Rao Narendra: हरियाणा कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। पार्टी दक्षिण हरियाणा से नया प्रदेश अध्यक्ष चुन सकती है। नारनौल के पूर्व मंत्री राव नरेंद्र सिंह को अचानक दिल्ली बुलाया गया है और उन्हें बिहार में होने वाली कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में विशेष आमंत्रण मिला है। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को भी बिहार में होने वाली कांग्रेस कार्य समिति की बैठक का आमंत्रण मिला है। उनके नाम पर नेता प्रतिपक्ष के रूप में मोहर लगने की उम्मीद है। चौंकाने वाली बात यह है कि राव नरेंद्र सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, दोनों ही CWC के सदस्य नहीं हैं, इसके बावजूद उन्हें बैठक में बुलाया गया है। बैठक में हरियाणा से सांसद कुमारी शैलजा और रणदीप सुरजेवाला भी मौजूद रहेंगे।
चर्चा है कि कांग्रेस प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने हुड्डा का नाम CLP लीडर के लिए आगे बढ़ाया है। माना जा रहा है कि इस बैठक में हुड्डा को CLP लीडर और राव नरेंद्र को प्रदेश अध्यक्ष बनाने पर मुहर लग सकती है।
विधानसभा चुनाव को लगभग 10 महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक नेता प्रतिपक्ष का ऐलान नहीं हुआ है। ऐसे में इस बैठक को हरियाणा कांग्रेस के लिए अहम माना जा रहा है।

कौन है राव नरेंद्र सिंह
नारनौल के वरिष्ठ नेता राव नरेंद्र सिंह हरियाणा की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम हैं। वे 3 बार विधायक रह चुके हैं। 1996 और 2000 में अटेली से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे, जबकि 2009 में नारनौल से विधायक बने। इसी कार्यकाल में 2009 से 2014 तक हरियाणा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के रूप में कार्य किया। राव नरेंद्र सिंह ने अपना राजनीतिक सफर हरियाणा जनहित कांग्रेस (HJC) से शुरू किया था और बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए। उनके पिता राव बंसी सिंह भी 3 बार विधायक और राज्य में पंचायत मंत्री रह चुके हैं।
कैसे उभरा नाम
रणदीप सुरजेवाला की भूमिका: दिल्ली से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, राव नरेंद्र सिंह की नजदीकियां हाल के दिनों में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला के साथ बढ़ी हैं। यही वजह है कि उनकी दावेदारी और मजबूत हो गई है। हालांकि इस तरह की भी खबरें हैं कि राव नरेंद्र सिंह की सीधे राहुल गांधी तक भी पहुंच बनी हुई है। खबरें यह हैं कि नेतृत्व ने राव नरेंद्र सिंह के नाम पर लगभग सहमति जता दी है। पार्टी इस बार दक्षिण हरियाणा से और बैकवर्ड क्लास से प्रदेश अध्यक्ष देना चाहती थी ऐसे में कुछ नाम पर चर्चा थी इसी बीच राव नरेंद्र सिंह ने रणदीप सुरजेवाला के माध्यम से अपनी दावेदारी को मजबूत करने का काम किया। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि प्रदेशाध्यक्ष पद पर बैकवार्ड नेता को तवज्जो देकर कांग्रेस चुनावी समीकरण साधना चाहती है। खासतौर से दक्षिण हरियाणा में जहां राव नरेंद्र सिंह का अच्छा प्रभाव माना जाता है।
कार्यकारी अध्यक्षों का फॉर्मूला फिर लागू: सूत्रों की मानें तो कांग्रेस इस बार भी प्रदेशाध्यक्ष के साथ दो से तीन कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का फॉर्मूला लागू कर सकती है। बवानीखेड़ा से कांग्रेस प्रत्याशी रहे प्रदीप नरवाल और तेलूराम जांगड़ा के नाम संभावित कार्यकारी अध्यक्षों की सूची में शामिल हैं। माना जा रहा है कि कार्यकारी अध्यक्षों के साथ पार्टी जातीय संतुलन साधने का काम करेगी।
हुड्डा खेमे की मजबूती
राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा को नेता प्रतिपक्ष बनाकर पार्टी उनके खेमे को भी खुश रखना चाहती है। हुड्डा का नेता प्रतिपक्ष बनना उनके खेमे के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है।

Leave a Reply