Assam: VC शंभुनाथ सिंह पर आरोपों की जांच कब होगी? तेजपुर यूनिवर्सिटी में जांच की तैयारी पर सस्पेंस

Satyakhabarindia

Assam के तेज़पुर विश्वविद्यालय के छात्रों ने दावा किया है कि उन्हें केंद्र सरकार की ओर से एक अनौपचारिक पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें बताया गया है कि उपकुलपति शंभुनाथ सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच शुरू की जाएगी। हालांकि यह जानकारी प्रारंभिक स्तर की मानी जा रही है, लेकिन विश्वविद्यालय के छात्रों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के संयुक्त मोर्चे ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्रदर्शन और विरोध जारी रहेगा जब तक सरकार से औपचारिक अधिसूचना नहीं मिलती। यह विरोध पिछले 80 दिनों से लगातार चल रहा है, और छात्रों का कहना है कि वे केवल लिखित और स्पष्ट आदेश मिलने तक शांत नहीं होंगे।

मिली जानकारी के अनुसार, हस्तलिखित पत्र में कहा गया है कि शंभुनाथ सिंह को विश्वविद्यालय में उनके प्रशासनिक अधिकारों से मुक्त किया जाएगा। इसके साथ ही पत्र में यह भी आश्वासन दिया गया है कि उपकुलपति के खिलाफ सभी आरोपों की समयबद्ध जांच की जाएगी। बावजूद इसके, विश्वविद्यालय समुदाय ने निर्णय लिया है कि औपचारिक और ठोस आदेश मिलने तक विरोध जारी रहेगा। छात्रों और कर्मचारियों का कहना है कि केवल शब्दों या अस्थायी पत्र से उन्हें संतुष्टि नहीं मिलेगी।

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अध्यक्ष पद पर प्रो. ध्रुब के कार्यकाल की स्थिति

तेज़पुर विश्वविद्यालय के संयुक्त निदेशक ने बताया कि वर्तमान में कार्यवाहक उपकुलपति प्रो. ध्रुब के. भट्टाचार्य की नियुक्ति की स्थिति यथास्थिति बनी रहेगी और किसी भी बदलाव के लिए आधिकारिक सूचना का इंतजार किया जाएगा। इस बीच छात्रों और विश्वविद्यालय कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि उनका मुख्य उद्देश्य शंभुनाथ सिंह को हटवाना और विश्वविद्यालय प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। छात्रों और शिक्षकों का प्रदर्शन न केवल उपकुलपति के खिलाफ है, बल्कि विश्वविद्यालय में प्रशासनिक नियमों और प्रक्रियाओं के पालन की मांग को भी उजागर करता है।

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विवाद की पृष्ठभूमि: RTI से सामने आए दस्तावेज़

तेज़पुर विश्वविद्यालय का यह विवाद तब सामने आया जब RTI (सूचना का अधिकार) के तहत यह खुलासा हुआ कि शंभुनाथ सिंह की नियुक्ति और शैक्षणिक योग्यता से संबंधित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़ विश्वविद्यालय कार्यालय से गायब थे। इस खुलासे ने छात्रों और शिक्षकों के विरोध को और मजबूती दी। पिछले 80 दिनों से चल रहे इस विरोध में छात्रों ने उपकुलपति के हटने और जांच के तुरंत परिणाम की मांग की है। इस घटना ने विश्वविद्यालय में प्रशासनिक पारदर्शिता और जिम्मेदारी के महत्व को भी उजागर किया है।

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