All eyes on Bangladesh: बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा को लेकर अब भारतीय फिल्म इंडस्ट्री से भी आवाजें उठने लगी हैं। वरिष्ठ अभिनेता मनोज जोशी ने इस मुद्दे पर बॉलीवुड की चुप्पी पर सवाल खड़े करते हुए इसे दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर तो कई कलाकार तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन जब पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार होता है, तो ज्यादातर लोग चुप्पी साध लेते हैं। मनोज जोशी के इस बयान के बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। उनके साथ-साथ अभिनेत्री जान्हवी कपूर, काजल अग्रवाल और पूर्व सांसद व अभिनेत्री जया प्रदा ने भी इस विषय पर अपनी नाराजगी और चिंता जाहिर की है।
मनोज जोशी का बयान: दोहरा रवैया दुर्भाग्यपूर्ण
मनोज जोशी ने ANI को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि जब गाजा या फिलिस्तीन में कोई घटना होती है, तो कई लोग तुरंत बयान देने लगते हैं, सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं और न्याय की मांग करते हैं। लेकिन जब बांग्लादेश में किसी हिंदू की हत्या होती है, तो वही लोग चुप रह जाते हैं। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सच्चाई क्या है, यह समय के साथ सामने आएगा, लेकिन सवाल यह है कि क्या हम इंसानियत के आधार पर हर हिंसा का विरोध करते हैं या केवल चुनिंदा मुद्दों पर ही आवाज उठाते हैं। उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में समर्थन मिल रहा है, वहीं कुछ लोग इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश भी कर रहे हैं।

जान्हवी कपूर और जया प्रदा की भावुक प्रतिक्रिया
क्रिसमस की पूर्व संध्या पर अभिनेत्री जान्हवी कपूर ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक लंबा नोट साझा किया। उन्होंने बांग्लादेश में हुई हिंसा को अमानवीय बताया और लोगों से अपील की कि इस मुद्दे को नजरअंदाज न करें, बल्कि इसके बारे में जानें और सवाल पूछें। जान्हवी ने लिखा कि हर तरह की हिंसा और कट्टरता का विरोध करना जरूरी है, क्योंकि अगर हम चुप रहे तो समाज अपनी मानवता खो देगा। वहीं, अभिनेत्री और पूर्व सांसद जया प्रदा ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताया। उन्होंने PTI से बातचीत में कहा कि ऐसी घटनाएं किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
काजल अग्रवाल का पोस्ट और पूरा मामला
अभिनेत्री काजल अग्रवाल ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पोस्टर साझा किया, जिसमें लिखा था, “Wake up Hindus! Silence will not save you” और “All eyes are on the Hindus।” इस पोस्ट के जरिए उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा पर लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश की। यह पूरा मामला बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले में 27 वर्षीय दीपु चंद्र दास की मौत से जुड़ा है, जिसने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। इस घटना के बाद भारत ने कथित तौर पर बांग्लादेशी उच्चायुक्त को तलब किया। हालांकि, बाद में बांग्लादेशी अधिकारियों की रिपोर्ट में आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत न मिलने की बात कही गई। अंतरिम सरकार के एक प्रतिनिधि ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर संवेदना जताई और सहायता का आश्वासन दिया। इसी बीच मयमनसिंह से एक और हिंसक घटना की खबर सामने आई है, जिससे बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता और गहरी हो गई है।