यमुनानगर जिले के फूड सप्लाई विभाग के अधिकारी अपने वेतन के बावजूद बिना पैसे काम करने को तैयार नहीं थे। ऐसे ही एक मामले में विभाग के इंस्पेक्टर और एएफएसओ ने 15 अगस्त को जिले के सभी डिपो संचालकों से 7100 रुपये मासिक और 500 रुपये लड्डू के नाम पर मांग की। आरोप है कि बैठक में प्रति क्विंटल गेहूं 10 रुपये का कमीशन भी तय किया गया और बाकी खर्च अलग था।
गुलाब सिंह को दी गई राशि इकट्ठा करने की जिम्मेदारी
बैठक में तय राशि को इकट्ठा करने का काम डिपो प्रमुख गुलाब सिंह को सौंपा गया। अधिकांश डिपो संचालकों ने अपनी हिस्सेदारी भेज दी, लेकिन बिलासपुर के डिपो संचालक नितिन ने इस अवैध मांग के खिलाफ DFSC में शिकायत दर्ज कराई। वहाँ उसे अपमान का सामना करना पड़ा, लेकिन नितिन ने बैठक की रिकॉर्डिंग अपने मोबाइल में कर ली।

मोबाइल रिकॉर्डिंग से खुला सच
नितिन ने मोबाइल रिकॉर्डिंग के आधार पर Vigilance ऑफिस का रुख किया। इस रिकॉर्डिंग ने साबित कर दिया कि अधिकारी अवैध तरीके से राशि की मांग कर रहे थे और डिपो संचालकों को धमकी दी जा रही थी। इंस्पेक्टर ने धमकी दी कि यदि नितिन पैसे नहीं देगा तो डिपो को सस्पेंड कर दिया जाएगा।
Vigilance ने जाल बिछाकर कार्रवाई की
जांच टीम ने पूरी योजना बनाई और जाल बिछाया। जैसे ही इंस्पेक्टर राजेश यादव और गुलाब सिंह 7100 रुपये लेने पहुंचे, Vigilance ने गुलाब सिंह को पकड़ लिया, जबकि इंस्पेक्टर राजेश यादव मौके से फरार हो गए। टीम ने 7100 रुपये बरामद किए और गुलाब सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
आगे की कार्रवाई और संदेश
Vigilance ने कहा कि राजेश यादव को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन अधिकारी शामिल थे और उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह घटना स्पष्ट संदेश देती है कि सरकारी कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले भ्रष्टाचार पर नज़र रखी जा रही है और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं रखा जाएगा।


















