सुप्रीम कोर्ट ने 71 वर्षीय महिला के मामले में वकील और पुलिस की कार्रवाई पर दिखाई सख्ती, पढ़ें पूरी कहानी

सुप्रीम कोर्ट ने 71 वर्षीय महिला के मामले में वकील और पुलिस की कार्रवाई पर दिखाई सख्ती, पढ़ें पूरी कहानी

सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को एक पुराने और महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए 71 वर्षीय महिला को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले की कड़ी आलोचना की, जिसमें बिना किसी ठोस वजह के महिला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता, वकील दादुराम शुक्ला के खिलाफ ₹10,000 का जमानती वारंट जारी किया और उन्हें कोर्ट में हाजिरी सुनिश्चित करने के लिए शोकॉज़ नोटिस भेजा।

महिला पर धोखाधड़ी और नकली दस्तावेज का आरोप

इस मामले में वकील के कहने पर महिला के खिलाफ 1971 की भूमि रजिस्ट्री फर्जी बनाने का आरोप लगाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ पुलिस कमिश्नर को महिला की गिरफ्तारी रोकने का आदेश दिया। कोर्ट ने पुलिस के मामले के संचालन पर भी सवाल उठाए और सभी संबंधित दस्तावेज पेश करने को कहा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला कानून का दुरुपयोग प्रतीत होता है और इसे गंभीरता से देखने की आवश्यकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने 71 वर्षीय महिला के मामले में वकील और पुलिस की कार्रवाई पर दिखाई सख्ती, पढ़ें पूरी कहानी

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले की आलोचना

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का 71 वर्षीय महिला की जमानत खारिज करना गलत था। महिला न तो खरीदार, न विक्रेता, न गवाह और न ही लाभार्थी थी। कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को लापरवाह बताया और कहा कि इस पर गंभीर विचार करना आवश्यक है। पुलिस को निर्देश दिया गया कि FIR से संबंधित सभी दस्तावेज पेश करें और बताएं कि क्यों मामले को रोका नहीं जा सकता।

अगली सुनवाई और महिला की स्थिति

इस मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी। महिला ने 26 मई, 2025 को पुलिस के सामने बयान दर्ज कराया था। वकील शुक्ला नोटिस लेने से बच रहे थे, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को गैर-जमानती वारंट जारी करने और उन्हें कोर्ट में लाने का निर्देश दिया। मामला 22 जून, 2023 को गोंडा जिले के कोतवाली नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था।

FIR का विवरण और विवाद

FIR के अनुसार 20 अगस्त, 1971 को नकली भूमि रजिस्ट्री बनाई गई थी और 7 सितंबर, 2020 को इसे रद्द कर दिया गया। FIR में यह भी कहा गया कि महिला मुख्य आरोपी बृजेश कुमार अवस्थी की सास हैं, जो कई नकली दस्तावेज बनाने वाले गिरोह से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला को तत्काल राहत दी और मामले में कानूनी प्रक्रियाओं की पूरी जांच करने का निर्देश दिया।

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