Parliament Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र के पांचवें दिन विपक्षी दलों ने बिहार वोटर वेरिफिकेशन मुद्दे पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन की शुरुआत संसद परिसर स्थित गांधी प्रतिमा से हुई जहां पर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत अन्य विपक्षी सांसदों ने हाथों में पोस्टर लेकर मार्च शुरू किया। विरोध मार्च मकर द्वार तक पहुंचा जो नए संसद भवन का मुख्य प्रवेश द्वार है। यह पदयात्रा विपक्ष की एकजुटता और चुनावी अधिकारों को लेकर चिंता को दर्शाती है।
SIR पोस्टर फाड़कर जताया विरोध
मकर द्वार पर पहुंचते ही विपक्षी सांसदों ने ‘SIR’ यानी स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया। उन्होंने पोस्टर फाड़े और प्रतीकात्मक तौर पर उन्हें डस्टबिन में डाल दिया। इसके साथ ही “मोदी सरकार हाय-हाय” के नारे लगाए गए जिससे माहौल गरमा गया। विपक्ष का आरोप है कि SIR के नाम पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। यह प्रदर्शन सरकार की मंशा पर सवाल उठाता है।

लोकसभा में हंगामा और कार्यवाही स्थगित
इस प्रदर्शन की गूंज संसद के भीतर भी सुनाई दी। लोकसभा में विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के चलते कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। सदन के भीतर विपक्ष के सांसदों ने बिहार में वोटर डेटा से छेड़छाड़ और गरीबों के मताधिकार को लेकर चिंता जताई। कई सांसदों ने सरकार से इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की लेकिन स्पीकर के इनकार के बाद हंगामा और तेज हो गया।
खड़गे का तीखा हमला
राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र गरीबों को उनके मतदान अधिकार से वंचित करना चाहता है और केवल अमीरों को वोट देने की छूट देना चाहता है। खड़गे ने यह भी कहा कि सरकार संविधान का उल्लंघन कर रही है। उन्होंने SIR को लोकतंत्र के खिलाफ बताया और इस कानून को तत्काल रद्द करने की मांग की।
चुनावी पारदर्शिता पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम से चुनावी पारदर्शिता को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई है। विपक्ष का दावा है कि बिहार में हुए वोटर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण और संविधान विरोधी है। वहीं सरकार की तरफ से अब तक इस मुद्दे पर कोई विस्तृत बयान नहीं आया है। प्रदर्शन और संसद के हंगामे से यह साफ है कि SIR को लेकर आने वाले दिनों में सियासी टकराव और तेज हो सकता है।

Leave a Reply