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  • लाडो लक्ष्मी योजना में बहुओं को 2100 रुपये पाने में बाधा, सास-ससुर के आधार नंबर की जटिल शर्तें

    लाडो लक्ष्मी योजना में बहुओं को 2100 रुपये पाने में बाधा, सास-ससुर के आधार नंबर की जटिल शर्तें

    प्रदेश सरकार की लाडो लक्ष्मी योजना के तहत 2100 रुपये पाना उन बहुओं के लिए मुश्किल हो रहा है, जिनका अपने सास-ससुर के साथ मनमुटाव है। दरअसल, योजना के तहत उन्हें आवेदन करने के लिए ससुराल पक्ष के सभी सदस्यों के आधार नंबर की जरूरत पड़ रही है। ऐसे में सास-ससुर साथ देंगे, तभी वे लाभार्थी बनकर धन (लक्ष्मी) का लाभ ले सकेंगी।

    लाडो लक्ष्मी योजना में बहुओं को 2100 रुपये पाने में बाधा, सास-ससुर के आधार नंबर की जटिल शर्तें

    पहले चरण में योजना का लाभ उन्हीं अंत्योदय परिवारों की महिलाओं को मिलना है, जिनकी सालाना आमदनी एक लाख रुपये से कम है। लेकिन मोबाइल एप की तकनीकी दिक्कतों और दस्तावेजों की जटिल शर्तों के चलते अधिकांश महिलाओं का पंजीकरण अटक रहा है। जिन महिलाओं का पंजीकरण शुरू होता है, वे सास-ससुर या माता-पिता का आधार कार्ड उपलब्ध न होने के कारण आगे नहीं बढ़ पातीं। यहां तक कि माता-पिता या सास-ससुर के न होने की स्थिति में मृत्यु प्रमाण पत्र देना भी अनिवार्य है।

    महिलाओं का कहना है कि जब परिवार पहचान पत्र में पहले से आधार नंबर दर्ज हैं, तो दोबारा उनसे दस्तावेज़ क्यों मांगे जा रहे हैं। सबसे अधिक दिक्कत रिहायशी प्रमाण पत्र को लेकर सामने आ रही है। सरकार के नियमों के अनुसार, सरल पोर्टल पर आवेदन करने के बाद ही रिहायशी प्रमाण पत्र बनता है, जिसके लिए ग्रामीण महिलाओं को नंबरदार, पटवारी व तहसीलदार और शहरी महिलाओं को पार्षद, नगरपालिका सचिव व तहसीलदार के हस्ताक्षर कराने पड़ते हैं। इस प्रक्रिया में कई दिन लग जाते हैं।

  • हरियाणा में प्रदूषण नियंत्रण का नया अभियान, 592 टीमों से राज्यभर में पराली और निर्माण साइटों की निगरानी

    हरियाणा में प्रदूषण नियंत्रण का नया अभियान, 592 टीमों से राज्यभर में पराली और निर्माण साइटों की निगरानी

    हरियाणा सरकार ने प्रदूषण पर कड़ा नियंत्रण करने के लिए विशेष तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। इस बार केवल फरीदाबाद जिले में ही 149 टीमों को तैनात किया जाएगा, जो पराली जलाने वाले किसानों पर नजर रखेंगे। पूरे प्रभाग में लगभग 592 टीमें सक्रिय होंगी, जो करीब 3,000 किसानों की गतिविधियों पर निगरानी रखेंगी। अगर कोई किसान पराली जलाते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी। पूरे राज्य में ऐसी ही टीमें पराली जलाने वालों पर निगरानी रखती रहेंगी।

    फसल कटाई और अवशेष रिपोर्टिंग

    इन टीमों का एक महत्वपूर्ण काम फसल कटाई और बचे हुए पराली अवशेषों की रिपोर्ट तैयार करना भी है। यह रिपोर्ट जिला उपायुक्त के माध्यम से उच्च अधिकारियों को प्रस्तुत की जाएगी। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा इन टीमों के गठन और नियुक्ति की जिम्मेदारी ली जाएगी। आवश्यकतानुसार ग्रेइटेड रेस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के विभिन्न चरणों में टीमों की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है।

    हरियाणा में प्रदूषण नियंत्रण का नया अभियान, 592 टीमों से राज्यभर में पराली और निर्माण साइटों की निगरानी

    निर्माण स्थलों पर कड़ी निगरानी

    प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि निर्माण गतिविधियां भी प्रदूषण में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। अब केवल बोर्ड द्वारा अनुमोदित निर्माण स्थल ही काम कर सकेंगे। किसी भी निर्माण स्थल के मालिक के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे बोर्ड से NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) प्राप्त करें। मौजूदा निर्माण स्थलों को भी प्रदूषण नियंत्रण मानकों को पूरा करना होगा। FMDA, नगर निगम क्षेत्रीय कार्यालय और HSVP जैसी विभागीय एजेंसियां NOC जारी करने में सहयोग करेंगी ताकि GRAP लागू होने से पहले सभी मानक पूरे हों।

