Ram Rahim: हाईकोर्ट में कम नहीं हो रही ‘बाबा’ की मुश्किलें, सजा के बाद भड़की हिंसा के मामले की सुनवाई रहेगी जारी

Ram Rahim: हाईकोर्ट में कम नहीं हो रही 'बाबा' की मुश्किलें, सजा के बाद भड़की हिंसा के मामले की सुनवाई रहेगी जारी

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख Gurmeet Ram Rahim को प्रदेश सरकार से भले ही राहत मिलती रही हो, लेकिन उनकी मुश्किलें अदालत में काम होने का नाम नहीं ले रही है। बाबा को 2017 में सजा सुनाए जाने के बाद पंचकूला में हुई हिंसा को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया है।

बता दें कि Ram Rahim को सजा सुनाए जाने के बाद फैली हिंसा में 32 लोगों की मौत हुई थी। इस हिंसा में करीब 118 करोड़ रुपये की संपत्ति नष्ट हुई थी। अब हाईकोर्ट ने परोक्ष रूप से सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए वर्ष 2017 में पंचकूला में हुई हिंसा के खिलाफ दायर याचिका को बंद नहीं करने का फैसला किया है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह भी देखा जाएगा की सरकार हिंसा को रोकने में किस तरह नाकाम रहीं। अदालत इस मामले में बाबा से नुकसान की भरपाई कर सकती है।

इस मामले में मुख्य न्यायाधीश शील नागू, न्यायमूर्ति विनोद एस. भारद्वाज और न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल की पूर्ण पीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

इस मामले में न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता अनुपम गुप्ता ने कोर्ट से आग्रह किया कि 2017 में ही तय किए गए छह संवैधानिक सवालों पर सुनवाई होनी चाहिए। इनमें यह भी शामिल है कि हाईकोर्ट की रोकथाम संबंधी जनहित याचिका में हस्तक्षेप की सीमा क्या होगी? हिंसा में हुए नुकसान का मुआवजा कौन देगा? और क्या हरियाणा सरकार ने जानबूझकर डेरा समर्थकों को इकट्ठा होने दिया?

Ram Rahim: हाईकोर्ट में कम नहीं हो रही 'बाबा' की मुश्किलें, सजा के बाद भड़की हिंसा के मामले की सुनवाई रहेगी जारी

अनुपम गुप्ता ने अदालत में कहा कि राज्य ने राजनीतिक कारणों से डेरा की मदद की, 240 मामले दर्ज हुए, जिनमें से 100 से अधिक मामलों में आरोपी बरी हो चुके हैं। यह केवल मुआवजे के आकलन का मामला नहीं है, बल्कि राज्य की जवाबदेही और संवैधानिक सिद्धांतों का सवाल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि कोर्ट इन सवालों पर फैसला नहीं करता तो यह न्यायिक शक्ति का आत्म-त्याग होगा। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि अब कौन से मुद्दे शेष हैं, जिस पर न्याय मित्र ने तीन प्रमुख सवालों का हवाला दिया।

उन्होंने अदालत से हिंसा के मामलों में अभियुक्तों को बरी किए जाने और हरियाणा सरकार की ओर से डेरा सच्चा सौदा का समर्थन करने की घटनाओं पर गौर करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार राजनीतिक कारणों से डेरे की मदद करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इन दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट को मामले को निपटाने के बजाय सुनवाई जारी रखी। गुप्ता ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार राजनीतिक कारणों से डेरा समर्थकों को सहयोग दे रही थी। 240 मामले दर्ज हुए लेकिन 100 से अधिक में बरी हो चुके हैं।

पंजाब सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता चंचल सिंगला ने कहा कि पंजाब ने हिंसा के दौरान 11 जिलों में सुरक्षा बलों की तैनाती और नियंत्रण पर 169 करोड़ रुपये खर्च किए जिसमें 50 करोड़ रुपये सीआरपीएफ पर खर्च हुए। अदालत ने पंजाब सरकार से यह भी पूछा कि क्या उसने सुरक्षा बलों की तैनाती पर हुए खर्च की भरपाई किसी अन्य संस्था से मांगी है इस पर शपथ पत्र दायर किया जाए। अप्रैल 2025 की पिछली सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट कर दिया था कि इस मामले में अब और स्थगन स्वीकार नहीं होगा।

Comments

Leave a Reply

Discover more from Site Title

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading