वंदे भारत ट्रेन में पहली बार सफर, चिनाब ब्रिज का अद्भुत अनुभव और शिक्षा सुधारों को लेकर उम्मीद। मशहूर शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने भारतीय रेलवे की सराहना करते हुए सरकार से युवाओं और छात्रों के बीच भरोसे का माहौल बनाने की अपील की।
वंदे भारत यात्रा ने छोड़ी गहरी छाप
प्रसिद्ध शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा कर भारतीय रेलवे की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि दिल्ली से श्रीनगर तक वंदे भारत ट्रेन में पहली बार यात्रा करना उनके लिए बेहद यादगार अनुभव रहा। यात्रा के दौरान विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे आर्च ब्रिज चिनाब ब्रिज को करीब से देखने का अवसर भी मिला, जिसने उन्हें बेहद प्रभावित किया।
रेलवे पर गर्व, वादों पर भी वही भरोसा चाहते हैं
वीडियो में वांगचुक ने कहा कि उन्हें भारतीय रेलवे की इस उपलब्धि पर गर्व है। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिस तरह रेलवे की प्रगति पर उन्हें विश्वास और खुशी महसूस होती है, उसी तरह वे चाहते हैं कि सरकार अपने सार्वजनिक वादों को भी पूरी गंभीरता से निभाए। उनका यह बयान विकास और जवाबदेही, दोनों पर समान महत्व देने का संदेश देता है।
शिक्षा सुधारों से बढ़ीं उम्मीदें
सोनम वांगचुक ने संसद में परीक्षाओं में सुधार से जुड़े विधेयक का स्वागत किया। उनका मानना है कि केवल परीक्षा प्रणाली में बदलाव पर्याप्त नहीं होगा। देश के शिक्षा तंत्र में व्यापक और दीर्घकालिक सुधार की जरूरत है, ताकि छात्रों को बेहतर अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। उन्होंने कहा कि मजबूत शिक्षा व्यवस्था ही देश के भविष्य की सबसे बड़ी नींव है।

छात्रों के भरोसे को सबसे बड़ी प्राथमिकता
वांगचुक ने सरकार से अपील की कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने के जो आश्वासन पहले दिए गए थे, उनका पूरी तरह पालन किया जाए। उनका कहना था कि युवाओं और छात्रों के बीच भरोसे का वातावरण बनाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जब संवाद और विश्वास मजबूत होंगे, तभी राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया भी मजबूत होगी।
लद्दाख वापसी के साथ सकारात्मक संदेश
हाल ही में 26 दिनों तक चले अपने भूख हड़ताल आंदोलन के बाद अब सोनम वांगचुक लद्दाख लौट रहे हैं। उनका यह संदेश केवल रेलवे की प्रशंसा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा, युवाओं के भविष्य और सरकार की जवाबदेही पर भी केंद्रित रहा। यह दिखाता है कि विकास के साथ-साथ विश्वास और संवाद भी किसी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत होते हैं।
सोनम वांगचुक का बयान एक संतुलित दृष्टिकोण पेश करता है। उन्होंने जहां भारतीय रेलवे की उपलब्धियों की सराहना की, वहीं शिक्षा सुधार, छात्रों के हित और सरकारी वादों के पालन की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका संदेश यही है कि विकास तभी सार्थक होगा, जब उसके साथ विश्वास, पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता भी जुड़ी हो।