महिला आरक्षण कानून के लागू होने और परिसीमन को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच एक बार फिर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। राहुल गांधी के महिला अधिकारों से जुड़े बयान के बाद बीजेपी ने सवाल उठाए, जबकि कांग्रेस ने कानून के समर्थन और उसके लागू होने में देरी को मुद्दा बनाया है।
महिला आरक्षण पर फिर शुरू हुई बहस
महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले कानून को लेकर सियासी बहस नए सिरे से तेज हो गई है। राहुल गांधी के महिला सशक्तिकरण और मनुस्मृति को लेकर दिए गए बयान के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर सवाल खड़े किए।
बीजेपी का कहना है कि अगर कांग्रेस वास्तव में महिला आरक्षण के पक्ष में है, तो उसे कानून के जल्द लागू होने का समर्थन करना चाहिए।
कांग्रेस ने समर्थन का दिया हवाला
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को कांग्रेस ने संसद के दोनों सदनों में पूरा समर्थन दिया था। उनके मुताबिक, लोकसभा ने 20 सितंबर 2023 और राज्यसभा ने 21 सितंबर 2023 को विधेयक पारित किया था।

कांग्रेस का आरोप है कि कानून को जनगणना और परिसीमन से जोड़ने के कारण इसके प्रभावी होने में देरी हुई है। पार्टी सरकार से सवाल कर रही है कि महिलाओं को आरक्षण देने वाले कानून को तत्काल लागू क्यों नहीं किया गया।
पी चिदंबरम ने भी बीजेपी पर साधा निशाना
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कथित बयान का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने संविधान के 106वें संशोधन विधेयक का संसद के दोनों सदनों में समर्थन किया था।
चिदंबरम ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस पर महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करने का आरोप लगाना सही नहीं है।
राहुल गांधी के मनुस्मृति वाले बयान से जुड़ा विवाद
पूरी बहस की पृष्ठभूमि में राहुल गांधी का पुणे में दिया गया बयान भी है। उन्होंने मनुस्मृति में महिलाओं की स्वतंत्रता से जुड़े विचारों की आलोचना करते हुए कहा था कि महिलाओं को दबाने वाली मानसिकता के खिलाफ लड़ाई जरूरी है।
राहुल ने बीजेपी और आरएसएस पर महिलाओं को लेकर एक अलग सोच रखने का आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस ऐसा भारत चाहती है, जहां सभी को सम्मान मिले।
स्मृति ईरानी ने किया पलटवार
बीजेपी नेता स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों के समर्थन को सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी से महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू करने की पहल का समर्थन करने की अपील की।
बीजेपी का तर्क है कि संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने वाले कानून को आगे बढ़ाने के लिए विपक्ष को सरकार का साथ देना चाहिए।
असली विवाद कानून लागू होने की समयसीमा पर
महिला आरक्षण पर मौजूदा राजनीतिक टकराव सिर्फ समर्थन या विरोध तक सीमित नहीं है। असली सवाल इसके प्रभावी होने की प्रक्रिया और परिसीमन से जुड़ा है।
एक तरफ बीजेपी कांग्रेस से उसके रुख पर स्पष्टता मांग रही है, वहीं कांग्रेस कानून पारित कराने में अपने समर्थन का हवाला देकर सरकार से इसके क्रियान्वयन की समयसीमा पूछ रही है।
आखिरकार, इस पूरे विवाद का केंद्र महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी है। संसद में महिलाओं की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य तभी वास्तविक बदलाव बनेगा, जब कानून के साथ उसकी लागू होने की प्रक्रिया भी स्पष्ट और समयबद्ध हो।