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  • प्रदीप गिल ने INLD में की घर वापसी, रोहतक-जींद में पार्टी की स्थिति मजबूत बनाने की तैयारी शुरू

    प्रदीप गिल ने INLD में की घर वापसी, रोहतक-जींद में पार्टी की स्थिति मजबूत बनाने की तैयारी शुरू

    हरियाणा की सियासत में एक बार फिर हलचल मच गई है। कांग्रेस के पूर्व नेता और जींद विधानसभा से निर्दलीय उम्मीदवार रह चुके प्रदीप गिल, जो लंबे समय तक INLD में युवा प्रदेशाध्यक्ष के रूप में सक्रिय रहे, आज अपनी मूल पार्टी में वापसी कर रहे हैं। यह “घर वापसी” रोहतक की नई अनाज मंडी में ताऊ देवीलाल की 112वीं जयंती समारोह के दौरान हुई।

    प्रदीप गिल की वापसी से इनैलो को जींद और रोहतक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी। हरियाणा में 2029 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर यह आयोजन एक सियासी शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। रोहतक, जो हमेशा से जाट और किसान वोट बैंक का गढ़ रहा है, में इनैलो का यह कदम कांग्रेस और बीजेपी के लिए चुनौती पेश कर सकता है।

    प्रदीप गिल ने INLD में की घर वापसी, रोहतक-जींद में पार्टी की स्थिति मजबूत बनाने की तैयारी शुरू

    प्रदीप गिल ने इनैलो में युवा प्रदेशाध्यक्ष के रूप में लंबे समय तक काम किया और किसान-केंद्रित मुद्दों को युवाओं तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में जींद सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ताल ठोकी। हालांकि, वे जीत हासिल नहीं कर सके, लेकिन स्थानीय स्तर पर उनकी सक्रियता ने उन्हें चर्चा में रखा। अब उनकी INLD में वापसी को पार्टी की रणनीति के तहत एक अहम कदम माना जा रहा है।

    प्रदीप गिल को राजनीति में ऐसे व्यक्ति के रूप में जाना जाता है जो राजनीतिक लाभ के लिए पार्टी नहीं बदलता है। जब हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार थी तब प्रदीप गिल की पत्नी अनीता गिल जिला परिषद की सदस्य बनी थी। हरियाणा में कांग्रेस सरकार ने जिला परिषद में अपना अध्यक्ष बनने के लिए पार्षदों को अपने पक्ष में कर रही थी। तब प्रदीप गिल को प्रदेश सरकार ने बड़े राजनीतिक पद का ऑफर भी किया था लेकिन प्रदीप गिल ने उसे स्वीकार नहीं किया था। जब तक उनकी पत्नी जिला पार्षद रही तब तक वह इनेलो में ही बने रहे। बाद में वह कांग्रेस में गए और टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और 8000 वोट हासिल किए।

    हाल ही में रोहतक से बलवान सिंह सुहाग (पूर्व जजपा उपाध्यक्ष) और उनके परिवार की इनैलो में वापसी के बाद प्रदीप गिल का यह कदम पार्टी के लिए और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। जिस रास्ते पर इस समय इनेलो चल रही है, उसे हरियाणा की राजनीति में आने वाले समय में बड़ी हलचल देखने को मिलेगी।

  • कुलदीप बिश्नोई ने राजनीति से एक साल के विराम के बाद जनहित दिवस पर दिखाई अपनी ताकत, लोगों की उम्मीदें बढ़ीं

    कुलदीप बिश्नोई ने राजनीति से एक साल के विराम के बाद जनहित दिवस पर दिखाई अपनी ताकत, लोगों की उम्मीदें बढ़ीं

    भिवानी एवं हिसार से सांसद रहे वरिष्ठ भाजपा नेता कुलदीप बिश्नोई अपने अभेद किले को खोने और करीब 1 साल राजनीति से दूर रहने के बाद एक बार फिर राजनीति में सक्रिय हो रहे हैं। ‌कुलदीप बिश्नोई के जन्मदिन के अवसर पर 22 सितंबर को सुबह आदमपुर मंडी में ‘जनहित दिवस समारोह’ आयोजित किया जाएगा। इस समारोह से बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री वितरित की जाएगी और रवाना की जाएगी। यह कार्य कुलदीप बिश्नोई के समर्थकों और ‘भजन ग्लोबल इंपेक्ट फाउंडेशन’ की तरफ से किया जाएगा।

