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  • क्या Anil Vij ने दे दिया मंत्री पद से इस्तीफा, रात 11:30 पर सोशल मीडिया से मिनिस्टर हरियाणा हटाया

    क्या Anil Vij ने दे दिया मंत्री पद से इस्तीफा, रात 11:30 पर सोशल मीडिया से मिनिस्टर हरियाणा हटाया

    आज सुबह से इस बात की चर्चा है कि क्या प्रदेश के परिवहन, श्रम एवं ऊर्जा मंत्री Anil Vij ने हरियाणा मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया है? असल में इस चर्चा के पीछे कारण है कि अनिल विज ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर उनके नाम के आगे से ‘मिनिस्टर’ शब्द हटाया गया है। अब मिनिस्टर की जगह ‘अम्बाला कैंट’ ही लिखा है। इसे लेकर देर रात मंत्री से बातचीत का प्रयास किया, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। विज ने 12 सितंबर को इसी एक्स हैंडल पर लिखा था, ‘अम्बाला छावनी में कुछ लोग समानांतर भाजपा चला रहे हैं, जिनको ऊपर वालों का आशीर्वाद भी प्राप्त है। कमेंट बॉक्स में लिखें कि हम क्या करें? पार्टी का बहुत नुकसान हो रहा है।’ उनका यह बयान काफी चर्चा में रहा था।

    बता दें कि Anil Vij अंबाला कैंट विधानसभा क्षेत्र से लंबे समय से विधायक रहे हैं और भाजपा के दिग्गज नेताओं में आते हैं। वह पिछली खट्टर सरकार में गृहमंत्री थे, लेकिन जब हरियाणा में नायब सिंह सैनी को नया मुख्यमंत्री बनाया गया तो वह नाराज हो गए। तब वह मंत्री पद की शपथ लेने भी नहीं गए थे। हालांकि, मीडिया के सामने विज पार्टी से नाराज ना होने की बातें लगातार कहते रहे हैं, लेकिन उनकी नाराजगी साफ नजर आ जाती है।

    जानकारी के अनुसार, यह बदलाव बुधवार रात करीब साढ़े 11 बजे हुआ है। पहले विज ने X पर अपने नाम के साथ मिनिस्टर हरियाणा, इंडिया लिखा हुआ था। इस बदलाव की वजह फिलहाल सामने नहीं आई है, लेकिन इसके बाद से सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हैं।

    क्या Anil Vij ने दे दिया मंत्री पद से इस्तीफा, रात 11:30 पर सोशल मीडिया से मिनिस्टर हरियाणा हटाया

    सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ समय से विज की नाराजगी बढ़ी है। इसकी कई वजह हैं। ताजा वजह है भाजपा के पूर्व कोषाध्यक्ष आशीष तायल की सीएम नायब सैनी से मुलाकात। 11 सितंबर को आशीष तायल अंबाला कैंट के इंडस्ट्रियल एरिया में उद्योगपतियों के प्रतिनिधिमंडल को लेकर चंडीगढ़ में सीएम नायब सैनी से मिले थे। तायल ने मुलाकात के फोटो भी सोशल मीडिया पर शेयर किए थे। इसके बाद 12 सितंबर को ही अनिल विज ने अपने X अकाउंट पर अंबाला में समानांतर भाजपा चलाने वाली टिप्पणी की। तायल वही पूर्व भाजपाई हैं, जिनकी विज ने सीएम नायब सैनी के साथ फोटो सोशल मीडिया पर शेयर कर गद्दार का ठप्पा लगाया था।

    इस ताजा विवाद पर आशीष तायल ने कहा था- मैं तो सिर्फ एक उद्योगपतियों के डेलीगेशन के साथ सीएम से मुलाकात करने चंडीगढ़ गया था। अंबाला छावनी के इंडस्ट्रियल एरिया में पानी की निकासी और आगे पानी न आए, इसे लेकर हमने सीएम को ज्ञापन दिया है। मुझे इस बारे में जानकारी नहीं कि विज की पोस्ट का इशारा किसकी ओर है।

    सीएम और प्रदेशाध्यक्ष के खिलाफ टिप्पणी पर BJP ने शोकॉज नोटिस जारी किया था BJP ने सीएम नायब सैनी और BJP के प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली के खिलाफ बयानबाजी करने पर विज को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसमें 3 दिन में जवाब मांगा गया था। इसके बाद उन्होंने 8 पन्ने में अपना जवाब भेजा था। हालांकि, उसके बाद विज और बड़ौली, दोनों ने इस पूरे मामले को लेकर सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा।

    स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों की लिस्ट में नहीं था विज का नाम स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण कार्यक्रमों की सूची में भी विज का नाम शामिल नहीं किया गया था। उन्हें अंबाला में राज्यपाल के साथ लगाया गया था। जब यह मामला तूल पकड़ने लगा तो बाद में लिस्ट में संशोधन किया गया। सदन में जासूसी का आरोप लगाकर भी विज ने राजनीतिक हलचल मचा दी थी। विपक्ष ने इसे हवा देते हुए सरकार पर तीखे वार किए थे।

  • Haryana News: भूपेंद्र हुड्डा के बुरे दिन शुरू!  ईडी का शिकंजा और 400 गुना पीनल रेंट का खतरा

    Haryana News: भूपेंद्र हुड्डा के बुरे दिन शुरू! ईडी का शिकंजा और 400 गुना पीनल रेंट का खतरा

