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  • Waqf Amendment Act 2025: डिजिटल सुधार और महिला सशक्तिकरण के साथ वक्फ संपत्तियों का पारदर्शी प्रबंधन संभव

    Waqf Amendment Act 2025: डिजिटल सुधार और महिला सशक्तिकरण के साथ वक्फ संपत्तियों का पारदर्शी प्रबंधन संभव

    Waqf Amendment Act 2025: भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार के लिए वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 एक क्रांतिकारी कानून है। यह अधिनियम वक्फ प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता लाने का प्रयास करता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 15 सितंबर 2025 को दिए गए निर्णय में न्यायालय ने अधिनियम को पूर्ण रूप से रोकने से इनकार कर दिया है, जो इसकी संवैधानिकता के पक्ष में एक महत्वपूर्ण संकेत है। वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका तकनीकी दृष्टिकोण है। यह अधिनियम वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का उपयोग सुनिश्चित करता है। एक केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल के माध्यम से सभी वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन और प्रबंधन होगा, जिससे भ्रष्टाचार की संभावनाएं काफी कम हो जाएंगी। यह व्यवस्था न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगी बल्कि वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को भी रोकेगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपत्ति की जानकारी, आय- व्यय का ब्योरा, और विकास परियोजनाओं की स्थिति सभी हितधारकों के लिए सुलभ होगी। यह तकनीकी सुधार वक्फ बोर्डों की कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन लाएगा और समुदाय की भलाई के लिए संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करेगा।

    Waqf Amendment Act 2025: डिजिटल सुधार और महिला सशक्तिकरण के साथ वक्फ संपत्तियों का पारदर्शी प्रबंधन संभव

    अधिनियम में प्रशासनिक ढांचे में व्यापक सुधार किए गए हैं। वक्फ बोर्डों की संरचना में सुधार करके उनमें विविधता और विशेषज्ञता लाई गई है। यह सुनिश्चित करता है कि वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन केवल धार्मिक आधार पर नहीं बल्कि आधुनिक प्रबंधन सिद्धांतों के अनुसार हो। बोर्डों में गैर- मुस्लिम सदस्यों की सीमित संख्या में नियुक्ति से विविध दृष्टिकोण मिलेगा, जो बेहतर निर्णय लेने में सहायक होगा। नए अधिनियम में वक्फ बोर्डों और स्थानीय प्राधिकरणों के बीच बेहतर समन्वय की व्यवस्था है, जिससे विकास कार्यों में तेजी आएगी। यह समुदाय के हितों की रक्षा करते हुए राष्ट्रीय विकास में वक्फ संपत्तियों के योगदान को बढ़ाएगा।

    15 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति ए.जी. मसीह की खंडपीठ ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर महत्वपूर्ण निर्णय दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि “किसी भी कानून की संवैधानिकता के पक्ष में हमेशा अनुमान लगाया जाता है।” यह टिप्पणी अधिनियम की वैधता के पक्ष में एक मजबूत संकेत है। न्यायालय ने पूरे अधिनियम को रोकने से इनकार कर दिया, केवल कुछ विशिष्ट प्रावधानों को अस्थायी रूप से रोका। यह निर्णय अधिनियम के मूल ढांचे और उद्देश्यों की वैधता को स्वीकार करता है। कोर्ट ने माना कि सुधार की आवश्यकता है और अधिकांश प्रावधान समुदाय और राष्ट्र के हित में हैं। अधिनियम का एक विशेष पहलू मुस्लिम महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार है। नए नियमों से महिलाओं को वक्फ संपत्तियों से होने वाले लाभ में अधिक हिस्सेदारी मिलेगी। यह लैंगिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इस्लामिक न्याय के सिद्धांतों के अनुकूल भी है। वक्फ संपत्तियों से होने वाली आय का उपयोग महिला शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में किया जाएगा। यह समुदाय के सामाजिक विकास में योगदान देगा और लैंगिक असमानता को कम करने में सहायक होगा। वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन न केवल समुदाय के लिए बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभकारी है। अधिनियम के तहत वक्फ संपत्तियों का व्यावसायिक उपयोग बढ़ेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यह न केवल मुस्लिम समुदाय बल्कि व्यापक समाज के लिए भी फायदेमंद होगा। संपत्तियों के विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा और कृषि, व्यापार, शिक्षा व स्वास्थ्य क्षेत्रों में नए निवेश आएंगे। यह समुदायिक विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रगति में भी योगदान देगा।

    वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 भारत में धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन में एक नए युग की शुरुआत करता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से स्पष्ट होता है कि न्यायपालिका भी इस सुधार की आवश्यकता को समझती है। यह अधिनियम न केवल वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकेगा बल्कि उनका उपयोग समुदाय और राष्ट्र की भलाई के लिए सुनिश्चित करेगा। आधुनिक तकनीक, पारदर्शी प्रक्रियाओं, और जवाबदेह प्रशासन के साथ यह अधिनियम वक्फ व्यवस्था को 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए तैयार करता है। यह समुदायिक सद्भावना बनाए रखते हुए राष्ट्रीय एकता में योगदान देगा और भारत के धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र को मजबूत बनाएगा। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू के अनुसार, यह निर्णय वक्फ सुधारों के महत्व की पुष्टि करता है और यह आश्वासन देता है कि वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा, विकास और उपयोग समुदाय एवं राष्ट्र की भलाई के लिए होगा। यह 2025 के सुधारों के उद्देश्यों के अनुकूल है और भविष्य में वक्फ प्रबंधन के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।

  • कुमारी शैलजा का आरोप, भाजपा की 2100 रुपये की घोषणा सिर्फ चुनावी जुमला, महिलाओं के साथ छलावा

    कुमारी शैलजा का आरोप, भाजपा की 2100 रुपये की घोषणा सिर्फ चुनावी जुमला, महिलाओं के साथ छलावा

    अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी शैलजा ने कहा कि हरियाणा सहित देशभर की करोड़ों महिलाओं के साथ भाजपा सरकार बार-बार छलावा कर रही है। अब लाड़ो लक्ष्मी योजना और 2100 रुपये देने का जो शोर मचाया जा रहा है, वह भी जनता को गुमराह करने का एक और चुनावी हथकंडा है। योजना में आय सीमा रखकर अधिकतर गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों की महिलाओं को बाहर कर दिया गया है।

    मीडिया को जारी बयान में कुमारी शैलजा ने कहा कि भाजपा का संकल्प पत्र सभी महिलाओं को 2100 रुपये देने की बात करता है, लेकिन हकीकत में योजना इतनी शर्तों से बंधी है कि अधिकांश महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिल पाएगा। योजना में आय सीमा रखकर अधिकांश गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों की महिलाओं को बाहर कर दिया गया है।

    कुमारी शैलजा का आरोप, भाजपा की 2100 रुपये की घोषणा सिर्फ चुनावी जुमला, महिलाओं के साथ छलावा

    केवल कुछ गिनी-चुनी महिलाएं ही इसका लाभ ले पाएंगी, जबकि संकल्प पत्र में सभी महिलाओं को लाभ देने की बात कही गई थी। महिलाओं को वास्तविक सशक्तिकरण और सम्मान की जगह मात्र चुनावी लालच देकर गुमराह किया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट मत है कि महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण के लिए ठोस और दीर्घकालीन योजनाएं बनाई जाएं, न कि केवल चुनाव के समय वोट बटोरने के लिए ऐसी घोषणाएं की जाए।

    कुमारी शैलजा ने कहा है कि इस योजना लाभ उन्हीं महिलाओं को मिलेगा जिनके परिवार की आय एक लाख रुपये से कम होनी चाहिए और आय का निर्धारण परिवार पहचान पत्र के आधार पर किया जाएगा। कुमारी शैलजा ने कहा कि इस योजना के तहत आयु सीमा दूसरे राज्यों की अपेक्षा हरियाणा में कम रखी है। दूसरे राज्य में यह आय सीमा 1.20 लाख रुपपे से 2.50 रुपये तक रखी गई है। सांसद कुमारी शैलजा ने भाजपा सरकार से पूछा है कि जब उनका संकल्प पत्र सभी महिलाओं को 2100 रुपये देने का था, तो फिर आय सीमा की शर्त क्यों लगाई गई? क्या भाजपा महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है या केवल चुनावी राजनीति करना चाहती है? क्या महिलाओं की गरिमा और अधिकार महज 2100 रुपये से खरीदे जा सकते हैं? सांसद ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के लिए नीतियां बनाईं और जमीन पर उतारी हैं। आने वाले समय में कांग्रेस महिलाओं को उनका वास्तविक हक और सम्मान दिलाने के लिए संकल्पबद्ध है। 

  • प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार पर किया कड़ा प्रहार जींद-रोहतक मार्केटिंग बोर्ड के पांच अधिकारी सस्पेंड 10 करोड़ का विवाद

    प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार पर किया कड़ा प्रहार जींद-रोहतक मार्केटिंग बोर्ड के पांच अधिकारी सस्पेंड 10 करोड़ का विवाद

    प्रदेश सरकार ने जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन की अपनी नीति पर चलते हुए जींद और रोहतक में मार्केटिंग बोर्ड के एसडीओ, जेई समेत 5 कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है। इनमें चार जींद के और एक रोहतक की एसडीई शामिल हैं। सस्पेंड किए गए अधिकारियों में एक जींद की बड़ी भाजपा महिला नेत्री के पति हैं। सरकार ने अपनी ही महिला नेता के पति को सस्पेंड करके साफ संदेश दिया है कि वह करप्शन पर किसी प्रकार का कोई समझौता नहीं करेगी।

    प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार पर किया कड़ा प्रहार जींद-रोहतक मार्केटिंग बोर्ड के पांच अधिकारी सस्पेंड 10 करोड़ का विवाद

    आरोप है कि जींद के कर्मचारियों ने सब यार्ड और सड़कों का काम पूरा किए बिना ही 10 करोड़ रुपए पेमेंट कर दी। इसकी जांच हुई तो मामले का खुलासा हुआ और इसके बाद हरियाणा मार्केटिंग बोर्ड पंचकूला मुख्य प्रशासक कार्यालय की तरफ से पांच कर्मचारियों के सस्पेंशन ऑर्डर जारी हुए। हालांकि रोहतक मार्केटिंग बोर्ड की एसडीई सीमा के सस्पेंशन का कारण तत्काल नहीं पता चल पाया है।

    मार्केटिंग बोर्ड के मुख्य प्रशासक द्वारा जींद मार्केटिंग बोर्ड के एसडीओ रवि प्रकाश, एसडीई रोशन लाल, जेई नरेश कुमार, जेई सुरेंद्र कुमार और रोहतक मार्केटिंग बोर्ड की एसडीई सीमा को सस्पेंड किया है। इस मामले में एसडीओ रवि प्रकाश से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

    सस्पेंशन अवधि के दौरान एसडीओ रवि प्रकाश नैन और जेई नरेश कुमार का मुख्यालय हिसार एसई कार्यालय और एसडीई रोशन लाल व जेई सुरेंद्र कुमार का मुख्यालय रोहतक एसई कार्यालय रहेगा। वहीं रोहतक की एसडीओ सीमा का निलंबन के दौरान मुख्यालय जींद एसई कार्यालय रहेगा।

  • हरियाणा सरकार ने 5 साल पुराने फैसले को पलटा, किसानों को मिलेगा पर्याप्त पानी और राहत

    हरियाणा सरकार ने 5 साल पुराने फैसले को पलटा, किसानों को मिलेगा पर्याप्त पानी और राहत

    हरियाणा सरकार ने किसानों की सुविधा और नहर जल प्रबंधन को दुरुस्त करने के लिए एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने जून 2020 में जारी अपने ही उन आदेशों को रद्द कर दिया है, जिनके तहत जुई, सिवानी और हिसार जल सेवाएं प्रभागों से कुछ नहर तंत्र लोहारू डिवीजन में स्थानांतरित किए गए थे। इससे किसानों को पर्याप्त मात्रा में पानी मिल पाएगा और साथ ही उनकी समस्याओं का समाधान भी समय पर हो पाएगा।

    पांच वर्ष पहले सरकार द्वारा जारी आदेशों के बाद बनी नई व्यवस्था के चलते कई व्यवहारिक कठिनाइयां सामने आईं। नहरों के केवल टेल हिस्से लोहारू डिवीजन में रहे, जबकि हेड हिस्से अपने मूल प्रभागों के पास ही थे। इस विभाजन से नहर जल का कुशल प्रबंधन नहीं हो पाया और खासतौर पर टेल एंड पर बसे किसानों को पानी की कमी का सामना करना पड़ा। जिससे उनकी फसल प्रभावित हुई।

    सरकार ने किसानों की इन समस्याओं को देखते हुए नहरों को उनके मूल प्रभागों को लौटा दिया है। इस कदम से हेड से लेकर टेल तक बेहतर नियंत्रण और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। पानी की आपूर्ति निष्पक्ष और भरोसेमंद ढंग से टेल एंड गांवों तक पहुंचेगी। फील्ड स्टाफ भी किसानों की शिकायतों के समाधान में अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार रहेगा। विभाग पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ और कार्य की दोहराव भी समाप्त हो जाएगी।

    हरियाणा सरकार ने 5 साल पुराने फैसले को पलटा, किसानों को मिलेगा पर्याप्त पानी और राहत

    सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसानों को सुविधा में कोई कमी न आए। वर्ष 2023 में सरकार ने गांव खेड़ा, ब्लॉक सिवानी, जिला भिवानी में 17.54 करोड़ रुपये की लागत से एकीकृत कार्यालय परिसर, नहर विश्राम गृह और स्टाफ आवासीय भवन को मंजूरी दी थी। यह परियोजना अब 80 प्रतिशत पूरी हो चुकी है और जल्द ही इसमें तीनों अहम कार्यालय—एसडीओ सिवानी (लोहारू डिवीजन, एलडब्ल्यूएस सर्किल), एसडीओ माइकाड़ा (माइकाड़ा डिवीजन) और एसडीओ सिवानी (सिवानी डिवीजन, वाईडब्ल्यूएस सर्किल)—एक ही छत के नीचे काम करेंगे। इससे किसानों को रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

    सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल नहर प्रबंधन सुचारू होगा बल्कि किसानों तक समय पर पानी पहुंच पाएगा। प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी और किसानों की संतुष्टि भी सुनिश्चित होगी। खासकर टेल एंड के किसान इस निर्णय से सीधा लाभ उठाएंगे और जल वितरण व्यवस्था में सुधार का अनुभव करेंगे।

    किसानों के प्रति प्रतिबद्ध : श्रुति चौधरी

    सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी ने कहा कि यह फैसला हमारी सरकार की किसानों के प्रति प्रतिबद्धता और नहर जल प्रबंधन को सुधारने का प्रमाण है। हम जमीनी हालात को देखते हुए पुराने फैसलों की समीक्षा करने से हिचकिचाते नहीं हैं। नहर प्रबंधन को सही दिशा देने के साथ-साथ हम आधुनिक ढांचे में भी निवेश कर रहे हैं ताकि हर किसान को सेवाएं आसानी और बिना किसी झंझट के मिल सकें।

  • Rahul Gandhi ने ECI को दी 1 हफ्ते की चेतावनी, वोट चोरी और डिलीट होने वाले वोटों का किया खुलासा

    Rahul Gandhi ने ECI को दी 1 हफ्ते की चेतावनी, वोट चोरी और डिलीट होने वाले वोटों का किया खुलासा

    कांग्रेस नेता Rahul Gandhi लंबे समय से वोट चोरी के आरोप लगाते आ रहे हैं। 7 अगस्त को उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तार से बताया कि किस तरह से चुनाव आयोग वोटों की हेराफेरी कर रहा है। इसी क्रम में 18 सितंबर को उन्होंने एक और प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि यह हाइड्रोजन बम नहीं है, वह जल्द आएगा। उन्होंने वोट डिलीट होने के सबूत पेश किए और समझाया कि चुनाव आयोग किस तरह वोटों को हटा रहा है।

    कर्नाटक CID ने भेजे 18 पत्र

    राहुल गांधी ने बताया कि कर्नाटक CID ने इस वोट डिलीशन मामले को लेकर चुनाव आयोग को 18 पत्र लिखे हैं। इन पत्रों में CID ने चुनाव आयोग से तीन सवाल पूछे। बावजूद इसके, इतने पत्रों के बाद भी चुनाव आयोग की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। राहुल ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुँचाने वालों की रक्षा कर रहे हैं। यही कारण है कि इतने पत्रों के बाद भी कोई उत्तर नहीं मिल पाया।

    Rahul Gandhi ने ECI को दी 1 हफ्ते की चेतावनी, वोट चोरी और डिलीट होने वाले वोटों का किया खुलासा

    वोट चोरी के सबूत और आरोप

    राहुल गांधी ने वोट चोरी के सबूत पेश करते हुए कहा कि हाइड्रोजन बम आने वाला है। उन्होंने बताया कि पिछली बार उन्होंने वोटों के जोड़ने की जानकारी दी थी, आज उन्होंने वोटों के हटाने की प्रक्रिया के बारे में बताया। यह सब केंद्रीकरण और कॉल सेंटर के माध्यम से किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी जानकारी ठोस सबूतों के साथ प्रस्तुत की जा रही है। उनका कहना था कि ECI के प्रमुख ज्ञानेश कुमार वोट चोरों की रक्षा कर रहे हैं।

    राज्यवार वोट हेराफेरी

    राहुल ने कहा कि कर्नाटक CID ने वोट डिलीट मामले की जांच शुरू की थी। CID ने चुनाव आयोग को कई सवालों के साथ पत्र भेजे, जिसमें OTP और मोबाइल नंबरों की जानकारी मांगी गई। फरवरी 2023 में जांच शुरू हुई। मार्च में पहला पत्र भेजा गया, जिसमें कई सवालों के जवाब मांगे गए। अगस्त में अधूरी जानकारी दी गई, जबकि आवश्यक जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कर्नाटक में नहीं हुआ, महाराष्ट्र के राजुरा में नाम जोड़े गए और कर्नाटक में नाम हटाए गए।

    चुनाव आयोग को एक सप्ताह का अल्टीमेटम

    राहुल गांधी ने चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया। उनका कहना था कि जनता को पूरी जानकारी एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करनी होगी। तभी चुनाव आयोग पर विश्वास कायम रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो लोकतंत्र की प्रक्रिया पर सवाल उठेंगे। राहुल गांधी की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस एक बार फिर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

  • मुख्यमंत्री नायब सैनी का भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार, बसई वाटर ट्रीटमेंट प्रोजेक्ट के टेंडर में गड़बड़ी पर मुख्य अभियंता चार्जशीट