    हरियाणा में करीब एक साल बाद बिश्नोई परिवार फिर राजनीतिक सक्रियता बढ़ा रहा है। ताकत दिखाने के लिए इस बार पूर्व सीएम भजनलाल की जयंती (6 अक्टूबर) की बजाय कुलदीप बिश्नोई के जन्मदिन 22 सितंबर का मौका चुना है। इस दिन हिसार के आदमपुर में पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल की पुरानी आढ़त की दुकान के सामने जनहित दिवस समारोह रखा गया है। कांग्रेस से नाराज होने के बाद भजनलाल ने ‘जनहित’ शब्द को लेकर ही साल 2007 में हरियाणा जनहित कांग्रेस बनाई थी, जिसका बाद में कांग्रेस में विलय कर दिया गया था। कुलदीप बिश्नोई 2022 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। हालांकि, लोकसभा चुनाव के बाद से भाजपा की कुछ बैठकों से उनकी दूरी की खबरें भी आईं। यह कार्यक्रम पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल की विरासत को याद करने और परिवार की राजनीतिक पकड़ को फिर से मजबूत करने की एक कोशिश मानी जा रही है।

    कुलदीप बिश्नोई ने राजनीति से एक साल के विराम के बाद जनहित दिवस पर दिखाई अपनी ताकत, लोगों की उम्मीदें बढ़ीं

    2024 के विधानसभा चुनाव में भव्य बिश्नोई की हार के बाद, भजनलाल परिवार की आदमपुर सीट पर लगातार 16 जीत का सिलसिला टूट गया था। यह कार्यक्रम शक्ति प्रदर्शन का जरिया हो सकता है, जहां कुलदीप बिश्नोई के राजनीतिक भविष्य पर चर्चा हो सकती है।

    कुलदीप बिश्नोई ने हमेशा जनता के हितों की लड़ाई लड़ी इसलिए जनहित दिवस

    आदमपुर के पूर्व विधायक एवं भाजपा के युवा नेता भव्य बिश्नोई ने बताया कि चौधरी कुलदीप बिश्नोई ने सदैव जनता के हितों की राजनीति की है। उनकी राजनीति बेदाग, साफ-सुथरी और संघर्षपूर्ण रही है। इसलिए कार्यकर्ताओं ने उनके जन्मदिन को ‘जनहित दिवस समारोह’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि हरियाणा सहित राजस्थान, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में कुलदीप बिश्नोई के जन्मदिन पर साथी सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करेंगे। भव्य बिश्नोई ने बताया कि राज्य में भारी बारिश से जलभराव होने के चलते किसानों एवं आम जानमानस को परेशानी का सामना करना पड़ा है। कुलदीप बिश्नोई के जन्मदिवस समारोह को सादगीपूर्ण ढंग से आयोजित किया जाएगा। समारोह को सादगीपूर्ण ढंग से आयोजित किया जाएगा।

  • 30 करोड़ रुपए के घोटाले में BDPO Pooja Sharma की गिरफ्तारी सिर्फ दिखावटी, पूजा शर्मा को मिली सुविधाजनक पोस्टिंग पर उठे सवाल

    30 करोड़ रुपए के घोटाले में BDPO Pooja Sharma की गिरफ्तारी सिर्फ दिखावटी, पूजा शर्मा को मिली सुविधाजनक पोस्टिंग पर उठे सवाल

    BDPO Pooja Sharma: पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने आज 30 करोड़ रुपए के घोटाले को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उनका कहना था कि यह बड़ी हैरानी की बात है कि जिस मामले में वे वर्ष 2021 से लगातार सरकार को पत्राचार कर रहे थे और विधानसभा सत्र में आवाज उठा चुके थे, उसके बावजूद भ्रष्टाचार की जांच में सरकार ने केवल लीपा पोती की कार्रवाई की है।

