Kanwar Yatra से पहले मीट बैन का हंगामा, मुस्लिम धर्मगुरु बोले- यह तुगलकी फरमान नहीं चलेगा

Satyakhabarindia

Kanwar Yatra: सावन माह शुरू होने में कुछ ही दिन बचे हैं और इसी के साथ कांवड़ यात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं। उत्तर प्रदेश, दिल्ली और अब उत्तराखंड सरकार द्वारा कांवड़ मार्गों पर मांस दुकानों को बंद करने का निर्देश दिया गया है। इस आदेश को लेकर एक नई बहस खड़ी हो गई है।

मौलाना साजिद रशीदी ने कहा – ये तुगलकी फरमान है

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने इस फैसले को संविधान विरोधी और तुगलकी फरमान बताया है। उनका कहना है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और सरकार को सभी धर्मों के लिए काम करना चाहिए। किसी एक धर्म के लिए दूसरों को प्रभावित करना न केवल अनुचित है बल्कि समाज को बांटने वाला भी है।

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कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की चेतावनी – नफरत फैलाने का माध्यम न बने यात्रा

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने साफ कहा है कि कांवड़ यात्रा एक धार्मिक आयोजन है और राज्य सरकारें यदि इसमें सुविधा देती हैं तो यह ठीक है। लेकिन जब इस यात्रा का उपयोग नफरत फैलाने के लिए किया जाता है, तो यह एक सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है। धार्मिक आयोजनों को समाज में एकता और शांति का माध्यम बनाना चाहिए।

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नाम छुपाकर व्यापार करना गलत – एसटी हसन

पूर्व सांसद डॉक्टर एसटी हसन ने भी सरकार के फैसले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि होटल का नाम लिखना गलत नहीं है लेकिन नाम छिपाकर सामान बेचना धोखा है। उन्होंने इस पर भी सवाल उठाया कि भारत में बीफ का सबसे बड़ा निर्यातक एक हिंदू है, तो केवल मुसलमानों को टारगेट करना ठीक नहीं। जुर्माने की राशि 2 लाख रुपये बहुत ज्यादा है और इसे 500 से 1000 रुपये के बीच रखा जाना चाहिए।

धर्म, राजनीति और रोज़गार के बीच उलझा फैसला

कांवड़ यात्रा पर मांस दुकानों को बंद करने का फैसला धार्मिक आस्था और सामाजिक व्यवस्था के टकराव को उजागर करता है। एक ओर भक्तों की भावना है तो दूसरी ओर दुकानदारों की रोज़ी-रोटी। सरकार के ऐसे फैसले समाज में धार्मिक ध्रुवीकरण बढ़ा सकते हैं। संविधान की दृष्टि से देखा जाए तो किसी एक धर्म के चलते दूसरे समुदायों की आजीविका पर प्रतिबंध लगाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध जाता है।

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