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  • इस दिन किया जाएगा रेवाड़ी खंड की ग्राम पंचायतों व पंचायत समिति के वार्ड का आरक्षण

    इस दिन किया जाएगा रेवाड़ी खंड की ग्राम पंचायतों व पंचायत समिति के वार्ड का आरक्षण

    हरियाणा पंचायती राज निर्वाचन नियमावली 1994 के नियम 5 में किए गए प्रावधान के अनुसार रेवाड़ी खंड की ग्राम पंचायतों व पंचायत समिति के वार्ड में से अनुसूचित जाति, (महिलाओं सहित) पिछड़ा वर्ग-(क), महिला व महिलाओं सहित वार्ड का आरक्षण 17 जून को जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) एवं डीसी अशोक कुमार गर्ग के मार्गदर्शन में जिला सचिवालय स्थित एसडीएम न्यायालय कमरा नंबर 124 में किया जाएगा।

     

     

    यह जानकारी एसडीएम रेवाड़ी सिद्धार्थ दहिया ने दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि 17 जून को प्रात: 11 बजे पंचायत समिति तथा दोपहर 12 बजे ग्राम पंचायतों के वार्ड का आरक्षण किया जाएगा। उन्होंने वार्ड आरक्षण से संबंधित विभागों के विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए कि उक्त बैठक में निर्धारित तिथि व समय पर पहुंचना सुनिश्चित करें।

  • किसानों को मिल रहा तीन लाख रुपए तक का ऋण, पढ़े विस्तार से

    किसानों को मिल रहा तीन लाख रुपए तक का ऋण, पढ़े विस्तार से

    डीसी ने बताया कि पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत किसान अपने पशुओं की देखभाल के लिए होने वाले खर्च हेतु पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ऋण प्राप्त कर सकता है। कोई भी पशुपालक एक लाख 60 हजार रुपए तक की राशि की लिमिट तक का पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड बिना कोई जमीन गिरवी रखे व बिना किसी गारंटी के कोलैटरल सुरक्षा बनवा सकता है। यदि कोई पशुपालक इस राशि से अधिक लिमिट का पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड बनवाना चाहता है तो उसे अपनी जमीन या कोई जमानत देना अनिवार्य होगा।

    पशुपालकों को ऋण का केवल 4 प्रतिशत के हिसाब से करना होगा भुगतान :

    डीसी ने बताया कि पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड धारक को सालाना 7 प्रतिशत साधारण ब्याज दर पर बैंक द्वारा ऋण दिया जायेगा। यदि कार्डधारक अपने ऋण का समय पर भुगतान करता है तो उसे केंद्र सरकार की तरफ से 3 प्रतिशत ब्याज दर का अनुदान दिया जायेगा तथा उस पशुपालक को यह ऋण केवल 4 प्रतिशत के हिसाब से चुकाना होगा। उन्होंने बताया कि 7 प्रतिशत ब्याज दर के हिसाब से अधिकतम 3 लाख रुपये तक की ऋण राशि पर केंद्र सरकार की ओर से 3 प्रतिशत ब्याज दर का अनुदान दिया जायेगा।

     

    कार्डधारक द्वारा ऋण की राशि जरूरत के अनुसार समय-समय पर ली जा सकती है और सुविधा अनुसार जमा करवाई जा सकती है। कार्ड धारक को ऋण राशि निकलवाने या खर्च करने के एक साल की अवधि के अन्दर किसी भी एक दिन लिये गये ऋण की पूरी राशि को जमा करवाना अनिवार्य ताकि साल में एक बार ऋण की मात्रा शून्य हो जाए।

     

    एक साल तक ऋण वापस जमा न करवाने पर भरना पड़ेगा 12 प्रतिशत सालाना ब्याज :

    डीसी अशोक कुमार गर्ग ने बताया कि यदि किसी पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड धारक द्वारा लिया गया ऋण एक साल की समय अवधि के दौरान वापिस जमा नहीं करवाया जाता है, तो उसे 12 प्रतिशत सालाना ब्याज की दर से ऋण का भुगतान करना होगा। पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड धारक को बाजार में प्रचलित अन्य किसी भी साधारण क्रेडिट, डेबिट कार्ड की भांति किसी भी एटीएम मशीन से राशि निकलवाने या बाजार से खरीदारी करने हेतु प्रमाणित लिमिट अनुसार प्रयोग कर सकता है।

     

    पशुओं की भिन्न-भिन्न श्रेणियों और वित्तीय पैमाने की अवधि के अनुसार ही पशुपालक को पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड द्वारा ऋण दिया जायेगा। इच्छुक पशुपालक अपने नजदीकी राजकीय पशु चिकित्सालय या बैंक में जाकर पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन कर सकते है। आवेदन करने के लिए पशुपालक को अपने सभी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, पशु का बीमा, पशु का हेल्थ सर्टिफिकेट आदि आवेदन पत्र सहित बैंक में जमा करवाना होगा।