    मुख्यमंत्री नायब सैनी का भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार, बसई वाटर ट्रीटमेंट प्रोजेक्ट के टेंडर में गड़बड़ी पर मुख्य अभियंता चार्जशीट

    हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने विकास परियोजनाओं में अनियमितताओं पर नकेल कसते हुए गड़बड़ी पर कड़ा प्रहार किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरुग्राम के बसई वाटर ट्रीटमेंट प्रोजेक्ट के टेंडर में गड़बड़ी सामने आने के बाद मुख्य अभियंता को चार्जशीट करने के आदेश दिए हैं। सीएम सैनी ने साफ कहा कि इस मामले में टेंडर प्रक्रिया के नियम जानबूझकर तोड़े गए, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा और जनता समय पर सुविधा से वंचित रही।

    चंडीगढ़ में हाई पावर परचेज कमेटी की बैठक के दौरान सीएम ने ये आदेश दिए। बैठक में कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल, श्याम सिंह राणा, रणबीर गंगवा, राज्य मंत्री राजेश नागर, उर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एके सिंह, पीडब्ल्यूडी (भवन एवं सड़कें) विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल, वित्त विभाग के आयुक्त एवं सचिव-। मोहम्मद शाईन, आपूर्ति एवं निपटान विभाग के महानिदेशक पंकज और विभिन्न विभागों के प्रशासनिक सचिव भी शामिल रहे।

    मुख्यमंत्री नायब सैनी का भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार, बसई वाटर ट्रीटमेंट प्रोजेक्ट के टेंडर में गड़बड़ी पर मुख्य अभियंता चार्जशीट

    मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा, ‘सरकार की पहली प्राथमिकता पारदर्शिता और जनता का हित है। विकास कार्यों में ईमानदारी और गुणवत्ता से समझौता किसी भी कीमत पर नहीं किया जाएगा। भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति लागू है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। यहां बता दें कि गुरुग्राम का बसई वाटर ट्रीटमेंट प्रोजेक्ट शहर की पानी सप्लाई को मजबूती देने के लिए शुरू किया गया था।

    टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ियों के आरोप लंबे समय से लग रहे थे। परियोजना के ठेकों में नियमों को नजरअंदाज करने और वित्तीय अनियमितताओं पर सवाल उठे थे। मुख्यमंत्री ने नौकरशाही और ठेकेदार लॉबी दोनों को कड़ा संदेश इस कार्रवाई के जरिये दिया। उन्होंने दोहराया कि विकास परियोजनाएं जनता की सुविधा के लिए हैं, किसी अधिकारी या ठेकेदार की मनमर्जी से नियम तोड़ने के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि विकास में देरी जनता के साथ अन्याय है। लापरवाही और भ्रष्टाचार का जिम्मा तय होगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

    हाई पावर्ड परचेज कमेटी और हाई पावर्ड वर्क्स परचेज कमेटी की बैठक में लगभग 851 करोड़ रुपये के ठेकों व खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बोलीदाताओं से हुई बातचीत के बाद करीब 28 करोड़ रुपये की बचत दर्ज की गई। बैठक में 133 करोड़ रुपये के कार्यों पर सहमति बनी। इसमें उत्तर व दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के लिए 16, 20, 25, 63 और 100 केवीए क्षमता वाले ट्रांसफॉर्मरों की मरम्मत शामिल है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग, हैफेड और हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के लिए 18,353 काले पॉलिथीन कवर की वार्षिक दर अनुबंध पर खरीद को भी मंजूरी दी गई। यह कवर खाद्यान्न भंडारण और संरक्षण के लिए उपयोग किए जाएंगे।

    बैठक में सड़क नेटवर्क सुधार पर खास जोर रहा। करीब 178 करोड़ रुपये की लागत से कई जिलों में सड़कों के चौड़ीकरण और मजबूती का काम होगा। भिवानी जिले में हांसी-तोशाम रोड को चार लेन बनाने का निर्णय लिया। साथ ही, तोशाम-भिवानी रोड, रोहतक-खरखौदा-दिल्ली बॉर्डर रोड, रेवाड़ी-दादरी रोड (बेरली कलां से कोसली तक), गोहाना से भिवानी वाया लाखनमाजरा व महम रोड और सुरेवाला चौक-उकलाना रोड के अपग्रेडेशन का निर्णय लिया। इन पर कुल 103.23 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कैथल में कुंजपुरा-करनाल-कैथल-खन्नौरी रोड की मजबूती, करनाल-कैथल रोड की विशेष मरम्मत, कोंड-मुनक-सालवान-असंध रोड और करनाल-रांबा-इंद्री-लाडवा रोड पर इंटरलॉकिंग पावर ब्लॉक लगाने पर लगभग 75.49 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

