Jammu-Kashmir-Himachal landslide: सोमवार को जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और भूस्खलन की वजह से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। इन घटनाओं में अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें एक 5 साल का मासूम बच्चा भी शामिल है। रियासी जिले में माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जा रहे तीर्थयात्रियों के रास्ते पर अचानक भूस्खलन हुआ जिससे एक 70 साल के श्रद्धालु की जान चली गई जबकि 9 अन्य घायल हो गए। ये हादसा इतनी तेजी से हुआ कि लोग संभल भी नहीं पाए और मलबे में दब गए।
हिमाचल में चट्टान गिरने से नवविवाहित जोड़े की मौत
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में एक दर्दनाक हादसा सामने आया जब एक नवविवाहित जोड़े के घर पर भारी चट्टान गिर गई। इस घटना में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। लगातार हो रही बारिश के कारण जमीन खिसकने और चट्टानों के गिरने का खतरा लगातार बना हुआ है। राज्य की 401 सड़कों को एहतियातन बंद कर दिया गया है जिससे आम लोगों की आवाजाही ठप हो गई है और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

मध्य प्रदेश में बाघ बह गया बंजर नदी में
बारिश का कहर सिर्फ पहाड़ी इलाकों में ही नहीं बल्कि मध्य भारत तक फैला हुआ है। मध्य प्रदेश के मंडला जिले में स्थित कान्हा टाइगर रिजर्व से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया जहां एक बाघ बाढ़ के पानी में बह गया। बंजर नदी में बाघ को बहते हुए देखा गया जिसे देख वन विभाग में हड़कंप मच गया। जबलपुर सहित 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है और प्रशासन सतर्कता बरतने की अपील कर रहा है।
देश के कई हिस्सों में ऑरेंज अलर्ट जारी
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि मंगलवार को उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा और तेलंगाना में भारी बारिश हो सकती है। इन राज्यों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। बिहार के 27 और राजस्थान के 4 जिलों में भी तेज बारिश की संभावना जताई गई है। इस कारण लोगों को घरों में ही रहने की सलाह दी गई है और प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
फिर बन रहा है कम दबाव का क्षेत्र
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में 24 जुलाई के आसपास एक नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इससे अगले कुछ दिनों में देश के कई राज्यों में फिर से तेज बारिश हो सकती है। इस संभावित स्थिति को देखते हुए राज्य सरकारों को राहत और बचाव के लिए पहले से तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। खासकर पहाड़ी और तटीय इलाकों में सतर्कता बेहद जरूरी हो गई है।

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