    कड़ी कार्रवाई और जुर्माना

    पलवल के उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ के अनुसार, पराली जलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उल्लंघन करने वालों पर ₹5,000 से ₹30,000 तक का जुर्माना लगाया जाएगा और FIR दर्ज की जाएगी। इसके अलावा, ऐसे किसान अगले दो वर्षों तक MSP पर अपनी फसल नहीं बेच पाएंगे। यह कदम प्रदूषण पर अंकुश लगाने और किसानों को सतर्क करने के लिए उठाया गया है।

    सहायता और हेल्पलाइन

    सरकार किसानों को पराली जलाने के बजाय आय के स्रोत में बदलने के विकल्प भी उपलब्ध कराएगी। आम जनता भी कृषि और किसान कल्याण विभाग को पराली जलाने की सूचना दे सकती है। इस उद्देश्य के लिए 01275-254060 नंबर की हेल्पलाइन जारी की गई है। इससे न केवल प्रदूषण पर नियंत्रण रहेगा बल्कि किसानों को जागरूक और समर्थ बनाने में भी मदद मिलेगी।

  • प्रदेश सरकार और राइस मिलर्स के बीच हुआ समझौता, बैंक गारंटी को लेकर कई दिनों से चल रहा था विवाद

    प्रदेश सरकार और राइस मिलर्स के बीच हुआ समझौता, बैंक गारंटी को लेकर कई दिनों से चल रहा था विवाद

    पिछले कई दिनों से प्रदेश सरकार और राइस मिलर्स के बीच बैंक गारंटी को लेकर चल रहा विवाद अब समाप्त हो गया है। दोनों के बीच इस मामले को लेकर समझौता हो गया है। खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर और मिलर्स एसोसिएशन के बीच चंडीगढ़ में हुई बैठक में इस मुद्दे पर सहमति बनी है। बैठक में तय किया गया कि सभी राइस मिलर्स को 15 नवंबर तक बैंक गारंटी जमा करवानी होगी।

    बैंक गारंटी की शर्तें स्पष्ट की गईं

    सरकार और राइस मिलर्स के बीच सहमति बनी है कि जिन राइस मिलर्स ने 15 मार्च 2025 तक चावल की गाड़ियां लगा दी हैं, उन्हें डेढ़ प्रतिशत (1.5%) बैंक गारंटी जमा करनी होगी। जिन राइस मिलर्स ने मार्च 2025 के बाद चावल की गाड़ियां लगाई हैं, उन्हें तीन प्रतिशत (3%) बैंक गारंटी जमा करनी होगी। अगर कोई राइस मिलर तय समय पर बैंक गारंटी जमा नहीं कराता है, तो उसके आवंटित धान को कस्टम मिलिंग के लिए अन्य मिलर्स को अलॉट कर दिया जाएगा।

    प्रदेश सरकार और राइस मिलर्स के बीच हुआ समझौता, बैंक गारंटी को लेकर कई दिनों से चल रहा था विवाद

    खरीद एजेंसियों ने लगाई सख्त शर्तें

    खरीद एजेंसी हैफेड, वेयरहाउस, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग समेत सभी संबंधित एजेंसियों ने इस शर्त को लागू किया है। साथ ही, जो राइस मिलर्स ई-खरीद पोर्टल पर पंजीकरण करवा रहे हैं, उनके लिए बैंक गारंटी वाले कॉलम को भरना अनिवार्य कर दिया गया है। फिलहाल, खरीद एजेंसियां इस कॉलम में ऑप्शन उपलब्ध कराने की मांग कर रही हैं ताकि प्रक्रिया और सरल हो सके।

    राइस मिलर्स को मिला 50 हजार क्विंटल धान का आवंटन

    राइस मिलर्स को कुल 50,000 क्विंटल धान का आवंटन किया गया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के अनुसार, धान की कीमत 2,389 रुपये प्रति क्विंटल है, जिससे कुल मूल्य लगभग 11 करोड़ 94 लाख 50 हजार रुपये होता है। इस हिसाब से, राइस मिलर्स को 35 लाख 83 हजार रुपये की बैंक गारंटी जमा करनी होगी।

    तय समय पर बैंक गारंटी न जमा करने पर कार्रवाई

    यदि राइस मिलर्स नियत समय तक बैंक गारंटी जमा नहीं करवाते हैं, तो उनके आवंटित धान का कस्टम मिलिंग का अधिकार दूसरे मिलर्स को दे दिया जाएगा।

