संसद का मॉनसून सत्र शुरू होते ही देश की राजनीति एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। एक ओर सरकार अहम विधेयकों की तैयारी में जुटी है, तो दूसरी ओर जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन और सोनम वांगचुक की नई शर्तों ने दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था और सियासी हलचल दोनों को तेज कर दिया है।
मॉनसून सत्र के साथ बढ़ी राजनीतिक हलचल
सोमवार से संसद का मॉनसून सत्र शुरू हो गया है। केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में पेश करने की तैयारी कर रही है। वहीं विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। ऐसे में संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक गतिविधियां चरम पर हैं।
जंतर-मंतर बना सबसे बड़ा केंद्र
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों प्रदर्शनकारी जुटे हैं। संसद मार्च के ऐलान को देखते हुए दिल्ली पुलिस पूरी तरह सतर्क है। जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक तीन स्तरीय बैरिकेडिंग की गई है और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि बिना अनुमति किसी भी मार्च को संसद तक नहीं जाने दिया जाएगा।

10 हजार जवान, कड़ी सुरक्षा और बंद रास्ते
राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई है। करीब 10 हजार सुरक्षाकर्मी, दंगा नियंत्रण वाहन, टियर गैस और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए गए हैं। नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163 लागू है। जंतर-मंतर के अलावा अन्य स्थानों पर लोगों के एकत्र होने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
सोनम वांगचुक ने रखीं चार शर्तें
सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अनशन समाप्त करने के लिए चार प्रमुख शर्तें रखी हैं। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही तय करने, संसद तक पहुंचने की अनुमति देने और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों से इस मुद्दे को संसद में उठाने का सार्वजनिक आश्वासन मांगा है। यदि स्वास्थ्य कारणों से वे संसद नहीं जा सकते, तो उन्होंने नेताओं से अस्पताल आकर समर्थन देने की बात कही है।
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कई मेट्रो स्टेशन भी किए गए बंद
सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो ने जनपथ, राजीव चौक, पटेल चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट और सेवा तीर्थ सहित कई स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद कर दिया है। संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में आवाजाही पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है, जिससे आम लोगों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी गई है।
संसद का यह मॉनसून सत्र केवल विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहने वाला है। एक तरफ सरकार अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, वहीं दूसरी ओर सड़क से लेकर संसद तक विरोध की आवाजें गूंजती रहेंगी। आने वाले दिनों में राजनीतिक घटनाक्रम और सुरक्षा व्यवस्था दोनों पूरे देश की नजरों में रहेंगे।