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  • 41 करोड़ की ठगी में MobiKwik का सॉफ्टवेयर फेल, पुलिस ने SIT गठित कर जांच शुरू

    41 करोड़ की ठगी में MobiKwik का सॉफ्टवेयर फेल, पुलिस ने SIT गठित कर जांच शुरू

    मोबाइल पेमेंट कंपनी MobiKwik की पेमेंट एप में तकनीकी खराबी का फायदा उठाकर मेवात के रहने वाले शातिर ठगों ने कंपनी को 40 करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगाया। गुरुग्राम पुलिस को शिकायत मिलने के बाद मामले में बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। पुलिस ने ठगी करने वाले 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस बीच इस मामले की जांच SIT गठित की गई है।

    41 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त विकास अरोड़ा ने बुधवार को जांच के लिए SIT गठित की। एसीपी साइबर क्राइम प्रियांशु दीवान के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम जांच के बाद इसकी रिपोर्ट सौंपेगी। टीम में सेक्टर 53 और साइबर ईस्ट थाना प्रभारी भी शामिल हैं। सितंबर के पहले सप्ताह में मोबिक्विक एप में आई तकनीकी खामी का फायदा उठाकर बड़ी संख्या में लोगों ने एप के वॉलेट से रुपये अपने जानने वालों, दुकानदारों और अन्य लोगों के खाते में भेजकर कंपनी को करोड़ों रुपये का चूना लगाया।

    41 करोड़ की ठगी में MobiKwik का सॉफ्टवेयर फेल, पुलिस ने SIT गठित कर जांच शुरू

    अकेले नूंह में ही 30 करोड़ आए मोबिक्विक एप के जरिए हुए 40 करोड रुपए का अवैध ट्रांजेक्शन में से अकेले नूंह में ही 30 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ है। बाकी 10 करोड़ रुपए गुरुग्राम और पलवल जिले में गए।

    सबसे ज्यादा रकम नूंह जिले से निकाली गई। कंपनी ने नूंह के लघु सचिवालय के कमरा नंबर 428 में 23 सितंबर तक के लिए कैंप लगाया है। जिन लोगों ने वॉलेट से पैसे निकाले हैं, उनको एक मौका दिया है। रकम न लौटाने पर FIR दर्ज कराई जाएगी।

    शुरुआती जांच में सामने आया है कि सॉफ्टवेयर अपडेट करते वक्त गलती हुई। जिससे सिक्योरिटी चेक डिसेबल हो गया। कंपनी की वार्षिक मीटिंग होने वाली है, उसी को लेकर ऑडिट चल रहा था और तकनीकी टीम भी रात को काम कर रही थी। इसी दौरान सिस्टम फेल हुआ। कंपनी की टेक्निकल टीम जांच कर रही है।

  • Haryana News: सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता धर्म सिंह छोकर को फटकारा, 600 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में तुरंत सरेंडर का आदेश

    Haryana News: सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता धर्म सिंह छोकर को फटकारा, 600 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में तुरंत सरेंडर का आदेश

    Haryana News: हरियाणा की राजनीति में हलचल मचाने वाले कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक धरम सिंह छोकर को अदालत से लगातार झटके मिल रहे हैं। रियल एस्टेट घोटाले और 600 करोड़ से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से घिरे छोकर की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।

    पहले पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी रद्द करने से इंकार कर दिया, वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी मेडिकल आधार पर दी गई अंतरिम जमानत बढ़ाने की उनकी याचिका ठुकरा दी। अदालत ने न केवल छोकर को तुरंत सरेंडर करने का आदेश दिया, बल्कि गलत दलीलों के आधार पर अंतरिम राहत हासिल करने पर कड़ी फटकार भी लगाई। यह पूरा मामला 600 करोड़ रुपए से अधिक के रियल एस्टेट घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।

    Haryana News: सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता धर्म सिंह छोकर को फटकारा, 600 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में तुरंत सरेंडर का आदेश

