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  • हरियाणा की उचाना सीट पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बृजेंद्र सिंह की चुनाव याचिका बनी चर्चा का विषय, 19 सितंबर होगी सुनवाई

    हरियाणा की उचाना सीट पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बृजेंद्र सिंह की चुनाव याचिका बनी चर्चा का विषय, 19 सितंबर होगी सुनवाई

    पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय एक महत्वपूर्ण फैसले में देवेंद्र चतुर्भुज अत्री द्वारा उचाना विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस उम्मीदवार बृजेंद्र सिंह द्वारा दायर चुनाव याचिका को खारिज करने की मांग उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी है। अब मुख्य चुनाव याचिका पर 19 सितंबर को सुनवाई होगी।

    बता दें कि 11 सितंबर को बृजेंद्र सिंह की चुनाव याचिका को खारिज करने की देवेंद्र अत्री की अपील पर उच्च न्यायालय ने सुनवाई पूरी कर ली थी और अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में बताया गया है कि आज सुबह उच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुना दिया है और देवेंद्र चतुर्भुज अत्री की चुनाव याचिका खारिज करने की दलीलों को खारिज कर दिया है। मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अनूप चिटकारा की अदालत ने अब इस मामले में मुख्य चुनाव याचिका पर 19 सितंबर को सुनवाई करने की बात कही है।

    हरियाणा की उचाना सीट पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बृजेंद्र सिंह की चुनाव याचिका बनी चर्चा का विषय, 19 सितंबर होगी सुनवाई

    यहां बता दें कि पिछले साल हुए चुनाव में बृजेंद्र सिंह केवल 32 वोटों से चुनाव हार गए थे और उसके बाद इस मामले में उन्होंने रद्द हुए वोटों की गिनती करवाए जाने की मांग को लेकर याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि अगर रद्द हुए वोटों की संख्या हार जीत के मार्जिन से ज्यादा है तो उनकी गिनती किया जाना जरूरी है और वह एक निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत वीडियो ग्राफी के बीच गिनती की जानी चाहिए। लेकिन निर्वाचन अधिकारी ने कानून को अनदेखा करते हुए उन वोटों की गिनती नहीं करवाई।

    अदालत इस मामले में पहले ही कह चुकी है कि किसी प्रकार की देरी नहीं की जानी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा था कि चुनाव याचिका लोकतंत्र में सबसे महत्वपूर्ण है और इस मामले में अदालत इतिहास रचना चाहती है इसलिए दोनों ही पक्षों के अधिवक्ता मामले को टालने का काम न करें। बृजेंद्र सिंह द्वारा दायर चुनाव याचिका पर सुनवाई के दौरान अब अदालत दोनों पक्षों की दलीलों को सुनेगी और उसके बाद वह इस पर फैसला लेगी।

  • Jyoti Malhotra: ज्योति मल्होत्रा की डिफॉल्ट बेल खारिज, अब ज्योति का वकील को मिलेगा अधूरा चालान

    Jyoti Malhotra: ज्योति मल्होत्रा की डिफॉल्ट बेल खारिज, अब ज्योति का वकील को मिलेगा अधूरा चालान

    हिसार कोर्ट ने पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में जेल में बंद यूट्यूबर Jyoti Malhotra की डिफॉल्ट बेल खारिज कर दी है। वहीं पुलिस की 3 एप्लीकेशन में से 2 को स्वीकार कर लिया और एक को आंशिक तौर पर स्वीकार कर लिया। अब ज्योति मल्होत्रा को अधूरी चार्जशीट दी जाएगी और चालान के पार्ट को प्रकाशित नहीं किया जा सकेगा। हालांकि रूटीन मीडिया ब्रीफिंग पर कोर्ट ने रोक नहीं लगाई है।

    Jyoti Malhotra के वकील कुमार मुकेश ने बताया कि अदालत के फैसले का सम्मान है लेकिन वह संतुष्ट नहीं हैं। चारों आदेशों की कॉपियां शीघ्र लेकर उनके खिलाफ रिविजन फाइल की जाएगी। कोर्ट ने ज्योति को 10 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए हैं। ज्योति की पिछली पेशी 25 अगस्त को हुई थी। इसी दौरान पुलिस ने एप्लीकेशन देकर कहा था कि ज्योति के वकील को चार्जशीट की कॉपी ना दी जाए क्योंकि यह काफी संवेदनशील है। इस पर वकील ने कहा था कि बिना चार्जशीट वह केस कैसे लड़ेंगे?