    Haryana News: यमुनानगर 16 सितम्बर लगता है कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की किस्मत उनका साथ नही दे रही है। चुनाव हारे तो सी एम की कुर्सी भी हाथ से फिसल गई।अब नेता प्रतिपक्ष का ठाट बाट भी उनसे कोसो दूर होता दिखाई दे रहा है।विधायको का शक्ति प्रदर्शन दिखाने के बाद भी कांग्रेस उनके सामने झुकने को तैयार नही ।

    वंही अब दो और मुसीबते उनका इंतजार कर रही है। एक तरफ ई डी ने शिकंजा टाइट कर दिया है तो वहीं दूसरी और हरियाणा सरकार ने भी उन पर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। तो चलिए आगे आपको बताते हैं कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा आगे आने वाले दिनों में किन मुश्किलों से गिरने वाले हैं। हरियाणा में कांग्रेस की सरकार न बनने को लेकर पहले से ही भूपेंद्र हुड्डा अपनी पार्टी के निशाने पर है न केवल राहुल गांधी बल्कि राज्य के अनेक कांग्रेसी नेता सरकार न बनने पर हुड्डा परिवार को दोषी ठहरा रहे है।

    Haryana News: भूपेंद्र हुड्डा के बुरे दिन शुरू! ईडी का शिकंजा और 400 गुना पीनल रेंट का खतरा

    हरियाणा में गुटबाजी और धड़ेबाजी के चलते राज्य की सत्ता कांग्रेस के हाथ आते-आते चली गई। इसके बाद से ही हुड्डा परिवार के बुरे दिन शुरू होने लगे हैं। सी एम की कुर्सी ना मिलने के बाद भूपेंद्र हुड्डा को उम्मीद थी कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष का रुतबा तो मिला जाएगा इसके बाद वह कैबिनेट मंत्री का लुत्फ उठा पाएंगे ना केवल सरकारी सुविधाये बल्कि चंडीगढ़ में कोठी भी उनके पास रहेगी, लेकिन कांग्रेस हाई कमान ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया वहीं अब दूसरी ओर हरियाणा सरकार ने हुड्डा साहब को सरकारी कोठी खाली करने का फरमान भी सुना दिया।

    ये कोठी कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल को पसंद थी परंतु हुड्डा ने सरकार के आदेशों पर अमल नही किया ओर कोठी कब्जाए रखी रही, हालांकि नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट मंत्री की तर्ज पर सुविधाएं मिलती है मगर कांग्रेस ने उनके नाम पर मोहर नहीं लगाई जिसके बाद पूर्व सी एम होते हुए भी एक साधारण विधायक होकर रह गए। इसलिए सरकार ने उनसे कोठी खाली करवाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके चलते ही हुड्डा पर सरकार ने पिनल रेंट लगाने की भी घोषणा कर दी है। हुड्डा के पास चंडीगढ़ में कोठी नंबर 70 का कब्जा है।

    यह कोठी उन्हें सरकार गठन के 15 दिन के अंदर खाली करनी थी परंतु करीब 12 महीने बाद भी यह कोठी खाली नही की गई। इसलिए अब हुड्डा से पीनल रेंट वसूला जाएगा। आपको बता दे नियम अनुसार पीनल रेंट किस तरह से वसूला जाता है। एक महीना होने पर पीनल रेंट 50 गुना दूसरे महीने में यह रकम 100 गुना तीसरे महीने में यह राशि 200 गुना हो जाती है और तब भी कोठी खाली नहीं होती तो वसूली का यह आंकड़ा 400 गुना हो जाता है।

    अब हुड्डा साहब के पास यह कोठी लगभग तीन महीने से भी ऊपर होने के बाद 400 गुना के दायरे में आ गए है। इस तरह से न केवल अब उन्हें यह कोठी खाली करनी होगी बल्कि 400 गुना का भुगतान भी करना होगा जो की लाखों रुपए बनेगा। ये तो हुई सरकार की बात। रही ई डी की बात है तो वह भी हुड्डा साहब के पीछे हाथ धोकर पड़ गई है जबकि उनकी अपनी ही पार्टी कांग्रेस भी अब उनसे अपना पिंड छुड़ाने को तैयार है ऐसे में देखना भी है कि भविष्य में हुड्डा परिवार की राजनीतिक दिशा किस ओर जाएगी।

  • भिवानी की प्ले स्कूल शिक्षिका मनीषा की मौत की सीबीआई जांच लगभग पूरी, अब कब होगा सच्चाई का खुलासा ?

    भिवानी की प्ले स्कूल शिक्षिका मनीषा की मौत की सीबीआई जांच लगभग पूरी, अब कब होगा सच्चाई का खुलासा ?

    भिवानी के प्ले स्कूल की शिक्षिका मनीषा की डैथ मिस्ट्री की जांच कर रही सीबीआई टीम को जांच करते 14 दिन हो गए है। तीन दिन पहले सीबीआई ने पूछताछ का सिलसिला बंद करके इस मामले में हुई पूछताछ की कड़ियों को जोड़ना शुरु कर दिया है। जिस प्रकार से सीबीआई ने अब इस मामले में एकदम से पूछताछ लगभग बंद कर दी है ऐसे में लगता है कि सीबीआई की जांच पूरी हो गई है और वह अब इसका निष्कर्ष निकालने में लगी हुई है।

    सीबीआई टीम ने इस केस से जुडे़ हर व्यक्ति प्ले स्कूल संचालकों, स्टाफ, नर्सिंग कालेज संचालकों, परिजनों, बकरी पालक, खेत मालिक, खाद-बीज विक्रेता दुकानदार, लाइब्रेरी संचालकों से पूछताछ की और उनके बयान कलमबद्ध किए।

    इस दौरान सीन आफ क्राइम क्रिएट किया गया। हर पहलु से जांच के बाद पिछले तीन दिन से टीम कहीं नहीं जा रही। जिस कारण चर्चाएं है कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है। ऐसे में अब सबको परिजन, ग्रामीण व अन्य को परिणाम का इंतजार है।

    भिवानी की प्ले स्कूल शिक्षिका मनीषा की मौत की सीबीआई जांच लगभग पूरी, अब कब होगा सच्चाई का खुलासा ?