    धरम सिंह छोकर ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर गिरफ्तारी रद्द करने की मांग की थी। लेकिन अदालत ने साफ कहा कि ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) द्वारा की गई गिरफ्तारी सही है। कोर्ट ने माना कि छोकर ने जांच एजेंसी के साथ लगातार सहयोग नहीं किया। उनके खिलाफ कई गैर-जमानती वारंट जारी हो चुके हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए ईडी की हिरासत में पूछताछ जरूरी है। इस फैसले से कांग्रेस नेता को बड़ा झटका लगा, क्योंकि वे गिरफ्तारी से राहत की उम्मीद कर रहे थे।

    ईडी ने अदालत के सामने तगड़े सबूत पेश किए। एजेंसी का आरोप है कि धरम सिंह छोकर ने अपनी कंपनी साईं आइना फार्म्स प्राइवेट लिमिटेड के जरिए करीब 3,700 घर खरीदारों से धोखाधड़ी की। इस फर्जीवाड़े के जरिए 616 करोड़ रुपए से ज्यादा की मनी लॉन्ड्रिंग की गई। छोकर और उनकी कंपनी ने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेशकों को फंसाकर पैसा हड़पा। ईडी के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क संगठित धोखाधड़ी और अवैध धन शोधन का मामला है।

    धरम सिंह छोकर को पहले मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम जमानत दी गई थी ताकि वे सर्जरी करवा सकें। लेकिन अदालत ने पाया कि उन्होंने अब तक कोई सर्जरी नहीं करवाई और इस आधार पर दी गई राहत का दुरुपयोग किया। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने की मांग ठुकरा दी। अदालत ने कहा कि आरोपी ने गलत दलीलों से अंतरिम राहत हासिल कर अदालत को गुमराह किया। कोर्ट ने तुरंत आत्मसमर्पण का आदेश दिया। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने मामले में गलत बयान देने के लिए छोकर के वकील को भी फटकार लगाई।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद छोकर की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अदालत ने साफ कहा है कि वे अब तुरंत सरेंडर करें। उनकी ओर से जमानत अवधि बढ़ाने की अपील भी सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दी। अदालत के रुख को देखते हुए छोकर ने खुद ही यह याचिका वापस ले ली। धरम सिंह छोकर हरियाणा के समालखा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर विधायक रह चुके हैं। उन पर लगे गंभीर आरोप और अदालत के सख्त रुख ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस पार्टी इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है, लेकिन विपक्ष इस मुद्दे को लगातार उठा रहा है।

    यहां बता दें कि पिछले दिनों गुरुग्राम के डीएलएफ फेज 2 में बिल्डर की आवाज के बाहर लोगों ने प्रदर्शन किया था और इन लोगों का कहना था कि कांग्रेस नेता और उनके बेटे ने उन्हें ऐसा फंसाया कि अब वह इच्छा मृत्यु की मांग करने के अलावा और कुछ नहीं मांग सकते। यह लोग पिछले 7 साल से अपने आशियाने का इंतजार कर रहे हैं। 7 साल पहले अफोर्डेबल फ्लैट लॉन्च किए गए थे। सेक्टर 68 में बनने वाले इन फ्लैट्स को अभी तक नहीं बनाया गया है और 1500 लोग इनके चंगुल में फंस कर रह गए हैं।

  • 30 करोड़ रुपए के घोटाले में BDPO Pooja Sharma की गिरफ्तारी सिर्फ दिखावटी, पूजा शर्मा को मिली सुविधाजनक पोस्टिंग पर उठे सवाल

    30 करोड़ रुपए के घोटाले में BDPO Pooja Sharma की गिरफ्तारी सिर्फ दिखावटी, पूजा शर्मा को मिली सुविधाजनक पोस्टिंग पर उठे सवाल