    बैठक में 14 करोड़ रुपये की लागत से राणा डिस्ट्रीब्यूटरी के रीमॉडलिंग की स्वीकृति दी गई। इससे क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधाओं में सुधार मिलेगा। इसके अलावा 132/11 केपीएम ट्रांसफॉर्मरों की खरीद के लिए 15.47 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भी पारित हुआ। इससे बिजली आपूर्ति तंत्र को मजबूती मिलेगी।

  • हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण बना प्रॉपर्टी डीलर , शहरों की प्रॉपर्टी अब HSVP अपने पोर्टल के माध्यम से बेचेगा

    हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण बना प्रॉपर्टी डीलर , शहरों की प्रॉपर्टी अब HSVP अपने पोर्टल के माध्यम से बेचेगा

    हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण अब प्रदेश में प्रॉपर्टी डीलर का काम करेगा। सरकार ने शहरी क्षेत्रों में प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने अब प्राइवेट प्रॉपर्टीज की बिक्री और खरीद को अपने पोर्टल के माध्यम से अनिवार्य कर दिया है। इस फैसले से प्रदेश के प्रॉपर्टी डीलरों को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि अब सौदे सीधे पोर्टल पर होंगे और हर लेन-देन सरकार की निगरानी में रहेगा।

    नये प्रावधानों के तहत एचएसवीपी पोर्टल पर प्रॉपर्टी लिस्ट करने के लिए विक्रेता को 10,000 रुपये की नॉन-रिफंडेबल रजिस्ट्रेशन फीस के साथ जीएसटी देना होगा। यही नहीं, सरकार ने बिक्री और खरीद पर भी कमीशन लागू किया है। प्रॉपर्टी लिस्ट करते समय विक्रेता को प्रॉपर्टी की मांग की गई कीमत का 0.25% बतौर कमीशन देना होगा। वहीं, जब खरीदार बोली को स्वीकार करेगा, तो उसे अंतिम बोली राशि का 0.50% कमीशन के रूप में चुकाना पड़ेगा।

    हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण बना प्रॉपर्टी डीलर , शहरों की प्रॉपर्टी अब HSVP अपने पोर्टल के माध्यम से बेचेगा

    एचएसवीपी के नये नियमों के अनुसार, विक्रेता को पोर्टल पर केवाईसी डॉक्यूमेंट्स, कानूनी वारिस की सहमति, प्रॉपर्टी से जुड़े मुकदमों से मुक्त होने का प्रमाण और प्रॉपर्टी का पूरा विवरण देना अनिवार्य होगा। इसके बाद खरीदार ऑनलाइन बोली लगाएंगे और सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को प्रॉपर्टी मिलेगी। सौदा तय होने के साथ ही स्वचालित रूप से ट्रांसफर परमिशन जारी होगी, जो 90 दिन तक मान्य रहेगी।

    पोर्टल के जरिये की जाने वाली डील में विक्रेता और खरीददार की संपर्क जानकारी (मोबाइल नंबर व ईमेल) डील पूरी होने तक गोपनीय रखी जाएगी। इसका उद्देश्य अनधिकृत नेगोसिएशन और ‘ऑफ-प्लेटफॉर्म’ डील्स को रोकना है। साथ ही, हर चरण की जानकारी एसएमएस और ईमेल के जरिए दोनों पक्षों को भेजी जाएगी।

    इस फैसले से प्रॉपर्टी डीलरों में नाराजगी देखी जा रही है, क्योंकि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा प्रभावित होगा। दूसरी ओर सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से आम खरीदार और विक्रेता को फायदा होगा, क्योंकि धोखाधड़ी और कालाबाजारी की गुंजाइश समाप्त हो जाएगी। सरकार का यह कदम रियल एस्टेट सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव की ओर इशारा करता है और अब देखना होगा कि आने वाले समय में इसका बाजार पर कितना गहरा असर पड़ता है।

    फिलहाल पांच बड़े शहरों में होगी शुरुआत

    एचएसवीपी ने शुरुआती तौर पर इस व्यवस्था को पांच बड़े शहरों में लागू करने का फैसला किया है और इनके लिए ऑक्शन की तारीख भी घोषित कर दी है। माना जा रहा है कि यह कदम जहां पारदर्शिता बढ़ाएगा, वहीं प्रॉपर्टी बाजार में बिचौलियों की भूमिका लगभग खत्म कर देगा।

    बढ़ेगा सरकार का रेवेन्यू

    सरकार के इस फैसले से सरकार के रेवेन्यू में जबरदस्त इजाफा होगा। पहले तो इजाफा एचएसवीपी को होगा जो कुल मूल्य का 0.75% कमीशन के रूप में लेगा और साथ प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन के समय ₹10000 भी प्राप्त करेगा। दूसरा इजाफा राजस्व विभाग को होगा। वर्तमान में सभी रजिस्टर कलेक्टर रेट पर हो रही है लेकिन जब मामला सरकार की जानकारी में आएगा तो रजिस्ट्री पूरे मूल्य की होगी जिससे रात सभी विभाग के संग्रहण में भारी वृद्धि दर्ज की जाएगी।