    हर किसी को जानने के लिए उत्सुक है कि सीबीआई की 14 दिन की जांच में क्या निकला? मनीषा की मौत हत्या है या आत्महत्या? अब तक न परिजनों को कुछ बताया गया है और न ही इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक की गई है।

    शिक्षिका मनीषा मौत मामले की जांच में जुटी सीबीआई टीम तीन सितंबर को भिवानी आई थी और पिछले 14 दिन से हर पहलु से मामले की जांच कर रही है। पहले सीआईए, लोहारू थाना पुलिस की जांच रिपोर्ट देखी तो उसके बाद मौके का निरीक्षण, परिजनों से बातचीत, प्ले स्कूल संचालक, स्टाफ से पूछताछ, नर्सिंग कालेज में पूछताछ के अलावा खाद-बीज दुकानदार देवेंद्र, बकरी पालक सतपाल, खेत मालिक पवन, साझेदार ईश्वर से भी पूछताछ कर उनके बयान कलमबद्ध कर चुकी है।

    घटनास्थल पर इन सभी के बयानों के आधार पर सीन रि-क्रिएट किया जा चुका है। सेंट्रल फारेंसिक साइंस लैबोरेट्री की 15 सदस्यीय टीम भी मौके पर पहुंचकर जांच कर चुकी है। ढिगावा मंडी की दो लाइब्रेरी में भी दो दफा जांच और पूछताछ हो चुकी है।

    प्ले स्कूल की शिक्षिका ढाणी लक्ष्मण वासी मनीषा 11 अगस्त को स्कूल में पढ़ाने गई थी मगर वापस नहीं लौटी। परिजनों ने उसकी काफी तलाश की और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने अगले दिन 12 अगस्त को गुमशुदगी का केस दर्ज किया।

    13 अगस्त को मनीषा का शव सिंघानी गांव में नहर किनारे मिला। गले पर चोट के निशान देख परिजनों ने हत्या के आरोप लगाए। नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों के बोर्ड ने शव का पोस्टमार्टम किया। मगर परिजनों ने शव लेने से इंकार करते हुए कहा कि पहले आरोपियों की गिरफ्तारी करें। परिजनों की मांग पर पीजीआई रोहतक में चिकित्सकों के बोर्ड ने दोबारा पोस्टमार्टम किया। विसरा जांच करवाई गई। जिसमें सामने आया कि शरीर में जहरीला पदार्थ है। परिजनों ने धरना दिया और एम्स दिल्ली में पोस्टमार्टम और सीबीआई जांच की मांग की।प्रदेश सरकार ने ये दोनों मांगे मानी। जिसके बाद 21 अगस्त को गांव में ही गमगीन माहौल में शव का अंतिम संस्कार किया गया। तीन सितंबर को दिल्ली से सीबीआई टीम इंस्पेक्टर विवेक के नेतृत्व में जांच के लिए भिवानी पहुंची। जो अब तक मामले की जांच में जुटी है।

    हर कोई सीबीआई की जांच पर नजर लगाए है और अब तीन दिनों से टीम के ढिगावा, लोहारू या मृतका मनीषा के गांव ढाणी लक्ष्मण में नहीं जाने के कारण चर्चाएं है कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है। जिस कारण हर किसी को जांच रिपोर्ट का इंतजार है। मृतका के पिता संजय कुमार ने बताया कि पिछले कुछ दिन से सीबीआई टीम न तो उनके घर आई और न ही उनसे कोई संपर्क किया। उन्हें जांच रिपोर्ट का इंतजार है।

  • Haryana News: गाड्डे–लुहारों की समस्या पर जयहिंद ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात, प्लॉट देने का दिया आश्वासन

    Haryana News: गाड्डे–लुहारों की समस्या पर जयहिंद ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात, प्लॉट देने का दिया आश्वासन

    Haryana News: रविवार 14 सितंबर को सैकड़ों गाड्डे–लुहार घुमंतू जाति के लोग जयहिन्द के बीपीएल आवास पर पहुंचे। आपको बता दे कि 14 सितंबर को रोहतक में मुख्यमंत्री नायब सैनी जी भी आए हुए थे, जिसके चलते पुलिसकर्मी जयहिन्द के बीपीएल आवास पहुंची और जयहिन्द को हाउस अरेस्ट कर लिया।

    बाद में पुलिसकर्मियों संग जयहिन्द व कुछ घुमंतू जाति के लोग मुख्यमंत्री नायब सैनी जी से मिलने सर्किट हाउस पहुंचे और मुख्यमंत्री जी को गाड्डे–लुहार घुमंतुओं की समस्या सुनाई। मुख्यमंत्री जो में तुरंत अधिकारियों को आदेश दिए कि इन गरीब लोगों को किसी भी प्रकार कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए जयहिन्द ने मुख्यमंत्री जी धन्यवाद किया।