    BDPO Pooja Sharma: पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने आज 30 करोड़ रुपए के घोटाले को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उनका कहना था कि यह बड़ी हैरानी की बात है कि जिस मामले में वे वर्ष 2021 से लगातार सरकार को पत्राचार कर रहे थे और विधानसभा सत्र में आवाज उठा चुके थे, उसके बावजूद भ्रष्टाचार की जांच में सरकार ने केवल लीपा पोती की कार्रवाई की है।

    नीरज शर्मा ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी पुलिस, विजिलेंस सहित सरकार के हर विभाग को पत्र लिखकर इस मामले की जांच विजिलेंस से करवाने की मांग की थी। बावजूद इसके अब विजिलेंस को जांच सौंप दी गई, लेकिन एडीसी साहब की रिपोर्ट में ब्रह्मपाल, हरिंदर, जोगिंदर, पूजा शर्मा व अन्य के खिलाफ करीब 20 करोड़ रुपए के ऐसे लेनदेन सामने आए हैं, जिनके रिकॉर्ड आज तक गायब हैं।

    30 करोड़ रुपए के घोटाले में BDPO Pooja Sharma की गिरफ्तारी सिर्फ दिखावटी, पूजा शर्मा को मिली सुविधाजनक पोस्टिंग पर उठे सवाल

    पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने सवाल उठाया कि वर्तमान सरकार नोटबंदी की वजह से एक साल में 2 लाख से ज्यादा का लेनदेन नहीं होने की बात कहती है, तो ऐसे में कोरोना संकट के समय, जब आमजन जीने के लिए संघर्ष कर रहे थे, यह लोग आपदा को अवसर बनाकर करोड़ों रुपए की लूट में लगे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि 5 साल बाद ऐसे रिकॉर्ड कैसे मिलेंगे और जनता का हड़प लिया गया 30 करोड़ रुपए किस प्रकार वसूल किए जाएंगे।

    नीरज शर्मा ने सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले में दोषियों के खिलाफ एडीसी रिपोर्ट व संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर तत्काल कार्रवाई की जाए। दोषी अधिकारियों की सम्पत्ति जब्त की जाए और जनता का हक ग्राम पंचायतों के खातों में पुनः डलवाया जाए। साथ ही दोषियों को ऐसी सजा दी जाए, जिससे भविष्य में कोई भी अधिकारी इस प्रकार के भ्रष्टाचार की सोचे भी नहीं।

    पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने यह भी कहा कि बीडीपीओ पूजा शर्मा काफी समय से फरार है, और फरार होने के बावजूद उसे अच्छी पोस्टिंग दी गई है। इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि किन नेताओं की सिफारिश पर यह सुविधा दी गई थी।

  • यमुनानगर में साइबर ठगी का शिकार बने रिटायर्ड फौजी, डिजिटल गिरफ्तारी का भय दिखाकर सैनिक से की 5 लाख रु की ठगी

    यमुनानगर में साइबर ठगी का शिकार बने रिटायर्ड फौजी, डिजिटल गिरफ्तारी का भय दिखाकर सैनिक से की 5 लाख रु की ठगी

    यमुनानगर में थाना सदौरा क्षेत्र के एक गांव में रहने वाले 61 वर्षीय सेवानिवृत्त सैनिक को सायबर ठगों ने पैसे की धोखाधड़ी और डिजिटल गिरफ्तारी का भय दिखाकर फंसा लिया। ठग ने खुद को CBI अधिकारी बताकर उसे डराया। सैनिक को दस दिनों तक “डिजिटल गिरफ्तारी” में रखा गया और हर दो घंटे में अपनी गतिविधियों की जानकारी देने को कहा गया।