    नीरज शर्मा ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी पुलिस, विजिलेंस सहित सरकार के हर विभाग को पत्र लिखकर इस मामले की जांच विजिलेंस से करवाने की मांग की थी। बावजूद इसके अब विजिलेंस को जांच सौंप दी गई, लेकिन एडीसी साहब की रिपोर्ट में ब्रह्मपाल, हरिंदर, जोगिंदर, पूजा शर्मा व अन्य के खिलाफ करीब 20 करोड़ रुपए के ऐसे लेनदेन सामने आए हैं, जिनके रिकॉर्ड आज तक गायब हैं।

    30 करोड़ रुपए के घोटाले में BDPO Pooja Sharma की गिरफ्तारी सिर्फ दिखावटी, पूजा शर्मा को मिली सुविधाजनक पोस्टिंग पर उठे सवाल

    पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने सवाल उठाया कि वर्तमान सरकार नोटबंदी की वजह से एक साल में 2 लाख से ज्यादा का लेनदेन नहीं होने की बात कहती है, तो ऐसे में कोरोना संकट के समय, जब आमजन जीने के लिए संघर्ष कर रहे थे, यह लोग आपदा को अवसर बनाकर करोड़ों रुपए की लूट में लगे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि 5 साल बाद ऐसे रिकॉर्ड कैसे मिलेंगे और जनता का हड़प लिया गया 30 करोड़ रुपए किस प्रकार वसूल किए जाएंगे।

    नीरज शर्मा ने सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले में दोषियों के खिलाफ एडीसी रिपोर्ट व संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर तत्काल कार्रवाई की जाए। दोषी अधिकारियों की सम्पत्ति जब्त की जाए और जनता का हक ग्राम पंचायतों के खातों में पुनः डलवाया जाए। साथ ही दोषियों को ऐसी सजा दी जाए, जिससे भविष्य में कोई भी अधिकारी इस प्रकार के भ्रष्टाचार की सोचे भी नहीं।

    पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने यह भी कहा कि बीडीपीओ पूजा शर्मा काफी समय से फरार है, और फरार होने के बावजूद उसे अच्छी पोस्टिंग दी गई है। इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि किन नेताओं की सिफारिश पर यह सुविधा दी गई थी।

  • Vice President election India: सुदर्शन रेड्डी का लालू यादव से मुलाकात, BJP ने कहा- देश की आत्मा बचाने का दिखावा कर रहे

    Vice President election India: सुदर्शन रेड्डी का लालू यादव से मुलाकात, BJP ने कहा- देश की आत्मा बचाने का दिखावा कर रहे

    Vice President election India: देश में उपराष्ट्रपति के चुनाव का महत्व हमेशा ही हाई प्रोफाइल रहता है। इस बार यह चुनाव मंगलवार, 9 सितंबर को होने वाला है। इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्षी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी पर हमला किया है। बीजेपी नेता रवि शंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बी. सुदर्शन रेड्डी विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी न्यायाधीशों का सम्मान करते हैं, लेकिन जब कोई न्यायाधीश चुनावी मैदान में आकर बड़े-बड़े बयान देता है तो सवाल उठते हैं। उन्होंने बताया कि रेड्डी देश की आत्मा बचाने के लिए वोट की बात कर रहे हैं, जबकि वे लालू यादव से मुलाकात कर रहे हैं।

    लालू यादव से मुलाकात को लेकर बीजेपी का सवाल

    रवि शंकर प्रसाद ने लालू प्रसाद यादव के खिलाफ चल रहे मामलों का जिक्र करते हुए कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आप किस तरह के न्यायाधीश हैं, जो भ्रष्टाचार में दोषी पाए गए व्यक्ति से मुलाकात कर रहे हैं। लालू यादव फोडर घोटाले में सजा पाए हैं और रेल संपत्ति बेचने के मामले में भी उनके खिलाफ चार्जशीट है। ऐसे में किसी भी न्यायाधीश का लालू यादव से मिलकर देश की आत्मा की बात करना पूरी तरह दिखावा है। रवि शंकर प्रसाद ने बी. सुदर्शन रेड्डी और उनके समर्थन करने वाले न्यायाधीशों को भी आड़े हाथों लिया।