    Jyoti Malhotra: ज्योति मल्होत्रा की डिफॉल्ट बेल खारिज, अब ज्योति का वकील को मिलेगा अधूरा चालान

    पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा की चार्जशीट को लेकर विवाद चल रहा है। 25 अगस्त को ज्योति को चार्जशीट सौंपने के लिए कोर्ट में पेशी पर लाया गया था। कोर्ट में चार्जशीट सौंपने की प्रक्रिया चल ही रही थी, इस दौरान हिसार पुलिस ने कोर्ट में 3 एप्लिकेशन दी कि ज्योति के वकील कुमार मुकेश को चार्जशीट के कुछ हिस्से न दिए जाएं। पुलिस ने इसके पीछे तर्क दिया है कि वकील को चार्जशीट कॉपी देने से रिपोर्ट सार्वजनिक हो सकती है, जो काफी संवेदनशील है।

    पुलिस ने कहा कि पंचकूला सीएफएल का डेटा गोपनीय है और देश की सुरक्षा के लिए इसे सार्वजनिक करना ठीक नहीं है। पुलिस ने कहा कि पाक एजेंटों के साथ ज्योति की चैटिंग सार्वजनिक नहीं की जा सकती। पुलिस ने कहा कि पूरे मामले के मीडिया ब्रीफिंग पर रोक लगाई जाए। वहीं कुमार मुकेश ने कोर्ट में कहा कि यह एप्लिकेशन अवैध हैं। कुछ प्रावधानों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है। इसका कोई प्रावधान नहीं है। इसके बाद वकील कुमार मुकेश ने अपनी तरफ से डिफॉल्ट बेल की एप्लिकेशन कोर्ट में लगाई थी।

    हिसार पुलिस ने ज्योति मल्होत्रा को पाकिस्तान के लिए जासूसी के शक में 15 मई को गिरफ्तार किया था। उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 की धारा 3, 4 और 5 के तहत जासूसी, राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने और गोपनीय जानकारी साझा करने जैसे गंभीर आरोप हैं।

  • Haryana: भाजपा विधायक ने बृजेंद्र की याचिका पर लगाई 10 आपत्तियां, बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई

    Haryana: भाजपा विधायक ने बृजेंद्र की याचिका पर लगाई 10 आपत्तियां, बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई

    Haryana: जींद जिले की उचाना विधानसभा चुनाव 2024 के रिजेक्ट वोटों की गणना को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में बुधवार को याचिका पर सुनवाई होगी। इसमें भाजपा विधायक देवेंद्र अत्री और कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह पेश हुए। देवेंद्र अत्री के वकील की तरफ से 10 आब्जेक्शन लगाए गए, जबकि बृजेंद्र सिंह की तरफ से दो आब्जेक्शन लगाए गए हैं। इन सभी आपत्तियों पर तीन सितंबर को बहस होगी। सभी आपत्ति हटने के बाद इस पर फैसला आ सकता है।

    आपत्तियां सुनने के बाद जज द्वारा 3 सितंबर को फिर से सुनवाई और इन पर बहस का समय दिया गया है। पूर्व विधायक प्रेमलता के अनुसार जज ने ये भी कहा है कि यह केस सबसे ऊपर रहेगा। दिन में चाहे कितने भी केस हों, सबसे पहले इस पर सुनवाई होगी। बता दें कि उचाना विधानसभा सीट पर रिजेक्ट वोटों की काउंटिंग को लेकर चौथी बार तारीख मिली है। इससे पहले तीन बार इस मामले में सुनवाई हो चुकी हैं।

    भाजपा विधायक देवेंद्र अत्री की तरफ से 10 ऑब्जेक्शन लगाए गए। इनमें एक ये है कि बृजेंद्र सिंह संशोधित याचिका देने के लिए खुद नहीं आए। दूसरा ये है कि बृजेंद्र सिंह के अलावा किसी भी दूसरे प्रत्याशियों ने यह ऑब्जेक्शन क्यों नहीं लगाया। इसके अलावा भी 8 और ऑब्जेक्शन हैं।

    कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह ने याचिका में कहा है कि उचाना विधानसभा में जीत-हार का अंतर मात्र 32 वोटों का था और रिजेक्ट हुए वोटों की संख्या 215 के करीब है। इसलिए रिजेक्ट वोटों की दोबारा से काउंटिंग होनी चाहिए। याचिका पर इससे पहले 26 अगस्त को सुनवाई हुई थी, जिसमें भाजपा विधायक के सीनियर एडवोकेट की तरफ से दलील दी गई थी। हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह मामले की तेजी से सुनवाई की बात कही थी।

    Haryana: भाजपा विधायक ने बृजेंद्र की याचिका पर लगाई 10 आपत्तियां, बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई

    भाजपा विधायक देवेंद्र अत्री के एडवोकेट ने कोर्ट से राहत पाने के लिए यह तर्क दिया कि बृजेंद्र सिंह की संशोधित याचिका CPC के आदेश 7 नियम-11 के तहत सुनने योग्य नहीं है।

    उचाना सीट पर भाजपा के देवेंद्र अत्री ने मात्र 32 वोटों से बृजेंद्र सिंह को हराया था। मार्च 2025 में बृजेंद्र सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा था कि जो कैंसिल या रिजेक्ट वोट होते हैं, यदि उसका अंतर इलेक्शन की हार-जीत के अंतर से ज्यादा है, तो गिनती खत्म होने के बाद उन सभी कैंसिल वोटों की दोबारा से जांच रिटर्निंग अधिकारी को मौके पर करनी होती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

    उचाना विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र अत्री को 48 हजार 968 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह को 48 हजार 936 वोट मिले थे। इसमें कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह 32 वोटों से हार गए थे। इस चुनाव में 400 के करीब बैलेट पेपर की काउंटिंग की गई थी, तो इनमें से 215 वोट त्रुटियों के कारण रिजेक्ट या कैंसिल हो गए थे।

    बृजेंद्र सिंह ने आरोप लगाए थे कि 150 वोट केवल इसलिए कैंसिल किए गए हैं, क्योंकि पोस्टल बैलेट के लिफाफे के ऊपर जो स्कैनर था, उनकी स्कैनिंग नहीं हो पा रही थी। बृजेंद्र सिंह ने कहा कि जिन वोटों की स्कैनिंग नहीं होती तो उन लिफाफों को कैसे खोलना है, इसकी भी प्रक्रिया है, जो गिनती के दौरान नहीं की गई। उसी को लेकर उन्होंने कोर्ट में याचिका लगाई है। उन्होंने कहा है कि वोटों की जीत-हार का अंतर मात्र 32 वोटों का है, इसलिए यह काउंटिंग जरूरी थी।

    हाईकोर्ट ने अत्री के वकील को सबसे बड़ी बात यह कही थी कि इस केस को रैंक ऑन प्रायरिटी पर रखा जाए और इसमें बेवजह देरी के तौर-तरीके न अपनाए जाएं।

  • फतेहाबाद में राजनीतिक और कानूनी संकट, CM नायब सैनी के फतेहाबाद दौरे से पहले BJP के 3 अधिकारियों और 2 समर्थकों के खिलाफ FIR दर्ज

    फतेहाबाद में राजनीतिक और कानूनी संकट, CM नायब सैनी के फतेहाबाद दौरे से पहले BJP के 3 अधिकारियों और 2 समर्थकों के खिलाफ FIR दर्ज

    फतेहाबाद में मुख्यमंत्री नायब सैनी के आगमन से पहले तीन BJP अधिकारियों और दो समर्थकों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। यह FIR CJM सुषा जावा की अदालत के आदेश पर दर्ज की गई। हालांकि साइबर थाना पुलिस को FIR दर्ज करने में एक सप्ताह का समय लगा।

    विनय शर्मा की शिकायत के बाद हुई कार्रवाई

    पूर्व जिला बार एसोसिएशन अध्यक्ष अधिवक्ता विनय शर्मा ने SP को शिकायत दी थी। विनय शर्मा ने आरोप लगाया कि देशद्रोह के आरोपी ताज मोहम्मद के केस को लेने के बाद BJP कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ अभद्र टिप्पणियां की। उन्हें ‘सेटिंग बाज’ कहा गया और फेसबुक पर कई आपत्तिजनक पोस्ट लिखे गए।