  • बुजुर्गों की डांट भविष्य कि सीख देने में काम आती है- राव इंद्रजीत

    बुजुर्गों की डांट भविष्य कि सीख देने में काम आती है- राव इंद्रजीत

    केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने कहा है कि बुजुर्गों के संस्कार है जो आज समाज को एक सूत्र में पिरोए हुए हैं। युवाओं को चाहिए कि वह उनके संस्कारों को अपने जीवन में अपनाएं और उनकी दिखाए रास्ते पर चलें। केंद्रीय मंत्री रविवार को गांव धामलावास में नंबरदार स्वर्गीय सुमेर सिंह की मूर्ति का अनावरण करने के पश्चात सभा को संबोधित कर रहे थे।

     

    इससे पूर्व गांव पहुंचने पर राव का पगड़ी पहनाकर सम्मानित कर उनका जोरदार अभिनंदन किया गया। नंबरदार सुमेर सिंह के पुत्र चेयरमैन दयानंद ने कहा कि हमारा सौभाग्य कि हम पीढ़ी दर पीढ़ी राव परिवार से जुड़े हुए हैं और उनके आदर्श आज भी हमें प्रेरणा देते हैं।

     

    बुजुर्गों की डांट  भविष्य के लिए सीख

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बुजुर्गों की डांट भी भविष्य के लिए हमें सीख देने का काम करती है इसलिए युवाओं को बुजुर्गों की डांट का बुरा नहीं मानना चाहिए। उन्होंने युवाओं को सीख देते हुए कहा कि चाहे कितना भी पैसा हो जाए या कितने ऊंचे पद पर व्यक्ति पहुंच जाए अगर उसके साथ अपने परिवार के बुजुर्गों का आशीर्वाद नहीं है तो उनका जीवन अधूरा रहता है।अपने पुरानी संस्मरणों को याद करते हुए राव ने कहा कि स्वर्गीय सुमेर लंबरदार हमेशा मुझे राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने के लिए तत्पर रहे।

     

    राव ने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए आप लोगों ने जो मुझे जिम्मेदारी दी है जितना संभव हो पा रहा है मैं उसे निभाने का प्रयास कर रहा हूं और आप लोगों को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि मैं कभी भी क्षेत्र के हितों के साथ समझौता नहीं करूंगा और जनता की आवाज बनकर काम करता रहूंगा।

     

    राव ने कहा कि क्षेत्र में एम्स का सपना भी जल्दी पूरा होने जा रहा है और जल्द ही जमीन से संबंधित औपचारिकताओं को पूरा कर लिया जाएगा। राव ने कहा कि  क्षेत्र का विकास हो और यहां के युवाओं को उनका अधिकार मिले इसके लिए निरंतर प्रयासरत है।

  • एम्स निर्माण में देरी , संघर्ष समिति फिर कर रही आन्दोलन की तैयारी

    एम्स निर्माण में देरी , संघर्ष समिति फिर कर रही आन्दोलन की तैयारी

    पिछले दो महीनों से जिला प्रशासन से कह रहा है कि अगले हफ्ते रजिस्ट्री प्रकिया शुरू करा दी जायेगी. लेकिन अभीतक किया कुछ नहीं गया है. आपको बता दें कि वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मनेठी में एम्स बनाने की घोषणा की थी. जिसके बाद स्थानीय लोगों ने एम्स की घोषणा को पूरा करने की मांग को लेकर लोकसभा चुनाव से पहले महीनों तक बड़ा आन्दोलन किया था. मनेठी में एम्स बनाने का रास्ता बिलकुल साफ़ हो गया था. सरकार ने बजट जारी कर टेंडर प्रकिया भी शुरू कर दी थी. लेकिन तभी फारेस्ट एडवायजरी कमेटी ने उक्त जमीन को फारेस्ट की जमीन बता निर्माण पर आपत्ति लगा दी थी.

     

     

    जिसके बाद विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने ग्रामीणों से जमीन मांगकर कहा था कि सरकार की नियत साफ़ है. ग्रामीण जमीन देते है तो वो एम्स का निर्माण करा देंगे. लेकिन अब माजरा गाँव ग्रामीण अपनी सहमती से जमीन देने के लिए महीनों से राजी है. बावजूद इसके अलग कारणों के चलते मामला लटका हुआ है. एस्म बनाओ संघर्ष समिति ने कहा कि राव इन्द्रजीत सिंह और राव नरबीर सिंह की राजनितिक लड़ाई के कारण मनेठी में एम्स नहीं बन पाया और अब भी सरकार की नियत में खोट है इसलिए एम्स निर्माण को लटकाया हुआ है.

     

    सरकार एम्स  मामले को  चुनाव तक खींचना चाहती

    फिलहाल स्थिति ये है कि जिला प्रशासन कह रहा है कि एम्स का नक्शा पास किया जा चूका है. लैटर और इंटेंट जारी किया गया है यानि भू मालिकों के हस्ताक्षर होने के बाद रजिस्ट्री प्रकिया शुरू की जायेगी. जबकि संघर्ष समिति का कहना है की लैटर और इंटेंट की जरूरत ही नहीं है. ग्रामीण अपनी मर्जी से जमीन देने के लिए दस्तावेज ई भूमि पोर्टल पर अपलोड कर चुके है. जब रजिस्ट्री होगी तब भू मालिकों के हस्ताक्षर लिए जा सकते है. जिससे साफ़ है कि सरकार इस मामले को 2024 के चुनाव तक खींचना चाहती है.