    सुदर्शन रेड्डी का लालू यादव से मुलाकात, BJP ने कहा- देश की आत्मा बचाने का दिखावा कर रहे

    देश की आत्मा बचाने की बात पर बीजेपी का हमला

    बीजेपी नेता ने कहा कि हम पार्टी के मंच से यह दिखाने आए हैं कि यह केवल दिखावा है। किसी भी न्यायाधीश को देश की आत्मा बचाने या किसी की अंतरात्मा की बात करने का अधिकार नहीं बनता। उन्होंने कहा कि बी. सुदर्शन रेड्डी के बयान पूरी तरह से नकली हैं और यह पद की गरिमा को ठेस पहुंचा सकता है। रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि ऐसे बयान देने वाले न्यायाधीश देश के लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था की गरिमा के लिए सही उदाहरण नहीं हैं।

    उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया और तारीख

    देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई की शाम को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनकी अवधि 10 अगस्त 2027 तक थी। इस कारण से उपराष्ट्रपति चुनाव करवाया जा रहा है। चुनाव प्रक्रिया मंगलवार, 9 सितंबर को सुबह 10 बजे शुरू होगी और परिणाम शाम 6 बजे घोषित किए जाएंगे। इस चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य वोट डालते हैं। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए एनडीए के उम्मीदवार की जीत लगभग सुनिश्चित मानी जा रही है क्योंकि उनके पास संसद में बहुमत है।

    एनडीए की जीत की संभावना और राजनीतिक माहौल

    भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, उनका उम्मीदवार आसानी से चुनाव जीत सकता है। विपक्ष के उम्मीदवार पर बीजेपी के हमले और लालू यादव से मुलाकात को लेकर उठाए गए सवालों ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। चुनाव से पहले यह बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा बन गए हैं। देश की जनता और संसद सदस्य इस चुनाव में संविधान और लोकतंत्र की गरिमा को ध्यान में रखकर मतदान करेंगे। उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 का यह मुकाबला न सिर्फ पद के लिए, बल्कि राजनीतिक संदेश देने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • Manesar Municipal Corporation Election: मेयर चुनाव में मिली हार का बदला चुकाने के लिए राव नरबीर कुछ भी करने को तैयार!  सियासी घमासान में फंसी भाजपा की अंदरूनी जंग

    Manesar Municipal Corporation Election: मेयर चुनाव में मिली हार का बदला चुकाने के लिए राव नरबीर कुछ भी करने को तैयार! सियासी घमासान में फंसी भाजपा की अंदरूनी जंग

    Manesar Municipal Corporation Election: गुरुग्राम के मानेसर नगर निगम में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव 5 अगस्त को होना है। तीन दिन बाद होने वाले चुनाव के लिए मानेसर निगम कमिश्नर आयुष सिन्हा इस संबंध में आदेश जारी कर चुके हैं। आज और कल को चुनाव की तैयारी की जाएगी। इसलिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के हेडक्वार्टर छोड़ने पर रोक लगा दी गई है। मानेसर नगर निगम के कमिश्नर आयुष सिन्हा ने इसकी पुष्टि की। अधिकारियों ने तैयारी शुरू कर दी है। चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराए जाएंगे।

    सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव को लेकर भाजपा में भी बड़ा सियासी खेल शुरू हो गया है। यहां से 12 पार्षदों को नेपाल के काठमांडू भेज दिया गया है। इनके साथ भाजपा का एक रणनीतिकार भी है। माना जा रहा है कि इसके पीछे केंद्रीय राज्यमंत्री और गुरुग्राम से सांसद राव इंद्रजीत को झटका देने की कोशिश की जा रही है। पार्षदों को काठमांडू भेजने के पीछे प्रदेश की भाजपा सरकार के ही मंत्री राव नरबीर को माना जा रहा है। हालांकि इस मामले में कोई खुलकर कुछ नहीं कह रहा है।