  • हरियाणा की योजना के सहारे भाजपा की पंजाब और बिहार की चुनाव वैतरणी पार करने की योजना  ‘दीनदयाल लाडो लक्ष्मी’ योजना लांच

    हरियाणा की योजना के सहारे भाजपा की पंजाब और बिहार की चुनाव वैतरणी पार करने की योजना ‘दीनदयाल लाडो लक्ष्मी’ योजना लांच

    हरियाणा की महत्वाकांक्षी ‘दीनदयाल लाडो लक्ष्मी’ योजना को प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय स्वरूप देने और इसका बिहार से पंजाब तक राजनीतिक लाभ लेने की तैयारी शुरू कर दी है। अब यह योजना भाजपा की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है। मुख्यमंत्री नायब सैनी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर इस योजना की पहली किस्त उनके हाथों से दिलाने का अनुरोध करेंगे। भाजपा की मंशा साफ है कि इस योजना को हरियाणा तक सीमित न रखकर बिहार और पंजाब जैसे राज्यों जहां निकट भविष्य में चुनाव होने वाले हैं, वहां इसको प्रचारित कर इसका राजनीतिक लाभ लेना भी है।

    हरियाणा के मुख्यमंत्री ने आज पंचकूला में राज्य स्तरीय समारोह में लाडो लक्ष्मी योजना का रजिस्ट्रेशन ऐप लॉन्च कर दिया। इस दिन सभी जिलों में मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के जरिए भी यही ऐप लॉन्च कराया गया। ताकि इसे एक बड़े सामूहिक कार्यक्रम का रूप दिया जा सके। सरकार ने इस लॉन्च को लेकर इतनी गंभीरता दिखाई है कि 22 और 23 सितंबर की सार्वजनिक छुट्टियों के बावजूद समाज कल्याण, स्वास्थ्य और नागरिक संसाधन सूचना विभाग के अफसरों की ड्यूटी लगी रही। पोर्टल का काम पूरा हो चुका है और लॉन्चिंग से पहले हर स्तर पर इसकी टेस्टिंग करवाई गई है।

    हरियाणा की योजना के सहारे भाजपा की पंजाब और बिहार की चुनाव वैतरणी पार करने की योजना  ‘दीनदयाल लाडो लक्ष्मी’ योजना लांच

    भाजपा सूत्रों का कहना है कि पहले सरकार इसे एक साथ एक लाख 80 हजार रुपए तक की पारिवारिक आय वाली महिलाओं के लिए लागू करने वाली थी लेकिन इसमें दिक्कत आ सकती थी इसलिए सरकार ने इसे तीन चरणों में लागू करने का फैसला किया है। पहले चरण में यह योजना एक लाख रुपए वार्षिक आय वाले परिवारों के लिए है और दूसरे चरण में यह योजना एक लाख 80 हजार रुपए वार्षिक आय वाले परिवारों के लिए आ जाएगी। इसके बाद 3 लाख रुपए सालाना आय वाले परिवार भी इसमें शामिल होंगे। पहले चरण में यह योजना 20 लाख महिलाओं को लाभान्वित करेगी लेकिन जब इसके तीनों चरण पूरे हो जाएंगे तो इसे 50 लाख महिलाओं को लाभ मिलने लगेगा।

    मुख्यमंत्री नायब सैनी के लिए यह योजना उनकी राजनीतिक साख से भी जुड़ी हुई है। भाजपा नेतृत्व उन्हें एक जनहितकारी और ठोस फैसले लेने वाले मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करना चाहता है। यही वजह है कि सैनी खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं कर रहे। इस योजना के साथ ही हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी देवीलाल और बंसीलाल की श्रेणी में आकर खड़े हो गए हैं। जानकारों का मानना है कि अगर यह योजना बिना अड़चनों के लागू हो जाती है तो सैनी न सिर्फ राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करेंगे, बल्कि राष्ट्रीय नेतृत्व की नजरों में भी भरोसेमंद चेहरे के रूप में उभरेंगे।

    बता दें कि 2024 विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने महिलाओं को 2100 रुपए प्रति माह देने का वादा किया था। बजट में इस मद के लिए 5000 करोड़ रुपए का प्रावधान भी कर दिया गया था। सरकार ने इस योजना को ऐसे हिसाब से जारी किया है कि जो सरकार ने अपने बजट में 5000 करोड रुपए का प्रावधान किया है फिलहाल उसे 5000 करोड रुपए में काम चल जाएगा। नए बजट में इसकी राशि बढ़ाकर सिर्फ 8000 करोड़ से 10 हजार करोड़ रुपए किए जाने का प्रावधान की बात सामने आ रही है।

