अब पार्टी के जिला अध्यक्षों के कामकाज की होगी थर्ड पार्टी समीक्षा
सत्य खबर हरियाणा
Haryana Congress : हरियाणा में वर्ष 2029 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। कांग्रेस हाईकमान इस बात को ध्यान में रख रही है कि अगले साल प्रदेश के 66 नगर निकायों में चुनाव होने वाले हैं और साथ ही पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव भी संभावित हैं।

इसी क्रम में प्रदेश के जिलाध्यक्षों के कामकाज की थर्डपार्टी समीक्षा के लिए नियुक्त किए गए चार केंद्रीय पर्यवेक्षकों की जिम्मेदारियां भी तय की जा रही हैं। प्रदेश के जिलों को चार जोन में बांटकर प्रत्येक पर्यवेक्षक को एक जोन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसके बाद अगले सप्ताह से पर्यवेक्षक अपने-अपने जोन में संगठन की वास्तविक स्थिति का आकलन शुरू कर सकते हैं।
इन पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट कांग्रेस के मौजूदा जिलाध्यक्षों के राजनीतिक भविष्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी के भीतर करीब पांच से छह जिलाध्यक्षों के कामकाज को लेकर असंतोष की चर्चा है। ऐसे में पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होने की संभावना है कि किन जिलों में मौजूदा नेतृत्व को बरकरार रखा जाए और कहां बदलाव किया जाए।
कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व ने हरियाणा के लिए चार वरिष्ठ नेताओं को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। अगले सप्ताह से ये नेता संबंधित जिलों का दौरा कर स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं और संगठन से जुड़े पदाधिकारियों से फीडबैक ले सकते हैं।
पर्यवेक्षकों का मुख्य उद्देश्य केवल जिलाध्यक्षों के कामकाज का आकलन करना नहीं होगा, बल्कि संगठन की जमीनी सक्रियता, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय, पार्टी कार्यक्रमों की स्थिति और स्थानीय स्तर पर नेतृत्व की पकड़ का भी मूल्यांकन करना होगा। इससे कांग्रेस को जिलावार संगठन की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
पांच-छह जिलाध्यक्षों पर नजर
पार्टी सूत्रों के अनुसार करीब एक वर्ष पहले नियुक्त किए गए जिलाध्यक्षों में से पांच से छह का रिपोर्ट कार्ड रेड जोन में माना जा रहा है। ऐसे जिलों में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना जताई जा रही है। हालांकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह लगातार इस बात से इनकार कर रहे हैं कि संगठन की कमजोरी का समाधान केवल जिलाध्यक्ष बदलना है। उनका जोर संगठन को सक्रिय करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने पर है। पार्टी नेतृत्व भी चाहता है कि किसी पदाधिकारी को केवल राजनीतिक समीकरणों के आधार पर हटाने के बजाय उसके कामकाज का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाए। यही कारण है कि केंद्रीय पर्यवेक्षकों को जिम्मेदारी देकर थर्डपार्टी समीक्षा की व्यवस्था की गई है।
हांसी में नया जिला अध्यक्ष, पंचकूला और फरीदाबाद में दो-दो
संगठन सृजन अभियान के तहत कुछ जिलों की संगठनात्मक संरचना में भी बदलाव किया जाना है। हांसी में नया जिला अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा। इसके अलावा पंचकूला और फरीदाबाद में दो-दो जिलाध्यक्ष बनाए जाने की योजना है। इसके पीछे पार्टी की कोशिश संगठन को प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर अधिक प्रभावी बनाना है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि बड़े राजनीतिक और भौगोलिक क्षेत्र वाले जिलों में एक ही जिलाध्यक्ष पर संगठन की पूरी जिम्मेदारी होने से कई बार कार्यकर्ताओं तक प्रभावी पहुंच नहीं बन पाती। ऐसे में कुछ जिलों में संगठनात्मक जिम्मेदारियों को अलग-अलग स्तर पर बांटने की तैयारी है।
गुटबाजी खत्म करना सबसे बड़ी चुनौती
हरियाणा कांग्रेस के सामने संगठन मजबूत करने के साथ-साथ अंदरूनी गुटबाजी की चुनौती भी बनी हुई है। प्रदेश में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच अलग-अलग राजनीतिक खेमों की चर्चा लंबे समय से होती रही है। संगठन को मजबूत करने की कोशिशों के बावजूद यह खींचतान पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है। प्रदेश प्रभारी संजय सतीशचंद्र दत्त लगातार विभिन्न नेताओं के साथ संवाद कर इस दूरी को कम करने का प्रयास कर रहे हैं। वह प्रदेश की राजनीतिक और संगठनात्मक स्थिति से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भी अवगत करा रहे हैं। इसी फीडबैक के बाद केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति को संगठनात्मक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कांग्रेस प्रभारी के सामने कई जिलों में कार्यकर्ताओं के बीच तू-तू-मैं-मैं हो चुकी है। अनेक जिले में इन कार्यक्रमों में हंगामा भी देखने को मिला है।
किन के हाथ में अहम जिम्मेदारी
हरियाणा के लिए नियुक्त चार केंद्रीय पर्यवेक्षकों में आंध्र प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष डा. एन. रघुवीरा रेड्डी, महाराष्ट्र की पूर्व मंत्री यशोमति ठाकुर, मध्य प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू शामिल हैं। इन नेताओं को प्रदेश के अलग-अलग जोन की जिम्मेदारी मिलने के बाद वे संगठन की स्थिति का स्वतंत्र आकलन करेंगे। स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से बातचीत के साथ जिलाध्यक्षों की सक्रियता, पार्टी कार्यक्रमों में भागीदारी और संगठन विस्तार की क्षमता को भी परखा जा सकता है।
पार्टी पहले ही फैसला कर चुकी है कि वह नगर परिषद और नगर निगम के चुनाव अपने चुनाव चिन्ह पर लड़ेगी। अगले साल होने वाले नगर परिषद और नगर पालिकाओं के चुनाव पार्टी संगठन को उसका आईना दिखाने का काम करेंगे। इससे पहले हाल ही में तीन नगर निगम सहित आधा दर्जन से अधिक नगर निकायों के चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है। पार्टी आने वाले दिनों में होने वाले चुनाव में और अधिक मजबूती के साथ मैदान में उतरने की तैयारी में है।
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