    फतेहाबाद में राजनीतिक और कानूनी संकट, CM नायब सैनी के फतेहाबाद दौरे से पहले BJP के 3 अधिकारियों और 2 समर्थकों के खिलाफ FIR दर्ज

    BJP अधिकारियों और समर्थकों के खिलाफ धाराएं

    साइबर थाना पुलिस ने इस मामले में जिला कार्यकारिणी सदस्य धानंजय अग्रवाल, किसान मोर्चा के जिला सचिव लायक राम गढ़वाल, CA सेल के जिला प्रमुख CA ललित जगा और समर्थक सज्जन गोदारा और दीपक सोनी के खिलाफ धारा 196(1), 197(1), 391(2), 356(2) और 46 BNS के तहत FIR दर्ज की।

    ताज मोहम्मद का फेसबुक पोस्ट विवाद

    इस मामले की पृष्ठभूमि में 10 मई को भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम की घोषणा के बाद फतेहाबाद के ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ मुश्ताक अहमद उर्फ ताज मोहम्मद ने अपने फेसबुक अकाउंट पर तीन वीडियो पोस्ट किए थे। इन वीडियो में पीएम मोदी को बड़ी गलती करते दिखाया गया और पाकिस्तान की जीत दर्शाई गई। इसके बाद BJP नेताओं ने ताज मोहम्मद के खिलाफ देशद्रोह का केस दर्ज कराया।

    विधिक लड़ाई और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

    ताज मोहम्मद का केस अधिवक्ता विनय शर्मा लड़ रहे हैं। वहीं BJP जिला उपाध्यक्ष जगदीश राय शर्मा, मंडल अध्यक्ष विकास शर्मा और मंडल उपाध्यक्ष परम् जीत बेनीवाल ने शहर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई। मामला राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से काफी संवेदनशील बन गया है।

  • दिल्ली हाईकोर्ट का केंद्र को झटका! हर बार मुकदमा करना ठीक बात नहीं है, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को लगाई फटकार

    दिल्ली हाईकोर्ट का केंद्र को झटका! हर बार मुकदमा करना ठीक बात नहीं है, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को लगाई फटकार

    दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई है। हाई कोर्ट ने कहा कि सरकार आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल (AFT) के फैसले के खिलाफ अपील करती है। AFT सैनिकों को पेंशन देने का आदेश देता है और सरकार उन्हें पेंशन देने की बजाए हाईकोर्ट आ जाती है। बेंच ने कहा कि सरकार को कुछ मामलों में AFT के फैसले को मान लेना चाहिए। हर बार मुकदमा करना ठीक बात नहीं है।

    यह बात जस्टिस सी हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने कही। बेंच ने केंद्र सरकार की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने AFT के एक आदेश को चुनौती दी थी। बेंच ने कहा कि हर छोटे-मोटे विवाद अदालत में नहीं ले जाना चाहिए। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद केंद्र सरकार द्वारा AFT की फैसलों के खिलाफ कोर्ट में जाने की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।

    दिल्ली हाईकोर्ट का केंद्र को झटका! हर बार मुकदमा करना ठीक बात नहीं है, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को लगाई फटकार

    मेजर संजीव चड्ढा 25 साल पहले बाथरूम में मृत पाए गए थे। उनकी मौत ब्रेन हेमरेज के कारण हुई थी। संजीव चड्ढा को हाई ब्लड प्रेशर की वजह से यह ब्रेन हैमरेज हुआ था। आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल की दिल्ली बेंच ने मेजर संजीव चड्ढा की विधवा को स्पेशल फैमिली पेंशन देने का आदेश दिया था।

    AFT ने 3 नवंबर 2023 को संजीव चड्ढा के पत्नी के पक्ष में फैसला दिया था। ट्रिब्यूनल ने कहा था कि अधिकारियों को पेंशन देने से इनकार करने के लिए मशीनी या तकनीकी रवैया नहीं अपनाना चाहिए। केंद्र सरकार का कहना था कि मेजर चड्ढा की मौत सर्विस के कारण नहीं हुई थी और इसलिए केंद्र ने मेजर की पत्नी को पेंशन का हकदार नहीं माना।