    अब सरकार ने नई सरकार की गठन के 1 साल पूरा होने से पहले ही इस योजना की शुरुआत कर जनता के बीच यह संदेश देना चाहा है कि भाजपा अपने वादों को निभाती है। माना जा रहा है कि यह कदम विपक्ष की उस आलोचना को कमजोर कर देगा जिसमें सरकार पर चुनावी घोषणाएं भूल जाने का आरोप लगाया जाता रहा है।

    बिहार में इसी साल और पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और भाजपा हरियाणा की इस योजना को पंजाब और बिहार में प्रचारित करने का काम करेगी ताकि उसे इन राज्यों में राजनीतिक लाभ मिल सके और वहां की महिलाओं को पार्टी के साथ जोड़ना आसान हो सके।

    21 लाख महिलाओं तक पहुंचेगा लाभ

    योजना के पहले फेज में राज्य की करीब 21 लाख महिलाओं को शामिल किया गया है। इनमें उन परिवारों की महिलाएं हैं जिनकी सालाना आय एक लाख रुपए से कम है। 23 से 45 साल की 2 लाख 82 हजार 635 अविवाहित महिलाएं हैं, जो इसमें कवर होंगी। इसी तरह 18 लाख 16 हजार 621 विवाहित लाभार्थी महिलाएं हैं, जिनकी उम्र 23 से 60 साल है। 60 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद वृद्धावस्था पेंशन का लाभ आटोमेटिक तरीके से मिलना शुरू हो जाएगा। इस योजना में आने वाली महिलाओं को इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि 2 महीने में कम से कम एक बार वह अपने इस पैसे को निकाल लें। यह पैसा नहीं निकाले जाने की सूरत में यह राशि बंद हो जाएगी।

  • Namo Yuva Run: CM नायब सैनी ने युवाओं के साथ लगाई दौड़, कुशल और जिम्मेदार नागरिक बनाने का दिया संदेश

    Namo Yuva Run: CM नायब सैनी ने युवाओं के साथ लगाई दौड़, कुशल और जिम्मेदार नागरिक बनाने का दिया संदेश

    Namo Yuva Run: कुरुक्षेत्र के पवित्र शहर में आयोजित नामा युवा रन का उद्घाटन हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने स्वयं दौड़ लगाई और युवाओं के साथ भाग लिया। भाजपा राज्य अध्यक्ष मोहन लाल कौशिक, सांसद नवीन जिंदल, और पूर्व मंत्री सुभाष सुधा भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, क्योंकि युवा ही राष्ट्र की असली ताकत और धन हैं।

    युवाओं की सक्रिय भूमिका राजनीति में

    मुख्यमंत्री नायब सैनी ने युवाओं से राजनीति और लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि युवा भागीदारी से सिंहासन परिवारवाद और वंशवाद राजनीति समाप्त हो सकती है। उन्होंने कहा कि आज तकनीकी प्रगति ने हमारी जिंदगी को आसान बना दिया है और राज्य तेजी से विकास की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने यह भी कहा कि युवा ही एक स्वच्छ और सशक्त राष्ट्र की नींव हैं।

    Namo Yuva Run: CM नायब सैनी ने युवाओं के साथ लगाई दौड़, कुशल और जिम्मेदार नागरिक बनाने का दिया संदेश

    कौशल विकास और सरकार की पहल

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में कौशल विकास पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। सरकार इस दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसके अलावा युवाओं को व्यस्त और प्रेरित रखने के लिए मैराथन, साइक्लोथॉन और अन्य खेल आयोजन आयोजित किए जा रहे हैं। यह पहल न केवल युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करती है, बल्कि उनके सामूहिक विकास में भी मदद करती है।

    लोकतंत्र में युवाओं का महत्व

    सैनी ने जोर देकर कहा कि जितना अधिक युवा लोकतंत्र में सक्रिय होंगे, उतना ही देश और राज्य का भविष्य उज्जवल होगा। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सकारात्मक भूमिका निभाएं और भ्रष्टाचार व परिवारवाद राजनीति को समाप्त करें। उनका कहना था कि युवा ही समाज में बदलाव की सबसे बड़ी शक्ति हैं और उन्हें जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्व निभाने चाहिए।

    सरकार की प्रतिबद्धता और भविष्य की दिशा

    मुख्यमंत्री नायब सैनी ने इस अवसर पर यह भी स्पष्ट किया कि सरकार युवाओं की भलाई और उनके विकास के लिए समग्र नीतियां और योजनाएं बना रही है। नशे से मुक्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेलकूद और कौशल विकास के क्षेत्र में लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं की भागीदारी और सक्रियता ही हरियाणा और भारत के उज्जवल भविष्य की कुंजी है।