    इसी साल मार्च महीने में प्रदेश में 10 नगर निगमों के मेयर और पार्षदों का चुनाव हुआ था। भाजपा ने 9 निगमों में मेयर का चुनाव जीता लेकिन मानेसर नगर निगम के पहले ही चुनाव में हार गई। यहां से निर्दलीय डॉ. इंद्रजीत कौर मेयर चुन ली गईं। उन्होंने चुनाव में खुलकर कहा कि वह केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत की करीबी हैं।

    Manesar Municipal Corporation Election: मेयर चुनाव में मिली हार का बदला चुकाने के लिए राव नरबीर कुछ भी करने को तैयार!  सियासी घमासान में फंसी भाजपा की अंदरूनी जंग

    20 पार्षद वाले इस निगम में भाजपा के 7 पार्षद जीते थे। मानेसर निगम से मेयर चुनाव हारने का सबसे बड़ा झटका प्रदेश सरकार में मंत्री राव नरबीर को लगा। उन्होंने भाजपा के मेयर उम्मीदवार सुंदर लाल के लिए खूब प्रचार भी किया था। हालांकि मेयर पद गंवाने के बाद नरबीर ने सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद पर अपने समर्थक पार्षदों को बिठाने की रणनीति तेज कर दी। चुनाव के बाद उन्होंने 7 निर्दलीय पार्षदों को अपने साथ मिला लिया। जिसके बाद भाजपा के पास 20 में से 14 पार्षदों का समर्थन हो गया।

    राव नरबीर के इस दांव को देखकर राव इंद्रजीत का खेमा भी एक्टिव हो गया। उन्होंने पार्षदों को राव इंद्रजीत के प्रभाव से बचाने के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी। इसके बाद पिछले महीने 12 पार्षदों को गुवाहाटी और गोवा की सैर कराई। हालांकि पार्षदों का कहना था कि वह अपने मर्जी से घूमने गए हैं। जब वे वापस लौटे तो राव इंद्रजीत खेमा फिर उनसे संपर्क करने लगा। जिसके बाद उन्हें नेपाल भेज दिया गया। राव नरबीर खेमे का दावा है कि 14 पार्षद साथ होने के बाद 2 और पार्षद उनके संपर्क में हैं। उनके लिए भी काठमांडू जाने की एयर टिकट बुक कराई जा रही है। माना जा रहा है कि राव नरबीर चाहते हैं कि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के जरिए वह निगम में दबदबा बनाए रखें।

    8 जुलाई को मानेसर की मेयर इंद्रजीत यादव का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वो हयातपुर में भरी पंचायत में फूट-फूट कर रो रहीं थी। उन्होंने मंत्री राव नरबीर पर गंभीर आरोप लगाए थे। मेयर ने आरोप लगाया कि मारपीट की एक एफआईआर में जानबूझ उनके पति राकेश यादव का नाम लिखवा दिया, जबकि वो मौके पर मौजूद भी नहीं थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार के दबाव में पुलिस उनके पति को परेशान कर रही है।

    राव इंद्रजीत और राव नरबीर, दोनों अहीरवाल क्षेत्र के बड़े नेता हैं। नरबीर को राव इंद्रजीत का धुर विरोधी माना जाता है। 2019 के विधानसभा चुनाव में राव नरबीर की टिकट भी कट गई थी। जिसके पीछे राव इंद्रजीत को ही माना गया। हालांकि 2024 के चुनाव में राव नरबीर सीधे दिल्ली गए और अमित शाह से मिलकर टिकट ले आए। इसके बाद बादशाहपुर से चुनाव जीते।

    भाजपा ने अहीरवाल बेल्ट में पावर बैलेंस रखने के लिए नरबीर को मंत्री भी बना दिया। वहीं राव इंद्रजीत का अहीरवाल में दबदबा है। वह गुरुग्राम से 6 बार सांसद हैं। पार्टी बदलने के बावजूद वह चुनाव जीतते आ रहे हैं। इसके अलावा वह लगातार केंद्र की मोदी सरकार में तीसरी बार केंद्रीय राज्य मंत्री बने हैं।