    पुत्र की कोर्ट मार्शल का डर

    सैनिक ने बताया कि सबसे पहले उसे मनी लॉन्ड्रिंग के केस का डर दिखाया गया। फिर यह धमकी दी गई कि उसके बेटे, जो सेना में तैनात हैं, की कोर्ट मार्शल कर दी जाएगी। इस डर में वह मानसिक रूप से टूट गया और ठगों ने उससे 5 लाख रुपये भी ठग लिए। ठगों ने यह रकम 22 जुलाई को बताई गई बैंक अकाउंट में RTGS के माध्यम से जमा करवाई।

    यमुनानगर में साइबर ठगी का शिकार बने रिटायर्ड फौजी, डिजिटल गिरफ्तारी का भय दिखाकर सैनिक से की 5 लाख रु की ठगी

    ठगी की पूरी प्रक्रिया

    सैनिक ने बताया कि 19 जुलाई को उसे एक लड़की ने व्हाट्सएप कॉल किया और खुद को टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताया। उसने कहा कि मुंबई में उसके खिलाफ केस दर्ज हो रहा है। जब सैनिक ने बताई गई संख्या पर कॉल किया, तो सामने वाले ने खुद को CBI अधिकारी बताया और डिजिटल गिरफ्तारी का डर दिखाया। 19 जुलाई से 29 जुलाई तक सैनिक ने ठगों के कहने पर हर दो घंटे में अपने स्थान और गतिविधियों की जानकारी दी। इस दौरान ठगों ने घर, परिवार, जमीन और संपत्ति का पूरा विवरण जुटाया।

    सायबर क्राइम पुलिस ने दर्ज किया मामला

    सैनिक के किसी परिचित ने उसे सायबर ठगी के बारे में बताया और इसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। इस मामले में सायबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने धोखाधड़ी, डर और धन हड़पने के आरोप में जांच शुरू कर दी है। पुलिस लगातार डिजिटल गिरफ्तारी के मामलों को लेकर नागरिकों को जागरूक कर रही है।

    पुलिस की एडवाइजरी जारी

    जिला पुलिस बार-बार चेतावनी जारी कर रही है कि कोई भी पुलिस या CBI अधिकारी डिजिटल गिरफ्तारी नहीं करता। यदि किसी को इस तरह के कॉल मिलते हैं तो घबराएं नहीं। तुरंत पुलिस को सूचित करें और हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। बावजूद इसके लोग सायबर ठगों के जाल में फंस रहे हैं।

  • फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर बड़ी कार्रवाई! पानीपत जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष काजल देशवाल पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज

    फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर बड़ी कार्रवाई! पानीपत जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष काजल देशवाल पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज

    पानीपत जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष काजल देशवाल के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और साजिश के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री नायब सैनी को भेजी गई शिकायत के बाद की गई। शिकायत में कहा गया कि काजल देशवाल ने वार्ड-13 से चुनाव लड़ने के लिए बीसी-ए जाति का फर्जी प्रमाण पत्र बनाया था।

    BJP नेता की शिकायत पर जांच शुरू

    BJP नेता प्रदीप कुमार शर्मा ने शिकायत की थी कि काजल देशवाल ने वार्ड-13 से चुनाव जीतने के लिए फर्जी जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया और ज्योति शर्मा को हटाकर अध्यक्ष बनी। इस वार्ड को पिछड़ी जातियों के लिए आरक्षित किया गया था। जांच में प्रमाण पत्र फर्जी साबित होने के बाद जून 2025 में उन्हें पद से हटाया गया।

    फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर बड़ी कार्रवाई! पानीपत जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष काजल देशवाल पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज

    जांच अधिकारियों ने दी जानकारी

    ADC पंकज यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर ACS से पत्र मिला जिसमें काजल की जाति पर संदेह जताया गया। इसके बाद DC ने जांच अधिकारी नियुक्त किया और DM से रिकॉर्ड प्राप्त कर पूरी रिपोर्ट ACS को सौंपी। DSP सतीश वत्स ने बताया कि मामले की जांच पहले से चल रही थी और अब आरोप साबित होने के बाद FIR दर्ज की गई है।

