Haryana: पराली जलाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट इस समय पूरी तरह से शक है लेकिन फिलहाल जो आंकड़े आ रहे हैं उसके अनुसार इस बार पंजाब में पुरानी जलाने के घर से हरियाणा से करीब 25 गुना ज्यादा है।
कंसोर्टियम फॉर रिसर्च ऑन एग्रोसिस्टम एंड मॉडलिंग फॉम स्पेस (क्रीम्स) द्वारा देश के छह राज्यों में धान की पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी अंतरिक्ष से की जाती है। क्रीम्स की ताजा रिपोर्ट बताती है कि 15 सितंबर से लेकर 29 सितंबर के बीच पराली जलाने की कुल 126 घटनाएं दर्ज की गई हैं। यह रिपोर्ट आज शाम ही जारी की गई है। पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं सबसे ज्यादा सामने आ रही हैं। क्रीम्स के पास मौजूद आंकड़े बताते हैं कि कुल 126 घटनाओं में से अकेले पंजाब में ही 90 घटनाएं हुई हैं। पंजाब के बाद उत्तर प्रदेश में 25 घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं। मध्य प्रदेश से छह, हरियाणा से चार और राजस्थान से पराली जलाने की एक घटना दर्ज की गई है।

यहां बता दें कि पंजाब में इस बार बाढ़ के कारण काफी तबाही हुई है और उसके बावजूद अब तक पहले 14 दिनों में पराली जलाने की 90 घटनाएं सामने आना अपने आप में एक बड़ी बात बनी हुई है। हालांकि बाढ़ के कारण हरियाणा में भी फसलों को काफी नुकसान हुआ है लेकिन उसके बावजूद हरियाणा में लगभग आधी फैसले अभी तक बिल्कुल सही है और ऐसे में हरियाणा में केवल चार जगह पर प्रणाली जलाने की बात सामने आ रही है जो इस बात का सूचक है कि हरियाणा सरकार ने किसानों को कुली दिलाने से रोकने की दिशा में काफी ठोस कदम उठाए हैं।
मौसम के अलग-अलग कारकों के चलते दिल्ली और एनसीआर की आबो-हवा अभी मध्यम श्रेणी में चल रही है। सप्ताह भर में दिल्ली की हवा में पराली के धुएं का असर भी देखने को मिल सकता है। दरअसल, हवा की दिशा उत्तरी पश्चिमी होने पर पराली का धुआं भी दिल्ली की ओर आने लगता है।
दिल्ली समेत इस बार पूरे उत्तर भारत से मानसून समय से थोड़ा पहले विदा हो गया है। इसके साथ ही पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश में धान की फसल कटने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। फसल कटने के बाद बचे अवशेषों को किसान खेत में ही जला देते हैं। इस कारण दिल्ली-एनसीआर की हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। इसे देखते हुए हर साल ही पराली जलाने की रोकथाम के लिए तमाम कदम उठाए जाते हैं, लेकिन ऐसा लग रहा है कि इन उपायों का पर्याप्त असर नहीं पड़ रहा है।








