संत रामपाल बना रहे अपना कद, डेरा सच्चा सौदा प्रमुख भी है हरियाणा के बड़े राजनीतिक संत
सत्य खबर हरियाणा
Importance of religious gurus in politics : हरियाणा की राजनीति में इसलिए काफी समय से ‘बाबाओं’ की अहम भूमिका रही है। जब भी प्रदेश में कोई चुनाव आता है इन ‘बाबाओं’ का महत्व राजनीतिक लोगों की नजर में बढ़ जाता है। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को प्रदेश का सबसे बड़ा ‘राजनीतिक बाबा’ माना जाता है। जेल से बाहर आने के बाद अब संत रामपाल भी इस लाइन पर चल पड़े हैं। संत रामपाल के पास अब राजनीतिक लोगों का आना शुरू हो गया है और उनकी फैन फॉलोइंग को देखते हुए लगता है कि आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति पर उनका असर भी देखने को मिल सकता है।

अब से पहले इसे संयोग कहें या राजनीति की जरूरत पिछले कुछ समय में प्रदेश और इसके आसपास के इलाके में जब भी कोई चुनाव हुआ है तो डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पैरोल या फरलो मिलती रही है। संत रामपाल के केस लगभग समाप्त हो चुके हैं। जो केस अभी लंबित हैं, उनमें इन्हें जमानत मिल चुकी है।
संत रामपाल के पास हालांकि अभी कोई बहुत बड़ा नेता तो नहीं आया लेकिन पंजाब से पूर्व स्वास्थ्य मंत्री नवजोत कौर सिद्धू ने जरूर उनसे मुलाकात की है। हरियाणा से पूर्व भाजपा सांसद सुनीता दुग्गल और उनके पति, भाजपा विधायक रणधीर पनिहार मुख्य रूप से मिलने वालों को शामिल है। इनके अलावा भी कुछ नेता उनसे मिले हैं। 11 साल 4 महीने और 24 दिन जेल में बीताकर 10 अप्रैल को जेल से बाहर आए सतलोक आश्रम के प्रमुख संत रामपाल अब 3 महीने में ही राजनीतिक लोगों के चेहते बन रहे हैं।
डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने करीब 3 महीने पहले फतेहगढ़ साहिब स्थित सतलोक आश्रम में गई थी। यहां उन्होंने कहा था कि, मैं राजनीति खत्म कर संतों की सेवा करने की सोच रही हूं। अगर राजनीतिक लोग दूर हो जाएं तो संत रामपाल जैसे लोग ही धरती को संभाल लेंगे। आजकल के राजनीतिक लोग अपनी पहचान भूल चुके हैं।
पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू जेल से छूटे सतलोक आश्रम प्रमुख रामपाल से मिलने पहुंचीं। सिद्धू ने रामपाल के पांव छूकर आशीर्वाद लिया। 11 साल जेल में रहने के बाद 10 अप्रैल को रामपाल जमानत पर बाहर आया है। उसके बाद से कई नेता आश्रम में नतमस्तक दिखे हैं।
भाजपा विधायक रणधीर पणिहार संत रामपाल से मुलाकात के दौरान सोनीपत के गोहाना के धनाना स्थित सतलोक आश्रम में दंडवत प्रणाम कर रामपाल के सामने हाथ जोड़कर खड़े रहे, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई।
पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल और उनकी डीआईजी पति राजेश दुग्गल भी संत रामपाल के सामने दंडवत हो चुके हैं।जेजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय सिंह चौटाला संत रामपाल से मिलने पहुंचे थे। हिसार से कांग्रेस सांसद जय प्रकाश (जे.पी.) भी सतलोक आश्रम गए थे। कांग्रेस नेता धर्मवीर गोयत ने भी संत रामपाल से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया और उनके सामाजिक कार्यों की प्रशंसा की। उकलाना से विधायक नरेश सेलवाल समेत अनेक नेता संत रामपाल से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद ले चुके हैं। एक दौर ऐसा था जब संत रामपाल की हरियाणा के हरियाणा की राजनीति में तूती बोलती थी। कबीर पंथी रामपाल के समर्थकों की संख्या भी अच्छी खासी बताई जाती है। अब फिर वह प्रदेश की राजनीति पर अपनी पकड़ को मजबूत करने का काम कर रहे हैं।