    अध्यक्ष पद पर अस्थिरता

    पिछले तीन सालों में पानीपत जिला परिषद के अध्यक्ष पद पर दो बार बदलाव हुआ। पहली बार ज्योति शर्मा को BJP के समर्थन से अध्यक्ष बनाया गया था। लेकिन विरोध शुरू होने के बाद उन्हें मार्च 2024 में पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद जून 2024 में काजल देशवाल ने अध्यक्ष पद संभाला। हालांकि, उनका पद एक साल बाद फर्जी जाति प्रमाण पत्र साबित होने पर खाली हो गया।

    BJP सदस्य बनने के बाद विवाद

    काजल देशवाल ने अध्यक्ष बनने के बाद BJP का दामन थामा और राज्य अध्यक्ष मोहन लाल बरोली के निर्देशों पर काम करने की बात कही। उनके फर्जी प्रमाण पत्र का खुलासा होने के बाद अब अध्यक्ष पद रिक्त है और जिला परिषद में राजनीतिक हलचल जारी है।

  • आसानी से पैसा मिलना एक जाल है.. दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज किया धोखाधड़ी का केस, देश भर में हजारों केसों पर पड़ेगा फैसले का असर

    आसानी से पैसा मिलना एक जाल है.. दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज किया धोखाधड़ी का केस, देश भर में हजारों केसों पर पड़ेगा फैसले का असर

    दिल्ली हाईकोर्ट ने एक तीखे और स्पष्ट फैसले में कहा है कि लालच में अंधे लोग जोखिम को जानबूझकर स्वीकार करते हैं और उन्हें इसके परिणाम भी भुगतने होंगे। कोर्ट ने 24% सालाना रिटर्न का वादा कर निवेशकों को लुभाने के आरोपी शख्स के खिलाफ दर्ज 2 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले को रद्द कर दिया। दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले का देशभर में चल रहे हजारों मामलों पर सीधा असर पड़ने वाला है।

    देश में मल्टी लेवल मार्केटिंग कंपनियां इसी प्रकार से लोगों को चुना लगती है और दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद हजारों करोड़ रुपये जब्त करके भागने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने में बड़ी दिक्कत आने वाली है।

    जस्टिस अरुण मोंगा ने अपने 35 पेज के फैसले में ‘आसान पैसा’ को एक ‘जाल’ करार दिया और अवास्तविक रिटर्न की चाह रखने वालों को चेतावनी दी। उन्होंने 13 अगस्त को दिए अपने फैसले में कहा, ‘जो लोग अवास्तविक वादों के पीछे भागते हैं, उन्हें अपने जोखिम खुद उठाने होंगे। लोग पहले लालच में आकर वित्तीय जाल में कूदते हैं और बाद में धोखा होने का रोना रोते हुए राज्य से मदद मांगने दौड़ते हैं। यह एक कड़वी, लेकिन जरूरी सच्चाई है कि अगर आप असाधारण मुनाफे की चाह रखते हैं, तो असाधारण नुकसान के लिए भी तैयार रहें।’

    आसानी से पैसा मिलना एक जाल है.. दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज किया धोखाधड़ी का केस, देश भर में हजारों केसों पर पड़ेगा फैसले का असर

    जस्टिस मोंगा ने आगे कहा, ‘लालच चुनने का मतलब है जोखिम चुनना और जोखिम चुनने का मतलब है परिणाम भुगतना। ऐसे लोग यह दिखावा नहीं कर सकते कि वे किसी जादू से ठगे गए, जब उन्होंने खुद ही उस भ्रम में कदम रखा। हर उस सपने देखने वाले के लिए, जो जल्दी अमीर बनने की चाह रखता है, यह एक चेतावनी है। आसान पैसा एक जाल है। अगर रिटर्न अविश्वसनीय लगता है, तो यह मान लें कि आप अगले शिकार हैं।’

