Haryana: जान से ज्यादा आजीविका जरूरी, बाढ़ के पानी में बहकर आई लकड़ियां पकड़ने की कोशिश में दो युवक बहे

Haryana: जान से ज्यादा आजीविका जरूरी, बाढ़ के पानी में बहकर आई लकड़ियां पकड़ने की कोशिश में दो युवक बहे

Haryana: एक ओर जहां हरियाणा में नदियां उफान पर हैं, वहीं कुछ लोगों के लिए अपनी जान से ज्यादा आजीविका बनी हुई है। सरकार द्वारा बार-बार रोके जाने के बावजूद वह दो लड़कियों की तलाश में उफनती आ रही नदी के बीच में उतरने को मजबूर हैं। इसी दौरान बाढ़ के पानी में बहकर आई लकड़ियां पकड़ने की कोशिश में यमुनानगर के बेलगढ़ में बनियावाला निवासी सूफियान (17) व बल्लेवाला निवासी सालिक (19) नदी के तेज बहाव में बह गए। इन दोनों की तलाश की जा रही है।

यमुनानगर जिले में लगातार बारिश से नदियां उफान पर हैं। हथिनीकुंड बैराज से तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण आसपास के गांवों और खेतों में पानी भर गया है। हालात गंभीर होने के बावजूद कुछ लोग अपनी जान जोखिम में डालकर तेज बहाव में उतर रहे हैं।

Haryana: जान से ज्यादा आजीविका जरूरी, बाढ़ के पानी में बहकर आई लकड़ियां पकड़ने की कोशिश में दो युवक बहे

दरअसल, यमुना नदी पहाड़ी और जंगली क्षेत्रों से होकर गुजरती है और अपने साथ पेड़ व लकड़ियां बहाकर लाती है। इन्हीं लकड़ियों को निकालना कुछ लोगों के लिए आजीविका का साधन बन गया है। तेज धारा के बीच लकड़ी निकालने की कोशिशें खतरनाक साबित हो सकती हैं, लेकिन चेतावनी के बावजूद लोग ऐसा कर रहे हैं।

सिंचाई विभाग ने साफ निर्देश दिए हैं कि जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और लोगों को नदी से दूर रहना चाहिए। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही कभी भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। आज बाढ़ का दौरा करने पहुंचे अतिरिक्त उपायुक्त नवीन आहूजा ने कहा कि जो लोग चलते पानी से लकडिया या कोई और सामान निकालने के लिए पानी में जाते हैं, ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वह अपने बच्चों को यमुना के आसपास ना जाने दे, ताकि कोई बड़ा हादसा ना हो जाए।

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