    आपको बता दे कि 13 सितंबर को इन घुमंतू जाति के लोगों की झोपड़ियां तोड़ने बुलडोजर लेकर प्रशासन पहुंचा था, तो जयहिन्द ने वहां पहुंच कर कुछ समय मांगा था, जिसके बाद प्रशासन ने बुलडोजर चलाना बंद कर दिया।

    Haryana News: गाड्डे–लुहारों की समस्या पर जयहिंद ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात, प्लॉट देने का दिया आश्वासन

    जयहिन्द ने कहा कि इन गरीब लोगों का कोई नहीं है, इनके रहने की व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए। क्योंकि ये लोग सौ साल दे रोहतक में रह रहे है। इनके आधार कार्ड, वोटर कार्ड इत्यादि सब रोहतक का ही है।

    जयहिन्द ने बताया कि ये कोई कब्जा नहीं कर रहे, ये सिर्फ इतना कह रहे है कि हमें कोई दूसरी जगह दे दी जाए या किसी योजना के तहत इनको घर या प्लॉट जो भी देना है वह दिया जाए। इन गरीब लोगों ने बहुत बार फॉर्म भी भरे लेकिन कभी कोई प्लॉट नहीं मिला।

    मुख्यमंत्री नायब सैनी जी ने मजाक करते हुए कहा कि जयहिन्द तू जनता को भड़कता रहता है ये गाड्डे–लुहार भी भड़का दिए। इस पर जयहिन्द ने कहा कि अगर सीएम साहब आप बढ़िया काम करोगे को बड़ाई करेंगे, नहीं तो सड़क पर लड़ाई करेंगे। हालांकि सीएम साहब ने तुरंत डीसी साहब को बुला कर बोला कि बिल्कुल परेशान नहीं किए जाए गाड्डे–लुहार और प्लॉट दिए जाएँगे। बाक़ी समस्याओं पर चंडीगढ़ में बैठ कर बात करेंगे।

  • घग्गर की बाढ़ ने पंजाब के गांवों को किया परेशान, लोगो ने हरियाणा में शामिल होने की मांग की

    घग्गर की बाढ़ ने पंजाब के गांवों को किया परेशान, लोगो ने हरियाणा में शामिल होने की मांग की

    पंजाब इस समय बहुत बड़ी त्रासदी के दौर से गुजर रहा है लेकिन इस त्रासदी के बीच इस त्रासदी का जिम्मेदार कौन है इस बात को लेकर आज बहुत बड़ी बहस हो रही है लेकिन इस सब बहस के बीच उस समय पंजाब सरकार की मुश्किलें और बढ़ गई जब पंजाब के चार गांव के लोगों ने इस तरह से के लिए पंजाब सरकार को जिम्मेवार ठहराते हुए उन्हें हरियाणा में शामिल करने की मांग कर डाली।

    हरियाणा और पंजाब के कई गांवों की चिंता घग्गर नदी ने बढ़ा दी है। खासकर कैथल में शनिवार को घग्गर का जलस्तर 24 फीट दर्ज हुआ जबकि खतरे का निशान 23 फीट है। हरियाणा के गुहला-चीका क्षेत्र के कई गांव घग्गर पार पंजाब की तरफ हैं।हरियाणा सरकार ने इन गांवों में घग्गर का पानी आने से रोकने के लिए गांव टटियाणा के पास करीब 2 किलोमीटर तक पत्थर के जाल लगाकर बंध मजबूत किए गए, जबकि पंजाब सरकार की ओर से ऐसे इंतजाम नहीं किए गए। हालांकि, पानी हरियाणा के गांवों के खेतों में भी पहुंचा, लेकिन यह अभी करीब एक फीट के आसपास ही है। जबकि सटे पंजाब के पटियाला जिले के गांवों में दो से ढाई फीट तक है। इससे पंजाब के धर्महेड़ी, थेह ब्राह्मणा, हरिपुर, शशि गुजरान गांवों के लोग इतने परेशान हैं कि उन्होंने हरियाणा में शामिल करने की मांग कर डाली।

    घग्गर की बाढ़ ने पंजाब के गांवों को किया परेशान, लोगो ने हरियाणा में शामिल होने की मांग की

    इन गांवों लोगों को कहना है कि करीब 13 वर्ष पहले हरियाणा की सरकार ने गांव टटियाणा में हरियाणा-पंजाब के बॉर्डर पर घग्गर के दोनों तरफ पत्थर लगाकर तटबंधों को मजबूत कर दिया था, ताकि घग्गर के टूटने से किसी प्रकार की दिक्कतें आमजन को न झेलनी पड़ें। मगर, पंजाब सरकारों की ओर से ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया।

    अभी पंजाब और हरियाणा के घग्गर के साथ लगते गांवों में रिहायशी क्षेत्र में पानी नहीं आया है, लेकिन लोगों में भय का माहौल है। यही डर सता रहा है कि जाने कब पानी आ जाए और उनके आशियाने डूब जाएं। हरियाणा के कैथल में फसलों में घग्गर का पानी ओवरफ्लो होकर घुसने लगा है। टटियाणा, रत्ताखेड़ा, सिहाली, कल्लर माजरा, कड़ाम, सुगलपुर, बुढ़नपुर, पपराला, कसौली, बौपुर, कमहेड़ी, अरनौली व डंडौता में खेतों में करीब डेढ़ फीट तक पानी जमा हो गया है।

