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  • बिहार में मतदाता सूची विवाद, अमित मालवीय ने राहुल गांधी की वोटर यात्रा को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया

    बिहार में मतदाता सूची विवाद, अमित मालवीय ने राहुल गांधी की वोटर यात्रा को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया

    बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखी टिप्पणी की। वरिष्ठ भाजपा नेता और IT सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उन्होंने मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के संबंध में एक भी शिकायत या आपत्ति नहीं दर्ज की। उन्होंने राहुल गांधी की ‘Voter Rights Yatra’ को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया और इसे “वोट चोरी” का झूठा प्रचार करार दिया।

    अमित मालवीय का आरोप

    अमित मालवीय ने X पर लिखा कि चुनाव आयोग ने बिहार में SIR प्रक्रिया पूरी की और अंतिम मतदाता सूची जारी की। यह ध्यान देने योग्य है कि कांग्रेस ने एक भी शिकायत या आपत्ति नहीं की। उन्होंने राहुल गांधी के दौरे को अवैध प्रवासियों की रक्षा और जनता को गुमराह करने की कोशिश बताया। मालवीय ने कहा कि यह रणनीति सीधे जॉर्ज सोरोस की किताब से ली गई है, जिससे कांग्रेस की हार को छुपाने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों के विश्वास को कमजोर करने की साजिश की जा रही है।

    बिहार में मतदाता सूची विवाद, अमित मालवीय ने राहुल गांधी की वोटर यात्रा को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया

    कांग्रेस का विरोध

    बिहार कांग्रेस प्रमुख राजेश राम ने SIR प्रक्रिया को शुरू से ही धोखाधड़ी बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया न तो जनता की मांग पर हुई थी और न ही राजनीतिक पार्टियों की। इसके बावजूद इसे लापरवाही और अस्पष्टता के साथ किया गया। उन्होंने कहा कि इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं और उनके कार्यकर्ता पूरे राज्य में जांच करेंगे कि कितने नाम हटाए या जोड़े गए। राजेश राम ने स्पष्ट किया कि यह मामला यहीं खत्म नहीं होगा।

    4.7 लाख मतदाताओं की हटाई गई सूची

    मुख्य निर्वाचन आयुक्त ग्यानेश कुमार ने अंतिम मतदाता सूची जारी होने पर मतदाताओं, राजनीतिक पार्टियों और अन्य हितधारकों का धन्यवाद किया। अंतिम सूची में कुल 7.42 करोड़ मतदाता हैं, जबकि 24 जून को यह संख्या 7.89 करोड़ थी। इसका मतलब है कि लगभग 47 लाख मतदाता सूची से हटाए गए। वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने इस पर सवाल उठाते हुए लिखा कि ये 47 लाख मतदाता कौन हैं। चुनाव आयोग को स्पष्ट करना चाहिए कि इनमें से कितने अन्य राज्यों में चले गए, कितने मृत हैं और कितने नकली मतदाता हैं।

    पारदर्शिता और लोकतंत्र का मुद्दा

    इस विवाद ने बिहार में लोकतांत्रिक प्रक्रिया और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा ने कांग्रेस की आलोचना की तो कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र में धांधली बताया। मतदाता सूची में बदलाव, लाखों मतदाताओं के हटाए जाने और आरोप-प्रत्यारोप ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। अब जनता और मीडिया इस पर ध्यान दे रहे हैं कि चुनाव आयोग इस मुद्दे को किस तरह संभालेगा और अपनी विश्वसनीयता को कैसे बनाए रखेगा।

  • चुनाव आयोग ने किया विशेष गहन सूची (SIR) की तैयारी का आदेश, 30 सितंबर तक सभी राज्य रहें तैयार

    चुनाव आयोग ने किया विशेष गहन सूची (SIR) की तैयारी का आदेश, 30 सितंबर तक सभी राज्य रहें तैयार

    चुनाव आयोग ने सभी राज्य निर्वाचन अधिकारियों को विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) के लिए 30 सितंबर तक तैयार रहने का निर्देश दिया है। इस निर्देश का मतलब है कि आगामी महीनों में देशभर में मतदाता सत्यापन और मतदाता सूची सुधार की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। अधिकारियों के अनुसार, अक्टूबर या नवंबर से ही यह मतदाता सूची की सफाई का काम शुरू किया जा सकता है।

