देश की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए 26 दिसंबर को रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council – DAC) की एक बेहद अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री Rajnath Singh करेंगे। बैठक में थल सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए आपात खरीद (Emergency Procurement – EP) के तहत हथियारों और सैन्य उपकरणों की खरीद पर बड़े फैसले लिए जाने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास तौर पर मिसाइल प्रणालियों की खरीद इस बैठक का मुख्य एजेंडा होगी, जिससे तीनों सेनाओं की मारक क्षमता में बड़ा इजाफा हो सकता है।
नौसेना और वायुसेना के लिए मिसाइलें होंगी फोकस में
इस बैठक में भारतीय नौसेना की एक बड़ी मांग पर चर्चा होने की संभावना है। नौसेना ने 700 से अधिक MR-SAM (मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल) की आवश्यकता जताई है। ये मिसाइलें DRDO और इज़राइल के सहयोग से विकसित की गई हैं और इनका निर्माण भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) द्वारा किया जाता है। करीब 70 किलोमीटर की रेंज वाली ये मिसाइलें दुश्मन के विमान, मिसाइल, ड्रोन और हेलीकॉप्टर को मार गिराने में सक्षम हैं। पिछले लगभग एक दशक से इन्हें भारतीय नौसेना के प्रमुख युद्धपोतों पर तैनात किया जा रहा है। वहीं, भारतीय वायुसेना भी अपनी ताकत बढ़ाने के लिए 600 से अधिक Astra Mark-2 एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने की योजना बना रही है। इनकी रेंज लगभग 200 किलोमीटर है, जिससे भारत की सीमा के भीतर रहते हुए दुश्मन के लड़ाकू विमानों को निशाना बनाया जा सकता है।

SPICE बम और सेना के लिए नए रडार
बैठक में वायुसेना के लिए SPICE प्रिसिजन गाइडेड म्यूनिशन की खरीद पर भी फैसला लिया जा सकता है। इज़राइल में विकसित SPICE बमों का इस्तेमाल 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक में किया गया था। ये बम बेहद सटीक होते हैं और मजबूत तथा सुरक्षित ठिकानों को भी तबाह करने में सक्षम हैं। वायुसेना 300 से अधिक SPICE सिस्टम खरीद सकती है। इसके अलावा, भारतीय थल सेना ने भी कम ऊंचाई पर काम करने वाले हल्के और आधुनिक रडार की मांग की है। सेना को 3D अश्लेषा और 2D भारणी रडार के अलावा दो दर्जन से अधिक नए रडार की आवश्यकता है। ये सभी रडार आकाशवीर कमांड एंड रिपोर्टिंग सिस्टम का हिस्सा होंगे, जिसकी प्रभावशीलता ऑपरेशन सिंदूर के दौरान काफी अच्छी साबित हुई थी।
क्या है इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट (EP) और क्यों अहम है यह बैठक
इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट (EP) एक विशेष व्यवस्था है, जिसके तहत सीमित मात्रा में हथियार और सैन्य उपकरण बहुत तेजी से खरीदे जाते हैं। इसका मकसद आपात स्थिति में सेनाओं की तत्काल जरूरतों को पूरा करना होता है। EP के तहत मिसाइलें, गोला-बारूद, छोटे हथियार और एंटी-टैंक सिस्टम खरीदे जाते हैं। आमतौर पर इस व्यवस्था के तहत करीब 300 करोड़ रुपये तक की खरीद की जाती है। DAC में रक्षा मंत्री, रक्षा राज्य मंत्री, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS), तीनों सेनाओं के प्रमुख, रक्षा सचिव और DRDO प्रमुख शामिल होते हैं। आज होने वाली यह बैठक इसलिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें लिए गए फैसले भारतीय सेना की सामूहिक युद्ध क्षमता को कई गुना बढ़ा सकते हैं और देश की सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान कर सकते हैं।