    पंजाब के गांवों में पानी दो फीट से भी ज्यादा हो गया है। पंजाब के हरिपुर और धर्महेड़ी के खेतों में करीब दो से तीन फीट तक पानी बह रहा है। फसलें बिल्कुल डूब चुकी हैं। गांवों के लोग सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि फसलें तो खराब हो गईं, कम से कम उनको और उनके मवेशियों को बचाने के लिए तो कोई कदम उठाया जाए। घग्गर का जलस्तर बढ़ ही रहा है। ऐसे में लोगों को और ज्यादा डर सता रहा है।

    पंजाब के गांव हरिपुर की बुजुर्ग कुलवंत कौर अपनी व्यथा सुनाते हुए भावुक हो गईं। बोलीं-पिछली बार जब 2023 में बाढ़ आई तो उनके घरों में चार-चार फीट तक पानी जमा हो गया था। इस बार भी उनको डर सता रहा है। हाथ जोड़कर बोलीं-फसलें तो खराब हो गईं, लेकिन व्यक्ति और उनके पशु ही बच जाएं तो यह भी दाता का शुक्र होगा।

    गांव शशि गुजरा के रहने वाले बिंद्र ने बताया कि उनके गांव में घग्गर के ओवरफ्लो होने से काफी नुकसान हुआ है। सब्जियों की फसल खराब हो चुकी हैं। उनके गांव के साथ लगते चार-पांच गांवों में फसलों को ज्यादा नुकसान है। हरियाणा और पंजाब में अलग-अलग पार्टियों की सरकार होने के चलते भी नुकसान उन्हीं को है।

    गांव धर्महेड़ी के पूर्व सरपंच प्रतिनिधी सोनू ने कहा कि वे हरियाणा सरकार की प्रशंसा करते हैं कि उसने अपने क्षेत्र में लोगों को बाढ़ से बचाने के लिए पत्थर लगा दिए। यही नहीं, पंजाब की ओर भी घग्गर के पुल पर पत्थर लगा दिए, ताकि घग्गर दोनों तरफ से न टूटे और आबादी बची रहे। पंजाब सरकार की ओर से ऐसा कोई काम नहीं किया गया। ये पंजाब सरकार के रवैये से परेशान हैं। उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने सरकार से गुहार लगाई की उनके गांवों को पटियाला से हटाकर कैथल जिले में डाला जाए, वे इससे सहमत हैं।

  • हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण बना प्रॉपर्टी डीलर , शहरों की प्रॉपर्टी अब HSVP अपने पोर्टल के माध्यम से बेचेगा

    हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण बना प्रॉपर्टी डीलर , शहरों की प्रॉपर्टी अब HSVP अपने पोर्टल के माध्यम से बेचेगा

    हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण अब प्रदेश में प्रॉपर्टी डीलर का काम करेगा। सरकार ने शहरी क्षेत्रों में प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने अब प्राइवेट प्रॉपर्टीज की बिक्री और खरीद को अपने पोर्टल के माध्यम से अनिवार्य कर दिया है। इस फैसले से प्रदेश के प्रॉपर्टी डीलरों को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि अब सौदे सीधे पोर्टल पर होंगे और हर लेन-देन सरकार की निगरानी में रहेगा।

    नये प्रावधानों के तहत एचएसवीपी पोर्टल पर प्रॉपर्टी लिस्ट करने के लिए विक्रेता को 10,000 रुपये की नॉन-रिफंडेबल रजिस्ट्रेशन फीस के साथ जीएसटी देना होगा। यही नहीं, सरकार ने बिक्री और खरीद पर भी कमीशन लागू किया है। प्रॉपर्टी लिस्ट करते समय विक्रेता को प्रॉपर्टी की मांग की गई कीमत का 0.25% बतौर कमीशन देना होगा। वहीं, जब खरीदार बोली को स्वीकार करेगा, तो उसे अंतिम बोली राशि का 0.50% कमीशन के रूप में चुकाना पड़ेगा।

    हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण बना प्रॉपर्टी डीलर , शहरों की प्रॉपर्टी अब HSVP अपने पोर्टल के माध्यम से बेचेगा

    एचएसवीपी के नये नियमों के अनुसार, विक्रेता को पोर्टल पर केवाईसी डॉक्यूमेंट्स, कानूनी वारिस की सहमति, प्रॉपर्टी से जुड़े मुकदमों से मुक्त होने का प्रमाण और प्रॉपर्टी का पूरा विवरण देना अनिवार्य होगा। इसके बाद खरीदार ऑनलाइन बोली लगाएंगे और सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को प्रॉपर्टी मिलेगी। सौदा तय होने के साथ ही स्वचालित रूप से ट्रांसफर परमिशन जारी होगी, जो 90 दिन तक मान्य रहेगी।

    पोर्टल के जरिये की जाने वाली डील में विक्रेता और खरीददार की संपर्क जानकारी (मोबाइल नंबर व ईमेल) डील पूरी होने तक गोपनीय रखी जाएगी। इसका उद्देश्य अनधिकृत नेगोसिएशन और ‘ऑफ-प्लेटफॉर्म’ डील्स को रोकना है। साथ ही, हर चरण की जानकारी एसएमएस और ईमेल के जरिए दोनों पक्षों को भेजी जाएगी।