    मेजर संजीव चड्ढा की पत्नी के वकील चैतन्य अग्रवाल ने बताया कि मेजर चड्ढा जून 1988 में सेना में भर्ती हुए थे। 3 सितंबर 2000 को नई दिल्ली में उनका निधन हो गया था। उनकी मौत का कारण दिमाग में खून का रिसाव बताया गया था। वकील ने कहा कि मेजर चड्ढा न तो शराब पीते थे न ही कोई और नशा करते थे। उनके परिवार में भी किसी को हाई ब्लड प्रेशर नहीं था। उन्होंने तनावपूर्ण परिस्थितियों में नौकरी की, जिससे उन्हें बीपी की प्रॉब्लम हुई।

    केंद्र सरकार ने दावा किया कि मेजर संजीव चड्ढा को सेना की सर्विस जॉइन करते समय हाई ब्लड प्रेशर था। हाई कोर्ट ने केंद्र की यह दलील खारिज कर दी। हाई कोर्ट ने कहा कि 12 साल तक वर्दी पहनने के बाद उनकी ब्रेन हेमरेज से मौत हुई। हमने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देखी है। रिपोर्ट में सिर्फ इतना लिखा है कि मेजर संजीव चड्ढा की मौत ICH से हुई है, कोई और कारण नहीं बताया गया है। हाईकोर्ट ने AFT के फैसले को सही ठहराया।

  • Elvish Yadav को Supreme Court से राहत! सांप ज़हर केस पर रोक, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- नहीं चलेगी निचली अदालत की कार्यवाही

    Elvish Yadav को Supreme Court से राहत! सांप ज़हर केस पर रोक, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- नहीं चलेगी निचली अदालत की कार्यवाही

    Supreme Court ने यूट्यूबर और रियलिटी शो फेम Elvish Yadav को बड़ी राहत दी है। सांप के ज़हर के अवैध उपयोग से जुड़े मामले में उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता गौरव गुप्ता को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई तक निचली अदालत में कोई कार्यवाही नहीं होगी।

    क्या है पूरा मामला?

    यह मामला उस समय सामने आया जब नोएडा पुलिस ने एल्विश यादव और अन्य कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। आरोप था कि इन्होंने एक रेव पार्टी में सांप और उसके ज़हर का अवैध रूप से इस्तेमाल किया। पुलिस और वन विभाग की संयुक्त जांच के बाद आरोप पत्र दाखिल किया गया, जिसमें यह भी कहा गया कि पार्टी में विदेशी नागरिकों ने भी भाग लिया था और सांप के ज़हर का मनोरंजन के लिए प्रयोग किया गया था।

    Elvish Yadav को Supreme Court से राहत! सांप ज़हर केस पर रोक, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- नहीं चलेगी निचली अदालत की कार्यवाही

    एल्विश यादव की याचिका में क्या कहा गया?

    एल्विश यादव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उनके खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं, वे गलत और आधारहीन हैं। उन्होंने यह दावा किया कि उनके पास से न तो कोई ज़हर, न ही कोई सांप या प्रतिबंधित पदार्थ बरामद हुआ है। वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता का घटना से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है और उन्हें केवल लोकप्रियता के कारण फंसाया जा रहा है। साथ ही यह भी बताया कि एफआईआर दर्ज कराने वाला व्यक्ति अब कोई अधिकृत अधिकारी नहीं है।

    मीडिया में क्यों बना मामला सुर्खियों में?

    एल्विश यादव एक प्रसिद्ध सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और रियलिटी शो विनर रह चुके हैं। उनकी लोकप्रियता को देखते हुए यह मामला मीडिया में खूब उछाला गया। याचिका में भी यह तर्क दिया गया कि एफआईआर में उनका नाम आने के कारण मीडिया और जनता में गलत संदेश गया है, जबकि उनके खिलाफ ठोस सबूत नहीं हैं।

    अगली सुनवाई तक राहत, लेकिन जांच जारी

    हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाई है, लेकिन यह स्थायी राहत नहीं है। अभी मामले की सुनवाई जारी रहेगी। कोर्ट ने दोनों पक्षों से जवाब मांगा है, और अगली सुनवाई के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल एल्विश यादव को कानूनन थोड़ी राहत मिली है, लेकिन उनके लिए यह मामला पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है।

