दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई है। हाई कोर्ट ने कहा कि सरकार आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल (AFT) के फैसले के खिलाफ अपील करती है। AFT सैनिकों को पेंशन देने का आदेश देता है और सरकार उन्हें पेंशन देने की बजाए हाईकोर्ट आ जाती है। बेंच ने कहा कि सरकार को कुछ मामलों में AFT के फैसले को मान लेना चाहिए। हर बार मुकदमा करना ठीक बात नहीं है।
यह बात जस्टिस सी हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने कही। बेंच ने केंद्र सरकार की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने AFT के एक आदेश को चुनौती दी थी। बेंच ने कहा कि हर छोटे-मोटे विवाद अदालत में नहीं ले जाना चाहिए। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद केंद्र सरकार द्वारा AFT की फैसलों के खिलाफ कोर्ट में जाने की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।

मेजर संजीव चड्ढा 25 साल पहले बाथरूम में मृत पाए गए थे। उनकी मौत ब्रेन हेमरेज के कारण हुई थी। संजीव चड्ढा को हाई ब्लड प्रेशर की वजह से यह ब्रेन हैमरेज हुआ था। आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल की दिल्ली बेंच ने मेजर संजीव चड्ढा की विधवा को स्पेशल फैमिली पेंशन देने का आदेश दिया था।
AFT ने 3 नवंबर 2023 को संजीव चड्ढा के पत्नी के पक्ष में फैसला दिया था। ट्रिब्यूनल ने कहा था कि अधिकारियों को पेंशन देने से इनकार करने के लिए मशीनी या तकनीकी रवैया नहीं अपनाना चाहिए। केंद्र सरकार का कहना था कि मेजर चड्ढा की मौत सर्विस के कारण नहीं हुई थी और इसलिए केंद्र ने मेजर की पत्नी को पेंशन का हकदार नहीं माना।
मेजर संजीव चड्ढा की पत्नी के वकील चैतन्य अग्रवाल ने बताया कि मेजर चड्ढा जून 1988 में सेना में भर्ती हुए थे। 3 सितंबर 2000 को नई दिल्ली में उनका निधन हो गया था। उनकी मौत का कारण दिमाग में खून का रिसाव बताया गया था। वकील ने कहा कि मेजर चड्ढा न तो शराब पीते थे न ही कोई और नशा करते थे। उनके परिवार में भी किसी को हाई ब्लड प्रेशर नहीं था। उन्होंने तनावपूर्ण परिस्थितियों में नौकरी की, जिससे उन्हें बीपी की प्रॉब्लम हुई।
केंद्र सरकार ने दावा किया कि मेजर संजीव चड्ढा को सेना की सर्विस जॉइन करते समय हाई ब्लड प्रेशर था। हाई कोर्ट ने केंद्र की यह दलील खारिज कर दी। हाई कोर्ट ने कहा कि 12 साल तक वर्दी पहनने के बाद उनकी ब्रेन हेमरेज से मौत हुई। हमने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देखी है। रिपोर्ट में सिर्फ इतना लिखा है कि मेजर संजीव चड्ढा की मौत ICH से हुई है, कोई और कारण नहीं बताया गया है। हाईकोर्ट ने AFT के फैसले को सही ठहराया।

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