    यह मामला 2019 में दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एक FIR से शुरू हुआ था, जिसमें IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत शिकायत दर्ज की गई थी। तीन शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने 1.5 करोड़ रुपये के निवेश पर छह महीने के लिए 24% सालाना ब्याज देने का वादा किया था, लेकिन न तो ब्याज दिया और न ही मूल राशि लौटाई। इसके अलावा, उन्होंने दावा किया कि आरोपी ने उन्हें 43.66 लाख रुपये में एक कंपनी में 1.25% हिस्सेदारी खरीदने के लिए प्रेरित किया, जो भी वापस नहीं किया गया।

    कोर्ट ने इस मामले को रद्द करते हुए कहा कि छह साल बाद भी पुलिस पूरी तरह से चार्जशीट दाखिल करने में नाकाम रही। कोर्ट ने माना कि FIR में धोखाधड़ी के अपराध के आवश्यक तत्वों का अभाव है और यह मामला वास्तव में एक सिविल विवाद है, जिसे आपराधिक मामले के रूप में प्रस्तुत किया गया। जज ने जांच एजेंसी के रवैये को घोर लापरवाही और उचित परिश्रम की कमी करार दिया।

    जस्टिस मोंगा ने अपने फैसले में यह भी कहा कि निवेशकों द्वारा गैर-टिकाऊ योजनाओं में पैसा डालने से बाजार में असंतुलन पैदा होता है। उन्होंने कहा, “लालच सिर्फ व्यक्तिगत कमजोरी नहीं है, यह व्यापक प्रभाव डालता है। जब निवेशक ऐसी योजनाओं में पैसा लगाते हैं, तो वे बुलबुले को हवा देते हैं, जो वास्तविक उपयोगकर्ताओं को नुकसान पहुंचाता है और बाजार के संतुलन को बिगाड़ता है। जब यह बुलबुला फटता है, तो वे कानून से खुद को पीड़ित साबित करने की उम्मीद करते हैं, अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए।”

  • Fraud: नौकरी का झांसा देकर ठगी करने के मामले में 1आरोपी गिरफ्तार

    Fraud: नौकरी का झांसा देकर ठगी करने के मामले में 1आरोपी गिरफ्तार

    Fraud: जांचकर्ता ने बताया कि सेक्टर-4 ए निवासी युद्धवीर सिंह ने अपनी शिकायत में बताया कि फेसबुक पर एक दोस्त केडी वर्मा  है जिसने अपने STATUS पर OUT OF INDIA JOB के लिए लिखा हुआ था, जिसको देखकर मैने 01.09.2022 को केडी वर्मा से बात करी।

    जिसने बताया कि मै करन राजपूत के पास काम करता हूँ औऱ आपका काम कर दूंगा उसके बाद उसने कोई संतोष जनक जवाब नही दिया।मेरे पास 14.09.2022 को करन राजपूत से फोन आया जिसने बोला की मैं KD VERMA के साथ काम करता हूँ और उसी ने आप का नंबर दिया है और मै आपका काम कर दूंगा।

    फिर उसने बेटी के Passout व mark sheet , की copy मांगी तो मैने उसी दिन whatshap पर भेज दी और 15.09.2022 को बोला अगर इटली व कनाडा भेजना है तो समय लगेगा लेकिन दुबई अभी भेज दूंगा तो मैने दुबई की हाँ कर दी। उसने कहा कि दुबई का 1,80,000/-लगेगा काम हो जाएगा। जिसमे से 60,000/- एडवांस औऱ 120,000 विजा व ज्वाइनिंग लैटर मिलने के बाद। फिर 22.10.022 को फोन आय़ा औऱ कहा 20,000 रुपये जमा करो। उसने जमा कर दिए। इसके बाद 4.11.22 को दुबारा 60000 रुपये जमा करा लिए।

