दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने वसंत कुंज आश्रम के निदेशक Swami Chaitanyananda Saraswati की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। चैतन्यनंद पर करोड़ों रुपये के धोखाधड़ी और ट्रस्ट की जमीन पर कब्ज़ा करने के आरोप हैं। इसके अलावा, उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न की भी शिकायतें दर्ज हैं। अदालत ने पुलिस की दलीलों और मामले की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत की अनुमति नहीं दी।
संयुक्त राष्ट्र का प्रतिनिधि बनकर धोखाधड़ी
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने बताया कि आरोपी स्वामी चैतन्यनंद अपने आप को संयुक्त राष्ट्र (UN) का प्रतिनिधि बताकर लोगों को गुमराह कर रहे थे। उनकी वोल्वो कार से फर्जी “39 UN 1” नंबर प्लेट भी बरामद हुई। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि यह एक स्पष्ट धोखाधड़ी का मामला है और जनता को भ्रामक जानकारी देने का गंभीर आरोप है। इसके अलावा, पुलिस ने कहा कि आरोपी से लगभग ₹20 करोड़ की धोखाधड़ी की राशि की वसूली करनी है और जुलाई से ₹60 लाख नकद भी निकाल लिए गए।
ट्रस्ट पर कब्ज़ा करने की साजिश का आरोप
Swami Chaitanyananda Saraswati के वकील ने कोर्ट में कहा कि उनके खिलाफ यह संपूर्ण साजिश है। वकील का दावा है कि न तो कोई जमीन बेची गई और न ही कोई सेल डीड बनाई गई। ट्रस्ट पिछले 15 सालों से नियमों के अनुसार संचालित हो रहा था, लेकिन स्वामी चैतन्यनंद के जुड़ने के बाद उनके खिलाफ साजिश शुरू हो गई। वकील ने यह भी कहा कि जब स्वामी दिल्ली से बाहर थे, तो अचानक 19 सितंबर को तीन एफआईआर दर्ज कर दी गईं, जिससे ट्रस्ट पर आसानी से कब्ज़ा किया जा सके।
संपत्ति और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप
पुलिस ने कोर्ट को बताया कि चैतन्यनंद के पास दो PAN कार्ड, दो पासपोर्ट और फर्जी आधार कार्ड पाए गए। इसके अलावा, कई संपत्तियों की बिक्री बिना अनुमति के की गई। 2010 से अब तक लगभग ₹20 करोड़ नई ट्रस्ट में स्थानांतरित किए गए, जबकि पहले यह राशि श्री सरदा इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडियन मैनेजमेंट ट्रस्ट में जाती थी। पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपी रामकृष्ण मिशन से जुड़े हुए हैं और यौन उत्पीड़न की शिकायतें भी दर्ज हैं। पूरे विवाद की जड़ वसंत कुंज स्थित इस ट्रस्ट की जमीन और फंड की हेराफेरी है, जिसमें करोड़ों रुपये और जमीन का गबन शामिल है।


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