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Haryana

मौत की सजा से कम नही कैथल रोड पर धूल व पत्थरों से गुजरना

सत्यखबर निसिंग ( सोहन पोरिया ) – बीते कई वर्षो से बदहाल करनाल कैथल रोड़ का कोई सानी नही है। यदि होता तो कच्चे रास्ते से भी बदतर बनी सडक़ बहुत पहले दुरूस्त कर दी गई होती। सडक़ पर पड़े पत्थरों में दोपहिया वाहन चालक नियंत्रण खोकर जख्मी हो रहे है। सडक़ पर उड़ते धूल […]

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सत्यखबर निसिंग ( सोहन पोरिया ) – बीते कई वर्षो से बदहाल करनाल कैथल रोड़ का कोई सानी नही है। यदि होता तो कच्चे रास्ते से भी बदतर बनी सडक़ बहुत पहले दुरूस्त कर दी गई होती। सडक़ पर पड़े पत्थरों में दोपहिया वाहन चालक नियंत्रण खोकर जख्मी हो रहे है। सडक़ पर उड़ते धूल के गुब्बारों से गुजरना लोगों के लिए सजा ए मौत के समान बना है। उड़ती धूल लोगों की आंखों का नूर छीन रही है। खासकर साईकिल व बाईक सवारों का सडक़ से गुजरना दुश्वार बना है।

बड़े वाहन के पीछे उड़ती धूल में चालकों को कुछ दिखाई नही देने से निरंतर हादसों का अंदेशा रहता है। प्रतिदिन छुटमुट हादसे होते भी रहते है। रात के समय सडक़ पर समस्या ओर अधिक गहरा जाती है। लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारियों की मनमर्जी के चलते सडक़ को दुरूस्त नही किया गया। वाहन चालक सुशील कुमार, बलकार सिंह, राजेश शर्मा, बबलू, काकूराम, शेखर राणा, सुरेश कुमार व महेंद्र सिंह सहित अन्य का कहना था कि कई सालों से वह सडक़ के गहरे गड्डों व उड़तीधूल का दंश झेल रहे है।

जिससे लोगों में दमा व कैंसर पनपने का खतरा बना हुआ है। सडक़ पर उड़ती धूल में आवागमन करने से बाईकसवारों का दम घुटता है। कई माह पहले विभाग की ओर से राईसमिलों के पास सडक़ के गड्डों में पत्थर डाले थे। लेकिन उनपर बजरी तारकोल की लेयर डालना भूल गए है। जिस कारण सडक़ से गुजरना लोगों के लिए किसी चुनौती से कम नही है। उन्होंने प्रशासनिक व विभागीय अधिकारियों से सडक़ को शीघ्र दुरूस्त करने की मांग की है। इस संबंध में विभाग के एक्सईएन दलेल सिंह से संपर्क करने पर उन्होंने फोन रिसीव नही किया।

रास्ता बदलने को मजबूर चालक
वाहन चालक विक्की राणा का कहना था कि बदहाल सडक़ से आवागमन करना आग का दरिया पार करने के समान है। सडक़ से परेशान होकर अधिकत्तर चालकों ने मजबूरन अपना रास्ता बदलना पड़ा। टूटी सडक़ पर कम स्पीड़ में चलने से उनका समय व तेल दोनों अधिक लगते है। वहीं गाडी को भी क्षति पहुंचती है। निसिंग से करनाल आवागमन में वह वाया सांभली से सीतामाई रोड़ वाला रास्ता इस्तेमाल करते है।

हादसे का बना रहता डर
राजेंद्र चौहान का कहना था कि सडक़ पर पड़े पत्थर वाहनों के पहिये के नीचे से फिसलकर हादसों को निमंत्रण दे रहे है। कई बाईक सवारों को पत्थर भी लग चुके है। जगह जगह से टूटी सडक़ कच्चे रास्तों से बदतर बनी है। क्षेत्र के लोग फोरलेन के चक्कर में दो लाईन से भी हाथ धो बैठे। सरकार ने जिम्मेदार अधिकारियों से इस बारें में जबाब तलब करना चाहिए।

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