Haryana: शारदीय नवरात्र नजदीक हैं और अंबाला कैंट इलाके में जयपुर से आए कारीगरों ने मां दुर्गा की मूर्तियों का निर्माण शुरू कर दिया है। मूर्ति निर्माण करने वाले इन कारीगरों को पूजा समितियों से ऑर्डर मिलने लगे हैं, जिसके चलते उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर मूर्ति बनाना शुरू कर दिया है। ये मूर्तियां 1 फीट से लेकर 7 फीट तक की बनाई जा रही हैं। मूर्तिकारों ने जानकारी दी है कि मूर्ति निर्माण के लिए कोलकाता से विशेष ‘पवित्र मिट्टी’ मंगवाई गई है।
ऐसी मान्यता है कि यह मिट्टी धार्मिक अनुष्ठानों में शुद्ध मानी जाती है, जिससे मूर्ति निर्माण में किसी भी प्रकार की विघ्न-बाधा न आए। बात करें ‘पवित्र मिट्टी’ की तो यह सोनागाछी के रेड लाइट एरिया की मिट्टी है। इसके पीछे पौराणिक मान्यता है कि किसी वेश्या ने सामाजिक तिरस्कार से दुखी होकर मां दुर्गा की बड़ी भक्ति की। माता ने प्रसन्न होकर उसे इस पीड़ा से बाहर निकला और कहा कि उनकी प्रतिमा जब तक किसी वेश्या के आंगन की मिट्टी से नहीं बनाई जाएगी, पूजा अधूरी मानी जाएगी। तभी से इस परंपरा की शुरुआत हुई और एक समरसता का माहौल बनने लगा। वर्तमान में यहां की मिट्टी पैकेट में पैक होकर भी जाती है।

मूर्तिकार रमेश भाटी ने बताया कि वे पिछले कई पीढ़ियों से मूर्ति निर्माण का कार्य करते आ रहे हैं। उनके पूर्वज राजस्थान में पत्थरों पर देवी-देवताओं की सुंदर प्रतिमाएं बनाते थे।
रमेश भाटी स्वयं पिछले 30 वर्षों से अंबाला में विभिन्न त्योहारों पर भगवान और देवी-देवियों की मूर्तियां बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस बार शारदीय नवरात्र को देखते हुए 1 फीट से लेकर 7 फीट तक की मां दुर्गा की प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। धार्मिक आयोजनों के लिए लोग हिमाचल, पंजाब और हरियाणा से भी मूर्तियों के लिए ऑर्डर देते हैं। कई भक्त पहले से ही मूर्तियां बुक करवा लेते हैं।
मूर्ति निर्माण की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “हम सबसे पहले बांस और सूखे भूसे से प्रतिमा का ढांचा तैयार करते हैं, फिर उस पर मिट्टी की कई परतें चढ़ाई जाती हैं जिससे मूर्ति को ठोस और सुंदर आकार मिलता है।” उन्होंने यह भी बताया कि मूर्ति निर्माण में धार्मिक नियमों और शास्त्रीय विधियों का पालन किया जाता है। 5 फीट की मूर्ति बनाने में लगभग 5 दिन का समय लगता हैं। मूर्तियों को ध्यान, श्रद्धा और सतर्कता के साथ तैयार किया जाता है ताकि देवी की प्रतिमा में शुद्धता और सौंदर्य दोनों हों।

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