बृजेंद्र सिंह प्रदेश स्तर पर अपना बड़ा गुट बनाने में लगे
सत्य खबर हरियाणा
Fraction in congress : हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी की चर्चा हमेशा चलती रहती है और फिलहाल तक हरियाणा कांग्रेस में भूपेंद्र सिंह हुड्डा, रणदीप सिंह सुरजेवाला, कुमारी शैलजा, कैप्टन अजय यादव के गुट माने जाते हैं, लेकिन फिलहाल के राजनीतिक समीकरणों में जिस प्रकार से हरियाणा कांग्रेस की राजनीति चल रही है और बृजेंद्र सिंह प्रदेश व्यापी अभियान चला रहे हैं उसे देखकर लग रहा है कि आने वाले समय में बृजेंद्र सिंह अपना एक नया गुट खड़ा कर सकते हैं।

बृजेंद्र सिंह ने पहले पूरे हरियाणा में सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों में सद्भावना यात्रा का आयोजन किया था। 6 महीने से ज्यादा चली इस यात्रा के बाद अब वह प्रदेश में कार्यकर्ता सम्मेलनों का आयोजन कर रहे हैं। जिला स्तर पर आयोजित होने वाले इन कार्यकर्ता सम्मेलनों के माध्यम से बृजेंद्र सिंह को प्रदेश की कांग्रेस राजनीति में बड़ी ताकत मिलने की उम्मीद की जा रही है।
हरियाणा कांग्रेस की राजनीति में पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह के कार्यक्रम नई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे ही देते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेहद करीबी रहे लोग अब बृजेंद्र सिंह के कार्यक्रम में शामिल होने लगे हैं। हरियाणा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष कुलदीप शर्मा तो भूपेंद्र सिंह हुड्डा से नाराज थे ही ऐसे में उनका बृजेंद्र सिंह के साथ जाना किसी को विशेष नहीं लगा लेकिन भूपेंद्र सिंह हुड्डा के शासनकाल में लगभग एक दशक तक प्रिंसिपल ओएसडी रहे एम.एस. चोपड़ा का बृजेंद्र सिंह के कार्यक्रम में शामिल होने ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को हवा दे दी।
एम.एस. चोपड़ा लंबे समय तक भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सबसे विश्वसनीय सहयोगियों में गिने जाते रहे हैं। प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर उन्हें हुड्डा की कोर टीम का मजबूत स्तंभ माना जाता रहा है। ऐसे में उनका बृजेंद्र सिंह के कार्यक्रम में दिखाई देना सामान्य राजनीतिक उपस्थिति से कहीं अधिक महत्व रखता है।
हरियाणा कांग्रेस में विभिन्न नेताओं के अलग-अलग प्रभाव वाले समूह लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी शैलजा, रणदीप सिंह सुरजेवाला और चौधरी बीरेंद्र सिंह के अलग-अलग राजनीतिक प्रभाव को लेकर लगातार चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व सार्वजनिक रूप से संगठन की एकजुटता की बात करता है, लेकिन प्रदेश स्तर पर अलग-अलग धड़ों की सक्रियता किसी से छिपी नहीं है।
वर्तमान में कांग्रेस विधायक दल में सबसे अधिक विधायकों का समर्थन भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ माना जाता है। पिछले करीब साढ़े दस वर्षों में उन्होंने अपने समर्थक विधायकों को संगठित बनाए रखा है। यही वजह है कि संगठन और आलाकमान के स्तर पर भी उनका प्रभाव मजबूत माना जाता है। यह अलग बात है कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के विधायक बगावत कर विरोधी उम्मीदवारों को जितवाने का काम करते हैं।
चौधरी बीरेंद्र सिंह के पुत्र और पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह भी हरियाणा की राजनीति में लगातार अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वह इस बात को भी मानते हैं कि वंशवाद की राजनीति ज्यादा समय नहीं चलती। उनका कहना है कि किसी नेता का बेटा एक बार तो आगे आ सकता है लेकिन उसके बाद उसे अपने दम पर मुकाम हासिल करना होता है। अपनी इसी बात को साबित करने के लिए वह खुद राजनीति में संघर्ष का रास्ता अपना रहे हैं। हाल ही में उन्होंने प्रदेश की सभी 90 विधानसभा सीटों को कवर करने वाली यात्रा निकाली थी। इस यात्रा को भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने व्यक्तिगत राजनीतिक पहल बताया था, जबकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी स्वयं इस यात्रा में शामिल होकर बृजेंद्र सिंह को राजनीतिक समर्थन का संकेत दे चुके हैं।
हरियाणा कांग्रेस में इस समय एक ओर भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पुत्र एवं सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा पूरी सक्रियता के साथ संगठन और जनसंपर्क में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर बृजेंद्र सिंह भी अपने राजनीतिक आधार को लगातार मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की सक्रियता भविष्य की राजनीति को लेकर नए समीकरणों की संभावना भी पैदा कर रही है। चौधरी बीरेंद्र सिंह का राजनीतिक सफर भी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। कांग्रेस में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बाद वह भाजपा में गए, जहां उन्हें राज्यसभा भेजा गया और केंद्र सरकार में मंत्री बनने का अवसर मिला। बाद में उन्होंने भाजपा छोड़कर फिर कांग्रेस का दामन थाम लिया। पिछले लोकसभा चुनाव में हिसार सीट से उनके पुत्र बृजेंद्र सिंह को कांग्रेस का टिकट नहीं मिल पाया था, जिसे भी राजनीतिक हलकों में प्रदेश कांग्रेस के आंतरिक समीकरणों से जोड़कर देखा गया।
ऐसे माहौल में एम.एस. चोपड़ा जैसे हुड्डा के अत्यंत करीबी माने जाने वाले नेता का बृजेंद्र सिंह के कार्यक्रम में पहुंचना कई नए राजनीतिक सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि इस मुलाकात या उपस्थिति को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक राजनीतिक टिप्पणी सामने नहीं आई है, लेकिन हरियाणा की सियासत में इसे लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। आने वाले दिनों में कांग्रेस के अंदरूनी समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ते हैं, इस पर सभी की निगाहें बनी रहेंगी।
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