चंडीगढ़ 30 अगस्त। सांसद Deepender Hooda ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ की मार और बीजेपी सरकार की कमजोरी से हरियाणा के उद्योगों पर भयंकर चोट पड़ी है। हरियाणा में अमेरिकी टैरिफ हमले से हजारों करोड़ के एक्सपोर्ट आधारित उद्योगों पर तालाबंदी और इनसे जुड़े लाखों कामगारों के रोज़गार पर खतरे के काले बादल मंडरा रहे हैं। अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50 फ़ीसदी का भारी टैरिफ थोपने के बाद न केवल एक्सपोर्ट आधारित उद्यमों के लिए आफ़त खड़ी हो गई है, बल्कि अगले एक साल में ही लाखों लोगों की नौकरी छिन जाने का संकट भी पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि अमरीकी टैरिफ का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव पानीपत के कपड़ा उद्योग पर पड़ेगा।
पानीपत से अमेरिका को हर साल करीब 12000 करोड़ का निर्यात होता है। टैरिफ के बाद लगभग एक तिहाई ऑर्डर अटक गए हैं। अकेले क्रिसमस सीजन पर 1,500 करोड़ का निर्यात होता है। लेकिन अब आगामी क्रिसमस सीजन की तैयारी कर रहे उद्योग को ऑर्डर मिलने की संभावना न के बराबर है। पानीपत, फरीदाबाद, गुरुग्राम, मानेसर प्रमुख गारमेंट और टेक्सटाइल हब हैं, जहां हजारों एक्सपोर्ट यूनिट्स में लाखों लोग काम करते हैं। इसके अलावा टैरिफ का दुष्प्रभाव रोहतक, सोनीपत, हिसार, करनाल, अंबाला, रेवाड़ी के उद्योगों पर भी पड़ा है। दीपेन्द्र हुड्डा ने मांग करी कि अमेरिकी टैरिफ हमले से प्रभावित उद्योगों को विशेष सब्सिडी और कर छूट दी जाए साथ ही निर्यातकों के लिए आपात पैकेज की घोषणा करे सरकार।
सांसद Deepender Hooda ने कहा कि भारत पर लगे अमेरिकी टैरिफ का सीधा फायदा पाकिस्तान, बांग्लादेश, वियतनाम जैसे देशों को होगा। इसी तरह रोहतक की नट-बोल्ट इंडस्ट्री को करीब 4000 करोड़ रुपये, अंबाला के साइंटिफिक इक्विपमेंट्स एक्सपोर्ट को 500-600 करोड़ और करनाल के बासमती एक्सपोर्ट को भी खासा नुकसान उठाना पड़ेगा। हरियाणा की टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट, फुटवियर, ऑटो पार्ट्स, स्टील, इंजीनियरिंग, एग्रीकल्चर, फार्मा समेत अन्य इंडस्ट्री अमेरिकी टैरिफ हमले से बुरी तरह प्रभावित हुई है।

करीब एक तिहाई ऑर्डर रद्द हो चुके हैं। उद्योगों से जुड़े लोगों का कहना है कि नये ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं, पहले के जो ऑर्डर थे वो एक एक करके कैंसिल हो रहे हैं और फैक्ट्री का उत्पादन ठप हो गया है या काफी सीमित हो गया है। उद्योगों का कहना है कि जल्द समाधान नहीं निकला तो कंपनियों में तालाबंदी की नौबत आ जाएगी और बेरोजगारी का भयंकर और विकराल रूप सामने आएगा।
उन्होंने कहा कि देश में ऐसा कोई सेक्टर नहीं है जहां से गिरावट की खबरें लगातार न आ रही हों। अकेले टेक्सटाइल व ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में सबसे बड़ी मंदी की आशंका जताई जा रही है। इससे न केवल हजारों छोटे-मझोले उद्योग संकट में आएंगे, बल्कि लाखों श्रमिकों की आजीविका पर भी खतरा पैदा हो जाएगा। प्रदेश के टेक्सटाइल, गारमेंट, रत्न आभूषण, चमड़ा व जूते चप्पल, पशु उत्पाद, रसायन, वैज्ञानिक उपकरण, स्पोर्ट्स गुड्स, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद से जुड़े व्यापारियों व कामगारों को इस खतरे से बचाने के लिए सरकार कुछ नहीं कर रही है।
दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि सरकार की विफल विदेश व्यापार नीति और कूटनीतिक असफलता के कारण हरियाणा जैसे औद्योगिक राज्य को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। हरियाणा के उद्योग विदेशी बाजार में पूरी तरह से कमज़ोर और असुरक्षित हो गए हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र और राज्य सरकार इस गंभीर संकट पर पूरी तरह चुप हैं। अमेरिका जैसे बड़े बाजार में जब हरियाणा के उद्योगों की प्रतिस्पर्धा क्षमता घटेगी, तो सीधा असर निर्यात घटने, रोजगार कम होने और उत्पादन ठप पड़ने पर होगा। यदि सरकार समय रहते ठोस कदम नहीं उठाती तो आने वाले समय में हरियाणा के औद्योगिक ढांचे को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

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