  • Haryana News: आरती राव के बयान से हरियाणा की राजनीति में हलचल! क्या राव परिवार है हरियाणा में भाजपा की असली ताकत

    Haryana News: आरती राव के बयान से हरियाणा की राजनीति में हलचल! क्या राव परिवार है हरियाणा में भाजपा की असली ताकत

    Haryana News: आरती राव जो कि केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की बेटी और स्वास्थ्य मंत्री हैं उन्होंने कोसली में एक जनसभा के दौरान कहा कि हरियाणा में भाजपा की सरकार बनना किसी के लिए कल्पना से परे था लेकिन उन्होंने और उनके परिवार ने यह सोच बनाई और हवा दी जिससे भाजपा की सरकार बनी। उनके इस दावे से राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि वे सिर्फ सरकार का हिस्सा नहीं बल्कि उसकी मुख्य कड़ी मानी जा रही हैं।

    जनता से सीधी बातचीत और खुले दरवाजे की बात

    आरती राव ने अपने भाषण में कहा कि सरकार उनकी है और अगर किसी को कोई काम हो तो रामपुरा में दफ्तर चलता है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि अब चंडीगढ़ और दिल्ली में भी उनके ऑफिस हैं और रेवाड़ी और डहीना में भी काम हो रहा है। यह बात उन्होंने इस अंदाज में कही जिससे ये साफ हो गया कि वे क्षेत्र की जनता को बताना चाह रही थीं कि उनके काम के लिए अब कई रास्ते खुले हैं और वे हर स्तर पर सक्रिय हैं।

    Haryana News: आरती राव के बयान से हरियाणा की राजनीति में हलचल! क्या राव परिवार है हरियाणा में भाजपा की असली ताकत

    पारिवारिक राजनीति की नई रणनीति

    इस बयान से पहले उनके पिता राव इंद्रजीत सिंह भी लगातार अपने राजनीतिक प्रभाव का प्रदर्शन करते रहे हैं। उन्होंने एक रैली में सीएम नायब सैनी को यह कहकर साफ संकेत दिया था कि अगर हमने सरकार बनाई है तो हमारे काम प्राथमिकता में होने चाहिए। ऐसे बयानों से यह साफ है कि राव परिवार प्रदेश की सत्ता में अपनी हिस्सेदारी को मजबूती से जताना चाहता है और यह कोशिश लगातार हो रही है।

    डिनर डिप्लोमेसी से बनी नई चर्चा

    राव इंद्रजीत ने हाल ही में चंडीगढ़ में अपनी बेटी आरती राव के घर पर दक्षिण हरियाणा के 12 विधायकों को डिनर पर बुलाया था। इस ‘डिनर डिप्लोमेसी’ को राजनीतिक हलकों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसे एक बड़ी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है जहां वे यह दिखाना चाहते हैं कि उनके पास विधायकों का समर्थन है और भविष्य की राजनीति में उनकी स्थिति मजबूत है।

    भाजपा के भीतर उठते अंतर्विरोध के संकेत

    आरती राव और उनके पिता के बयान यह संकेत भी देते हैं कि भाजपा के भीतर क्षेत्रीय नेताओं के बीच प्रभाव को लेकर खींचतान जारी है। एक तरफ मुख्यमंत्री विकास का समान वादा करते हैं तो दूसरी तरफ राव परिवार अपने प्रभाव और योगदान को लेकर स्पष्ट रूप से बयान देता है। यह स्थिति भविष्य में पार्टी के भीतर गुटबाजी या दबाव की राजनीति को जन्म दे सकती है।

  • Haryana News: हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों पर गिरी गाज, इस नियम का उल्लंघन किया तो जाएगी नौकरी

    Haryana News: हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों पर गिरी गाज, इस नियम का उल्लंघन किया तो जाएगी नौकरी

    Haryana News: हरियाणा सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ा आदेश जारी किया है जिससे कई अधिकारियों की नौकरी पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग (Health Department) ने इस संबंध में सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि कोई भी अधिकारी अगर अपने पद का उपयोग राजनीतिक दबाव (Political Influence) बनाने के लिए करता है तो उसे बर्खास्त (Termination) किया जा सकता है।

