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  • Abhay Chautala बोले- किसान हितैषी सत्यपाल मलिक का अपमान, भाजपा ने दिखाई ओछी मानसिकता

    Abhay Chautala बोले- किसान हितैषी सत्यपाल मलिक का अपमान, भाजपा ने दिखाई ओछी मानसिकता

    इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी Abhay Chautala ने पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के अंतिम संस्कार में भाजपा सरकार द्वारा राजकीय सम्मान न देने को कड़ी आलोचना का विषय बताया है। उन्होंने कहा कि यह न केवल एक संवैधानिक पद पर रहे व्यक्ति का अपमान है, बल्कि समाज के उस वर्ग का भी अपमान है जिससे मलिक ताल्लुक रखते थे — यानी किसान वर्ग। अभय चौटाला ने इस फैसले को ओछी राजनीति और किसान विरोधी मानसिकता की उपज करार दिया।

    सत्यपाल मलिक को किसानों का समर्थन देना पड़ा महंगा

    Abhay Chautala ने कहा कि सत्यपाल मलिक ने अपने कार्यकाल के दौरान किसानों के हितों की खुलकर वकालत की थी, खासकर तब जब केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानून लागू किए थे। उन्होंने आंदोलनरत किसानों के पक्ष में निर्भीक बयान दिए और भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों पर सवाल उठाए थे। चौटाला ने स्पष्ट तौर पर कहा कि उन्हें राजकीय सम्मान न देना उसी समर्थन की ‘सजा’ है जो उन्होंने किसानों को दी थी। यह फैसला उन सभी लोगों को संदेश देने की कोशिश है जो सरकार के खिलाफ बोलते हैं या किसान हितों की पैरवी करते हैं।

    Abhay Chautala बोले- किसान हितैषी सत्यपाल मलिक का अपमान, भाजपा ने दिखाई ओछी मानसिकता

    लोकतंत्र के खिलाफ है यह सोच

    अभय सिंह चौटाला ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर यह दिखाना चाहती है कि किसी भी विरोधी स्वर को दबाया जाएगा। उन्होंने कहा, “यह रवैया लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। सरकार के इस कदम ने यह साफ कर दिया है कि जो भी किसान हित की बात करेगा, उसे या तो अनदेखा किया जाएगा या अपमानित किया जाएगा।” उन्होंने कहा कि यह सिर्फ सत्यपाल मलिक का नहीं, हर उस किसान का अपमान है जिसने अपने हक के लिए संघर्ष किया।

    जनता का प्रेम ही सच्ची श्रद्धांजलि

    अभय चौटाला ने कहा कि सत्यपाल मलिक को न दिए गए राजकीय सम्मान से उनकी जनप्रियता और उनके विचारों की ताकत कम नहीं होती। उन्होंने कहा कि जनता का बेशुमार प्यार, किसानों का आशीर्वाद और संघर्षशील सोच ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने देश के किसानों, युवाओं और जागरूक नागरिकों से अपील की कि वे इस ओछी मानसिकता का लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण जवाब दें। अब समय आ गया है जब देश को यह दिखाना होगा कि वह अपने सच्चे जननायकों को इज्जत और सम्मान देना जानता है, चाहे सत्ता में बैठी ताकतें उन्हें न पहचानें।

  • Haryana Politics: ममता बनर्जी की चेतावनी और नायब सिंह की पलटवार ने बढ़ाया बांग्लादेशी विवाद का तापमान

    Haryana Politics: ममता बनर्जी की चेतावनी और नायब सिंह की पलटवार ने बढ़ाया बांग्लादेशी विवाद का तापमान

    Haryana Politics: हरियाणा में बांग्लादेशियों की धरपकड़ को लेकर चल रहे अभियान में अब राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। तृणमूल कांग्रेस में बांग्लादेशी को पश्चिम बंगाल का नागरिक बता रही है जबकि हरियाणा सरकार इन्हें बांग्लादेशी करार देकर इन्हें निर्वासित करने की बात कर रही है।

    प्रदेशभर में अवैध तरीके से रहने वाले बांग्लादेशियों की धरपकड़ चल रही है। अभी तक छह माह में तकरीबन 200 बांग्लादेशियों को पकड़ा गया है। प्रदेश में इन्हें पकड़ने के बाद दिल्ली में बने शरणार्थी स्थलों पर पहुंचाया जा रहा है, जहां से केंद्र सरकार की टीम इनके सत्यापन सहित आगे की कार्रवाई कर रही है। गुरुग्राम में बीते शुक्रवार को पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से रह रहे आठ बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। इन लोगों के पास से कुछ भारतीय और बांग्लादेशी पहचान पत्र बरामद हुए हैं। इन्हें निर्वासित किया जाएगा। पुलिस ने बताया कि अवैध आप्रवासियों की पहचान करने के अभियान के तहत, पुलिस घरेलू कामगारों, रेहड़ी-पटरी वालों, किरायेदारों तथा झुग्गी-झोपड़ियों और निर्माण स्थलों पर रहने वाले लोगों की पहचान कर जांच कर रही है। इसी क्रम में पुलिस ने इन आठ बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा है।