  • Jyoti Malhotra case में नया मोड़, पिता बोले- बेटी को फंसाया, पुलिस ने मनमानी स्टेटमेंट लिखी

    Jyoti Malhotra case में नया मोड़, पिता बोले- बेटी को फंसाया, पुलिस ने मनमानी स्टेटमेंट लिखी

    Jyoti Malhotra case: पाकिस्तान के लिए भारत की जासूसी के आरोपों में गिरफ्तार हिसार की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा के पिता ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तथा हरियाणा के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने अपनी बेटी को बेगुनाह बताते हुए पुलिस की कार्रवाई पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। इस चिट्ठी में उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस ने ज्योति से कोरे कागजों पर दस्तखत कराकर खुद ही उसकी स्टेटमेंट लिखी, जो कि पूरी तरह से असंवैधानिक है। उन्होंने दर्ज FIR को तुरंत रद्द करने और बेटी को न्याय दिलाने की मांग की है।

    ज्योति मल्होत्रा के पिता का आरोप है कि पुलिस ने पूछताछ के दौरान ज्योति से कई कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराए और बाद में अपनी सुविधा के अनुसार खुद ही स्टेटमेंट लिख दी। उनका कहना है कि यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20 का उल्लंघन है, जो किसी भी व्यक्ति को अपने खिलाफ गवाह बनने से बचाता है। पिता का दावा है कि इस मामले में ज्योति को ही उसके खिलाफ गवाह बनाया गया है, जो इस एफआईआर को असंवैधानिक बनाता है।

    पुलिस ने ज्योति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 जोड़ी है, जो देशद्रोह से संबंधित है। पिता का कहना है कि 9 दिन के रिमांड के बावजूद पुलिस इस धारा से संबंधित एक भी सबूत नहीं जुटा पाई है। जब कोई सबूत ही नहीं है, तो इस धारा को तुरंत हटा दिया जाना चाहिए।

    पिता ने हिसार के पुलिस अधीक्षक (एसपी) द्वारा मीडिया में जारी किए गए लिखित प्रेस नोट का हवाला दिया है। एसपी ने स्पष्ट किया था कि जांच के दौरान ज्योति की किसी भी संवेदनशील, सैन्य या रणनीतिक जानकारी तक पहुंच नहीं मिली है। पिता का तर्क है कि जब ऐसा कोई सबूत ही नहीं मिला, तो आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की धाराएं भी उनकी बेटी के खिलाफ उचित नहीं हैं।

    Jyoti Malhotra case में नया मोड़, पिता बोले- बेटी को फंसाया, पुलिस ने मनमानी स्टेटमेंट लिखी

    उन्होंने कहा कि ज्योति ने बतौर ट्रैवल ब्लॉगर पाकिस्तान यात्रा के जो वीडियो बनाए हैं, वे सामान्य ब्लॉग की तरह ही हैं। फिर भी, यदि कोई भी जांच एजेंसी किसी वीडियो को हटाने के लिए कहती है, तो वह खुद गारंटी लेते हैं कि उनकी बेटी उसे तुरंत अपने ब्लॉग से हटा देगी।

    पिता ने भावुक होते हुए कहा कि उनकी बेटी अब अपनी पूरी जिंदगी में कभी पाकिस्तान नहीं जाएगी और ना ही इसके बारे में सोचेगी। उन्होंने अपील की है कि उनकी बेटी के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को रद्द कर दिया जाए, ताकि उन्हें और उनकी बेटी को न्याय मिल सके। उनका कहना है कि इस झूठी एफआईआर ने उनकी बेटी और उनके परिवार की जिंदगी बर्बाद कर दी है, जिससे उबरना बहुत मुश्किल है।

    यह पूरा मामला तब सामने आया जब केंद्रीय एजेंसियों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ एयर स्ट्राइक के बाद देश में संदिग्ध गतिविधियों पर नज़र रखना शुरू किया। 8 मई को पंजाब के मालेरकोटला से गजाला खातून को पाकिस्तान के लिए जासूसी के शक में पकड़ा गया। गजाला ने पूछताछ में बताया कि वह पाकिस्तानी दूतावास के अधिकारी दानिश से लगातार संपर्क में थी।