    इस आदेश को लेकर हेल्थ डायरेक्टर ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को पत्र भेजा है जिसमें स्पष्ट किया गया है कि इस नियम का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    स्वास्थ्य विभाग का सख्त रुख

    राज्य सरकार की तरफ से जारी इस आदेश का मुख्य उद्देश्य सरकारी तंत्र को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है। स्वास्थ्य विभाग के निदेशक ने कहा कि हरियाणा सिविल सेवा नियम 2016 के तहत कोई भी अधिकारी या कर्मचारी अपनी सेवा से जुड़े मामलों में अपने हितों को बढ़ाने के लिए राजनीतिक प्रभाव डालने की कोशिश करता है तो यह नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। नियम 26 के तहत किसी भी कर्मचारी को अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए राजनीति का सहारा नहीं लेना चाहिए। जो भी अधिकारी इस नियम का पालन नहीं करेगा उसकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है।

    नए आदेश से क्यों बढ़ी चिंता?

    हरियाणा में यह पहला मौका नहीं है जब सरकारी कर्मचारियों को लेकर इतने सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। इससे पहले भी सरकार ने कई बार कर्मचारियों को चेतावनी दी थी कि वे अपने पदों का गलत उपयोग न करें। लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग ने इसे लेकर एक ठोस कदम उठाया है और स्पष्ट कर दिया है कि अब सिफारिशों (Recommendations) का दौर खत्म हो चुका है।

    इस नए आदेश से उन अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है जो अपने राजनीतिक संबंधों के जरिए मनचाही पोस्टिंग (Posting) हासिल करने की कोशिश करते थे। खासकर डिस्ट्रिक्ट हेल्थ ऑफिसर (DHO) पीएनडीटी एक्ट (PNDT Act) के तहत गठित टीमें सैंपलिंग टीम (Sampling Team) और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर राजनीतिक दबाव से की जाने वाली नियुक्तियों पर अब रोक लगेगी।

    क्या है इस पत्र का उद्देश्य?

    यह पत्र किस विशेष उद्देश्य से लिखा गया है यह अब तक स्पष्ट नहीं हुआ है। लेकिन सूत्रों की मानें तो इसका सीधा संबंध स्वास्थ्य विभाग के अंदर बढ़ते राजनीतिक दबाव से है। हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव जो केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह की बेटी हैं इस विभाग की प्रमुख हैं। इससे पहले यह मंत्रालय डॉ. कमल गुप्ता और अनिल विज के पास था।

    स्वास्थ्य विभाग के उच्च पदों पर अक्सर राजनीतिक सिफारिशों के चलते नियुक्तियां होती रही हैं जिससे योग्य उम्मीदवारों को नुकसान उठाना पड़ता था। अब नए निर्देशों के तहत इन सिफारिशों को पूरी तरह समाप्त करने की तैयारी की जा रही है।

    राजनीतिक प्रभाव डालने पर होगी कड़ी कार्रवाई

    हरियाणा सरकार का मानना है कि सरकारी तंत्र को निष्पक्ष बनाना जरूरी है ताकि आम जनता को सही तरीके से सुविधाएं मिल सकें। सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि कोई अधिकारी राजनीतिक दबाव डालने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

    सरकारी विभागों में सिफारिशों का खेल

    सरकारी विभागों में राजनीतिक सिफारिशों का खेल नया नहीं है। खासकर स्वास्थ्य विभाग में यह एक आम बात बन चुकी थी कि अधिकारी अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर मनचाही पोस्टिंग हासिल कर लेते थे। अब हेल्थ डायरेक्टर ने इस पर नकेल कसने के लिए सीधे सीएमओ को पत्र भेजकर आगाह कर दिया है।

    स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार यह पत्र इसलिए जारी किया गया है ताकि भविष्य में कोई भी कर्मचारी या अधिकारी अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल न कर सके। इससे विभाग के कार्यों में पारदर्शिता आएगी और योग्य उम्मीदवारों को उनका हक मिल सकेगा।