अगर बात हरियाणा में चुनाव की की जाए तो हरियाणा में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में अभी काफी समय है। लोकसभा के चुनाव 2029 के अप्रैल या मई में होने वाले हैं वहीं विधानसभा के चुनाव अक्टूबर में होंगे जिनमें अभी 3 साल से ज्यादा का समय है। लेकिन प्रदेश में स्थापित हो रहे राजनीतिक बाबाओं की पूछ अगले साल भी होने वाली है। अगले साल प्रदेश में बड़े पैमाने पर स्थानीय निकाय और पंचायत के चुनाव होने हैं। इन चुनावों में भी प्रदेश के इन राजनीतिक बाबाओं की अच्छी खासी पूछ होती है।
प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव में अध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष होने से यह चुनाव काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। ऐसे में किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति को इन बाबाओं के आशीर्वाद की जरूरत महसूस होती है।
सतलोक आश्रम में पिछले कुछ समय में विशेष तौर पर पिछले साल आई बाढ़ के दौरान जिस तरीके से लोगों के बीच काम किया है उससे सतलोक आश्रम और संत रामपाल का महत्व बढ़ गया है और उनकी फैन फॉलोइंग भी काफी ज्यादा हुई है। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम का पिछले कुछ समय से ‘भाजपा प्रेम’ चल रहा है, लेकिन संत रामपाल के पास भाजपा और कांग्रेस दोनों के ही नेता आ रहे हैं।
हरियाणा की राजनीति में बाबाओं के दखल का एक अच्छा-खासा इतिहास रहा है। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख और सतलोक आश्रम को प्रदेश की राजनीति में बड़े राजनीतिक बाबाओं के रूप में देखा जाता है। इनके अलावा भी कई अन्य संत और डेरे हैं, जिनकी राजनीति पर पकड़ है। ऐसे ही एक संत है काली दास महाराज। काली दास महाराज का डेरा रोहतक जिले के सांपला में है। काली दास के बारे में एक बार बड़ी फेमस है कि वो केवल नारियल का पानी पीकर ही जीवित हैं। 2017 में जब गृह मंत्री अमित शाह अपने तीन दिवसीय रोहतक दौरे पर आए थे तो उन्होंने डेरे में जाकर काली दास महाराज से मुलाकात की थी। इतना ही नहीं काली दास के डेरे में पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से लेकर जेपी नड्डा तक जा चुके हैं। काली दास को कई बार राजनीतिक मंचों के बैनर तले होने वाले कार्यक्रमों में भी देखा गया है।
करनपुरी महाराज के डेरे को बाला पुरी के नाम से जाना जाता है जो रोहतक के डबल फाटक इलाके में स्थित है। करन पुरी का पंजाबी समुदाय के मतदाताओं पर खास प्रभाव माना जाता है। बीजेपी के कार्यक्रमों में अक्सर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाले करन पुरी के बारे में कहा जा रहा है कि वो भाजपा को अपना समर्थन देते रहे हैं।
महंत सतीश दास का आश्रम रोहतक जिले के महम इलाके में है। सतीश दास के बारे में कहा जाता है कि इनकी महम और उसके आस पास के गांवों में अच्छी खासी पकड़ है। मंहत सतीश दास चुनावी मैदान में भी अपनी किस्मत आजमा चुके हैं और 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने इनेलो उम्मीदवार के तौर पर अपनी किस्मत आजमाई थी लेकिन उन्हें जीत नहीं मिल पाई थी। बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था।
गौकरण धाम के प्रमुख बाबा कपिल पुरी का आश्रम भी रोहतक शहर में है। कांग्रेस की तुरफ झुकाव रखने वाले कपिल पुरी को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का करीबी माना जाता है। हालांकि बाबा कपिल पुरी दावा करते रहे हैं कि उनका किसी भी दल की तरफ राजनीतिक झुकाव नहीं है। कपिल पुरी दावा करते हैं कि सभी दलों के नेता उनके डेरे में आते हैं।
हरियाणा की माटी से आने वाले दोनों बड़े राजनीतिक बाबाओं डेरा सच्चा सौदा प्रमुख और सतलोक आश्रम प्रमुख कि पंजाब के चुनाव में भी अहम भूमिका रहने वाली है। इसी बात को ध्यान में रखकर अब राजनीतिक लोग दोनों राजनीतिक बाबाओं के संपर्क में है। देखना यह होगा कि आने वाले समय में इन राजनीतिक बाबाओं का कितना असर दिखाई देता है।
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