हरियाणा में इस साल डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। 31 अगस्त 2025 तक राज्य में कुल 367 डेंगू के मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं, पन्नीपत जिले में डेंगू से पहली मौत भी हुई है। मृतक एक बच्चा था, जो उत्तर प्रदेश के शामली जिले का निवासी था। यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
पिछले साल की तुलना में मामलों में वृद्धि
पिछले साल 3 सितंबर 2024 तक राज्य में केवल 212 मामले दर्ज किए गए थे। इस बार 11 दिन में मामले 390 तक पहुँच गए। उस समय पंचकुला डेंगू का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बन गया था, जहाँ 15 सितंबर 2024 तक 390 मामले दर्ज किए गए। इस साल भी प्रशासन सतर्क है और डेंगू पर काबू पाने के लिए कड़े कदम उठा रहा है।

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की तैयारी
राज्य में डेंगू से निपटने के लिए 50 से अधिक कर्मचारियों की टीमें सक्रिय हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सभी सिविल अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे जांच और उपचार के पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित करें। अधिकारियों के अनुसार, डेंगू फैलाने वाली एडिस मच्छर केवल 400 मीटर तक उड़ सकती है, लेकिन वाहन या लोगों के जरिए यह दूर-दराज के इलाकों तक फैल सकती है। यह मच्छर दिन और दोपहर के समय काटती है और घर के अंधेरे और ठंडे स्थानों जैसे कोनों या कारों में छिप जाती है।
जिलेवार डेंगू के मामले
31 अगस्त 2025 तक जिलों में डेंगू के मामले इस प्रकार हैं: रेवाड़ी-106, गुरुग्राम-51, करनाल-29, सोनीपत-25, रोहतक-23, झज्जर-15, पंचकुला-18, पन्नीपत-14, यमुनानगर-14, चरखी दादरी-9, हिसार-9, कैथल-8, फरीदाबाद-8, महेन्द्रगढ़-8, नूह-7, कुरुक्षेत्र-5, अंबाला-4, सिरसा-3, फतेहाबाद-2। रेवाड़ी और गुरुग्राम सबसे अधिक प्रभावित जिले बन चुके हैं।
डेंगू से बचाव के उपाय
डेंगू से बचाव के लिए पानी का ठहराव न होने दें। कूलर, गमले और अन्य पानी जमा होने वाली जगहों को नियमित रूप से साफ करें। दिन और दोपहर में मच्छरों से बचने के लिए लंबे हाथों की कपड़े पहनें। जागरूकता और सावधानी बरतने से डेंगू के संक्रमण को रोका जा सकता है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूक कर रहे हैं।

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