Haryana News: हरियाणा के मेवात में के क्षेत्र नूंह और पलवल जिलों में एक ही रात में मोबिक्विक एप पर लोगों के पास करोड़ों रुपए आ गए और उन्होंने इस पैसे को दूसरे खातों में ट्रांसफर कर कैश भी करवा लिया। लेकिन जिन खातों में इन लोगों ने पैसे को डाला उन लोगों को उनके यहां लगे साउंड बॉक्स से साउंड तो आई लेकिन खाते में पैसे नहीं आए। ऐसे में इन लोगों को उस पैसे का चूना लग गया जो इन लोगों ने उन्हें कैश दिया था। अब मामला पुलिस के पास पहुंचा हुआ है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
हरियाणा का नूंह जिला साइबर क्राइम का बड़ा अड्डा बना हुआ है। यहां कल सुबह करीब 3:00 मोबिक्विक एप यूज करने वाले लोगों के फोन अचानक बजने लगे और कोई करोड़पति बन गया तो कोई लखपति। उनके वॉलेट में एक लाख रुपए से लेकर सवा करोड रुपए तक की राशि दिखाई जा रही थी। सुबह उठते ही कुछ लोगों ने इस पैसे को ठिकाने लगाने के लिए अभियान चला दिया और उन्हें जिस चीज की जरूरत थी वह चीज लेने के लिए बाजार में दौड़ पड़े। लोग बड़े दुकानदारों, व्यापारियों और पेट्रोल पंपों पर पहुंचे और उनके मोबिक्विक एप के वॉलेट में लाखों की ट्रांजैक्शन कर उनसे नकदी ले ली। इसके एवज में व्यापारियों को मोटा कमीशन भी दिया गया।

कुछेक ने तो आधे तक यानि 50% तक का ऑफर दे डाला। एक मेडिकल स्टोर संचालक के खाते में तो 1.13 करोड़ रुपए तक आ गए। नूंह से लेकर पलवल तक रात में “मोबिक्विक” एप में यही खेल चलता रहा। मगर, सुबह 8 बजे जब व्यापारियों ने रात में हुए ट्रांजैक्शन को अपने एप के वॉलेट से बैंक अकाउंट या दूसरे यूजर को ट्रांसफर करना चाहा तो वह फेल दिखाई देने लगा। रुपए फंसते देख उन्होंने तुरंत पुलिस को मामले की जानकारी दी। इस पर पुलिस की आईटी और साइबर टीम तुरंत एक्टिव हुई। मामले की जांच के साथ ही एक एडवाइजरी जारी की गई कि यह एक फ्रॉड है, किसी भी सूरत में ट्रांजैक्शन स्वीकार ना करें। फिलहाल, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। एप ऑथोरिटी से भी जानकारी मांगी गई है कि यह क्या मामला है और कितने लोग इसके शिकार हुए है। पुलिस का मानना है कि अकेले नूंह में ही 80 फीसदी व्यापारी मोबिक्विक एप यूज करते है।
गुरुवार-शुक्रवार की रात करीब 3 बजे लोगों के मोबिक्विक एप के वॉलेट में रुपए क्रेडिट दिखाई देने लगा, जबकि उन्होंने इसका कोई लेनदेन नहीं किया था। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर संदेश वायरल हुआ कि मोबिक्विक एप से स्कैनर के जरिए लेनदेन करने पर पुराने उधार स्वतः चुकता हो जाएगा और दुकानदारों के खाते में रकम जमा हो जाएगी। जैसे ही यह संदेश फैला, वैसे ही लोग तुरंत बाजार की तरफ भागे। किसी ने पेट्रोल पंप पर जाकर पेट्रोल भरवाया। ज्यादा का ट्रांजैक्शन कर कैश ले लिया। इसके अलावा कई लोग दुकानदारों और व्यापारियों के पास पहुंच गए। उन्हें आधे तक का ऑफर देकर कैश ले लिया। व्यापारियों ने मौका भुनाते हुए धड़ाधड़ कैश दिए।
खास बात यह रही है कि यह ट्रांजैक्शन केवल मोबिक्विक एप के ही यूजर्स के बीच हो रही थी, अन्य किसी प्लेटफार्म जैसे फोन पे या गूगल पे पर नहीं। इसके अलावा दूसरी खास बात यह भी थी कि जैसे ही एक यूजर व्यापारियों के मोबिक्विक वॉलेट में रुपए ट्रांसफर करता, वैसे ही एप से जुड़े साउंड बॉक्स से पेमेंट सक्सेसफुल की आवाज आ जाती।
मोबिक्विक एप पर रात तीन बजे से शुरू हुआ ट्रांजैक्शन का खेल सुबह आठ बजे तक चलता रहा। लोगों ने धड़ाधड़ मोबिक्विक एप के वॉलेट में आए पैसे को ठिकाने लगाया। मगर, आठ बजे के बाद जब दुकानदारों ने जब अपने अकाउंट चेक किए तो उसमें ट्रांजैक्शन शो नहीं हो रही थी। यह देख दुकानदारों और व्यापारियों को माथे पर चिंता की लकीरें आ गईं। उन्होंने तुरंत पुलिस को मामले की सूचना दी।
