Haryana News: पढ़ाई से परेशान किशोर ने ली अपनी जान! घर में सुबह कमरे में लटका मिला शव

Haryana News: पढ़ाई से परेशान किशोर ने ली अपनी जान! घर में सुबह कमरे में लटका मिला शव

Haryana News: हरियाणा के जींद जिले के नगूरां गांव में बुधवार की सुबह एक दर्दनाक घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। गांव के 16 वर्षीय राहुल ने अपने ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जब यह घटना हुई उस वक्त उसके पिता रामपाल घर पर नहीं थे और केवल उसकी बहन ही घर में मौजूद थी। जैसे ही बहन ने राहुल को फांसी के फंदे पर लटका देखा तो वह घबरा गई और शोर मचाकर आस-पड़ोस के लोगों को बुलाया।

 अस्पताल पहुंचते ही मृत घोषित

पड़ोसियों ने तत्काल अलेवा थाना पुलिस को सूचना दी और राहुल को फंदे से उतारकर नागरिक अस्पताल पहुंचाया गया। लेकिन अफसोस की बात यह रही कि डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस हादसे ने पूरे परिवार और गांव को सदमे में डाल दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जरूरी कार्रवाई की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया।

Haryana News: पढ़ाई से परेशान किशोर ने ली अपनी जान! घर में सुबह कमरे में लटका मिला शव

मां की मौत के बाद अकेला रह गया था राहुल

राहुल के पिता रामपाल ने बताया कि उनकी पत्नी का निधन तीन-चार साल पहले हो चुका था। इसके बाद से राहुल और उसकी बहन ही उनके साथ रहते थे। राहुल दसवीं कक्षा में पढ़ रहा था और बीते कुछ दिनों से वह पढ़ाई को लेकर काफी तनाव में था। पिता का कहना है कि राहुल का व्यवहार पिछले कुछ समय से बदला हुआ था लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेगा।

मानसिक दबाव ने ली जान

जांच अधिकारी जयबीर के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि राहुल पढ़ाई के कारण मानसिक रूप से परेशान था। वह खुद को पढ़ाई में पिछड़ा हुआ महसूस कर रहा था और इसी वजह से उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। परिजनों ने भी इस बात की पुष्टि की कि पढ़ाई के तनाव ने ही राहुल की जान ले ली।

सवाल खड़ा करता समाज और शिक्षा व्यवस्था पर

इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हमारी शिक्षा प्रणाली और सामाजिक सोच बच्चों पर जरूरत से ज्यादा दबाव तो नहीं बना रही। एक 16 वर्षीय बच्चा अगर इस हद तक परेशान हो जाए कि अपनी जान दे दे तो यह केवल पारिवारिक नहीं बल्कि सामाजिक विफलता भी है। जरूरत है कि हम अपने बच्चों से संवाद करें और उन्हें पढ़ाई के साथ मानसिक सहारा भी दें।

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