    फिर 14.11.22 को फिर फोन आय़ा औऱ कहा आपका काम हो गया मै आफिस मे खडा हूँ। ज्वाइनिंग लैटर और वर्क विजा भेजने का झांसा देकर एक लाख रुपये और जमा करा लिए। आरोपियों ने युद्धवीर से 1 लाख 80 हजार रुपये ठग (Fraud) लिए। धारूहेड़ा थाना पुलिस ने धोखाधड़ी (Fraud) का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के बाद पुलिस ने एक आरोपी जिला झज्जर के गांव फतेहपुर निवासी कपिल कुमार को गिरफ्तार कर लिया है।

     

     

  • Rewari : टावर लगाने का झांसा देकर 105700 रुपये की fraud का आरोपी गिरफ्तार

    Rewari : टावर लगाने का झांसा देकर 105700 रुपये की fraud का आरोपी गिरफ्तार

    Rewari fraud: जांचकर्ता ने बताया कि गांव डहीना निवासी सुंदर सिंह ने पुलिस को दी शिकायत मे बताया कि 12/01/23 को मोबाईल नम्बर से मेरे पास एक मैसेज आया है जिसमे लिखा है कि आप आई-टेल का टावर लगवाए और 45 लाख एंडवास पाईए। फिर मैने इस नम्बर पर काल की उसने उठाया नही फिर उसकी मेरे पास इसी नम्बर से काल आयी और मैने उससे बात की तो उसने टावर लगाने के लिये कहा। फिर मैने अपनी जमीन (साईट) के कागजात रजिस्ट्री इसी नम्बर पर वाट्सप की और उसने कहा कि सैटेलाईट से आपकी जमीन का निरक्षण कंपनी द्वारा कर लिया जायेगा और 24 घण्टे बाद आपको बता दिया जायेगा।

    फिर दिनांक 13/1/2023 को उसी नंबर से मेरे पास काल आयी और कहा कि मुबारक हो भाई कंपनी आपकी साईट पर टावर लगाने के लिये तैयार है आपको टावर की फाईल के लिए प्रोसेसिंग फीस 800 रुपये जमा करवानी होगी। पिंटु ने 1800 रुपये उसके (कपंनी) के खाता नम्बर मे डाल दिये। फिर इसी नम्बर से मेरे पास काल आया और एक लड़की बोल रही थी ।

    जिसने कहा कि आपका 25 लाख का एंडवास चैक तैयार किया था जो RBI ने होल्ड पर रख दिया इसके लिये आपके 15,500 रुपये फीस जमा करवानी होगी फिर मैने हमारे गांव के ही अशोक कुमार उर्फ पिंटु से 5500 रुपये कंपनी के अंकाउट मे डलवाये और 10 हजार रुपये मैने कंपनी के पास फोन पे किए। फिर इसी नंबर से लड़की का काल आया और कहा कि आपका चैक तैयार हो गया लेकिन रकम ज्यादा होने के कारण DD बनेगा।

    जिसके लिये 22900 फीस लगेगी फिर मैने उसके पास 22900 रुपये फोन पे मे डलवा दिये। फिर दिनांक 15/1/2023 को इसी लड़की का उसी नम्बर से मेरे पास फोन आया और कहा कि आपके टावर का सामान लेकर गाड़ियाँ आ रही थी जिन्हे RTO ने पकड़ लिया है जिसके लिये 48500 रुपये जमा करवाने होगे तो मैने उसके बताए अनुसार उसके फोन पे नम्बर पर डाल दिए।

    फिर दिनांक 16/1/2023 को पुन इसी लड़की का काल आया उसने कहा कि बड़े दुर्भाग्य की बात है कि जो गाड़ियाँ सामान लेकर आ रही थी उसका टायर फट गया है जिसके लिए आपको 17 हजार रुपये जमा करवाने होंगे तो मैने उसके बताए अनुसार उसके पास 17 हजार रुपये फोन पे कर दिये।

