झज्जर : बछड़े को बचाने के प्रयास में चली गई चार जिंदगियां, तीन एक ही परिवार के शामिल

Satyakhabarindia

पुलिस और प्रशासन पर लगे गंभीर आरोप, समय पर मिलती मदद तो बच जाती सभी की जान

सत्य खबर हरियाणा

Big Accident in Jhajjar : हरियाणा के झज्जर जिले में एक बड़ी दुर्घटना में चार लोगों की मौत हो गई। मृतकों में तीन एक ही परिवार के हैं जबकि एक प्रवासी मजदूर है। यह चारों एक बछड़े को बचाने के लिए कुएं में उतरे थे और जहरीली गैस के प्रभाव में आकर चारों ने दम तोड़ दिया। पुलिस और प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। आज सुबह चारों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल लाया गया है। मृतकों की पहचान मुनीमपुर निवासी दलबीर पुत्र फूल सिंह, मोनू पुत्र राजबीर और नरेंद्र पुत्र सत्यवान तथा बिहार के श्रमिक रामू पुत्र रामदुलारे के रूप में हुई है। यह दर्दनाक हादसा 50 साल पुराने बंद कुएं में हुआ।

जानकारी के अनुसार, घटना रविवार रात करीब 8:30 से 9:00 बजे के बीच की है। मुनीमपुर गांव की चौपाल और मंदिर के साथ लगते इस कुएं से कुछ ही दूरी पर दलबीर, नरेंद्र, मोनू और रामू बैठकर हुक्का पी रहे थे। इसी दौरान एक भागता हुआ बछड़ा अचानक कुएं में जा गिरा।

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गांव मुनीमपुर के बीचों-बीच स्थित करीब 150 साल पुराने कुएं में रविवार रात गिरे एक बछड़े को बचाने के प्रयास में चार लोगों की मौत हो गई। मृतकों में तीन स्थानीय ग्रामीण और एक बिहार का श्रमिक शामिल है। 50 साल से बंद पड़े पियाऊ वाले इस कुएं में बछड़े सहित कुल चार जिंदगियां खत्म हो गईं। इस हृदयविदारक हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और तनाव की स्थिति बनी हुई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के 3 घंटे बाद पुलिस की डायल 112 टीम मौके पर पहुंची। पुलिस कर्मी रेस्क्यू अभियान में मदद की बजाय बस देखते रहे। बाद में एंबुलेंस पहुंची तो उसमें भी ऑक्सीजन नहीं थी। समय रहते रेस्क्यू शुरू होता तो जान बच सकती थी। परिजनों के मुताबिक, जब प्रशासन की ओर से कोई कुएं में नहीं उतरा तो फायर ब्रिगेड के मास्क पहनकर गांव के लोग खुद अंदर गए और चारों को बाहर निकाला। चारों तब तक जिंदा थे।

पुलिस का दावा है कि सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंच गई थी और ग्रामीणों के आरोपों की जांच कराई जाएगी।

सुनील ने बताया कि थोड़ी देर बाद चिल्लाने की आवाजें आने लगी। सभी बचाओ-बचाओ कह रहे थे। तभी भीड़ जमा हो गई। हमने उन्हें बचाने की कोशिश की लेकिन पहले कुछ समझ नहीं आया। इसके बाद डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी गई। सुनील ने बताया कि जब वह कुएं पर पहुंचे तो नीचे उतरने की कोशिश की, लेकिन अंदर फंसे नरेंद्र ने चिल्लाकर कहा कि नीचे मत आना, यहां सांस नहीं आ रही है। सुनील का दावा है कि पुलिस के मौके पर पहुंचने तक चारों जिंदा थे, लेकिन समय पर रेस्क्यू शुरू नहीं किया गया और अधिकारियों ने कार्रवाई करने में देरी की।

ग्रामीणों का कहना है कि रात 8 बजे पुलिस, फायर ब्रिगेड व एम्बुलेंस को सूचना दी गई, लेकिन देर रात तक कोई बड़ा अधिकारी या बचाव दल मौके पर नहीं पहुंचा। एक निजी कंपनी ने अपनी फायर ब्रिगेड भेजी और ग्रामीणों ने निजी गोताखोर बुलाए।

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ग्रामीणों के अनुसार, प्रशासन से मदद नहीं मिलने पर उन्होंने खुद राहत कार्य शुरू किया। पहले सेप्टिक टैंक की मदद से कुएं का पानी कम किया गया। इसके बाद जेसीबी से कुएं की दीवार का हिस्सा तोड़ा गया, ताकि अंदर भरी जहरीली गैस बाहर निकल सके। देर रात 11:30 बजे बाद में फायर ब्रिगेड के मास्क पहनकर ग्रामीण ही कुएं में उतरे। करीब 3:30 घंटे बाद चारों लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर पहुंची एंबुलेंस में ऑक्सीजन की सुविधा नहीं थी। उनका कहना है कि चारों फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने के समय वो जीवित थे और समय पर ऑक्सीजन मिलती तो उनकी जान बच सकती थी। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि चौथे व्यक्ति को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी, इसलिए उसे पुलिस की पीसीआर से नागरिक अस्पताल पहुंचाया गया। जहां चारों को मृत घोषित कर दिया गया।

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस कमिश्नर डॉ. राजश्री सिंह पहले मुनीमपुर गांव और फिर नागरिक अस्पताल पहुंचीं। अस्पताल में ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए और कहा कि अगर समय रहते राहत कार्य शुरू होता तो चारों की जान बच सकती थी। लोगों ने पुलिस कमिश्नर से कहा कि अब दुख जताने का कोई फायदा नहीं है और उन्हें वापस जाने को कहा।

घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने कहा कि शवों का पोस्टमॉर्टम कराने से पहले गांव में बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। इस दौरान मौके पर पहुंचे बादली विधायक कुलदीप वत्स से भी ग्रामीणों ने सहयोग की मांग की।

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बादली से कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स ने कहा यह बहुत ही दुखद घटना है। कई पहलू हैं, जहां लापरवाही की गई है। इसकी जांच होनी चाहिए। जो लोग दोषी हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। दोषी अधिकारी पर कार्रवाई की जाए। पीड़ित परिवार को उचित मुआवज दिया जाए और हर घर में एक नौकरी दी जाए।

कमिश्नर बोलीं, सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे

झज्जर पुलिस कमिश्नर डॉक्टर राजश्री सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची गई थी। लोगों ने कुछ आरोप लगाए हैं, उनकी जांच कराई जाएगी। अगर कोई दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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