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  • हरियाणा: मोरनी काजड़ गांव में भूस्खलन का खतरा, घर और जमीन को बड़ा नुकसान होने का डर

    हरियाणा: मोरनी काजड़ गांव में भूस्खलन का खतरा, घर और जमीन को बड़ा नुकसान होने का डर

    हरियाणा में बाढ़ और जलभराव से जो नुकसान हुआ है, वह तो एक तरफ लेकिन इसके बावजूद अब भी लोगों पर भारी नुकसान का खतरा मंडरा रहा है। पंचकूला जिले के मोरनी क्षेत्र में इस मानसून में लगातार हुई बारिश से कई गांवों में घरों व जमीनों का भारी नुकसान देखने में आया है और खतरा अभी भी टला नहीं है।

    भोज जब्याल पंचायत के काजड़ गांव के नीचे हुए भूस्खलन से गांव के दर्जनों घर संकट में आ गए हैं। इस गांव के नीचे बारिश के दौरान काफी बड़े एरिया में भूस्खलन से मिट्टी खिसक गई जिसके बाद गांव को धंसने का खतरा पैदा हो गया था।

    हरियाणा: मोरनी काजड़ गांव में भूस्खलन का खतरा, घर और जमीन को बड़ा नुकसान होने का डर

    ग्रामीण भगवान दास, हेत राम, दुर्गा राम, पुरुषोत्तम और दीपक का कहना है कि गांव के नीचे से मिट्टी लगातार खिसक रही है। ऐसे में गांव में बने घर संकट में आ गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि भूस्खलन की वजह से न केवल मकानों की सुरक्षा खतरे में है, बल्कि उनकी जमीन भी धंसने का संकट है।

    पहाड़ी क्षेत्र में कई गांव पहले ही भूस्खलन से नुकसान झेल चुके हैं और अब काजड़ गांव भी उसी जोखिम से गुजर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते प्रशासन ने ठोस कदम उठाए तो बड़ा नुकसान टल सकता है।

    उन्होंने मांग की है कि पंचायत व वन विभाग मिलकर गांव के नीचे मजबूत बचाव दीवारें लगवाए जिससे घरों और जमीन को भूस्खलन से सुरक्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि जहां से भूस्खलन हुआ है उसके ऊपर गांव है और काफी ग्रामीण यहां निवास करते हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रदेश की सरकार इस तरफ ध्यान देकर इस गांव को बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।

  • हरियाणा में डेंगू का कहर! 367 मामले और पानीपत में पहली मौत की पुष्टि, सावधानी जरूरी!

    हरियाणा में डेंगू का कहर! 367 मामले और पानीपत में पहली मौत की पुष्टि, सावधानी जरूरी!

    हरियाणा में इस साल डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। 31 अगस्त 2025 तक राज्य में कुल 367 डेंगू के मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं, पन्नीपत जिले में डेंगू से पहली मौत भी हुई है। मृतक एक बच्चा था, जो उत्तर प्रदेश के शामली जिले का निवासी था। यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

    पिछले साल की तुलना में मामलों में वृद्धि

    पिछले साल 3 सितंबर 2024 तक राज्य में केवल 212 मामले दर्ज किए गए थे। इस बार 11 दिन में मामले 390 तक पहुँच गए। उस समय पंचकुला डेंगू का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बन गया था, जहाँ 15 सितंबर 2024 तक 390 मामले दर्ज किए गए। इस साल भी प्रशासन सतर्क है और डेंगू पर काबू पाने के लिए कड़े कदम उठा रहा है।

    हरियाणा में डेंगू का कहर! 367 मामले और पानीपत में पहली मौत की पुष्टि, सावधानी जरूरी!

    प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की तैयारी

    राज्य में डेंगू से निपटने के लिए 50 से अधिक कर्मचारियों की टीमें सक्रिय हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सभी सिविल अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे जांच और उपचार के पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित करें। अधिकारियों के अनुसार, डेंगू फैलाने वाली एडिस मच्छर केवल 400 मीटर तक उड़ सकती है, लेकिन वाहन या लोगों के जरिए यह दूर-दराज के इलाकों तक फैल सकती है। यह मच्छर दिन और दोपहर के समय काटती है और घर के अंधेरे और ठंडे स्थानों जैसे कोनों या कारों में छिप जाती है।

    जिलेवार डेंगू के मामले

    31 अगस्त 2025 तक जिलों में डेंगू के मामले इस प्रकार हैं: रेवाड़ी-106, गुरुग्राम-51, करनाल-29, सोनीपत-25, रोहतक-23, झज्जर-15, पंचकुला-18, पन्नीपत-14, यमुनानगर-14, चरखी दादरी-9, हिसार-9, कैथल-8, फरीदाबाद-8, महेन्द्रगढ़-8, नूह-7, कुरुक्षेत्र-5, अंबाला-4, सिरसा-3, फतेहाबाद-2। रेवाड़ी और गुरुग्राम सबसे अधिक प्रभावित जिले बन चुके हैं।

    डेंगू से बचाव के उपाय

    डेंगू से बचाव के लिए पानी का ठहराव न होने दें। कूलर, गमले और अन्य पानी जमा होने वाली जगहों को नियमित रूप से साफ करें। दिन और दोपहर में मच्छरों से बचने के लिए लंबे हाथों की कपड़े पहनें। जागरूकता और सावधानी बरतने से डेंगू के संक्रमण को रोका जा सकता है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूक कर रहे हैं।