Anurag Dhanda: पूरन कुमार का मामला सिर्फ एक अफसर की मौत नहीं, दलित समाज के सम्मान की लड़ाई है

Satyakhabarindia

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी और वरिष्ठ नेता Anurag Dhanda ने कहा कि हरियाणा कैडर के 2001 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या के छह दिन बीत चुके हैं, लेकिन न तो पोस्टमार्टम हुआ है और न ही अंतिम संस्कार। परिवार अब भी इंसाफ का इंतजार कर रहा है। परिवार ने साफ कहा है कि जब तक डीजीपी शत्रुजीत कपूर को हटाकर गिरफ्तार नहीं किया जाता और सुसाइड नोट में नामजद अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक वह पीछे नहीं हटेंगे। यह देरी न्याय में विश्वास को तोड़ती है।

Anurag Dhanda ने कहा, पूरन कुमार की मौत ने बीजेपी की दलित विरोधी सोच को नंगा कर दिया है। छह दिन में सरकार एक भी ठोस फैसला नहीं ले पाई। वजह साफ है, हरियाणा की बागडोर असली में आज भी पूर्व सीएम और केंद्रीय मंत्री खट्टर के हाथ में है और मुख्यमंत्री कम नायब सिंह सैनी एक ‘डमी सीएम’ से ज़्यादा कुछ नहीं।

उन्होंने कहा कि खट्टर के विदेश दौरे पर होने के कारण सरकार ठप पड़ी है, और नायब सिंह सैनी में इतना भी राजनीतिक साहस नहीं कि एक स्पष्ट फैसला ले सकें। एक दलित अधिकारी की मौत के बाद भी अगर सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है तो इसका सीधा मतलब है, बीजेपी को दलितों की जान और न्याय की कोई परवाह नहीं।

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अनुराग ढांडा ने कहा, कम नायब सिंह सैनी की नाकामी आज साफ दिख रही है। वे न तो डीजीपी को हटाने का साहस दिखा पा रहे हैं और न ही नामजद अधिकारियों पर कार्रवाई कर पा रहे हैं। इससे यह साबित होता है कि प्रदेश में असली सीएम कोई और है और नायब सिंह सिर्फ नाम के सीएम हैं।

ढांडा ने कहा कि यह सिर्फ एक अफसर की आत्महत्या नहीं, बल्कि दलित समुदाय को दिए जा रहे संदेश की तरह है, कि बीजेपी के राज में दलितों को इंसाफ नहीं मिलेगा। पूरन कुमार के परिवार को इंसाफ न देकर नायब सिंह सैनी ने दलित समाज को अपमानित किया है। यह सत्ता का दुरुपयोग और जातिगत भेदभाव की जिंदा तस्वीर है।

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उन्होंने कहा, बीजेपी का पूरा सिस्टम दलितों को दबाने में लगा है। पूरन कुमार जैसे सीनियर अधिकारी को सिस्टम में अकेला छोड़ दिया गया। यही बीजेपी की असली मानसिकता है, दलितों का इस्तेमाल वोट बैंक की तरह करो, लेकिन जब वो ऊंचा उठे तो उसे तोड़ दो।

ढांडा ने कहा, पूरन कुमार का मामला सिर्फ एक परिवार का संघर्ष नहीं, बल्कि पूरे दलित समाज की लड़ाई है। अगर बीजेपी सरकार ने अब भी इंसाफ नहीं दिया, तो आम आदमी पार्टी सड़क पर उतरकर इस लड़ाई को जनता की आवाज बनाएगी।

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