    Haryana Politics: ममता बनर्जी की चेतावनी और नायब सिंह की पलटवार ने बढ़ाया बांग्लादेशी विवाद का तापमान

    गुरुग्राम में अवैध रूप से रह रहे बंग्लादेशियों को पकड़ने के लिए चलाए जा रहे अभियान को लेकर सियासी बवाल मच रहा है। इस मामले में पहले बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एंट्री की तो उसके बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने करारा जवाब दिया।

    मुख्यमंत्री सैनी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि हरियाणा में बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए कोई स्थान नहीं है, उन्हें जल्द से जल्द प्रदेश से बाहर निकाला जा रहा है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी का देश की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले लोगों के प्रति सहानुभूति दिखाना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि राष्ट्रीय हितों के खिलाफ भी है। सीएम ने आगे लिखा कि यह अत्यंत निंदनीय है कि एक मुख्यमंत्री तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति के चलते एस हद तक गिर जाएं कि वह देश की सुरक्षा तक के समझौता करने लगे। भारत की एकता, संप्रभुता और संविधान के खिलाफ कोई भी समझौता हरियाणा में स्वीकार नहीं है। हमारे लिए देश का हित सर्वोपरि है और हमेशा रहेगा।

    दो दिन पूर्व ममता बनर्जी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट में लिखा कि हरियाणा के गुरुग्राम में पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों से हमारे बंगाली भाषी लोगों को हिरासत में लिए जाने और उन पर अत्याचार की लगातार खबरें मिल रही हैं। पश्चिम बंगाल पुलिस को हरियाणा पुलिस से पहचान पत्र तलाशी के अनुरोध के नाम पर ये खबरें मिल रही है। राजस्थान जैसे अन्य राज्यों में भी लगातार इस तरह की खबरें मिल रही हैं। हमारे अधिकारियों को उनके उचित दस्तावेजों की प्रतियां मिल गई हैं।

  • Parliament Monsoon Session: संसद परिसर में बिहार वोटर वेरिफिकेशन को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन! गांधी से मकर द्वार तक उठा सवाल

    Parliament Monsoon Session: संसद परिसर में बिहार वोटर वेरिफिकेशन को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन! गांधी से मकर द्वार तक उठा सवाल

    Parliament Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र के पांचवें दिन विपक्षी दलों ने बिहार वोटर वेरिफिकेशन मुद्दे पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन की शुरुआत संसद परिसर स्थित गांधी प्रतिमा से हुई जहां पर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत अन्य विपक्षी सांसदों ने हाथों में पोस्टर लेकर मार्च शुरू किया। विरोध मार्च मकर द्वार तक पहुंचा जो नए संसद भवन का मुख्य प्रवेश द्वार है। यह पदयात्रा विपक्ष की एकजुटता और चुनावी अधिकारों को लेकर चिंता को दर्शाती है।

    SIR पोस्टर फाड़कर जताया विरोध

    मकर द्वार पर पहुंचते ही विपक्षी सांसदों ने ‘SIR’ यानी स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया। उन्होंने पोस्टर फाड़े और प्रतीकात्मक तौर पर उन्हें डस्टबिन में डाल दिया। इसके साथ ही “मोदी सरकार हाय-हाय” के नारे लगाए गए जिससे माहौल गरमा गया। विपक्ष का आरोप है कि SIR के नाम पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। यह प्रदर्शन सरकार की मंशा पर सवाल उठाता है।

    Parliament Monsoon Session: संसद परिसर में बिहार वोटर वेरिफिकेशन को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन! गांधी से मकर द्वार तक उठा सवाल

    लोकसभा में हंगामा और कार्यवाही स्थगित

    इस प्रदर्शन की गूंज संसद के भीतर भी सुनाई दी। लोकसभा में विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के चलते कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। सदन के भीतर विपक्ष के सांसदों ने बिहार में वोटर डेटा से छेड़छाड़ और गरीबों के मताधिकार को लेकर चिंता जताई। कई सांसदों ने सरकार से इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की लेकिन स्पीकर के इनकार के बाद हंगामा और तेज हो गया।

    खड़गे का तीखा हमला

    राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र गरीबों को उनके मतदान अधिकार से वंचित करना चाहता है और केवल अमीरों को वोट देने की छूट देना चाहता है। खड़गे ने यह भी कहा कि सरकार संविधान का उल्लंघन कर रही है। उन्होंने SIR को लोकतंत्र के खिलाफ बताया और इस कानून को तत्काल रद्द करने की मांग की।

    चुनावी पारदर्शिता पर उठे सवाल

    इस पूरे घटनाक्रम से चुनावी पारदर्शिता को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई है। विपक्ष का दावा है कि बिहार में हुए वोटर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण और संविधान विरोधी है। वहीं सरकार की तरफ से अब तक इस मुद्दे पर कोई विस्तृत बयान नहीं आया है। प्रदर्शन और संसद के हंगामे से यह साफ है कि SIR को लेकर आने वाले दिनों में सियासी टकराव और तेज हो सकता है।