    राज्य CEO को मिले सख्त निर्देश

    अधिकारियों ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) की एक बैठक में उच्च चुनाव आयोग अधिकारियों ने उन्हें अगले 10 से 15 दिनों में SIR के लिए तैयार रहने के लिए कहा था। स्पष्टता के लिए 30 सितंबर की अंतिम तारीख तय की गई। सभी CEOs को अपने-अपने राज्यों की मतदाता सूचियों को तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

    चुनाव आयोग ने किया विशेष गहन सूची (SIR) की तैयारी का आदेश, 30 सितंबर तक सभी राज्य रहें तैयार

    वेबसाइट पर उपलब्ध मतदाता सूचियाँ

    राज्य CEOs ने पहले के SIR के बाद प्रकाशित मतदाता सूचियों को अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया है। दिल्ली CEO की वेबसाइट पर 2008 की मतदाता सूची उपलब्ध है, जब राष्ट्रीय राजधानी में आखिरी बार व्यापक संशोधन हुआ था। वहीं उत्तराखंड में अंतिम SIR 2006 में हुआ था और उस वर्ष की मतदाता सूची अब राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर देखी जा सकती है।

    बिहार के बाद पूरे देश में SIR

    अधिकांश राज्यों में अंतिम SIR 2002 से 2004 के बीच हुई थी। वर्तमान मतदाताओं का मिलान पिछली व्यापक संशोधन सूचियों के आधार पर लगभग पूरा हो चुका है। चुनाव आयोग ने कहा है कि बिहार के बाद पूरे देश में SIR आयोजित किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य विदेशी अवैध प्रवासियों को पहचान कर उनकी पहचान सूची से हटाना है।

    अगले साल इन राज्यों में चुनाव

    2026 में असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस गहन संशोधन का मुख्य उद्देश्य विदेशी अवैध प्रवासियों को बाहर करना है और उनके जन्मस्थान की पुष्टि करना है। यह कदम विभिन्न राज्यों में विदेशी अवैध प्रवासियों पर सख्ती के प्रयासों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर बांग्लादेश और म्यांमार से जुड़े मामलों में।

  • Haryana News: हरियाणा में शुरू होने जा रहा SIR का बड़ा अभियान – मतदाता सूची होगी पूरी तरह अपडेट

    Haryana News: हरियाणा में शुरू होने जा रहा SIR का बड़ा अभियान – मतदाता सूची होगी पूरी तरह अपडेट

    Haryana News: बिहार में मतदाता सूचियों के SIR पर मचे घमासान के बीच अब हरियाणा में भी SIR का काम शुरू होने जा रहा है। वर्ष 2002 के बाद मतदाता बने सभी लोगों को अपनी पहचान के सबूत देने होंगे। नई मतदाता सूची के लिए वर्तमान मतदाता सूची का वर्ष 2002 की मतदाता सूची से मिलान किया जाएगा।अगर मतदाता का नाम दोनों मतदाता सूचियों में पंजीकृत हुआ तो उसे कोई दस्तावेज देने की आवश्यकता नहीं होगी। जो लोग अपने दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाएंगे उन्हें फर्जी मतदाता करार देकर उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे।

    हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए श्रीनिवास ने SIR के संबंध में सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिया है। SIR से संबंधित सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। श्रीनिवास ने बताया कि भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा 10 सितंबर को सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई थी। इसमें पूरे देश में विशेष विस्तृत पुनरीक्षण SIR को लागू करने के निर्देश दिए गए थे।

    Haryana News: हरियाणा में शुरू होने जा रहा SIR का बड़ा अभियान – मतदाता सूची होगी पूरी तरह अपडेट

    इसी क्रम में प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन व निर्वाचक पंजीयन अधिकारियों के साथ बैठक की। जहां बीएलओ के पद खाली हैं, वहां जल्द नियुक्ति कर उनके पहचान पत्र जारी किए जाएंगे। नए सिरे से बनने वाली मतदाता सूची के कार्य में कोई बाधा उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। सभी बीएलओ 20 अक्टूबर तक हरियाणा की वर्तमान मतदाता सूची का वर्ष 2002 वाली मतदाता सूची से मिलान करेंगे। यदि मतदाता का नाम दोनों सूचियों में पंजीकृत होगा तो उन्हें कोई भी दस्तावेज देने की आवश्यकता नहीं होगी। बीएलओ नई मतदाता सूची के लिए गणना फार्म हर मतदाता के घर जाकर भरवाएगा। मतदाता को फार्म की दो कापी दी जाएगी। इसमें से एक कापी मतदाता और दूसरी कापी बीएलओ नई मतदाता सूची बनाने के लिए साथ ले जाएगा। मतदान केंद्र पर मतदाताओं की अधिकतम संख्या 1200 के आधार पर रेशनलाइजेशन किया जायेगा। यदि 1200 से ज्यादा मतदाता हैं तो नया मतदान केंद्र बनाया जाएगा।

