सभी लोगों पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिनियम में भी हुई कार्रवाई, तीन दिन पहले जींद जेल में एक कैदी की हुई थी मौत
सत्य खबर हरियाणा
Case Registered against police officer: जिला पुलिस ने जींद जिला कारागार के दो डीएसपी, दो डॉक्टरों, दो हवलदार और एक कैदी के खिलाफ एक कैदी के साथ मारपीट करने, जाति सूचक गालियां देने और उसे मरने के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज किया है। सिविल लाइन थाना पुलिस ने घटना के तीन दिन बाद मामला दर्ज किया है। बता दें कि 2 अगस्त की रात को जींद जेल में एक कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।

मृतक संदीप वासी लाखन माजरा के पिता वासुदेव ने पुलिस को दी शिकायत में कहां है कि उसके बेटे संदीप के खिलाफ पोक्सो एक्ट का मामला दर्ज था और वह जींद जेल में बंद था। वासुदेव ने कहा कि वह समय-समय पर अपने बेटे से मिलने जेल में आता था। संदीप ने उसे बताया था कि उसे पथरी है और जिसका इलाज पीजीआई रोहतक से चल रहा है। डॉक्टर ने 1 साल से उसे ऑपरेशन के लिए बोला हुआ है लेकिन जेल प्रशासन उसकी गार्द नहीं लगा रहा। वासुदेव का कहना है कि संदीप ने उसे बताया था कि बहुत तेज दर्द होने पर उसे नशे का टीका लगा देते हैं और जो दवाई पीजीआई रोहतक वाले उसे देते हैं वह भी उसे नहीं मिलती। उसने बताया कि जब वह डिप्टी सुपरीटेंडेंट सुरेंद्र और विक्रम गिल, एलओ ईश्वर और एक कैदी गोल्डी को इस बारे में कहता है तो वह उसे जाति सूचक गालियां देकर कहते हैं कि तू किस अपराध में जेल में आया हुआ है और तुझे इलाज भी चाहिए। मृतक संदीप के पिता का आरोप है कि उसके बेटे को उलटा लिटा कर बुरी तरह से पीटा जाता था और वह इतना डरा हुआ था कि वह जोर से रो-रो कर बोलता था कि मुझे बचा लो वरना यह चारों मुझे जान से मार देंगे। मृतक के पिता का कहना है कि 31 जुलाई को संदीप ने जेल के सार्वजनिक फोन से अपनी भाभी मोमिना के पास फोन किया था और उसने इस फोन को रिकॉर्ड कर लिया है जिसमें संदीप ने कहा है कि चारों लोग उसे बहुत ज्यादा प्रताड़ित कर रहे हैं और जान से मारने की धमकी भी दे रहे हैं। मृतक के पिता का कहना है कि उसके बेटे के साथ जिला जेल में अमानवीय व्यवहार किया गया। उसे जाति सूचक गालियां देकर प्रताड़ित किया गया और उसे समय पर सही इलाज नहीं दिया गया। जिस कारण संदीप ने जेल में बाथरूम में जान दे दी।
इस मामले में खास बात यह है कि मृतक संदीप के शव का पोस्टमार्टम 4 अगस्त को खानपुर पीजीआई में हो गया था। लेकिन मृतक के परिवार के लोगों ने तब तक अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया जब तक आरोपी लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। मृतक के परिवार के दबाव में पुलिस ने कल देर रात सिविल लाइन थाना के अंतर्गत सात लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने और अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में डॉक्टरों के नाम नहीं लिखे हैं। दोनों डीएसपी सुरेंद्र और विक्रम गिल, हवलदार ईश्वर और कृष्ण तथा कैदी गोल्डी का नाम लिखा हुआ है।
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