्रजीत को मिलने लगी अब कड़ी टक्कर, उनकी पार्टी में उठने लगे उनके खिलाफ सिर

    Haryana: अहीरवाल की राजनीति में राव इंद्रजीत को मिलने लगी अब कड़ी टक्कर, उनकी पार्टी में उठने लगे उनके खिलाफ सिर

    Haryana: दक्षिण हरियाणा यानी अहीरवाल में अब केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह को अपनी ही पार्टी में मजबूत टक्कर मिलने लगी है। अभी तक राव नरबीर सिंह ही उन्हें टक्कर दे रहे थे, लेकिन अब डॉक्टर अभय सिंह ने भी राव इंद्रजीत सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। डॉक्टर अभय ने राव इंद्रजीत को छोटे दिल वाला तक कह दिया। यह भी लिखा- अहीर समाज के ठेकेदार सुविधानुसार महानायक राव तुलाराम राजनीतिक कवच पहनते हैं।

    राव इंद्रजीत सिंह को लेकर पिछले काफी दिनों से चर्चा चल रही है कि पार्टी उन्हें केंद्रीय मंत्री के पद से हटा सकती है। असल में राव इंद्रजीत सिंह वर्तमान में मुख्यमंत्री बनने का सपना संजो रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने दक्षिणी हरियाणा के दर्जन भर विधायकों को डिनर पर बुलाया था। केंद्रीय मंत्री की यह डिनर डिप्लोमेसी भाजपा को रास नहीं आ रही है।

    मानेसर नगर निगम के चुनाव में मेयर के चुनाव में राव इंद्रजीत से मात खाने के बाद नरबीर ने सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में राव इंद्रजीत को सीधी पटखनी देने का काम किया। आने वाले 2 दिनों में गुरुग्राम नगर निगम में भी सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव होने वाला है। अगर राव इंद्रजीत यहां भी हारे तो अहीरवाल में उनकी राजनीति पर बड़ा सवालिया निशान लग जाएगा।

    Haryana: अहीरवाल की राजनीति में राव इंद्रजीत को मिलने लगी अब कड़ी टक्कर, उनकी पार्टी में उठने लगे उनके खिलाफ सिर

    राव इंद्रजीत के खिलाफ अहिरवाल में मुंह खोलने की ताकत ज्यादा किसी की रही नहीं है। पहले जब राव इंद्रजीत कांग्रेस में थे तो वह इस इलाके के कांग्रेस के एकमात्र बड़े नेता थे और जब वह भाजपा में गए तो इस इलाके के भाजपाई क्षत्रप हो गए। नायब सैनी सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री रहे पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. अभय सिंह यादव ने अपनी ही पार्टी के केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत पर निशाना साधा। एक के बाद एक 2 पोस्ट किए। इनमें राव इंद्रजीत को छोटे दिल वाला तक कह दिया। यह भी लिखा- अहीर समाज के ठेकेदार सुविधानुसार महानायक राव तुलाराम राजनीतिक कवच पहनते हैं। बता दें कि राव इंद्रजीत राव तुलाराम के परपोते हैं।

    असल में, नारनौल के पास गांव कोरियावास में 725 करोड़ रुपए की लागत से 800 बेड का मेडिकल कॉलेज बना है। इस कॉलेज का नाम सरकार ने महर्षि च्यवन चिकित्सा महाविद्यालय रखा है। राव इंद्रजीत सिंह के समर्थक इस कॉलेज का नाम शहीद राव तुलाराम के नाम पर रखवाना चाह रहे हैं। 3 माह से विवाद छिड़ा हुआ है। पहला मौका है जब भाजपा के किसी अहीर नेता ने राव इंद्रजीत पर खुला हमला किया है।

    राव इंद्रजीत पर हमला बोलने से पहले डॉ अभय ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में क्या बात हुई यह तो साफ नहीं है लेकिन जिस प्रकार से मुलाकात के बाद डॉक्टर अभय ने इंद्रजीत पर निशान साधा है, उससे साफ है कि अभय ने मनोहर लाल खट्टर से इस बारे में चर्चा जरूर की होगी।

  • Haryana News: राहुल गांधी के सामने संगठन खड़ा करने की चुनौती! हरियाणा कांग्रेस में 11 साल से खाली पड़ी कुर्सियां

    Haryana News: राहुल गांधी के सामने संगठन खड़ा करने की चुनौती! हरियाणा कांग्रेस में 11 साल से खाली पड़ी कुर्सियां

    Haryana News: हरियाणा में कांग्रेस पार्टी बीते 11 सालों से बिना किसी मजबूत संगठन के चल रही है। इस दौरान पार्टी चुनाव लड़ती रही लेकिन जमीनी स्तर पर संगठित ढांचा न होने के कारण उसे कई बार नुकसान झेलना पड़ा। अब जब राहुल गांधी ने संगठन को फिर से खड़ा करने की कोशिश शुरू की है तो सामने आ रही है एक नई चुनौती। पार्टी में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति का काम महीनों से लटका हुआ है और 22 जिलों के नामों की घोषणा अभी तक नहीं हो पाई है।

    राहुल गांधी का नया प्रयोग

    इस बार राहुल गांधी ने जिलाध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया को पारदर्शी और सबको साथ लेकर चलने वाली बनाने की कोशिश की है। दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में प्रदेश के सभी वरिष्ठ नेताओं से बातचीत की गई और हर किसी को 15-20 मिनट का समय दिया गया ताकि वे अपनी बात रख सकें। इस प्रक्रिया में केसी वेणुगोपाल और बीके हरिप्रसाद ने नेताओं की राय को ध्यान से सुना। लेकिन अंतिम फैसला अब भी राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को ही लेना है।