  • हरियाणा में चावल वितरण की अवधि बढ़ी, CM सैनी ने मिल मालिकों को 50 करोड़ रुपये की राहत का किया ऐलान

    हरियाणा में चावल वितरण की अवधि बढ़ी, CM सैनी ने मिल मालिकों को 50 करोड़ रुपये की राहत का किया ऐलान

    हरियाणा सरकार ने शनिवार, 20 सितंबर को चावल वितरण अवधि को 15 मार्च से बढ़ाकर 30 जून कर दिया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि इस कदम से राज्य में लगभग 1,000 चावल मिलों को सीधे लाभ होगा। उन्होंने बताया कि मिल मालिकों को होल्डिंग फीस में लगभग 50 करोड़ रुपये की राहत मिलेगी।

    मिल मालिकों की मांगों को मिला मान्यता

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन ने सरकार को सूचित किया था कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने चावल की आपूर्ति में लगभग 45 दिन की देरी की। इससे मिल मालिक समय पर अपना कार्य पूरा नहीं कर पाए। उनकी मांग को मान्यता देते हुए सरकार ने बोनस पात्रता अवधि को 15 मार्च से 30 जून तक बढ़ा दिया। इसके अलावा, मिल मालिकों के लिए चावल वितरण अवधि को भी 30 जून तक विस्तारित किया गया।

    हरियाणा में चावल वितरण की अवधि बढ़ी, CM सैनी ने मिल मालिकों को 50 करोड़ रुपये की राहत का किया ऐलान

    किसानों के हित में सरकार का निर्णय

    सैनी ने कहा कि राज्य सरकार हमेशा किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रही है। इसी उद्देश्य से इस साल धान की सरकारी खरीद 1 अक्टूबर की बजाय 22 सितंबर से शुरू होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी किसानों को गुमराह करने का प्रयास कर रही है और दावा कर रही है कि भाजपा सरकार MSP प्रणाली को समाप्त कर देगी।

    MSP में निरंतर वृद्धि

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने फसलों के लिए MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) को लगातार बढ़ाया है। 2014 में सामान्य धान का MSP 1,360 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर 2,369 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। इसी तरह, ग्रेड-ए धान का MSP 1,400 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 2,389 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। इससे किसानों को उनकी उपज के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित होगा।

    किसानों और मिल मालिकों के लिए सरकार का संदेश

    सैनी ने किसानों से अपील की कि वे सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को समझें और अफवाहों में न आएं। उन्होंने कहा कि मिलों को समय पर चावल वितरण सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी। इस निर्णय से न केवल मिल मालिकों को राहत मिलेगी बल्कि किसानों को भी उनकी उपज के लिए बेहतर मूल्य और सुरक्षित वितरण प्रणाली सुनिश्चित होगी।

  • प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार पर किया कड़ा प्रहार जींद-रोहतक मार्केटिंग बोर्ड के पांच अधिकारी सस्पेंड 10 करोड़ का विवाद

    प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार पर किया कड़ा प्रहार जींद-रोहतक मार्केटिंग बोर्ड के पांच अधिकारी सस्पेंड 10 करोड़ का विवाद

    प्रदेश सरकार ने जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन की अपनी नीति पर चलते हुए जींद और रोहतक में मार्केटिंग बोर्ड के एसडीओ, जेई समेत 5 कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है। इनमें चार जींद के और एक रोहतक की एसडीई शामिल हैं। सस्पेंड किए गए अधिकारियों में एक जींद की बड़ी भाजपा महिला नेत्री के पति हैं। सरकार ने अपनी ही महिला नेता के पति को सस्पेंड करके साफ संदेश दिया है कि वह करप्शन पर किसी प्रकार का कोई समझौता नहीं करेगी।

    प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार पर किया कड़ा प्रहार जींद-रोहतक मार्केटिंग बोर्ड के पांच अधिकारी सस्पेंड 10 करोड़ का विवाद

    आरोप है कि जींद के कर्मचारियों ने सब यार्ड और सड़कों का काम पूरा किए बिना ही 10 करोड़ रुपए पेमेंट कर दी। इसकी जांच हुई तो मामले का खुलासा हुआ और इसके बाद हरियाणा मार्केटिंग बोर्ड पंचकूला मुख्य प्रशासक कार्यालय की तरफ से पांच कर्मचारियों के सस्पेंशन ऑर्डर जारी हुए। हालांकि रोहतक मार्केटिंग बोर्ड की एसडीई सीमा के सस्पेंशन का कारण तत्काल नहीं पता चल पाया है।

