असौड़ा की सरकारी बालिका वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की जर्जर बिल्डिंग में एक कमरे की छत गिर गई। सौभाग्य से उस समय वहां कोई कक्षा नहीं चल रही थी। बीईओ निरीक्षण के लिए पहुंचे तो प्रधानाचार्य वहां नहीं मिले। इसके बाद बीईओ ने प्रधानाचार्य के कार्यकाल में मिले अनुदान की जांच के लिए समिति का गठन किया।
छात्राओं की सुरक्षा को देखते हुए शिफ्ट किया स्कूल
बीईओ ने स्कूल की स्थिति देखकर वहां पढ़ाई कर रही छात्राओं को गांव के दूसरे स्कूल में शिफ्ट करने का आदेश दिया। अब बालिकाओं की कक्षाएं शाम के समय वहां आयोजित की जाएंगी। असौड़ा गांव का यह बालिका विद्यालय 40 साल से अधिक पुराना है। गुरुवार दोपहर को स्कूल के मध्य हिस्से की छत गिर गई, जिससे वहां खड़े कर्मचारियों और छात्राओं में डर फैल गया।

प्रधानाचार्य की अनुपस्थिति पर सवाल
छत गिरने की जानकारी मिलने के बाद बीईओ शेर सिंह मौके पर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान प्रधानाचार्य का कहीं कोई सुराग नहीं मिला। बीईओ ने स्कूल के कर्मचारियों से बात कर इसे दूसरी जगह शिफ्ट करने की व्यवस्था की। बालिका विद्यालय में 250 से अधिक छात्राएं पढ़ती हैं, इस स्थिति में ग्रामीण भी चिंतित हैं कि कितनी देर तक दोनों स्कूल एक ही भवन में चल पाएंगे।
छह वर्षों से कार्यरत प्रधानाचार्य पर जांच शुरू
छह साल से यहां कार्यरत प्रधानाचार्य के कार्यकाल में स्कूल की स्थिति देखकर बीईओ ने समिति का गठन किया। समिति यह जांचेगी कि पिछले छह वर्षों में स्कूल को कितनी धनराशि मिली और उसे कितने मरम्मत और रखरखाव के कार्यों में सही तरीके से खर्च किया गया। विद्यालय की जर्जर स्थिति देखकर यह आशंका जताई जा रही है कि सरकारी बजट के अनुसार काम नहीं किया गया।
स्कूल की मरम्मत और बजट की जांच
बीईओ शेर सिंह ने बताया कि जिस कमरे की छत गिरी, वह पहले से ही खतरनाक स्थिति में था और वहां कोई कक्षा नहीं होती थी। प्रधानाचार्य की अनुपस्थिति और स्कूल की स्थिति को देखते हुए समिति बनाई गई है। यह समिति जांचेगी कि वर्तमान प्रधानाचार्य ने अपने कार्यकाल में स्कूल की मरम्मत के लिए मिले बजट का सही उपयोग किया या नहीं।

Leave a Reply