    एजेंसियों ने दानिश को ट्रैक करना शुरू किया, तभी सामने आया कि हिसार की यूट्यूबर ज्योति भी दानिश के संपर्क में थी। इसके बाद केंद्रीय एजेंसियों की नजरें ज्योति पर गईं और 15 मई को उसे उसके घर से गिरफ्तार कर लिया गया।

    इस बीच पुलिस ने दावा किया है कि ज्योति मल्होत्रा के मोबाइल और लैपटॉप से डिलीट किया गया डेटा रिकवर कर लिया गया है और इसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। हालांकि, पुलिस ने इस डेटा में क्या मिला, इसका खुलासा नहीं किया है। सूत्रों के अनुसार पुलिस को पाक एजेंट अली हसन नामक व्यक्ति से ज्योति की चैटिंग मिली है, जिसका इस्तेमाल यह साबित करने के लिए किया जा सकता है कि आईएसआई एजेंटों ने ज्योति के वीडियो का फायदा उठाया।

    हालांकि, हिसार के एसपी शशांक कुमार सावन ने भी पहले यह कह चुके हैं कि ज्योति का आतंकवादियों से सीधा संपर्क नहीं मिला है। इतना जरूर है कि वह पाक ऑपरेटिव के संपर्क में थी, लेकिन उसकी गहराई की जांच की जा रही है।

  • Banke Bihari Corridor dispute: सुप्रीम कोर्ट ने सुझाया मध्यस्थता का रास्ता! सरकार की जल्दबाजी पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

    Banke Bihari Corridor dispute: सुप्रीम कोर्ट ने सुझाया मध्यस्थता का रास्ता! सरकार की जल्दबाजी पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

    Banke Bihari Corridor dispute: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बांके बिहारी मंदिर से जुड़े कॉरिडोर विवाद में सुनवाई करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण विश्व के पहले मध्यस्थ थे। उन्होंने कौरवों और पांडवों के बीच शांति स्थापना की कोशिश की थी। इसी आधार पर अदालत ने मंदिर विवाद में भी आपसी बातचीत से समाधान निकालने का सुझाव दिया है। कोर्ट का कहना है कि अगर मंदिर ट्रस्ट और सरकार आपसी बातचीत से हल निकाल लें तो यह सबसे अच्छा रास्ता होगा।

    500 करोड़ की योजना और ट्रस्ट का विरोध

    उत्तर प्रदेश सरकार ने बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर के निर्माण के लिए 500 करोड़ रुपये मंदिर के फंड से खर्च करने का निर्णय लिया है। इसके लिए एक अध्यादेश भी लाया गया है लेकिन मंदिर प्रशासन इसका विरोध कर रहा है। ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर के फंड का इस तरह उपयोग नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि यह श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला है। सरकार और ट्रस्ट के बीच इसी मुद्दे को लेकर टकराव जारी है।

    Banke Bihari Corridor dispute: सुप्रीम कोर्ट ने सुझाया मध्यस्थता का रास्ता! सरकार की जल्दबाजी पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

    सुप्रीम कोर्ट ने पुराने आदेश पर जताई आपत्ति

    सुप्रीम कोर्ट ने 15 मई को दिए गए अपने आदेश को भी अस्थायी रूप से वापस लेने की बात कही जिसमें मंदिर के फंड के उपयोग की अनुमति दी गई थी। बेंच ने कहा कि पहले हाईकोर्ट को अध्यादेश की संवैधानिक वैधता की जांच करनी चाहिए थी। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि इतनी जल्दी में फैसला क्यों लिया गया। यह मामला गंभीर है और इससे जुड़ी भावनाएं बहुत गहरी हैं।

    पूर्व न्यायाधीशों की कमेटी करेगी मध्यस्थता

    सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया है कि इस विवाद को सुलझाने के लिए हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और वरिष्ठ रिटायर्ड जिला जज मिलकर मध्यस्थता करें। कोर्ट ने कहा कि जब तक अध्यादेश पर अंतिम निर्णय नहीं होता तब तक यही समिति मंदिर के मामलों की देखरेख करेगी। इस समिति को फंड के सीमित उपयोग की इजाजत होगी ताकि मंदिर की दैनिक गतिविधियां प्रभावित न हों।