    मार्केटिंग बोर्ड के मुख्य प्रशासक द्वारा जींद मार्केटिंग बोर्ड के एसडीओ रवि प्रकाश, एसडीई रोशन लाल, जेई नरेश कुमार, जेई सुरेंद्र कुमार और रोहतक मार्केटिंग बोर्ड की एसडीई सीमा को सस्पेंड किया है। इस मामले में एसडीओ रवि प्रकाश से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

    सस्पेंशन अवधि के दौरान एसडीओ रवि प्रकाश नैन और जेई नरेश कुमार का मुख्यालय हिसार एसई कार्यालय और एसडीई रोशन लाल व जेई सुरेंद्र कुमार का मुख्यालय रोहतक एसई कार्यालय रहेगा। वहीं रोहतक की एसडीओ सीमा का निलंबन के दौरान मुख्यालय जींद एसई कार्यालय रहेगा।

  • Haryana: अग्रवाल वैश्य समाज ने प्रदेश सरकार से समाज को लेकर रखी 6 मांगे, प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल को लिखा पत्र

    Haryana: अग्रवाल वैश्य समाज ने प्रदेश सरकार से समाज को लेकर रखी 6 मांगे, प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल को लिखा पत्र

    Haryana: हरियाणा सरकार पहली बार प्रदेश स्तर पर महाराजा अग्रसेन जयंती पर कार्यक्रम आयोजित कर रही है। पंचकूला के इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में होने वाले इस कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सैनी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे जबकि प्रदेश के राजस्व एवं शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल समारोह की अध्यक्षता करेंगे। कार्यक्रम में समाज की एकता, संस्कृति और संगठनात्मक शक्ति का अद्भुत परिचय मिलेगा।

    अग्रवाल वैश्य समाज के प्रदेश महासचिव बलराम गुप्ता ने समाज के लोगों से इस समारोह में ज्यादा से ज्यादा सहभागिता करने का अमानत करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम में शामिल होकर समाज की शक्ति और एकजुटता का परिचय देना चाहिए। इससे समाज की आने वाली पीढ़ियों को सामाजिक एकता का संदेश मिलेगा।

    अग्रवाल वैश्य समाज के महासचिव राजेश सिंगला ने इस कार्यक्रम को लेकर प्रदेश के शहरी निकाय एवं साक्षर मंत्री विपुल गोयल को एक पत्र लिखकर 6 मांगे उनके सामने रखी हैं और कहा है कि अग्रसेन जयंती के कार्यक्रम में इन मांगों पर विचार किया जाना चाहिए। इनमें से अधिकांश मांगे ऐसी हैं जिन पर सरकार का एक भी पैसा खर्च नहीं होगा।

    Haryana: अग्रवाल वैश्य समाज ने प्रदेश सरकार से समाज को लेकर रखी 6 मांगे, प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल को लिखा पत्र

    उन्होंने बताया कि महाराजा अग्रसेन मार्ग के नाम से भी क्या राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 9 जो दिल्ली से अग्रोहा होते हुए फाजिल्का पंजाब तक जाता है। इस पर बहादुरगढ़ में गेटवे आफ हरियाणा पर महाराजा अग्रसेन के नाम से विशाल गेट का निर्माण करवाया जाना चाहिए। उनकी दूसरी मांग में इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर में महाराजा अग्रसेन के नाम पर स्थापित शोध पीठ के संचालन हेतु पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करवाया जाना शामिल है। तीसरी मांग में कहा गया है कि प्रदेश के कोसली, बावल, कलायत, बलौदा, तरावड़ी, राई, खरखोदा बवानीखेड़ा, पिहोवा, बादली एवं बहादुरगढ़ ऐसे शहर है जहां पर महाराजा अग्रसेन की कोई प्रतिमा नहीं लगी हुई है। सरकार इन शहरों में महाराजा अग्रसेन की प्रतिमा स्थापित करवाने के लिए जगह उपलब्ध करवाए।

    समाज ने एक अन्य मांग करते हुए कहा है कि अग्रोहा में पूरे देश से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग आते हैं। इसके विकास से प्रदेश और समाज के सम्मान में वृद्धि होगी। इसलिए सरकार कुरुक्षेत्र विकास प्राधिकरण की तर्ज पर अग्रोहा विकास प्राधिकरण बनाने का काम करे।

