Punjab Flood: पंजाब की बाढ़ से लाखों लोग बेघर हुए, खेत और गांव डूब गए। ऐसे कठिन समय में हरियाणा के मेवात के लोग फरिश्तों की तरह खड़े हुए और पंजाब, हिमाचल प्रदेश और कश्मीर के लिए राहत सामग्री भेजी।
लगभग 500 गांवों ने इस मुहिम में हिस्सा लिया। हर गांव से औसतन 200-300 मन गेहूं और 2-5 लाख रुपये नकद इकट्ठा किए गए। कुछ गांवों ने 10 लाख रुपये से अधिक का सहयोग दिया। इसके अलावा गुदड़ी, बर्तन, बाल्टा, डलिया और अन्य आवश्यक वस्तुएं भी भेजी गईं। अब तक करीब 15 करोड़ रुपये मूल्य की राहत सामग्री और नकद भेजा जा चुका है।
महिलाओं ने इस मुहिम को नई ऊंचाई दी। बुजुर्ग माताओं ने अपनी पेंशन और बचत दी, कई ने गहने और बर्तन दान किए। गांव-गांव की महिलाएं मिलकर गुदड़ियां सी रही हैं और रोटियां बना रही हैं, ताकि कोई भूखा न रहे। बच्चों ने अपनी गुल्लक तक तोड़ दी।

मस्जिदों में ऐलान कर बताया गया कि “हमारे सिख भाई संकट में हैं, हमें उनके साथ खड़ा होना है।” इसके बाद महिलाएं, बुजुर्ग, नौजवान और बच्चे राहत सामग्री, पैसे और गहने लेकर मस्जिदों में पहुंचे।
मेवात, जिसे अक्सर पिछड़ा और गरीब कहा जाता है, इस मुहिम से इंसानियत में सबसे अमीर होने का संदेश दिया। यह योगदान केवल राहत नहीं, बल्कि भाईचारे और मानवता का संदेश भी है। जिम्मेदारों का कहना है कि यह मिसाल आने वाले भारत के लिए प्रेरणा है, जहां नफरत नहीं, इंसानियत और भाईचारा सबसे बड़ी ताकत होगी।
गरीब बेटी की शादी के लिए रखा कड़ा पंजाबी को दिया
मेवात के तिलकपुरी गांव की 80 वर्षीय रहीमी ने मेहनत की कमाई से खरीदा अपना चांदी का कड़ा किसी गरीब लड़की की शादी में देने के लिए बचा रखा था। पंजाब में आई बाढ़ के लिए जब राहत सामग्री जुटाई जा रही थी, तो उन्होंने वही कड़ा अपनी कलाई से उतारकर वालंटियर्स को दे दिया।
वह कहती हैं, “मैं चाहती थी कि मरने से पहले यह किसी गरीब लड़की की शादी में दूं। लेकिन आज हमारे अपने पंजाब के लोग ही ज्यादा जरूरतमंद हैं। यह बहुत बड़ी चीज़ नहीं है, लेकिन मेरे पास यही है। हमने 1996 की बाढ़ झेली है, इसलिए पंजाब के लोगों का दर्द समझती हूं।”
रहीमी अकेली नहीं हैं। पूरा मेवात इलाका करुणा और इंसानियत की मिसाल पेश कर रहा है। सोहना ब्लॉक के नूनेहरा गांव की बुजुर्ग महिलाएं, जिनकी उम्र 70 से 80 साल है, अब तक लगभग 2 किलो चांदी और 20 ग्राम सोना (करीब 5 लाख रुपये की कीमत) पंजाब के लिए दान कर चुकी हैं। गहनों के अलावा, ये महिलाएं अपनी पेंशन, और जमा-पूंजी भी दान कर रही हैं।

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