अगस्त 2023 से मार्च 2025 तक 1500 करोड़ का हुआ था घोटाला
सत्य खबर हरियाणा
Haryana Labour Welfare Board : प्रदेश में श्रम कल्याण बोर्ड में 2 साल में 1500 करोड रुपए का घोटाला सामने आने के बाद श्रम मंत्री अनिल विज इस मामले की पिछले 20 साल की जांच करवाने के मूड में है। माना जा रहा है कि पिछले 20 साल में बोर्ड में का से कम 10000 करोड रुपए का घोटाला सामने आ सकता है।

हरियाणा भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड से जुड़ी अनियमितताओं का मामला अब एक बार फिर सुर्खियों में है। श्रम मंत्री अनिल विज के निर्देश पर सामने आई गड़बड़ियों की जांच को अब एसीएस ए.के. सिंह के नेतृत्व में गठित उच्च स्तरीय कमेटी आगे बढ़ाएगी। वर्षों से लंबित इस मामले में सरकार अब पुराने रिकॉर्ड, जिलाधीशों की रिपोर्ट और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में हुए भुगतान की गहन समीक्षा की तैयारी में है।
माना जा रहा है कि ए.के. सिंह की अगुवाई में गठित कमेटी जांच के लंबित पहलुओं को नए सिरे से देखेगी और जहां आवश्यक होगा, वहां जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इससे पहले इस मामले की जांच के लिए आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल की अध्यक्षता में हाई लेवल कमेटी गठित की गई थी। पंकज अग्रवाल को सीबीआई ने बैंक घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया था। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
श्रमिक के रूप में पंजीकरण के लिए मुख्य रूप से तीन शर्तें निर्धारित हैं पहली 18 से 58 वर्ष की आयु, दूसरी वार्षिक 60 रुपये सदस्यता शुल्क तथा तीसरी निर्माण कार्य में कम से कम 90 दिन कार्य करने का प्रमाण।
सूत्रों का दावा है कि यदि वर्ष 2007 से 2023 तक की अवधि की व्यापक जांच होती है तो कथित अनियमितताओं का दायरा 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंच सकता है। हालांकि, इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
श्रम मंत्री अनिल विज के निर्देश पर अगस्त 2023 से मार्च 2025 के बीच हरियाणा के सभी जिलों में जिलाधीशों के माध्यम से विशेष जांच करवाई गई थी। इस जांच का दायरा श्रमिकों के पंजीकरण और 90 दिनों के निर्माण कार्य के सत्यापन तक सीमित रखा गया था। सूत्रों के अनुसार इस जांच में करीब 1500 करोड़ रुपये की अनियमितताओं का पता चला था, जिसके बाद पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया।
डीसी रिपोर्ट के बाद बनी थी हाई लेवल कमेटी
जिलाधीशों की रिपोर्ट और विभिन्न योजनाओं में सामने आई गड़बड़ियों के बाद राज्य सरकार ने आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की थी। समिति की पांच से अधिक बैठकें भी हुईं और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर मंथन किया गया। हालांकि बाद में पंकज अग्रवाल की सीबीआई द्वारा एक बैंक घोटाले में गिरफ्तारी के बाद समिति की कार्यप्रणाली प्रभावित हुई। अब संभावना जताई जा रही है कि सरकार इस जांच समिति का पुनर्गठन कर सकती है, ताकि लंबित जांच को आगे बढ़ाया जा सके।
बोर्ड की अधिकांश योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजा गया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि फर्जी पंजीकरण हुए तो सत्यापन किस स्तर पर हुआ और लाभार्थियों का चयन कैसे किया गया? सूत्रों का कहना है कि श्रमिकों के सत्यापन की जिम्मेदारी विभागीय स्तर पर होती है। ऐसे में जांच का फोकस अब इस बात पर भी रहेगा कि कथित गड़बड़ियां ठेकेदारों, विभागीय कर्मचारियों अथवा अन्य स्तरों पर कैसे हुईं।
22 से अधिक योजनाओं की भी हो सकती है समीक्षा
हरियाणा बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर वेलफेयर बोर्ड के तहत श्रमिकों के लिए 22 से अधिक कल्याणकारी योजनाएं संचालित हैं। विवाह सहायता, शिक्षा, चिकित्सा, मातृत्व सहायता, उपकरण अनुदान और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर वर्षों से बड़ी राशि खर्च होती रही है। ऐसे में जांच का दायरा बढ़ने पर इन योजनाओं के लाभ वितरण की भी विस्तृत समीक्षा हो सकती है।
अब अफसरों से मांगा जाएगा जवाब
सूत्रों के अनुसार श्रम मंत्री अनिल विज ने जनवरी 2007 से जुलाई 2023 तक के सभी मामलों की जांच के आदेश काफी पहले जारी किए थे और समय-समय पर रिमाइंडर भी भेजे गए। इसके बावजूद जांच आगे नहीं बढ़ने पर विज ने अब विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि लंबित जांच को गति मिलती है तो हरियाणा के श्रमिक कल्याण बोर्ड से जुड़े वर्षों पुराने मामलों की परतें खुल सकती हैं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।
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