    समाज ने हरियाणा के स्वतंत्रता सेनानियों रेवाड़ी के बालमुकुंद गुप्त, भिवानी के बनारसी दास गुप्त, पानीपत के देशबंधु गुप्त, करनाल के मूलचंद जैन, हिसार के हुकुमचंद जैन जैसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर उनकी कर्मभूमि में उनके नाम से मुख्य मार्ग बनवाने का प्रस्ताव भी रखा है। समाज ने पंजाब के संगरूर जिले के भवानीगढ़ से हरियाणा की सीमा ब्राह्मण वाला तक आने वाले महाराजा अग्रसेन राजमार्ग को लेकर कहा है कि यदि ब्राह्मण वाला से रतिया होते हुए यह फतेहाबाद तक बन जाएगा तो यह सीधे अग्रोहा से जुड़ जाएगा जिसकी कुल दूरी केवल 34 किलोमीटर है। अग्रवाल वैश्य समाज ने सरकार से मांग की है कि इस सड़क का निर्माण तुरंत करवाया जाए।

  • Haryana: परिसीमन कमेटी में केवल सत्ता पक्ष के लोग, फूटा कांग्रेसियों का गुस्सा

    Haryana: परिसीमन कमेटी में केवल सत्ता पक्ष के लोग, फूटा कांग्रेसियों का गुस्सा

    Haryana: पंचकूला नगर निगम में वार्डबंदी को लेकर बनाई गई परिसीमन कमेटी में केवल सत्ता पक्ष के लोगों को शामिल करने से कांग्रेसियों का गुस्सा फूट पड़ा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उपायुक्त में जो कमेटी बनाई थी उसमें कांग्रेस के लोग भी शामिल थे लेकिन पंचकूला से चंडीगढ़ जाते-जाते बीच रास्ते में यह लिस्ट पूरी तरह से बदल गई। इसी समस्या के चलते पंचकूला नगर निगम में वार्डबंदी को लेकर कांग्रेसी आगबबूला हो रहे हैं। कांग्रेसियों ने आरोप लगाया कि वार्डबंदी कमेटी में केवल सत्तापक्ष के पार्षद व नेताओं को ही शामिल किया गया है, जबकि पंचकूला जिला उपायुक्त की ओर से सरकार को विपक्ष के पार्षदों के नाम भी भेजे गए थे, जिन्हें नजरअंदाज करते हुए केवल सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों को कमेटी में जगह दी। कांग्रेस ने यहां गठित कमेटी को भंग कर नए सिरे से कमेटी गठित करने की मांग की है, जिसमें विपक्ष की मौजूदगी भी अनिवार्य है।

    वरुण चौधरी ने कसा सबका साथ-सबका विकास नारे पर तंज

    सरकार द्वारा गठित की गई कमेटी पर अंबाला लोकसभा सांसद वरुण चौधरी ने सरकार के सबका साथ-सबका विकास नारे पर तंज कसते हुए कहा कि यह नारा केवल कागजों तक सीमित है, धरातल पर सरकार मनमानी करने के साथ विपक्ष की अनदेखी कर रही है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण, पंचकूला नगर निगम में गठित की गई वार्डबंदी कमेटी है, जिसमें सत्ता पक्ष के पार्षदों को ही शामिल किया गया है। सरकार की ओर गठित वार्डबंदी का नोटिफिकेशन जारी किया गया है, जिसमें केवल सत्ता पक्ष से जुड़े पार्षदों के ही नाम शामिल हैं। वरुण ने सवाल उठाया कि जब वार्डबंदी में सत्ता पक्ष से जुड़े पार्षद व नेता शामिल होंगे तो वार्ड परिसीमन में मनमानी चलेगी और सत्ता पक्ष से जुड़े लोग अपने मन मुताबिक वार्डबंदी कराएं।

    Haryana: परिसीमन कमेटी में केवल सत्ता पक्ष के लोग, फूटा कांग्रेसियों का गुस्सा

    उपायुक्त के प्रस्तावित नामों को किया नजरअंदाज : चंद्रमोहन

    पंचकूला के विधायक चंद्रमोहन ने आरोप लगाते कहा कि पंचकूला उपायुक्त की ओर से 28 जुलाई 2025 को शहरी स्थानीय निकाय महानिदेशक को वार्ड परिसीमन के लिए पांच सदस्यों के नामों का प्रस्ताव भेजा गया था, इनमें जय कुमार कौशिक, सोनू, संदीप सिंह, गौतम प्रसाद और रितू शामिल थीं। जबकि शहरी निकाय विभाग की ओर से 16 सितंबर 2025 को जारी नोटिफिकेशन में जयकुमार कौशिक, सोनू व रितू को शामिल किया गया है, जबकि उपायुक्त द्वारा प्रस्तावित संदीप सिंह और गौतम प्रसाद की जगह हरिंद्र मलिक और नरेंद्र पाल सिंह लुबाना को शामिल किया गया है।

