उद्योगपति और पूर्व सांसद सुभाष चंद्रा ने 22000 करोड रुपए कर्ज माफी मामले में दी सफाई

Satyakhabarindia

कहा, पूरे मामले में गलत धारणाएं और गलतफहमी फैलाई जा रही हैं

सत्य खबर हरियाणा

PaisaVapasKaro and Subhash Chandra : नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) द्वारा प्रसिद्ध उद्योगपति और हरियाणा के पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुभाष चंद्रा के पर्सनल इनसॉल्वेंसी मैटर में रिपेमेंट प्लान को मंजूरी दिए जाने के बाद से विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं।


सोशल मीडिया पर चल रहे विवाद और #PaisaVapasKaro ट्रेंड पर अब सुभाष चंद्रा के कार्यालय की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया गया है। सुभाष चंद्रा ने सोशल मीडिया पर 3 पन्नों का विस्तृत दस्तावेज शेयर करते हुए दावा किया है कि इस पूरे मामले में गलत धारणाएं और गलतफहमी फैलाई जा रही हैं।

सुभाष चंद्रा ने इस पोस्ट को अपने सोशल मीडिया पर अपलोड करते हुए इस बात का भी ध्यान रखा है कि आम आदमी इस पर कमेंट ना कर सके। इस सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा आ रहा है कि इस पोस्ट पर केवल सीमित व्यक्ति ही कमेंट कर सकते हैं। माना जा रहा है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि सोशल मीडिया पर #PaisaVapasKaro ट्रेंड चलाने वाले लोग इस पर कमेंट नहीं कर सकें।

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यह विवाद तब और गहरा गया था जब भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर NCLT के फैसले को “भारतीय इंसाफ का असली मजाक” करार दिया था और आरोप लगाया था कि 22 हजार करोड़ रुपये के कर्ज को महज कुछ करोड़ में निपटाया जा रहा है।

डॉ. सुभाष चंद्रा के मुख्य दावे

सुभाष चंद्रा के बयान के मुताबिक, उन्होंने व्यक्तिगत रूप से शून्य उधारी ली है। 22,000 करोड़ रुपये की राशि उनके द्वारा दी गई ‘पर्सनल गारंटी’ की कुल रकम थी। दस्तावेज में स्पष्ट किया गया है कि ₹22,000 करोड़ की पर्सनल गारंटी में से केवल ₹4,800 करोड़ की गारंटी ही कंपनियों द्वारा कर्ज लेते समय दी गई थी। बाकी की गारंटी डिफॉल्ट होने के बाद दी गई थीं। सुभाष चंद्रा की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, बैंकों/वित्तीय संस्थानों द्वारा जारी कुल राशि ₹4,808 करोड़ है, जबकि उधारकर्ताओं द्वारा वापस चुकाई गई राशि ₹3,803 करोड़ है और शेष मूल बकाया राशि केवल ₹998 करोड़ है।

पूर्व सांसद सुभाष चंद्रा के अनुसार बैंकों ने ₹998 करोड़ के मूल बकाए के खिलाफ कुल ₹5,311 करोड़ का दावा पेश किया था। इसमें से ₹1,049 करोड़ के दावों का निपटारा/भुगतान हो चुका है, जिसके बाद अब शेष दावा ₹4,262 करोड़ का रह गया है। चंद्रा ने कहा कि उन्होंने सभी उधारकर्ताओं से चर्चा की है और उन्होंने आश्वासन दिया है कि लेंडर्स (बैंकों) के साथ खातों के मिलान के बाद शेष ₹4,262 करोड़ का भुगतान और निपटारा कर दिया जाएगा।

दस्तावेजों में ये दिया प्रमुख बैंकों और लेंडर्स का ब्योरा

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इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस से ₹726 करोड़ के लोन में से ₹771 करोड़ वापस किए गए। व्यक्तिगत दिवालियापन कार्यवाही शुरू होने के बाद इसे पूरी तरह सेटल कर दिया गया है।

एक्सिस बैंक ग्रुप को₹388 करोड़ के डिस्बर्समेंट में से ₹157 करोड़ चुकाए जा चुके हैं। सेटलमेंट प्रक्रिया के तहत शेष भुगतान जारी है।

दावा किया गया है कि HDFC ग्रुप, केनरा बैंक, एडेलवाइस, फ्रैंकलिन टेम्पलटन, इंडसइंड बैंक, LIC हाउसिंग फाइनेंस, RBL बैंक, यूनियन बैंक के पास या तो पर्याप्त सिक्योरिटी उपलब्ध थी या फिर इनके दावों का पुनर्मूल्यांकन और सेटलमेंट की प्रक्रिया चल रही है।

फॉरेन, डोमेस्टिक फंड्स और NBFCs का कर्ज

दस्तावेज के अंत में बताया गया है कि फॉरेन फंड्स, डोमेस्टिक फंड्स और NBFCs/कॉर्पोरेट्स से ली गई उधारी में से अधिकांश का निपटारा मूल उधारकर्ताओं द्वारा किया जा चुका है या किया जा रहा है। जिनके पास पर्याप्त संपत्तियां हैं, उन्हें जल्द भुगतान कर दिया जाएगा। सुभाष चंद्रा ने उम्मीद जताई है कि इस विस्तृत आंकड़े के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कमेंट्स करने वाले और #PaisaVapasKaro का समर्थन करने वाले लोग वास्तविकता को समझकर संतुष्ट होंगे।

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