  • CET Exam के रिजल्ट के बीच से हटी सभी बाधाएं, हाईकोर्ट ने खारिज की सभी याचिकाएं, आयोग के सदस्य बोले जल्द आएगा रिजल्ट

    CET Exam के रिजल्ट के बीच से हटी सभी बाधाएं, हाईकोर्ट ने खारिज की सभी याचिकाएं, आयोग के सदस्य बोले जल्द आएगा रिजल्ट

    CET Exam: हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) की तरफ से 26 और 27 जुलाई को आयोजित की गई कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीईटी) परीक्षा पर उठाए गए सवालों पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक और याचिका खारिज कर दी है। आयोग के सदस्य भूपेंद्र चौहान ने बताया कि यह याचिका एक अभ्यर्थी द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि परीक्षा के दौरान उसके सहायक लेखक को बैठने की अनुमति नहीं दी गई।

    आयोग के चेयरमैन हिम्मत सिंह ने अपने फेसबुक पेज पर हाईकोर्ट के इस फैसले की जानकारी दी। जांच में यह तथ्य सामने आया कि अभ्यर्थी ने अपने ऑनलाइन आवेदन पत्र में सहायक लेखक के लिए ‘नहीं’ विकल्प चुना था। नियमों के अनुसार, ऐसी स्थिति में सहायक लेखक की अनुमति नहीं दी जाती। इसके बावजूद अभ्यर्थी के हित में आयोग ने मौके पर उसे सहायक लेखक उपलब्ध करवाने की अनुमति दी थी, लेकिन स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए सहायक लेखक ने स्वयं परीक्षा देने से इनकार कर दिया। इसके बाद अभ्यर्थी अदालत पहुंचा, परंतु हाईकोर्ट ने तथ्यों के आधार पर आरोपों को निराधार मानते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

    CET Exam के रिजल्ट के बीच से हटी सभी बाधाएं, हाईकोर्ट ने खारिज की सभी याचिकाएं, आयोग के सदस्य बोले जल्द आएगा रिजल्ट

    आयोग सदस्य चौहान ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी की जा रही है। रिज़ल्ट में देरी या पुनः परीक्षा कराने की नीयत से कुछ लोग अदालत का दरवाज़ा खटखटा रहे हैं। लेकिन अब तक दायर याचिकाएं निराधार साबित हुई हैं और अदालत द्वारा खारिज की जा चुकी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभ्यर्थियों को किसी भी प्रकार की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है और आयोग जल्द ही परिणाम घोषित करेगा।

    पहले भी उठ चुके हैं सवाल

    गौरतलब है कि हरियाणा में सीईटी परीक्षा, ग्रुप-सी और ग्रुप-डी भर्तियों के लिए अनिवार्य है। पिछली बार भी इस परीक्षा पर सवाल उठे थे और कई अभ्यर्थियों ने कदाचार व अव्यवस्थाओं का आरोप लगाते हुए अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था। हालांकि अधिकांश मामलों में अदालत ने आयोग की प्रक्रिया को सही माना और याचिकाओं को खारिज कर दिया। इस बार भी परीक्षा संपन्न होने के बाद लगातार कुछ याचिकाएं दायर की गईं, जिन्हें अदालत तथ्यों के आधार पर नकार चुकी है।

  • यमुनानगर फूड सप्लाई विभाग में रिश्वत का बड़ा खुलासा, 7100 रुपये की मांग पर कार्रवाई

    यमुनानगर फूड सप्लाई विभाग में रिश्वत का बड़ा खुलासा, 7100 रुपये की मांग पर कार्रवाई

    यमुनानगर जिले के फूड सप्लाई विभाग के अधिकारी अपने वेतन के बावजूद बिना पैसे काम करने को तैयार नहीं थे। ऐसे ही एक मामले में विभाग के इंस्पेक्टर और एएफएसओ ने 15 अगस्त को जिले के सभी डिपो संचालकों से 7100 रुपये मासिक और 500 रुपये लड्डू के नाम पर मांग की। आरोप है कि बैठक में प्रति क्विंटल गेहूं 10 रुपये का कमीशन भी तय किया गया और बाकी खर्च अलग था।

    गुलाब सिंह को दी गई राशि इकट्ठा करने की जिम्मेदारी

    बैठक में तय राशि को इकट्ठा करने का काम डिपो प्रमुख गुलाब सिंह को सौंपा गया। अधिकांश डिपो संचालकों ने अपनी हिस्सेदारी भेज दी, लेकिन बिलासपुर के डिपो संचालक नितिन ने इस अवैध मांग के खिलाफ DFSC में शिकायत दर्ज कराई। वहाँ उसे अपमान का सामना करना पड़ा, लेकिन नितिन ने बैठक की रिकॉर्डिंग अपने मोबाइल में कर ली।

