Vande Mataram: सोमवार, 8 दिसंबर 2025 को संसद में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने अपने भाषण में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के बयान पर सवाल उठाए। भाषण की शुरुआत में ही उन्होंने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का नाम गलत उच्चारण किया, जिसके बाद उन्होंने प्रियंका गांधी से यह पूछने की मांग की कि उन्होंने यह जानकारी कहाँ से प्राप्त की। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रियंका गांधी ने जो तथ्य पेश किया है, उसे सदन में सत्यापित करने की आवश्यकता है, ताकि सही जानकारी साझा की जा सके।
प्रियंका गांधी वाड्रा का बयान और शेखावत का सवाल
प्रियंका गांधी ने लोकसभा में कहा कि 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने वंदे मातरम के दो पद लिखे थे और सात साल बाद, 1882 में उनके उपन्यास आनंदमठ में उन्होंने चार और पद जोड़े। उन्होंने बताया कि 1896 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने इस गीत को कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार प्रस्तुत किया। केंद्रीय मंत्री शेखावत ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने वंदे मातरम पूरी तरह से एक बार में लिखा था, और उन्होंने प्रियंका गांधी से अनुरोध किया कि वे अपने द्वारा प्रस्तुत कथन की पुष्टि करें। शेखावत ने यह भी कहा कि नैहाटी में स्थित बंकिम शोध केंद्र इस तथ्य की पुष्टि करता है।

सांसदों और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
प्रियंका गांधी के बयान और शेखावत के सवाल के बाद संसद में हल्की हलचल और बहस देखी गई। इस मामले में त्रिनमूल कांग्रेस (TMC) ने केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की आलोचना की। TMC ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा कि, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में बंगलादेश के एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व का नाम गलत उच्चारित किया और अब उनके अपने पार्टी के केंद्रीय मंत्री ने यह साबित कर दिया कि यह अज्ञानता अपवाद नहीं बल्कि परंपरा है।” TMC ने आगे कहा कि शेखावत ने बार-बार रिशि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को बंकिम दास चैटर्जी कहा, जिससे इस महान कवि के नाम में विकृति आई।
राष्ट्रीय गीत और इतिहास के प्रति संवेदनशीलता की आवश्यकता
इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम और उसके रचयिता के इतिहास के प्रति संसद और जनता की संवेदनशीलता कितनी महत्वपूर्ण है। केंद्रीय मंत्री और सांसदों द्वारा दी गई जानकारी को सत्यापित करना और सही तथ्यों का पालन करना आवश्यक है। इस बहस ने यह भी उजागर किया कि, राष्ट्रीय प्रतीकों और गीतों का सही संदर्भ और इतिहास सभी को ज्ञात होना चाहिए। साथ ही, राजनीतिक दलों और जनता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इतिहास और राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान या गलत जानकारी न फैले।