नूंह जिले के मरोड़ा गांव के रहने आसिफ ने बताया कि उसके घर के पास जलेबी बनाने वाले इमरान की दुकान है। इमरान भी मोबिक्विक एप यूज करता है। शुक्रवार की सुबह जब उसने अपना मोबिक्विक वॉलेट चेक किया तो उसमें 24 लाख रुपए शो हो रहे थे। इतनी बड़ी रकम देखकर वह डर गया। तुरंत मेरे पास आया और मामले की जानकारी दी। इसके बाद हमने 1930 पर कॉल कर पुलिस को मामले की जानकारी दी।
इसी गांव मरोड़ा के ही रहने वाले सुरेंद्र ने बताया कि उसका गांव में समर नाम से मेडिकल स्टोर है। गुरुवार-शुक्रवार की रात उसके मोबिक्विक वॉलेट में 1.13 करोड़ रुपए शो होने लगे। यह देख उसके होश उड़ गए। उसने तुरंत पुलिस से संपर्क साधा। पुलिस ने उससे कहा कि वॉलेट से छेड़छाड़ मत करना, यह फ्रॉड हो सकता है, हमने आपकी कंपलेन दर्ज कर ली है, जांच कर रहे है। सुरेंद्र ने बताया कि शुक्रवार की दोपहर को उसका मोबिक्विक वॉलेट एप सस्पेंड शो हो रहा है। इसमें उसके 5600 रुपए भी फंस गए।
पलवल के होडल क्षेत्र में तहसील के पास दुकान करने वाले राजेंद्र ने बताया कि रात में गुरुवार रात उसके पास दो युवक आए। उन्होंने अच्छी कंपनी वाला पंखा दिखाने का कहा। उसने बताया कि उसके पास तो ओरिएंट कंपनी के ही पंखे है। इस युवकों ने पंखा दिखाने को कहा। उसने पंखा दिखा दिया। युवक बोले, तीन पंखे चाहिए। राजेंद्र के मुताबिक, उसने तीन पंखे दे दिए, जिनका बिल बना 4200 रुपए। युवकों ने उसके मोबिक्विक वॉलेट में 5000 रुपए ट्रांसफर कर दिए। उसके पास साउंड बॉक्स नहीं है तो पता नहीं चला। उसने युवकों से पूछा तो उसने अपने मोबाइल में ट्रांजैक्शन सक्सेसफुल का मैसेज दिखा दिया। साथ ही कहा कि थोड़ी बहुत देर में आ जाएंगे। इसके बाद युवक पंखे और 680 रुपए कैश (क्रेडिट कार्ड के 120 रुपए कमीशन काटकर) लेकर चले गए। मगर, सुबह तक उसके बैंक अकाउंट में पैसे नहीं आए।
जैसे ही यह मामला पुलिस तक पहुंचा, साइबर और आईटी सेल तुरंत एक्टिव हुई। एएसपी आयुष यादव ने तुरंत एडवाइजरी जारी की। बताया कि गुरुवार से नूंह और पलवल जिले में एक फ्रॉड हो रहा है। इसमें लोग व्यापारियों और पेट्रोल पंपों पर जाकर दुकानदारों को लालच दे रहे हैं कि वह अभी उन्हें लाखों की पेमेंट कर रहे हैं, उन्हें सामान और कुछ पैसे दे दीजिए। कृपया, कोई भी लेनदेन न करें, यह फ्रॉड है।
एएसपी आयुष यादव ने आगे बताया कि जो लोग व्यापारियों या दुकानदारों या पेट्रोल पंपों पर जा रहे है, वे मोबिक्विक एप के स्कैनर का उपयोग कर रहे हैं। दुकानदार के पास मोबिक्विक एप वॉलेट में पैसे दिखेंगे, लेकिन वह अकाउंट में नहीं आएंगे। यहां तक कि एप से जुड़े साउंड बॉक्स में भी ट्रांजैक्शन की आवाज आ रही है। फ्रॉड से बचने के लिए ऐसे लोगों को कतई कैश ना दें।
एएसपी आयुष यादव ने बताया कि पुलिस के पास दो लोगों की लिखित शिकायतें आई है। इनमें से एक दुकानदार नूंह किले के मरोड़ा क्षेत्र का रहने वाला है। उसने बताया कि उसके मोबिक्विक एप के वॉलेट में 2,70,000 रुपए की पेमेंट आई थी। इसके अलावा तावडू के रहने वाले दूसरे दुकानदार के वॉलेट में 1,90,000 रुपए की पेमेंट आई है। यह धनराशि मोबिक्विक एप के वॉलेट में तो दिखाई दे रही है, लेकिन अकाउंट में नहीं।
एएसपी ने बताया कि पुलिस ने मोबिक्विक एप अथॉरिटी से भी संपर्क किया है। जानकारी मांगी है कि यह क्या मामला है, कैसे और किस स्तर पर फ्रॉड हुआ है, इसके पीछे कौन है? जैसे सवाल पूछे गए है। इसके अलावा पुलिस की साइबर और आईटी टीम भी मामले की जांच में जुटी है। उन्होंने आगे कहा कि यह पूरी तरह से फ्रॉड है। लोगों को बिना सत्यापन के किसी भी अफवाह या स्कीम पर भरोसा नहीं करना चाहिए। यदि ऐसा कोई लेनदेन दिखाई दे तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में रिपोर्ट करनी चाहिए।

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