Haryana News: अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के पूर्व अध्यक्ष देवेंद्र बूरिया जो बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार हैं, उनके वकील ने कोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें गुरुग्राम जेल भेजने की मांग की थी। लेकिन न्यायिक दंडाधिकारी आयुष की अदालत ने सोमवार को इस याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने देवेंद्र को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और अब इस केस की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। वकील ने दावा किया था कि देवेंद्र का इलाज गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में चल रहा है और उन्हें पार्किंसन जैसी गंभीर बीमारियां हैं, इसीलिए उन्हें वहीं की जेल भेजा जाए।
बीमारियों के बहाने से जमानत की कोशिश
देवेंद्र बूरिया को जब जोधपुर से हिसार लाया जा रहा था तो रास्ते में उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनके कई टेस्ट हुए। इसके बाद सोमवार दोपहर को उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। वकील पवन रापड़िया ने कोर्ट को बताया कि बूरिया ने खुद पुलिस के सामने सरेंडर किया है और वह जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश बताया और दावा किया कि देवेंद्र को राजनीतिक कारणों से फंसाया जा रहा है। हालांकि कोर्ट ने इन तर्कों को मानने से इनकार कर दिया।
लड़की ने लगाया गंभीर आरोप
24 जनवरी 2025 को आदमपुर थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक एक लड़की ने देवेंद्र बूरिया पर चंडीगढ़ के एक होटल में ले जाकर दुष्कर्म करने और उसकी अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है। लड़की का कहना है कि जब उसने इसका विरोध किया तो उसे जान से मारने और जेल भिजवाने की धमकी दी गई। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर देवेंद्र के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें हिरासत में ले लिया था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 जुलाई को होगी।
लॉरेंस विश्नोई के नाम पर वायरल पोस्ट से बवाल
इस पूरे मामले के बीच सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है जिसे गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नाम से जोड़ा जा रहा है। इस पोस्ट में देवेंद्र बूरिया का समर्थन करते हुए किसी कथित ‘तानाशाह’ को नतीजे भुगतने की चेतावनी दी गई है। हालांकि बाद में एक और पोस्ट वायरल हुई जिसमें पहली पोस्ट को फर्जी बताया गया और कहा गया कि समाज में नकारात्मकता फैलाने वालों से सावधान रहें। इधर कुलदीप बिश्नोई के मीडिया प्रभारी मोहित शर्मा ने भी इसे 6 महीने पुराना और फर्जी बताया है। पुलिस प्रवक्ता विकास कुमार ने कहा कि अब तक इस बारे में कोई आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है। बता दें कि बूरिया और कुलदीप बिश्नोई के बीच बीते 6 महीने से खींचतान चल रही है और 25 जून को राजस्थान के मुकाम में हुई महापंचायत में दोनों को पद छोड़ने का सुझाव दिया गया था।