    सीईओ ने कहा कि जिला स्तर पर सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ समय-समय पर बैठकें आयोजित की जाएं तथा सभी से बूथ लेवल एजेंट की सूची प्राप्त की जाए। गणना प्रपत्र की प्रिंटिंग कर बीएलओ को समय पर उपलब्ध करवाना है।

    वर्ष 2002 तथा वर्ष 2024 की अंतिम रूप में प्रकाशित मतदाता सूचियां विभाग की वेबसाइट पर आम जनता की सुविधा के लिए उपलब्ध हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राज्य के सभी पंजीकृत मतदाताओं और युवाओं, जोकि मतदाता बनने के पात्र हैं तथा सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से अपील की है कि राज्य की त्रुटि रहित मतदाता सूची तैयार करने के लिए किए जा रहे विशेष विस्तृत पुनरीक्षण में सहयोग दें।

  • Parliament Monsoon Session: संसद परिसर में बिहार वोटर वेरिफिकेशन को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन! गांधी से मकर द्वार तक उठा सवाल

    Parliament Monsoon Session: संसद परिसर में बिहार वोटर वेरिफिकेशन को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन! गांधी से मकर द्वार तक उठा सवाल

    Parliament Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र के पांचवें दिन विपक्षी दलों ने बिहार वोटर वेरिफिकेशन मुद्दे पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन की शुरुआत संसद परिसर स्थित गांधी प्रतिमा से हुई जहां पर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत अन्य विपक्षी सांसदों ने हाथों में पोस्टर लेकर मार्च शुरू किया। विरोध मार्च मकर द्वार तक पहुंचा जो नए संसद भवन का मुख्य प्रवेश द्वार है। यह पदयात्रा विपक्ष की एकजुटता और चुनावी अधिकारों को लेकर चिंता को दर्शाती है।

    SIR पोस्टर फाड़कर जताया विरोध

    मकर द्वार पर पहुंचते ही विपक्षी सांसदों ने ‘SIR’ यानी स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया। उन्होंने पोस्टर फाड़े और प्रतीकात्मक तौर पर उन्हें डस्टबिन में डाल दिया। इसके साथ ही “मोदी सरकार हाय-हाय” के नारे लगाए गए जिससे माहौल गरमा गया। विपक्ष का आरोप है कि SIR के नाम पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। यह प्रदर्शन सरकार की मंशा पर सवाल उठाता है।

    Parliament Monsoon Session: संसद परिसर में बिहार वोटर वेरिफिकेशन को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन! गांधी से मकर द्वार तक उठा सवाल

    लोकसभा में हंगामा और कार्यवाही स्थगित

    इस प्रदर्शन की गूंज संसद के भीतर भी सुनाई दी। लोकसभा में विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के चलते कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। सदन के भीतर विपक्ष के सांसदों ने बिहार में वोटर डेटा से छेड़छाड़ और गरीबों के मताधिकार को लेकर चिंता जताई। कई सांसदों ने सरकार से इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की लेकिन स्पीकर के इनकार के बाद हंगामा और तेज हो गया।

    खड़गे का तीखा हमला

    राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र गरीबों को उनके मतदान अधिकार से वंचित करना चाहता है और केवल अमीरों को वोट देने की छूट देना चाहता है। खड़गे ने यह भी कहा कि सरकार संविधान का उल्लंघन कर रही है। उन्होंने SIR को लोकतंत्र के खिलाफ बताया और इस कानून को तत्काल रद्द करने की मांग की।

    चुनावी पारदर्शिता पर उठे सवाल

    इस पूरे घटनाक्रम से चुनावी पारदर्शिता को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई है। विपक्ष का दावा है कि बिहार में हुए वोटर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण और संविधान विरोधी है। वहीं सरकार की तरफ से अब तक इस मुद्दे पर कोई विस्तृत बयान नहीं आया है। प्रदर्शन और संसद के हंगामे से यह साफ है कि SIR को लेकर आने वाले दिनों में सियासी टकराव और तेज हो सकता है।