    जिसके बाद फिर उसका फोन आया और कहा कि जो गाड़ियाँ आ रही थी उनमे से एक गाड़ी को कमेटी वाले उठा ले गये और वो NOC मांग रहे है जिसके लिये 25 हजार रुपये खर्चा आयेगा और आप मेरे पास भेज दे और गाड़ियों के साथ विनय श्रीवास्तव आ रहा है और आप पैसे भेज दो तो मैने उसे मना कर दिया और फिर बोली की आधे रुपये मै दे दुगी और आधे (12500) रुपये आप दे दो।

    आरोपियों ने मुझे टावर लगाने का झांसा देकर मेरे से 1 लाख 5 हजार सात सौ रुपये की धोखाधडी करके fraud किया है। साइबर थाना पुलिस ने धोखाधड़ी (fraud) का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। पुलिस ने जांच के बाद एक आरोपी दिनेश सैनी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी से पुलिस ने 4 पासबुक भी बरामद की है। आरोपी को आज अदालत मे पेश करके 2 दिन के पुलिस रिमाण्ड पर लिया गया है।

     

     

  • Cyber Crime: पॉलिसी रिन्यू करने का झांसा देकर 8 लाख की ठगी

    Cyber Crime: पॉलिसी रिन्यू करने का झांसा देकर 8 लाख की ठगी

    रेवाड़ी शहर की सनसिटी के रहने वाले धीरज कुमार ने Cyber Crime पुलिस स्टेशन में शिकायत देकर बताया है कि 15 फ़रवरी को एक अंजान नम्बर से उसके पास फोन आया था. फ़ोन करने वाले ठग ने अपना नाम रोहित बताया था. ठग ने धीरज को पॉलिसी रिन्यूवल कराने के लिए पहले अपने जाल में फंसाया और फिर 8 लाख 11 हजार 849 रूपए की नगदी बैंक खाते से साफ़ कर दी. जैसे ही धीरज को ठगी (cheated) का पता चला तो उसने पुलिस को शिकायत दर्ज कराई.

    आपको बता दें कि धीरज के पिता ने एक इंश्योरेंस कंपनी से पॉलिसी ली हुई है। कम्पनी का फर्जी एजेंट बनकर रोहित नाम के शातिर ठग ने उसके पास कॉल की और पिता की पॉलिसी के 5 लाख 11 हजार 849 रुपए जमा कराने के लिए कहा और धीरज के पास इंश्योरेंस कंपनी के खाता नंबर का एक लिंक भी उसके पास भेज दिया।

    इंश्योरेंस कंपनी से फोन आने पर ठगी का पता चला

    लिंक के माध्यम से धीरज ने पैसे NEFT के जरिए ट्रांसफर करा दिए। इसके बाद शातिर ने धीरज को फिर से कॉल की और कहा कि 3 लाख रुपए प्रीमियम भी जमा कराना होगा। उसने 3 लाख रुपए भी खाते में ट्रांसफर कर दिए। बाद में उसके पास इंश्योरेंस कंपनी के एजेंट सुधीर की कॉल आई और दोनों पॉलिसी का प्रीमियम जमा कराने की बात की। धीरज ने बताया कि वह पिता की पॉलिसी और प्रीमियम के पैसे जमा करा चुका है। इस पर सुधीर ने उससे जानकारी जुटाई तो पता चला कि रोहित नाम का कोई एजेंट उनकी कंपनी में है ही नहीं I ठगी (cheated) के बाद धीरज ने इसकी शिकायत Cyber Crime थाना पुलिस को दी।

    पुलिस ने केस दर्ज कर रेड की कार्रवाई शुरू की

    इस मामले में Cyber Crime पुलिस स्टेशन रेवाड़ी ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया है. जिन नम्बर के जरिये धीरज के पास फोन आया था. जिस बैंक खाते में पैसे ट्रान्सफर किये गए थे. उसके आधार पर Cyber Crime पुलिस ठग की धरपकड के लिए रेड कर रही है.