    इस फैसले से प्रॉपर्टी डीलरों में नाराजगी देखी जा रही है, क्योंकि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा प्रभावित होगा। दूसरी ओर सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से आम खरीदार और विक्रेता को फायदा होगा, क्योंकि धोखाधड़ी और कालाबाजारी की गुंजाइश समाप्त हो जाएगी। सरकार का यह कदम रियल एस्टेट सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव की ओर इशारा करता है और अब देखना होगा कि आने वाले समय में इसका बाजार पर कितना गहरा असर पड़ता है।

    फिलहाल पांच बड़े शहरों में होगी शुरुआत

    एचएसवीपी ने शुरुआती तौर पर इस व्यवस्था को पांच बड़े शहरों में लागू करने का फैसला किया है और इनके लिए ऑक्शन की तारीख भी घोषित कर दी है। माना जा रहा है कि यह कदम जहां पारदर्शिता बढ़ाएगा, वहीं प्रॉपर्टी बाजार में बिचौलियों की भूमिका लगभग खत्म कर देगा।

    बढ़ेगा सरकार का रेवेन्यू

    सरकार के इस फैसले से सरकार के रेवेन्यू में जबरदस्त इजाफा होगा। पहले तो इजाफा एचएसवीपी को होगा जो कुल मूल्य का 0.75% कमीशन के रूप में लेगा और साथ प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन के समय ₹10000 भी प्राप्त करेगा। दूसरा इजाफा राजस्व विभाग को होगा। वर्तमान में सभी रजिस्टर कलेक्टर रेट पर हो रही है लेकिन जब मामला सरकार की जानकारी में आएगा तो रजिस्ट्री पूरे मूल्य की होगी जिससे रात सभी विभाग के संग्रहण में भारी वृद्धि दर्ज की जाएगी।

  • Haryana: GST में बड़ा बदलाव, नवरात्र से सस्ते होंगे सामान, नायब सैनी बोले, सुधार आम नागरिकों और कारोबारियों दोनों के लिए राहत

    Haryana: GST में बड़ा बदलाव, नवरात्र से सस्ते होंगे सामान, नायब सैनी बोले, सुधार आम नागरिकों और कारोबारियों दोनों के लिए राहत

    Haryana: केंद्र सरकार ने जीएसटी में बड़ा बदलाव किया है। 12% और 28% के स्लैब को खत्म कर दिया गया है। एक नया स्लैब 40% का लगाया गया है। कुछ वस्तुओं को टैक्स फ्री कर दिया गया है। 12% वाली सभी वस्तुओं को पांच प्रतिशत के दायरे में लाया गया है जबकि 28 वाली वस्तुओं को 18% के दायरे में लाया गया है। 18% टैक्स वाली कुछ वस्तुओं को 5% के दायरे में भी लाया गया। जीएसटी में बदलाव पहले नवरात्र यानी 22 सितंबर से लागू होंगे।

    बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी ने भी शिरकत की। इस बैठक में आगामी दिनों में GST से जुड़े अनेक सुधारात्मक कदमों पर विस्तृत चर्चा हुई। सीएम सैनी ने इसको लेकर X पर पोस्ट कर लिखा GST प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाया जाएगा। इससे आमजन के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाएंगे। आगामी सुधार आम नागरिकों और कारोबारियों दोनों के लिए राहत लेकर आएंगे और अर्थव्यवस्था को और गति प्रदान करेंगे।

    GST Council की बैठक में 5% और 18% के स्लैब को मंजूरी दी गई है और इसके साथ ही कई जरूरी सामानों पर टैक्स खत्म किया गया है। इनमें दूध, पनीर, रोटी से लेकर दवाएं और इंश्योरेंस पॉलिसी तक शामिल हैं।

    Haryana: GST में बड़ा बदलाव, नवरात्र से सस्ते होंगे सामान, नायब सैनी बोले, सुधार आम नागरिकों और कारोबारियों दोनों के लिए राहत

    जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए और दिवाली से पहले ही देश के आम लोगों, छोटे कारोबारियों से लेकर किसानों तक को बड़ा तोहफा दे दिया गया। बैठक में जीएसटी स्लैब की संख्या को कम करते हुए सिर्फ 5% और 18% तक सीमित किया गया है, जबकि 12% और 28% स्लैब को खत्म करने को मंजूरी दी गई। वित्त मंत्री ने बैठक के बाद इस बदलाव की जानकारी शेयर की। उन्होंने बताया कि कुछ जरूरी चीजों पर लगने वाले जीएसटी को खत्म करते हुए इसे जीरो कर दिया गया है। इसमें जीवन रक्षक दवाएं, इंश्योरेंस पॉलिसी से लेकर दूध, छेना, पनीर तक शामिल हैं।

    वित्त मंत्री ने टैक्स स्लैब में बदलाव के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ऐसे सामानों की लिस्ट भी शेयर की, जिनपर अब तक 5 से लेकर 18 फीसदी तक जीएसटी लागू था, लेकिन ताजा बदलाव के तहत इन्हें टैक्स फ्री कर दिया गया है, मतलब इन सामानों को Zero GST के दायरे में लाया गया है। इसमें खासतौर पर कई फूड प्रोडक्ट शामिल हैं, जैसे, रेडी टू ईट पराठा को अब 18 फीसदी की जगह टैक्स फ्री कर दिया गया है। इस कैटेगरी में शामिल किए गए अन्य प्रोडक्ट में यूएचटी दूध, छेना, पनीर, पिज्जा, सभी तरह की ब्रेड, रेडी टू ईट रोटी, रेडी टू ईट पराठा शामिल हैं।

