भाजपा की मजबूत गढ़ अहीरवाल को पार्टी संगठन में नहीं मिला विशेष महत्व
सत्य खबर हरियाणा
State BJP : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता ने अपनी पहली प्रदेश कार्यकारिणी घोषित करते हुए संगठन, सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों का संतुलन साधने की कोशिश की है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष काफी हद तक इसमें सफल भी रही है लेकिन इस पूरे मामले में कहीं ना कहीं अहीरवाल की अनदेखी भी हुई है।

नई टीम में अधिकांश पदाधिकारी ऐसे हैं, जो फील्ड में सक्रिय रहे हैं और प्रदेशभर में संगठनात्मक प्रवास करने की क्षमता रखते हैं। खास बात यह है कि एक-दो अपवादों को छोड़ दें तो पूरी कार्यकारिणी में 60 वर्ष से कम आयु के नेताओं को जगह दी गई है। इसके जरिए भाजपा ने संगठन में अपेक्षाकृत युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संदेश दिया है। जो इस बात का भी सूचक है कि आने वाले दिनों में भाजपा आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति तैयार कर रही है।
डॉ. गुप्ता ने नई कार्यकारिणी में कई जिला अध्यक्षों और मोर्चा पदाधिकारियों को पदोन्नति देकर प्रदेश स्तर की जिम्मेदारी सौंपी है। जवाहर सैनी को प्रदेश सचिव से उपाध्यक्ष बनाया गया है। अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहे सत्यप्रकाश जरावता को प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है, जबकि बीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष मदन चौहान अब प्रदेश सचिव बनाए गए हैं। अजय बंसल को लगातार दूसरी बार प्रदेश कोषाध्यक्ष बनाया गया है। रामेश्वर चौहान को भी नई टीम में स्थान मिला है। दादरी के जिला अध्यक्ष रहे सुनील सैनी को ओबीसी मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।
जातीय समीकरणों पर जोर
जाट, ब्राह्मण, ओबीसी व एससी की बराबर हिस्सेदारी
नई टीम में जातिगत संतुलन भी साफ दिखाई देता है। कार्यकारिणी में करीब 16 प्रतिशत ब्राह्मण, 16 प्रतिशत ओबीसी और 16 प्रतिशत अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिनिधियों को जगह मिली है। वहीं जाट समाज की हिस्सेदारी लगभग 14 प्रतिशत, राजपूत समाज की 13 प्रतिशत और बनिया समाज की करीब आठ प्रतिशत है। इससे भाजपा ने प्रमुख सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है।
दिग्गज नेताओं के करीबी चेहरों को भी मिली अहम जिम्मेदारी
राजनीतिक दृष्टि से भी नई टीम में प्रदेश के सभी प्रमुख नेताओं के प्रभाव का ध्यान रखा गया है। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के करीबी विधायक लक्ष्मण यादव को उपाध्यक्ष बनाया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के करीबी माने जाने वाले दीपक मंगला, सुनीता दुग्गल और जवाहर सैनी को अहम जिम्मेदारियां मिली हैं। वहीं, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ के करीबी डा. संजय शर्मा की वापसी हुई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक सुरेंद्र पाल के भाई अशोक गुर्जर को भी प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल कर संगठन और विचार परिवार के बीच समन्वय का संदेश देने का प्रयास किया गया है। इसी प्रकार से कुलदीप बिश्नोई के पुत्र भव्य बिश्नोई को भी प्रदेश उपाध्यक्ष बनाकर उनकी नाराजगी को भी दूर करने का प्रयास किया गया है।
अहीरवाल की अनदेखी
अहीरवाल क्षेत्र लंबे समय से भाजपा की चुनावी ताकत का केंद्र माना जाता है। 2014 से ही लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पार्टी को यहां लगातार मजबूत जनसमर्थन मिलता रहा है। गौरतलब है कि प्रदेश में भाजपा की तीन बार सरकार बनाने में सबसे अहम योगदान अहीरवाल क्षेत्र का रहा है। ऐसे में संगठन की सूची में इस क्षेत्र की नगण्य भागीदारी ने स्वाभाविक रूप से स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा छेड़ दी है। शनिवार देर शाम घोषित प्रदेश संगठन की पहली सूची में भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ माने जाने वाले महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी जिलों को इस सूची में ना के बराबर स्थान मिला है। इस सूची में महेंद्रगढ़ जिले से एक भी नेता को जगह नहीं मिली, जबकि रेवाड़ी से केवल विधायक लक्ष्मण यादव को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। फतेहाबाद को उपाध्यक्ष, महामंत्री सहित कई अहम जिम्मेदारियां देकर विशेष महत्व दिया गया है। इसके विपरीत अहीरवाल जैसे भाजपा के गढ़ को केवल एक पद मिलना राजनीतिक दृष्टि से अनदेखी माना जा रहा है। अहीरवाल की अनदेखी के पीछे एक कारण यह भी माना जा रहा है कि यहां पर पार्टी अभी तक नई और पुरानी पार्टी में बंटी हुई है। एक तरफ राव इंद्रजीत सिंह है तो दूसरी तरफ उनके विरोधी भी पूरी तरह से सक्रिय हैं।
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