हरियाणा सरकार ने युवाओं को महत्व देने के लिए आने वाले समय में रिटायर होने वाले कर्मचारियों को रि-अपॉइंटमेंट नहीं देने का फैसला किया है। केवल विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 2 साल के लिए रिअप्वाइंटमेंट की जा सकेगी।
सरकार ने एक साथ कई ऐसे फैसले किए हैं, जिनका सीधा असर सरकारी कर्मचारियों पर पड़ेगा। इनमें कहीं राहत है तो कहीं सख्ती दिखाई दे रही है। री-इम्पलॉयमेंट पर सरकार ने सीमाएं तय कर दी हैं। अनुबंध (कांट्रेक्ट) कर्मचारियों के लिए डिजिटल सुरक्षा का रास्ता खोल दिया है। छुट्टियों पर समिति के जरिए पारदर्शिता लाई जा रही है और हड़ताल पर गए लिपिकों को भी बड़ी राहत दी है।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की ओर से इन फैसलों को लेकर प्रशासनिक सचिवों व विभाग प्रमुखों को पत्र जारी करके हिदायतें दी गईं। इन फैसलों के जरिये सरकार ने जहां एक तरफ प्रशासनिक व्यवस्था में अनुशासन और पारदर्शिता लाने की कोशिश की है। वहीं दूसरी ओर, कर्मचारियों का भरोसा जीतने की भी कोशिश साफ दिख रही है। री-इम्पलॉयमेंट पर लगाम से जहां नई पीढ़ी के लिए अवसर बढ़ेंगे। वहीं अनुबंध कर्मचारियों को डिजिटल पोर्टल और लिपिकों को हड़ताल अवधि की मान्यता राहत का अहसास दिलाएगी।

प्रदेश में अक्सर यह शिकायत रहती थी कि सेवानिवृत्ति के बाद भी अधिकारी-कर्मचारी लंबे समय तक कुर्सी पर जमे रहते हैं। सरकार ने अब इसे सख्ती से सीमित कर दिया है। नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक 58 साल की उम्र पूरी करने के बाद केवल दो साल तक ही री-इम्पलॉयमेंट मिलेगी। वह भी सिर्फ असाधारण परिस्थितियों में। सरकार का कहना है कि यह फैसला कनिष्ठ कर्मचारियों की पदोन्नति को रास्ता देने के लिए जरूरी है।
छुट्टियों पर भी नियमबद्धता
राज्य में अक्सर किसी दिन को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग उठती रहती है। अब इसके लिए एक स्थायी समिति बनाई गई है। इस समिति की अध्यक्षता राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के वित्तायुक्त करेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग के एसीएस और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव इसमें सदस्य होंगे। यह समिति आमजन या जनप्रतिनिधियों से आने वाले प्रस्तावों पर भी विचार करेगी और फिर सरकार को अपनी सिफारिश भेजेगी।
हरियाणा के अनुबंध कर्मचारी लंबे समय से सेवा सुरक्षा को लेकर असमंजस में रहते थे। अब सरकार ने उनकी समस्या का समाधान करने के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल बनाने का निर्णय लिया है। इस पोर्टल के माध्यम से सभी आवेदन हरियाणा अनुबंध कर्मचारी (सेवा सुरक्षा) नियम, 2025 के तहत किए जाएंगे। कर्मचारियों का कहना है कि यह कदम उनकी नौकरी में सुरक्षा और स्थायित्व की उम्मीद को मजबूत करेगा।
साल 2023 में हुई लिपिकों की हड़ताल को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। उस दौरान की अवधि को अब ‘अर्जित अवकाश’ माना जाएगा। इसका मतलब यह है कि कर्मचारियों का वेतन नहीं कटेगा और न ही इसे सेवा में रुकावट माना जाएगा। हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया है कि यह सिर्फ एक बार की विशेष व्यवस्था होगी और भविष्य में इसकी नजीर पेश नहीं की जाएगी।


