    कुछ विलासिता की वस्तुओं पर 40% कर लगेगा। तंबाकू, पान मसाला जैसी चीजों को इस स्लैब में रखा जाएगा। इससे इनके दामों में वृद्धि हो सकती है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बीते 15 अगस्त को जीएसटी रिफॉर्म को लेकर की गई थी, जिसके बाद ये पहली काउंसिल बैठक थी, जिसमें बड़े फैसले लिए गए हैं।

  • Haryana का बड़ा कदम! पड़ोसी धर्म निभाते हुए जम्मू-कश्मीर और पंजाब को 5-5 करोड़ की मदद

    Haryana का बड़ा कदम! पड़ोसी धर्म निभाते हुए जम्मू-कश्मीर और पंजाब को 5-5 करोड़ की मदद

    Haryana सरकार पड़ोसी राज्यों में बाढ़ से हुए नुकसान और बाढ़ की स्थिति में उनके साथ खड़ी है। प्रदेश सरकार ने जम्मू कश्मीर एवं पंजाब को पांच-पांच करोड रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की है।

    प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला एवं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर कहा है कि भारी वर्षा से उत्पन्न हुई कठिन परिस्थितियों में हरियाणा सरकार एवं प्रदेश की जनता पूरी संवेदना से लोगों को शीघ्र अति शीघ्र सरकारी सहायता पहुंचाने के आपके प्रयासों के साथ खड़ी है।

    Haryana का बड़ा कदम! पड़ोसी धर्म निभाते हुए जम्मू-कश्मीर और पंजाब को 5-5 करोड़ की मदद

    उन्होंने पत्र में कहा कि संकट की इस घड़ी में हरियाणा मुख्यमंत्री रात को से 5 करोड़ रुपए की राहत राशि उन्हें भिजवाई गई है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर फिर भी किसी भी तरह की राहत सामग्री यह सहायता की आवश्यकता हो तो आपके मुख्य सचिव हमारे मुख्य सचिव को निसंकोच बता दें। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रदेश की ओर से तुरंत ऐसी तमाम राहत सामग्री आपके यहां भिजवा दी जाएगी।

    प्रदेश सरकार ने दोनों राज्यों को आज पांच-पांच करोड रुपए की आरटीजीएस के माध्यम से राहत राशि भेजने का काम किया है।

    हालांकि हरियाणा में भी वर्तमान में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है लेकिन यह अभी काफी नियंत्रण में है। हरियाणा में अब तक के आंकड़ों के अनुसार 5000 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान है लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा पड़ोसी राज्यों पर आए संकट में उनके साथ खड़े होने से यह बात साबित हो गई है कि हरियाणा संकट के समय में पड़ोसियों की मदद करने से पीछे नहीं हटेगा। यह मदद इस बात का भी सूचक है कि हरियाणा की सरकार पड़ोसी धर्म निभाने का में सबसे आगे खड़ी है।

  • Haryana: देश के लिए बलिदान देने वालों का होगा हरियाणा में सम्मान, 75 स्कूलों का नाम शहीदों के नाम पर रखने का फैसला

    Haryana: देश के लिए बलिदान देने वालों का होगा हरियाणा में सम्मान, 75 स्कूलों का नाम शहीदों के नाम पर रखने का फैसला

    Haryana: देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान करने वाले जवानों के सम्मान के लिए नायब सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा विभाग (स्कूल) प्रदेश के 75 स्कूलों का नामकरण जांबाज जवानों के नाम करेगा। बता दें कि हरियाणा में 17 सितंबर से दो अक्टूबर तक राज्यव्यापी सेवा पखवाड़ा आयोजित किया जाएगा। इस पाक्षिक कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में सेवा की भावना को बढ़ावा देना और विकासात्मक पहलों को एक जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाना है।

    यह स्कूल नए होंगे जो केवल गांव के नाम पर चल रहे हैं। पहले से स्कूल बलिदानियों के नाम उन्हें इसमें नहीं रखा जाना है। नामकरण के लिए लिस्ट शिक्षा विभाग की परामर्श जिला सैनिक कल्याण बोर्ड की ओर से तैयार कर शासन को भेजी जानी है।

    Haryana: देश के लिए बलिदान देने वालों का होगा हरियाणा में सम्मान, 75 स्कूलों का नाम शहीदों के नाम पर रखने का फैसला

    यह कार्य दस दिन के अंदर पूरा किया जाना है। आयोजन आरंभ होने से पहले ही स्कूलों का नामकरण बलिदानी के नाम पर करना है। इसके लिए शनिवार को प्रदेश के मुख्य सचिव ने अनुराग रस्तोगी ने अभियान की तैयारियों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।

    इस अभियान के तहत प्रदेशभर में प्रतिदिन कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी हर रोज मुख्य कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे, जबकि सभी जिलों में मंत्री इस तरह के कार्यक्रमों की अगुवाई करेंगे। पूर्व सैनिकों की सक्रिय भागीदारी के साथ प्रदेशभर में प्लास्टिक मुक्त अभियान और व्यापक स्वच्छता अभियान शुरू चलेगा बता दें कि 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जन्मदिवस है और दो अक्टूबर को राष्ट्रपिता महत्मा गांधी की जयंती है। शिक्षा विभाग स्कूलों और कॉलेजों में निबंध लेखन, वाद-विवाद, चित्रकला, रंगोली और नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिताएं होंगी।