    Haryana News: राहुल गांधी के सामने संगठन खड़ा करने की चुनौती! हरियाणा कांग्रेस में 11 साल से खाली पड़ी कुर्सियां

    जातीय समीकरणों की भूमिका

    हरियाणा में संगठन के पुनर्गठन में जातीय समीकरणों की भी बड़ी भूमिका मानी जा रही है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष चौधरी उदयभान ने प्रत्येक जिले के लिए पैनल तैयार किया है जिसमें उन्होंने हर दावेदार की कार्यशैली, जनता से संपर्क और जातीय स्थिति को ध्यान में रखा है। इसी तरह पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी शैलजा और रणदीप सुरजेवाला से भी जिलावार सवाल पूछे गए कि कौन सा चेहरा संगठन के लिए उपयुक्त रहेगा।

    अंतिम मुहर की प्रतीक्षा

    पार्टी ने जिलाध्यक्षों के चयन के लिए हर जिले से छह नामों वाला पैनल तैयार किया है। अब इन छह में से एक नाम को ही अंतिम रूप देना है। यह जिम्मेदारी केंद्रीय पर्यवेक्षकों पर छोड़ी गई है जो नेताओं की सिफारिश और जमीनी रिपोर्ट के आधार पर नाम तय करेंगे। हालांकि इस बार राहुल गांधी खुद भी सीधे कुछ प्रमुख नेताओं से बात कर सकते हैं ताकि पार्टी के अंदर मौजूद गुटबाजी को संतुलन में रखा जा सके।

    संगठन में संतुलन बनाना बड़ी चुनौती

    हरियाणा कांग्रेस में मुख्य रूप से तीन बड़े गुट माने जाते हैं – भूपेंद्र हुड्डा, सुरजेवाला और कुमारी शैलजा का। ऐसे में इन गुटों में तालमेल बनाकर संगठनात्मक नियुक्ति करना राहुल गांधी के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गई है। अहीरवाल इलाके के नेता कैप्टन अजय यादव और अन्य सांसदों से भी बातचीत होनी है। संसद सत्र के बीच राहुल गांधी प्रदेश के पांचों सांसदों से अनौपचारिक चर्चा कर सकते हैं ताकि संगठन का मजबूत खाका तैयार किया जा सके।

  • Haryana Congress में बढ़ता घमासान! सीनियर नेताओं पर खुद के बेटे ने उठाए सवाल

    Haryana Congress में बढ़ता घमासान! सीनियर नेताओं पर खुद के बेटे ने उठाए सवाल

    Haryana Congress में अंतर्कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। अब पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री संपत सिंह के बेटे गौरव के ट्वीट ने नया बवाल खड़ा कर दिया है। गौरव ने बिना किसी नाम लिए कांग्रेस की हार के लिए पार्टी के एक वरिष्ठ नेता को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि यह नेता हर सभा में INLD, BSP, JJP और HLP को वोट काटने वाली पार्टियां बताते थे लेकिन अब समय आ गया है कि खुद उनके बारे में सवाल पूछे जाएं।

    वोट कटवा से ‘सरकार कटवा’ तक का आरोप

    गौरव ने अपने ट्वीट में तीखा सवाल खड़ा किया कि चुनाव आते ही कांग्रेस को सत्ता से वंचित करने वाला कौन है। उन्होंने कहा कि पार्टी के एक बड़े नेता की वजह से कांग्रेस को हर बार हार का सामना करना पड़ता है। उनका इशारा इस तरफ भी था कि जो नेता दूसरों को वोट कटवा बताते हैं वही असल में खुद ‘सरकार कटवा’ बन चुके हैं। गौरव ने लिखा कि अब जनता को यह जानने का हक है कि असली ‘फिक्सर’ कौन है।

    Haryana Congress में बढ़ता घमासान! सीनियर नेताओं पर खुद के बेटे ने उठाए सवाल

    सीनियर नेताओं के नाम पर सस्पेंस बरकरार

    गौरव ने ट्वीट में किसी नेता का नाम नहीं लिया लेकिन हरियाणा कांग्रेस में यह चर्चा गर्म हो गई है कि उनका इशारा किसकी ओर है। पार्टी के कई कार्यकर्ता और स्थानीय नेता इस बात को लेकर कयास लगा रहे हैं कि गौरव ने इशारा करके किसी बड़े चेहरे पर हमला बोला है। इससे यह भी साफ हो गया है कि अंदरूनी गुटबाजी अब खुलकर सामने आ चुकी है।

    कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी

    हरियाणा में कांग्रेस लंबे समय से सत्ता से बाहर है और जब चुनाव नजदीक आते हैं तो इस तरह के बयान पार्टी के लिए और मुश्किलें खड़ी कर देते हैं। गौरव का बयान यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर का विश्वास लगातार कमजोर हो रहा है। कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच समन्वय की कमी साफ झलक रही है जिससे जनता का भरोसा भी डगमगाता है।

    क्या हाईकमान लेगा संज्ञान?

    अब सबकी निगाहें कांग्रेस हाईकमान की ओर हैं कि क्या वह इस बयानबाजी पर कोई एक्शन लेगा। गौरव का यह बयान न केवल पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के लिए एक और बड़ी चुनौती बन सकता है। अगर अब भी इस गुटबाजी पर लगाम नहीं लगी तो पार्टी को बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है।