    सरकार को नोटिस और ट्रस्ट को खुली चुनौती

    अदालत ने स्पष्ट किया कि मंदिर ट्रस्ट को यह अधिकार है कि वह अध्यादेश को अदालत में चुनौती दे। ट्रस्ट यह भी मांग कर सकता है कि मंदिर से जुड़े सभी निर्णय वही लेगा और प्रबंधन भी उसके हाथ में रहेगा। यूपी सरकार की ओर से पेश हुए वकील केएम नटराज ने मंगलवार तक जवाब देने की बात कही है। अब देखना यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट के मध्यस्थता के सुझाव से यह विवाद खत्म होगा या फिर कानूनी लड़ाई और लंबी चलेगी।

  • Mumbai Serial Train Blast: क्या 2006 के गुनहगार फिर होंगे सलाखों के पीछे? सुप्रीम कोर्ट में चलेगी नई लड़ाई

    Mumbai Serial Train Blast: क्या 2006 के गुनहगार फिर होंगे सलाखों के पीछे? सुप्रीम कोर्ट में चलेगी नई लड़ाई

    Mumbai Serial Train Blast: 11 जुलाई 2006 को मुंबई में हुए सीरियल ट्रेन ब्लास्ट ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। लोकल ट्रेनों में हुए इन धमाकों में 189 लोगों की जान गई और 800 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस मामले में लंबे समय तक जांच और कोर्ट में सुनवाई चली। लेकिन हाल ही में बंबई हाईकोर्ट ने इस केस के 12 आरोपियों को सबूतों की कमी और उचित प्रक्रिया की कमी के आधार पर बरी कर दिया था।

    महाराष्ट्र सरकार ने लिया बड़ा फैसला

    हाईकोर्ट के इस फैसले से कई पीड़ित परिवारों और आम नागरिकों में नाराज़गी देखने को मिली। इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि जांच एजेंसियों ने जिन सबूतों को इकट्ठा किया था और जिन तथ्यों को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया था, उन्हें नज़रअंदाज़ कर देना न्याय के खिलाफ है। सरकार की तरफ से यह भी कहा गया कि आतंकवाद जैसे गंभीर मामलों में कठोरता बरतना ज़रूरी है।

    Mumbai Serial Train Blast: क्या 2006 के गुनहगार फिर होंगे सलाखों के पीछे? सुप्रीम कोर्ट में चलेगी नई लड़ाई

    सुप्रीम कोर्ट में क्या होगी रणनीति

    सरकार की ओर से दायर याचिका में यह तर्क दिया गया है कि उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटने में जल्दबाजी की है। ट्रायल कोर्ट ने इन 12 आरोपियों को दोषी करार दिया था और सज़ा भी सुनाई थी। अब सरकार सुप्रीम कोर्ट से आग्रह करेगी कि हाईकोर्ट के फैसले को रद्द किया जाए और ट्रायल कोर्ट का निर्णय बहाल किया जाए। इसके लिए सबूतों की दोबारा जांच और गवाही के बारीकी से विश्लेषण की मांग की जा सकती है।

    पीड़ित परिवारों की उम्मीदें जागी

    इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के फैसले से उन परिवारों को थोड़ी राहत मिली है जिन्होंने अपने करीबियों को इस दर्दनाक हादसे में खोया था। इन परिवारों का कहना है कि अगर दोषी आज़ाद घूम रहे हैं तो न्याय अधूरा है। सुप्रीम कोर्ट में दोबारा सुनवाई से उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है। कई सामाजिक संगठन भी इस मुद्दे पर सरकार के साथ खड़े हैं।

    यह सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं

    मुंबई ट्रेन ब्लास्ट न केवल एक आतंकवादी हमला था बल्कि यह उस दौर की सुरक्षा व्यवस्था और एजेंसियों की चुनौती भी था। यह केस सिर्फ 12 लोगों के खिलाफ नहीं बल्कि उस पूरे नेटवर्क के खिलाफ है जो भारत की शांति को भंग करना चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली यह सुनवाई सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और न्याय व्यवस्था की मजबूती का भी प्रतीक बनेगी।