  • अधिक प्रो एक्टिव होकर कर सकती थी काम, कुमारी सैलजा बोली- मौसम विभाग ने इस बार ज्यादा बारिश की पहले ही दे दे थी चेतावनी पर नहीं जागी भाजपा सरकार

    अधिक प्रो एक्टिव होकर कर सकती थी काम, कुमारी सैलजा बोली- मौसम विभाग ने इस बार ज्यादा बारिश की पहले ही दे दे थी चेतावनी पर नहीं जागी भाजपा सरकार

    अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश में बाढ़ को लेकर जो भी हालात बिगड़े है उसके लिए कही न कही सरकार जिम्मेदार है क्योंकि वह दावे करती है, अधिकारियों की कोई जवाब देही तय नहीं है, अधिकारियों ने जो कह दिया वहीं सही है। इस बार मौसम विभाग ने पहले चेतावनी दे दी थी और दे रहा है कि ज्यादा बारिश होगी। सरकार ने पहले से ही कोई प्रबंध नहीं किए और न ही मानसून आने से पहले नहरों, नालों और नदियों की सफाई कराई, आज प्रदेश की जनता उसी लापरवाही का दंश झेल रही है।

    मीडिया को जारी बयान में सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार और जनता सबको मालूम है कि जब बारिश अधिक होती है तो कौन कौन सा क्षेत्र प्रभावित होता है। ऐसे में सरकार का दायित्व है कि पहले से उचित प्रबंध करे और चौकन्ना रहे। पहाड़ी क्षेत्रों से पानी आता है और यहां तक पहुंचने में समय भी लगता है, इसलिए सरकार को और अधिक प्रोएक्टिव होकर काम करना चाहिए। लेकिन सच यह है कि भाजपा सरकार केवल दावे करती है। सवाल यह है कि ये दावे कब पूरे होंगे अगले साल, बारिश के बाद या तब, जब सारा नुकसान हो चुका होगा? जलस्तर बढ़ने पर जितना पानी बाहर आना चाहिए था उससे क ई गुना पानी बाहर आया और फसलें जलमग्न हो गई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि नहरों, नालों और नदियों की न तो सफाई कराई गई औप ही तटबंध मजबूत किए गए, जो भी काम हुआ कागजों में ही हुआ। सरकार सब कुछ जानते हुए भी अनजान बनी रही। किसानों की कोई बात तक नहीं सुनी गई।

    अधिक प्रो एक्टिव होकर कर सकती थी काम, कुमारी सैलजा बोली- मौसम विभाग ने इस बार ज्यादा बारिश की पहले ही दे दे थी चेतावनी पर नहीं जागी भाजपा सरकार

    सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि शनिवार को उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और स्थिति देखकर साफ है कि भाजपा सरकार सिर्फ आश्वासन तक सीमित है, जबकि जनता राहत की प्रतीक्षा कर रही है। ऐलनाबाद के गांव गुड़ियाखेड़ा में हिसार घग्घर मल्टीपर्पज़ ड्रेन का जायजा लिया। ग्रामवासियों ने बताया कि पानी का स्तर बढ़ने से उन्हें अपनी फसलों और घरों को लेकर गहरी चिंता है। भाजपा सरकार समय रहते कदम क्यों नहीं उठा रही? इंतज़ार किस बात का है क्या हालात बिगड़ने और नुकसान होने के बाद ही प्रबंध किए जाएंगे? जनता को आश्वासन नहीं, समय पर राहत चाहिए। प्रशासन से मांग है कि तुरंत ठोस प्रबंध किए जाएं ताकि किसी भी अनहोनी से गांव और किसानों को बचाया जा सके।

    सासंद ने प्रदेश की भाजपा सरकार से मांग की है कि बाढ़ से फसलों को जो भी नुकसान हुआ है उसकी विशेष गिरदावरी करवाई जाए और फसलों को जो भी नुकसान हुआ है उसका मृुआवजा जल्द से जल्द दिया जाए, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य तेजी से किए जाए, मानसून से पहले नहरों, नालों और नदियों की साफ सफाई और तटबंधों को मजबूत न करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए और जिन्होंने यह कार्य केवज कागजों में ही दिखाया हुआ है उनके खिलाफ केस दर्ज करवाया जाए क्योंकि किसी भी अधिकारी को जनता की जान से खिलवाड़ करने का कोई हक नहीं है। किसान चीख चीख कर कह रहे कि इस बार नहरों, नालों और घग्घर नदी की सफाई नहीं हुई, लोगों प्रशासनिक अधिकारियों को फोटो और वीडियो तक दिखा रहे थे पर कोई कार्रवाई करने के लिए तैयार तक नहीं हुआ।

    नेता प्रतिपक्ष के सवालों का जवाब तो भाजपा सरकार को देना चाहिए

    सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जो भी सवाल उठाए वे तथ्यों के आधार पर ही उठाए थे और मीडिया के सामने उठाए थे, जिसका जवाब केंद्र सरकार को भी देना चाहिए, जवाब तो चुनाव आयोग को भी देना होगा, केंद्र सरकार अभी तक कुछ भी नहीं कह रही है। सांसद ने कहा कि चुनाव आयोग स्वयं को संवैधानिक संस्था से ऊपर उठकर देखे, चुनाव आयोग को स्थिति साफ करनी चाहिए क्योंकि सब उसकी ओर देख रहे हैं। सच तो ये है कि बिहार चुनाव से ठीक पहले बीजेपी चुनाव आयोग के साथ मिलकर वोट देने का अधिकार छीन रही है।