    दोबारा बनाई जाए कमेटी : नवीन बंसल

    पंचकूला जिला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और एडवोकेट नवीन बंसल ने कहा कि हरियाणा नगर निगम वार्ड परिसीमन नियम, 1994 में स्पष्ट उल्लेख है कि विभिन्न समूहों या वर्गों से संबंध रखने वाले सदस्यों को एडहॉक कमेटी का सदस्य बनाया जाएगा, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षदों के साथ गणमान्य लोग भी सम्मिलित किए जा सकते हैं। उन्होने कहा कि पंचकूला में यह नियम पूरी तरह से नकार दिया गया है। इसके लिए इस कमेटी को दोबारा बनाया जाए।

  • Haryana: हरियाणा सरकार ने अपना ही 5 साल पुराना फैसला पलटा, किसानों को होगा फायदा

    Haryana: हरियाणा सरकार ने अपना ही 5 साल पुराना फैसला पलटा, किसानों को होगा फायदा

    Haryana: हरियाणा सरकार ने किसानों की सुविधा और नहर जल प्रबंधन को दुरुस्त करने के लिए एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने जून 2020 में जारी अपने ही उन आदेशों को रद्द कर दिया है, जिनके तहत जुई, सिवानी और हिसार जल सेवाएं प्रभागों से कुछ नहर तंत्र लोहारू डिवीजन में स्थानांतरित किए गए थे। इससे किसानों को पर्याप्त मात्रा में पानी मिल पाएगा और साथ ही उनकी समस्याओं का समाधान भी समय पर हो पाएगा।

    पांच वर्ष पहले सरकार द्वारा जारी आदेशों के बाद बनी नई व्यवस्था के चलते कई व्यवहारिक कठिनाइयां सामने आईं। नहरों के केवल टेल हिस्से लोहारू डिवीजन में रहे, जबकि हेड हिस्से अपने मूल प्रभागों के पास ही थे। इस विभाजन से नहर जल का कुशल प्रबंधन नहीं हो पाया और खासतौर पर टेल एंड पर बसे किसानों को पानी की कमी का सामना करना पड़ा। जिससे उनकी फसल प्रभावित हुई।

    सरकार ने किसानों की इन समस्याओं को देखते हुए नहरों को उनके मूल प्रभागों को लौटा दिया है। इस कदम से हेड से लेकर टेल तक बेहतर नियंत्रण और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। पानी की आपूर्ति निष्पक्ष और भरोसेमंद ढंग से टेल एंड गांवों तक पहुंचेगी। फील्ड स्टाफ भी किसानों की शिकायतों के समाधान में अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार रहेगा। विभाग पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ और कार्य की दोहराव भी समाप्त हो जाएगी।

    Haryana: हरियाणा सरकार ने अपना ही 5 साल पुराना फैसला पलटा, किसानों को होगा फायदा

    सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसानों को सुविधा में कोई कमी न आए। वर्ष 2023 में सरकार ने गांव खेड़ा, ब्लॉक सिवानी, जिला भिवानी में 17.54 करोड़ रुपये की लागत से एकीकृत कार्यालय परिसर, नहर विश्राम गृह और स्टाफ आवासीय भवन को मंजूरी दी थी। यह परियोजना अब 80 प्रतिशत पूरी हो चुकी है और जल्द ही इसमें तीनों अहम कार्यालय—एसडीओ सिवानी (लोहारू डिवीजन, एलडब्ल्यूएस सर्किल), एसडीओ माइकाड़ा (माइकाड़ा डिवीजन) और एसडीओ सिवानी (सिवानी डिवीजन, वाईडब्ल्यूएस सर्किल)—एक ही छत के नीचे काम करेंगे। इससे किसानों को रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

    सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल नहर प्रबंधन सुचारू होगा बल्कि किसानों तक समय पर पानी पहुंच पाएगा। प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी और किसानों की संतुष्टि भी सुनिश्चित होगी। खासकर टेल एंड के किसान इस निर्णय से सीधा लाभ उठाएंगे और जल वितरण व्यवस्था में सुधार का अनुभव करेंगे।

    किसानों के प्रति प्रतिबद्ध : श्रुति चौधरी

    सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी ने कहा कि यह फैसला हमारी सरकार की किसानों के प्रति प्रतिबद्धता और नहर जल प्रबंधन को सुधारने का प्रमाण है। हम जमीनी हालात को देखते हुए पुराने फैसलों की समीक्षा करने से हिचकिचाते नहीं हैं। नहर प्रबंधन को सही दिशा देने के साथ-साथ हम आधुनिक ढांचे में भी निवेश कर रहे हैं ताकि हर किसान को सेवाएं आसानी और बिना किसी झंझट के मिल सकें।