    यमुनानगर फूड सप्लाई विभाग में रिश्वत का बड़ा खुलासा, 7100 रुपये की मांग पर कार्रवाई

    मोबाइल रिकॉर्डिंग से खुला सच

    नितिन ने मोबाइल रिकॉर्डिंग के आधार पर Vigilance ऑफिस का रुख किया। इस रिकॉर्डिंग ने साबित कर दिया कि अधिकारी अवैध तरीके से राशि की मांग कर रहे थे और डिपो संचालकों को धमकी दी जा रही थी। इंस्पेक्टर ने धमकी दी कि यदि नितिन पैसे नहीं देगा तो डिपो को सस्पेंड कर दिया जाएगा।

    Vigilance ने जाल बिछाकर कार्रवाई की

    जांच टीम ने पूरी योजना बनाई और जाल बिछाया। जैसे ही इंस्पेक्टर राजेश यादव और गुलाब सिंह 7100 रुपये लेने पहुंचे, Vigilance ने गुलाब सिंह को पकड़ लिया, जबकि इंस्पेक्टर राजेश यादव मौके से फरार हो गए। टीम ने 7100 रुपये बरामद किए और गुलाब सिंह को गिरफ्तार कर लिया।

    आगे की कार्रवाई और संदेश

    Vigilance ने कहा कि राजेश यादव को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन अधिकारी शामिल थे और उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह घटना स्पष्ट संदेश देती है कि सरकारी कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले भ्रष्टाचार पर नज़र रखी जा रही है और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं रखा जाएगा।

  • देशभर में कटेंगे एक करोड़ 17 लाख राशन कार्ड, केंद्र सरकार ने जुटाई अपात्र लोगों की लिस्ट

    देशभर में कटेंगे एक करोड़ 17 लाख राशन कार्ड, केंद्र सरकार ने जुटाई अपात्र लोगों की लिस्ट

    अगर आप भी राशन कार्डधारक हैं और मुफ्त अनाज का फायदा उठा रहे हैं, तो ये खबर आपके लिए जरुरी है। केंद्र सरकार ने पहली बार उन राशन कार्ड धारकों की पहचान की है जो मुफ्त खाद्यान्न योजना के लाभ के पात्र नहीं हैं। इनमें आयकर दाता, चार-पहिया वाहन मालिक और कंपनियों के निदेशक शामिल हैं।

    खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने राशन कार्डधारकों के डाटाबेस को आयकर विभाग, सड़क परिवहन मंत्रालय और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय जैसी एजेंसियों से मिलान कर यह सूची तैयार की है। जांच में सामने आया कि 94.71 लाख कार्डधारक आयकर दाता, 17.51 लाख चार-पहिया वाहन मालिक और 5.31 लाख कंपनी निदेशक हैं।

    देशभर में कटेंगे एक करोड़ 17 लाख राशन कार्ड, केंद्र सरकार ने जुटाई अपात्र लोगों की लिस्ट

    इस तरह कुल 1.17 करोड़ कार्डधारक अपात्र की श्रेणी में आते हैं। केंद्र ने सभी राज्यों से कहा है कि वे जमीनी स्तर पर सत्यापन कर 30 सितंबर तक अपात्र लाभार्थियों को सूची से बाहर करें। खाद्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, केंद्र ने यह डेटा राज्यों को उपलब्ध कराया है ताकि फर्जी और अपात्र कार्ड हटाकर प्रतीक्षा सूची में शामिल वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को योजना का लाभ मिल सके।

    राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत अब तक 19.17 करोड़ राशन कार्ड जारी। देशभर में 76.10 करोड़ लाभार्थी इस योजना से जुड़े। नियमों के अनुसार सरकारी कर्मचारी, आयकरदाता, सालाना 1 लाख या उससे अधिक आय वाले परिवार और चार-पहिया वाहन मालिक पात्र नहीं।

    8 जुलाई 2025 को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे पत्र में खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि अपात्र लाभार्थियों की पहचान CBDT, CBIC, MCA, MoRTH और PM-किसान जैसी एजेंसियों के डाटाबेस से की गई है। उन्होंने निर्देश दिया कि यह प्रक्रिया 30 सितंबर तक पूरी की जाए ताकि वंचित परिवारों को सही समय पर लाभ पहुंच सके और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित हो।

    सरकार ने जुलाई में राज्यसभा को बताया था कि 2021 से 2023 के बीच 1.34 करोड़ फर्जी/अपात्र राशन कार्ड रद्द किए गए थे। वर्तमान में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत पात्र लाभार्थियों को अनाज मुफ्त दिया जा रहा है।