देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने कच्ची चीनी के आयात और घरेलू बिक्री से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए प्रावधानों के तहत आयातकों को हर खेप की चीनी तय समय में रिफाइन करके बाजार में उतारनी होगी।
चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी
देशभर में चीनी के दाम बढ़ने से आम उपभोक्ताओं पर असर पड़ा है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 20 जुलाई को चीनी की औसत खुदरा कीमत 48.18 रुपये प्रति किलो थी।
20 अगस्त तक यह बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई। यानी करीब एक महीने में कीमत 7.52 रुपये प्रति किलो, लगभग 15.6 प्रतिशत बढ़ी है। त्योहारों के मौसम से पहले यह बढ़ोतरी घरेलू बजट के लिए चिंता बढ़ा सकती है।
सरकार ने बदला कच्ची चीनी का नियम
बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र ने TRQ यानी टैरिफ रेट कोटा के तहत आयात की जाने वाली कच्ची चीनी के नियमों में बदलाव किया है।
पहले आयात की गई चीनी को घरेलू बाजार में बेचने के लिए 31 अक्टूबर 2026 की एक साझा अंतिम समय सीमा निर्धारित थी। अब व्यवस्था को खेप आधारित कर दिया गया है।
हर खेप के लिए दो महीने की समय सीमा
नए नियम के मुताबिक आयातक को बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से दो महीने के भीतर कच्ची चीनी को रिफाइन कर सफेद चीनी के रूप में घरेलू बाजार में बेचनी होगी।

सरकार ने कुल 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के TRQ आयात से जुड़े नियमों में यह बदलाव किया है। माना जा रहा है कि इससे आयातित कच्ची चीनी को लंबे समय तक रोककर रखने की संभावना कम होगी और घरेलू बाजार में आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी।
उत्पादन में कमी बनी बड़ी चुनौती
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने चीनी उत्पादन में कमी को लेकर चिंता जताई है। उनके मुताबिक गन्ने की फसल पर अल नीनो जैसी मौसम संबंधी परिस्थितियों का असर पड़ा है। इसका प्रभाव केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक चीनी उत्पादन पर भी पड़ा है।
भारत में सालाना चीनी की जरूरत करीब 280 लाख टन बताई गई है। सरकार के अनुसार देश में अभी भी 20-25 लाख टन से अधिक अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है।
उपभोक्ताओं को कब मिलेगी राहत?
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उत्पादन, स्टॉक और बाजार की मांग के बीच संतुलन बनाए रखने की है। सिर्फ आयात के नियम बदलने से कीमतों में तत्काल गिरावट आएगी, यह कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन घरेलू बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति बनाए रखना कीमतों पर दबाव कम करने में मदद कर सकता है।
चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार का नया फैसला बाजार में आपूर्ति को तेज करने की कोशिश है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आयातित कच्ची चीनी कितनी तेजी से रिफाइन होकर बाजार में पहुंचती है और इसका सीधा असर आम उपभोक्ता की जेब पर कब दिखाई देता है।